धामपुर (बिजनौर), उत्तर प्रदेश
\r\n\r\nफाल्गुन का महीना आते ही हवाओं में जहाँ एक तरफ अबीर और गुलाल की महक घुल जाती है, वहीं दूसरी तरफ कवियों की हास्य-व्यंग्य से भरी रचनाएं (फाग) माहौल को और भी खुशनुमा बना देती हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के प्रमुख शहर धामपुर (Dhampur) में भी होली का यह उल्लास अपने चरम पर देखने को मिला।READ ALSO:-मेरठ का सोहराबगेट बस अड्डा होगा हाईटेक: पीपीपी मॉडल पर होगा विकास, होली के बाद लोहिया नगर में शिफ्टिंग की तैयारी
\r\n\r\n\r\n\r\n
गत वर्षों की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए, इस वर्ष भी धामपुर में नंदन विश्वविद्यालय के तत्वावधान में होली के पावन अवसर पर एक शानदार और बहुचर्चित 'महामूर्ख सम्मेलन' (Maha Murkh Sammelan) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया, बल्कि समाज के प्रबुद्ध जनों को हास्य के रंग में रंगकर एक अद्भुत सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आयोजन स्थल और रूपरेखा: लोहियां धर्मशाला में सजा हास्य का मंच
\r\n\r\nइस भव्य और गुदगुदाने वाले कार्यक्रम का आयोजन धामपुर के हृदय स्थल माने जाने वाले भगत सिंह चौक के निकट स्थित लोहियां धर्मशाला में किया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n आयोजक और देखरेख: यह पूरा कार्यक्रम नंदन विश्वविद्यालय, धामपुर के बैनर तले आयोजित हुआ। कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा, सफल संचालन और देखरेख शहर के जाने-माने साहित्यकार एवं आयोजक श्री हरिकांत शर्मा के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुई।\r\n \r\n
- \r\n फाग और कविताओं की बौछार: सम्मेलन में धामपुर और आस-पास के क्षेत्रों से आए अनेकों प्रतिष्ठित कवियों ने शिरकत की। इन कवियों ने अपनी हास्य, व्यंग्य और ओज से भरी रचनाओं तथा होली के पारंपरिक 'फांग' (फाग) को प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।\r\n \r\n
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
उपाधियों का वितरण: कौन बना 'महामूर्ख धीराज' और कौन 'मूर्ख कुलपति'?
\r\n\r\nहोली के अवसर पर आयोजित होने वाले 'महामूर्ख सम्मेलनों' की सबसे बड़ी और रोचक खासियत यह होती है कि इसमें शहर के सबसे बुद्धिमान, सम्मानित और प्रबुद्ध नागरिकों को हास्य-व्यंग्य के तौर पर 'मूर्ख' की अजीबोगरीब उपाधियों से अलंकृत किया जाता है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ पद और गरिमा का लबादा उतारकर हर कोई केवल हंसी के रंग में रंग जाता है।
\r\n\r\nधामपुर के इस सम्मेलन में भी शहर की जानी-मानी हस्तियों को निम्नलिखित मजेदार उपाधियों से नवाजा गया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n डॉ. इंद्रदेव सिंह (पूर्व विधायक): शहर के सम्मानित राजनेता और पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह को इस सम्मेलन का सर्वोच्च सम्मान देते हुए 'महामूर्ख धीराज' की भव्य उपाधि से अलंकृत किया गया।\r\n \r\n
- \r\n डॉ. आदित्य अग्रवाल: चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. आदित्य अग्रवाल को 'मूर्ख अधिपति' का खिताब पहनाया गया।\r\n \r\n
- \r\n श्री अजय पाल शर्मा: इन्हें कार्यक्रम में 'महामूर्ख वाचस्पति' की अनोखी उपाधि देकर सम्मानित किया गया।\r\n \r\n
- \r\n श्री विजय जैन: अपनी गरिमामय उपस्थिति के लिए विजय जैन को 'मुखमंडल' की उपाधि से नवाजा गया।\r\n \r\n
- \r\n डॉ. जितेंद्र कौशिक: साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े डॉ. जितेंद्र कौशिक को 'मूर्ख भास्कर' की उपाधि प्रदान की गई।\r\n \r\n
- \r\n श्री दिनेश नवीन: मंच के सक्रिय चेहरे दिनेश नवीन को 'मूर्ख कुलाधिपति' के भारी-भरकम खिताब से अलंकृत किया गया।\r\n \r\n
- \r\n श्री हरिकांत शर्मा: कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार और संचालक हरिकांत शर्मा ने खुद को भी इस हास्य से अछूता नहीं रखा और उन्हें 'मूर्ख कुलपति' की उपाधि से सुशोभित किया गया।\r\n \r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
ये उपाधियां किसी का अपमान करने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में होली के उस गहरे दर्शन को दर्शाती हैं, जहाँ एक दिन के लिए सभी सामाजिक और बौद्धिक ऊंच-नीच मिटाकर हर इंसान एक समान स्तर पर आकर खुशियां बांटता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कवियों का जमावड़ा: रचनाओं ने मोहा मन
\r\n\r\nउपाधि वितरण के इस हास्य-विनोद के दौर के बाद कवि सम्मेलन का विधिवत आरंभ हुआ। मंच पर एक से बढ़कर एक कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी कविताओं के तीरों से व्यवस्थाओं, राजनीति और सामाजिक विद्रूपताओं पर जमकर कटाक्ष किए। कार्यक्रम को भव्य और ऐतिहासिक बनाने में जिन प्रमुख रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया, उनमें शामिल हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n राजकुमार राजन\r\n \r\n
- \r\n विभूतिकांत शर्मा\r\n \r\n
- \r\n राजकुमार सिंह\r\n \r\n
- \r\n डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल'\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन सभी कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को कभी गुदगुदाया, तो कभी गहरी सोच में डाल दिया। 'बुरा न मानो होली है' की तर्ज पर इन कवियों ने खुलकर अपनी बात रखी और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गुलाल, शुभकामनाएं और कार्यक्रम का समापन
\r\n\r\nकविताओं और हास्य के इस लंबे दौर के बाद, सम्मेलन अपने अंतिम चरण में पहुँचा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n रंगों का उत्सव: कार्यक्रम के अंत में सभी गणमान्य अतिथियों, कवियों और श्रोताओं ने एक-दूसरे के गालों पर प्रेम और सौहार्द का प्रतीक गुलाल लगाया। पूरे प्रांगण में एक-दूसरे को गले लगाकर होली की मंगलकामनाएं और बधाइयां दी गईं।\r\n \r\n
- \r\n आभार ज्ञापन और संचालन: इस शानदार और सफल कार्यक्रम का कुशल संचालन 'मूर्ख कुलपति' श्री हरिकांत शर्मा ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में किया। वहीं, कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री दिनेश नवीन ('मूर्ख कुलाधिपति') ने आयोजन में पधारे सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
धामपुर का यह 'महामूर्ख सम्मेलन' केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हास्य और व्यंग्य हमारे समाज के लिए कितने जरूरी हैं। पूर्व विधायक से लेकर साहित्यकारों तक का एक मंच पर आकर इस तरह से होली का जश्न मनाना, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने का एक बेहतरीन और अनुकरणीय प्रयास है।
Sabse pehle comment karne wale banein.