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बिजनौर, उत्तर प्रदेश। इंसानी बस्तियों में मौत का तांडव मचा रहे गुलदारों के आतंक से जूझ रहे बिजनौर जिले से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के नाभका गाँव में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक आदमखोर गुलदार आखिरकार कैद हो गया। पिछले कई दिनों से इस गुलदार ने गाँव और आसपास के इलाके में अपने खून-सने पंजों से दहशत की ऐसी इबारत लिख दी थी कि लोग सूरज ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर थे।READ ALSO:-बिजनौर: नूरपुर के निजी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत पर हंगामा, डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप; पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली
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क्या है पूरा मामला?
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नाभका गाँव के प्रधान मुस्तकीम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह गुलदार पिछले कई दिनों से गाँव में सक्रिय था। वह लगातार पालतू जानवरों और मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना निवाला बना रहा था। उसकी दहाड़ रात के सन्नाटे को चीर देती थी, जिससे ग्रामीणों, खासकर बच्चों और महिलाओं में भारी खौफ था। ग्रामीणों की शिकायत और बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग की टीम ने गाँव के पास जंगल से सटे खेत में एक पिंजरा स्थापित किया था।
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तीन दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वन विभाग की यह रणनीति काम कर गई। देर रात शिकार की तलाश में निकला गुलदार पिंजरे में रखे चारे के लालच में अंदर घुसा और उसका दरवाजा गिरते ही कैद हो गया। सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए तो पिंजरे के पास से गुर्राने की आवाजें सुनीं। पास जाकर देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि दहशत का दूसरा नाम बन चुका गुलदार अब सलाखों के पीछे था।
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दहशत का लंबा साया: जब गुलदार बन गए आदमखोर
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यह कोई अकेली घटना नहीं है। बिजनौर जिला पिछले कई सालों से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आग में झुलस रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में गुलदारों के हमलों में अब तक 35 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। गन्ने के ऊँचे खेत इन गुलदारों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं, जिस कारण खेतों में काम करने वाले किसान हर पल मौत के साये में जीने को मजबूर हैं।
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वन विभाग की कार्रवाई और चुनौतियां
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वन विभाग लगातार इस समस्या से निपटने के लिए अभियान चला रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाना, गश्त बढ़ाना और जागरूकता अभियान चलाना विभाग की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, गुलदारों की लगातार बढ़ती आबादी और घटते जंगल इस चुनौती को और भी गंभीर बना रहे हैं। एक गुलदार के पकड़े जाने से कुछ समय के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन सवाल वही रहता है कि इस समस्या का स्थायी समाधान क्या है?
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फिलहाल, नाभका गाँव के लोग चैन की सांस ले रहे हैं, लेकिन उनकी आँखों में भविष्य की चिंता साफ झलकती है। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या पर कोई ठोस और स्थायी नीति बनाएगा ताकि उन्हें हर दिन अपनी जान दांव पर न लगानी पड़े।
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