बिजनौर: एक तरफ महंगाई की मार और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता आम आदमी—उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर (Dhampur) कस्बे में आज यही नजारा देखने को मिला। घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं और जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर है। रसोई गैस (LPG) की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी और गैस सिलेंडरों की आपूर्ति (Supply) में हो रही भारी देरी ने उपभोक्ताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।READ ALSO:-छुट्टे की किल्लत होगी खत्म! अब एटीएम से निकलेंगे 10, 20 और 50 रुपये के नोट, सरकार ने संसद में दी पायलट प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी
\r\n\r\n\r\n\r\n
गैस बुक कराने के लगभग एक महीने (25 दिन) बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी न मिलने से परेशान और घरेलू गैस सिलेंडर पर लगभग 60 रुपये की वृद्धि से आक्रोशित उपभोक्ताओं का गुस्सा आज अचानक फूट पड़ा। दर्जनों की संख्या में उपभोक्ता धामपुर स्थित 'वेंकटेश्वर गैस एजेंसी' (Venkateshwar Gas Agency) पर पहुँच गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 उत्तर प्रदेश के बिजनौर (धामपुर) में रसोई गैस की कीमतों में लगभग 60 रुपये की वृद्धि और 25 दिन बाद भी डिलीवरी न मिलने से आक्रोशित उपभोक्ताओं ने वेंकटेश्वर गैस एजेंसी पर जमकर हंगामा किया। pic.twitter.com/8Whh1nWtwf
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) March 11, 2026
\r\n\r\n
आइए, इस पूरे मामले की जड़, जनता के आरोपों और प्रशासनिक कार्रवाइयों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
महंगाई का 'डबल अटैक': दाम बढ़े, लेकिन गैस गायब
\r\n\r\nधामपुर की जनता इस समय दोहरी मार झेल रही है। एक ओर जहाँ खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं रसोई गैस ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 60 रुपये की अचानक वृद्धि: उपभोक्ताओं का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 kg) के दामों में अचानक लगभग 60 रुपये की वृद्धि कर दी गई है। मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के लिए महीने के बजट में यह एक बड़ा झटका है। बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के इस वृद्धि ने लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।\r\n \r\n
- \r\n 25 दिन की लंबी 'वेटिंग लिस्ट': पैसे देने के बावजूद गैस न मिलना दूसरी सबसे बड़ी त्रासदी है। डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ गैस बुकिंग सेकंडों में हो जाती है, वहीं धामपुर में उपभोक्ताओं को बुकिंग के 25-25 दिन बाद भी डिलीवरी का इंतजार करना पड़ रहा है। कई घरों में गैस खत्म हो चुकी है और उन्हें मजबूरन लकड़ी के चूल्हे या महंगे इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वेंकटेश्वर गैस एजेंसी पर हंगामा: क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nलंबे समय से गैस का इंतजार कर रहे उपभोक्ताओं के धैर्य ने जब जवाब दे दिया, तो वे एकजुट होकर धामपुर की प्रमुख गैस वितरक 'वेंकटेश्वर गैस एजेंसी' के कार्यालय जा पहुंचे।
\r\n\r\n![]()
एजेंसी पर पहुँचते ही उपभोक्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और व्यवस्था में सुधार की मांग की। विरोध जताने वाले प्रमुख उपभोक्ताओं में अदनान अहमद, दीपू शर्मा, सूर्य कुमार, सुरेन्द्र कुमार, सुरेश कुमार और मोहित सहित कई अन्य स्थानीय निवासी शामिल थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उपभोक्ताओं की मुख्य शिकायतें और आरोप:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n घरों की रसोई ठप: अदनान और दीपू शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा कि सिलेंडर समय पर न मिलने के कारण घरों में खाना पकाना मुश्किल हो गया है। बच्चों को बिना नाश्ते के स्कूल जाना पड़ रहा है और बुजुर्गों को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n कालाबाजारी (Black Marketing) की आशंका: प्रदर्शनकारी उपभोक्ताओं ने एजेंसी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि गोदामों में गैस तो आ रही है, लेकिन उसे घरेलू उपभोक्ताओं को देने के बजाय 'ब्लैक' में व्यावसायिक इस्तेमाल (होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे) के लिए ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसी 'कृत्रिम कमी' (Artificial Scarcity) के कारण आम आदमी 25 दिन से लाइन में लगा है।\r\n \r\n
- \r\n कर्मचारियों का रवैया: लोगों का यह भी आरोप था कि जब वे गैस की जानकारी लेने एजेंसी पर आते हैं या फोन करते हैं, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है और अक्सर कर्मचारियों का व्यवहार भी टालमटोल वाला होता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एजेंसी संचालिका डिम्पल गुप्ता से सीधा सवाल
