बिजनौर (धामपुर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से रिश्तों को कलंकित करने वाली एक बेहद खौफनाक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। चंद रुपयों के लालच ने एक इंसान को इतना अंधा कर दिया कि उसने अपने ही रिश्तेदार को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। धामपुर थाना क्षेत्र से पिछले करीब पौने दो महीने (लगभग 50 दिन) से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता चल रहे युवक इसरार अहमद की हत्या का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।READ ALSO:-आधी रात, दीवार फांदकर घर में घुसा दरिंदा: बिजनौर में नाबालिग से छेड़छाड़, परिजनों ने रंगे हाथों पकड़कर पुलिस को सौंपा
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रविवार देर शाम पुलिस ने कड़ी मशक्कत और सर्च ऑपरेशन के बाद नूरपुर थाना क्षेत्र के दौलतपुर स्थित रामगंगा पोषक नहर से इसरार का सड़ा-गला शव बरामद कर लिया है। इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि मृतक का अपना रिश्तेदार आशु सिद्दीकी निकला। पुलिस ने आरोपी और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कैसे पैसे की चमक इंसानी रिश्तों और संवेदनाओं को निगल जाती है।
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क्या है पूरा घटनाक्रम? जानिए शुरुआत से

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प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मृतक इसरार अहमद (पुत्र अकबर अली) धामपुर कस्बे के मोहल्ला हजरत नगर नूरपुर का निवासी था। इसरार एक महत्वाकांक्षी युवक था जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता था।
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फरवरी के महीने में इसरार ने कपड़ों का एक नया कारोबार शुरू करने की योजना बनाई। इस व्यापार में उसका साथ देने के लिए उसका एक रिश्तेदार आशु सिद्दीकी आगे आया। कपड़ों का माल खरीदने और व्यापारिक डील तय करने के लिए इसरार अपने रिश्तेदार आशु के साथ गांव तिबड़ी के लिए निकला था।
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लाखों रुपये नकद और बैंक बैलेंस लेकर निकला था इसरार

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व्यापार शुरू करने के उत्साह में इसरार अपने साथ एक बड़ी रकम लेकर घर से रवाना हुआ था। पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट और परिजनों के अनुसार, जिस दिन इसरार घर से निकला, उसके पास:
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    नकद राशि: लगभग 1 लाख 95 हजार रुपये कैश मौजूद था।
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    चेक: 1 लाख रुपये का एक बैंक चेक भी उसके पास था।
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    बैंक बैलेंस: इसके अलावा, उसके बैंक खाते में भी करीब 99 हजार रुपये जमा थे।
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इतनी बड़ी रकम का साथ होना ही संभवतः इसरार के लिए काल बन गया। पुलिस जांच में यह बात सामने आ रही है कि आशु सिद्दीकी की नीयत इसी मोटी रकम को देखकर खराब हो गई थी।
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22 फरवरी का वह फोन कॉल और झूठी कहानी

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इसरार के घर से निकलने के कुछ समय बाद ही उसका फोन बंद आने लगा और उससे संपर्क टूट गया। परिवार वाले परेशान होने लगे। इसी बीच 22 फरवरी को आशु सिद्दीकी ने इसरार के भाई अफसर अली को फोन किया।
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खुद को बचाने और पुलिस व परिजनों को गुमराह करने के लिए आशु ने एक मनगढ़ंत कहानी रची। उसने अफसर अली को बताया कि व्यापार का काम खत्म होने के बाद उसने इसरार को स्योहारा में सुरक्षित छोड़ दिया था और वह वहां से घर के लिए निकल गया है। लेकिन, जब काफी समय बीत जाने के बाद भी इसरार घर नहीं पहुंचा, तो परिवार वालों का माथा ठनका।
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पुलिस की चौखट पर पहुंचा परिवार, अनहोनी की जताई आशंका

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जब इसरार का कोई सुराग नहीं मिला और आशु के बयानों में विरोधाभास नजर आने लगा, तो मृतक के भाई अफसर अली ने फरवरी माह में ही धामपुर पुलिस थाने में गुमशुदगी की तहरीर दी। अपनी शिकायत में अफसर अली ने स्पष्ट रूप से अपने भाई के साथ किसी गंभीर अनहोनी की आशंका जताई थी और पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी।
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इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और पुलिस की तफ्तीश: ऐसे खुला राज

