धामपुर (बिजनौर): कहते हैं जहां आस्था होती है, वहां तर्क मौन हो जाते हैं और केवल भक्ति का शोर सुनाई देता है। कुछ ऐसा ही नजारा आज धामपुर में देखने को मिला। देश की प्रसिद्ध एवं सिद्ध पीठ बाबा पानप दास समाधि स्थल (Baba Panap Das Samadhi Sthal) पर रविवार को आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।READ ALSO:-मेरठ में 'सिंघम' स्टाइल क्राइम: काली स्कॉर्पियो, 6 हथियारबंद बदमाश और 500 मीटर की मौत की दौड़... पेट्रोल पंप के ऑफिस में घुसकर कार ट्रेनर को घसीट ले गए अपहरणकर्ता
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अवसर था परम पूज्य बाबा पानप दास जी की 253वीं पुण्यतिथि का। इस पावन मौके पर सुबह से ही समाधि स्थल पर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग और क्या महिलाएं—हर कोई बाबा की एक झलक पाने और समाधि पर माथा टेकने के लिए आतुर दिखाई दिया।
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भक्ति और विश्वास का संगम: गद्दी नशीन का संदेश

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इस भव्य आयोजन का नेतृत्व समाधि स्थल के वर्तमान गद्दी नशीन महंत ओम दास (Mahant Om Das) ने किया। उनके सानिध्य में पूरा कार्यक्रम विधि-विधान और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
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महंत ओम दास ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा:

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"बाबा पानप दास का यह स्थान केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां जो भी सच्चे मन से मनौती मांगता है, बाबा उसकी झोली कभी खाली नहीं रहने देते। आज 253 साल बाद भी उनकी शिक्षाएं और आशीर्वाद हम सबके बीच जीवित हैं।"
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सैकड़ों बच्चों का मुंडन संस्कार

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मेले की एक प्रमुख विशेषता यहां होने वाले मुंडन संस्कार रहे। महंत ओम दास ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पुण्यतिथि के अवसर पर सैकड़ों बच्चों का मुंडन संस्कार कराया गया। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए परिवारों ने अपने बच्चों के बाल बाबा के चरणों में अर्पित किए। मान्यता है कि यहां मुंडन कराने से बच्चों पर बाबा की कृपा बनी रहती है और वे निरोगी रहते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर परिजनों ने खुशी-खुशी यह संस्कार संपन्न कराया।
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संतों की वाणी से निहाल हुए भक्त

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कार्यक्रम में केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि ज्ञान की गंगा भी बही। गद्दी नशीन महंत ओम दास के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ संतों ने बाबा पानप दास की 'वाणी' (उपदेशों) का पाठ किया।
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मंच से प्रवचन करने वाले प्रमुख संतों में शामिल थे:

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    महंत विक्रम दास
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    महंत ज्ञान दास
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    महंत पुष्पेंद्र दास
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    महंत अशोक दास
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    महंत हरिदास
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इन संतों ने सत्संग के माध्यम से भक्तों को सादा जीवन, उच्च विचार और समाज सेवा का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि बाबा पानप दास का जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित था।
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भंडारा और प्रसाद वितरण

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दोपहर होते-होते भीड़ का सैलाब और बढ़ गया। हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने पूर्ण श्रद्धा के साथ मनौती मांगी और उसके बाद विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। कतार में बैठकर अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सभी ने एक पंगत में भोजन किया, जो सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण था।
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सुरक्षा और व्यवस्था: प्रशासन मुस्तैद

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इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करना कोई आसान काम नहीं था। मेले की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में स्थानीय गणमान्य नागरिकों और पुलिस प्रशासन ने अहम भूमिका निभाई।
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    व्यवस्थापक मंडल: धामपुर के पूर्व पालिका अध्यक्ष ठाकुर अभय कुमार सिंह (Thakur Abhay Kumar Singh), वरिष्ठ समाजसेवी हरिकांत शर्मा और महेंद्र सिंह व्यवस्थाओं की देखरेख में जुटे रहे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
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    पुलिस बल: सुरक्षा के लिहाज से भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया था। महिला पुलिसकर्मियों की भी विशेष ड्यूटी लगाई गई थी ताकि महिला श्रद्धालुओं को दर्शन में असुविधा न हो और असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा सके।
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आस्था की जीत 

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शाम ढलने तक भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। बाबा पानप दास की 253वीं पुण्यतिथि न केवल एक धार्मिक आयोजन थी, बल्कि यह धामपुर की संस्कृति और एकता का प्रतीक भी बन गई। भक्तों का यह विश्वास बताता है कि समय बदल सकता है, लेकिन श्रद्धा की जड़ें हमेशा गहरी रहती हैं।
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