\r\n\r\nहंगामा बढ़ता देख 'वेंकटेश्वर गैस एजेंसी' की संचालिका डिम्पल गुप्ता (Dimple Gupta) को बाहर आना पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनसे जवाब तलब किया। उपभोक्ताओं ने स्पष्ट मांग रखी कि यदि व्यवस्था जल्द नहीं सुधारी गई, तो वे एजेंसी के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगे।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
(बाइट का संदर्भ): एजेंसी संचालिका डिम्पल गुप्ता ने उपभोक्ताओं को अपनी सफाई देते हुए बताया कि पीछे (प्लांट) से ही गैस की आपूर्ति में बाधा आ रही है। उनका तर्क था कि सप्लाई चेन (Supply Chain) में कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण बैकलॉग (Backlog) बढ़ गया है, जिसे वे जल्द से जल्द क्लियर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कालाबाजारी के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की एंट्री: कोतवाल मृदुल कुमार सिंह ने संभाला मोर्चा
\r\n\r\nगैस एजेंसी पर हंगामा बढ़ने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की सूचना तुरंत धामपुर कोतवाली पुलिस को दी गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कोतवाली प्रभारी निरीक्षक (Inspector) मृदुल कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुँच गए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मृदुल कुमार सिंह ने एक कुशल पुलिस अधिकारी की तरह सबसे पहले भीड़ के आक्रोश को शांत किया। उन्होंने:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n उपभोक्ताओं की बात सुनी: पुलिस ने उपभोक्ताओं को मंच दिया और उनकी सभी समस्याओं (25 दिन की देरी और कालाबाजारी के शक) को ध्यान से सुना।\r\n \r\n
- \r\n एजेंसी संचालिका से पूछताछ की: पुलिस ने एजेंसी प्रबंधन से सप्लाई रजिस्टर और बुकिंग की स्थिति के बारे में जानकारी ली और यह निर्देश दिया कि आम जनता को इस तरह परेशान न किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n समाधान का आश्वासन: कोतवाल मृदुल कुमार सिंह ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि वे इस मामले में खाद्य एवं रसद विभाग (Supply Department) के अधिकारियों से भी बात करेंगे ताकि कालाबाजारी की जांच हो सके। साथ ही, उन्होंने एजेंसी को जल्द से जल्द पेंडिंग डिलीवरी पूरी करने के सख्त निर्देश दिए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
पुलिस के इस त्वरित हस्तक्षेप और स्पष्ट आश्वासन के बाद ही उपभोक्ताओं का गुस्सा कुछ शांत हुआ और वे अपने घरों को वापस लौटे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गहराता संकट: आखिर कहाँ जा रही है आम आदमी की गैस?
\r\n\r\nधामपुर का यह मामला सिर्फ एक गैस एजेंसी का नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में व्याप्त सप्लाई चेन के कुप्रबंधन (Mismanagement) की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है, कालाबाजारी करने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
घरेलू और कमर्शियल (व्यावसायिक) गैस सिलेंडरों की कीमतों में बड़ा अंतर होता है। अक्सर देखा गया है कि मुनाफे के लालच में घरेलू (लाल वाले) सिलेंडरों को ब्लैक में ढाबों और होटलों में सप्लाई कर दिया जाता है। प्रशासन और आपूर्ति विभाग (Supply Inspector) की ढिलाई के कारण इस तरह के नेक्सस पनपते हैं, जिसका खामियाजा उस आम आदमी को भुगतना पड़ता है जो 25 दिन से अपनी बारी का इंतजार कर रहा होता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासन को उठाने होंगे सख्त कदम
\r\n\r\nधामपुर की इस घटना ने प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। आज पुलिस के समझाने-बुझाने से मामला शांत जरूर हो गया है, लेकिन यदि समस्या का जड़ से समाधान नहीं हुआ, तो यह चिंगारी किसी भी दिन बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगामी आवश्यकताएं:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n सप्लाई विभाग की छापेमारी: एसडीएम (SDM) और जिला पूर्ति अधिकारी (DS0) को तुरंत संज्ञान लेते हुए गैस एजेंसियों के गोदामों और क्षेत्र के होटलों/ढाबों पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n पारदर्शिता (Transparency): उपभोक्ताओं को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर गैस की सटीक डिलीवरी डेट का मैसेज मिलना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n जवाबदेही: यदि कोई एजेंसी 15 दिन से अधिक की देरी करती है, तो उस पर सख्त विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
धामपुर की जनता अब उम्मीद कर रही है कि प्रशासन उनकी इस बुनियादी समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा ताकि उन्हें अपने ही पैसों से खरीदी गई रसोई गैस के लिए दर-दर की ठोकरें न खानी पड़ें।
Sabse pehle comment karne wale banein.