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मामले की गंभीरता और बड़ी रकम के इंवॉल्वमेंट को देखते हुए बिजनौर पुलिस ने इस केस को चुनौती के रूप में लिया। जब पारंपरिक पूछताछ से बात नहीं बनी, तो पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया।
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    कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाली: पुलिस ने इसरार और आशु दोनों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकाली। इसमें दोनों की आखिरी बातचीत और लोकेशन के अहम सुराग मिले।
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    मोबाइल लोकेशन बनी हथियार: घटना वाले दिन आशु की मोबाइल लोकेशन स्योहारा (जहां उसने इसरार को छोड़ने का दावा किया था) से बिल्कुल अलग आ रही थी। लोकेशन उसी इलाके की थी जहां से बाद में शव बरामद हुआ।
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    शक यकीन में बदला: सीडीआर और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस का शक आशु सिद्दीकी पर गहरा गया।
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ठोस सबूत हाथ में आने के बाद पुलिस ने आशु सिद्दीकी और उसके एक अन्य साथी को हिरासत में ले लिया। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की (Third Degree और मनोवैज्ञानिक दबाव), तो आरोपी टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
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कबूलनामा और रामगंगा नहर में चला सर्च ऑपरेशन

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आरोपियों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसों के लालच में इसरार की बेरहमी से हत्या कर दी थी। सबूत मिटाने और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के उद्देश्य से, उन्होंने मृतक के शव को नूरपुर थाना क्षेत्र के दौलतपुर में बहने वाली गहरी रामगंगा पोषक नहर में फेंक दिया था।
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शव की बरामदगी में लगी 48 घंटे की मशक्कत:

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    शनिवार की नाकामी: आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने गोताखोरों की मदद से शनिवार को रामगंगा नहर में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। लेकिन पानी का बहाव तेज होने और समय बीत जाने के कारण शव नहीं मिला।
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    रविवार को मिली कामयाबी: पुलिस ने हार नहीं मानी। रविवार को सुबह से ही दोबारा जाल डालकर और एक्सपर्ट गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। आखिरकार, रविवार देर शाम पुलिस को नहर से इसरार का शव बरामद करने में सफलता मिल गई। पौने दो महीने तक पानी में रहने के कारण शव बेहद खराब स्थिति में था।
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परिवार में मचा कोहराम, अब आगे क्या?

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जैसे ही इसरार का शव मिलने की खबर धामपुर के मोहल्ला हजरत नगर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे के जिंदा लौटने की आस में परिवार पिछले 50 दिनों से दर-दर भटक रहा था, उसकी लाश देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि जिस रिश्तेदार पर उन्होंने सबसे ज्यादा भरोसा किया, उसी ने उनके बेटे की जान ले ली।
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पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचायतनामा (पंचनामा) की कार्रवाई पूरी कर ली है और मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को मोर्चरी (पोस्टमार्टम हाउस) भेज दिया है।
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पुलिस की आगामी कार्रवाई: इस मामले में पुलिस का काम अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर गहराई से काम कर रही है:-
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    लूटी गई रकम की बरामदगी: आरोपियों ने 1 लाख 95 हजार नकद और बैंक खातों में पड़े पैसों का क्या किया, उसकी शत-प्रतिशत बरामदगी की जा रही है।
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    हत्या का तरीका: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ होगा कि इसरार की हत्या किस हथियार से और कैसे की गई थी (गला घोंटकर, गोली मारकर या किसी धारदार हथियार से)।
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    गैंगस्टर या रासुका की कार्रवाई: समाज में खौफ पैदा करने वाले इस जघन्य कृत्य के लिए पुलिस आरोपियों पर कठोरतम धाराओं (संभवतः गैंगस्टर एक्ट) में कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है ताकि भविष्य में कोई भी पैसों के लिए इस तरह अपनों का कत्ल करने की हिम्मत न कर सके।
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यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है कि व्यापारिक लेनदेन और बड़ी रकम के मामलों में आंख मूंदकर किसी पर भी, चाहे वह अपना सगा रिश्तेदार ही क्यों न हो, भरोसा नहीं करना चाहिए।
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