विशेष रिपोर्ट: निशांत कुमार गौड़ (बिजनौर)
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दिनांक: 25 मई, 2026
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बिजनौर: क्या आप एक ही जगह पर खड़े होकर संपूर्ण देवलोक के साक्षात दर्शन करना चाहते हैं? क्या आप एक ऐसे अलौकिक आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं जहाँ सनातन धर्म की 33 कोटि (33 प्रकार की) देवी-देवताओं की शक्तियां एक साथ जाग्रत अवस्था में हों? अगर आपका उत्तर हाँ है, तो आपको किसी सुदूर हिमालय या दुर्गम तीर्थ पर जाने की आवश्यकता नहीं है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक ऐसा ही अद्भुत रहस्यमयी और जागृत सिद्ध पीठ मौजूद है, जिसे दुनिया 'बैकुंठ धाम, हाजीपुर' के नाम से जानती है।
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बिजनौर के अकबराबाद-नजीबाबाद रोड पर स्थित हाजीपुर गांव का यह मंदिर आस्था, आध्यात्मिकता और सनातन धर्म की जीवंत कलाकृतियों का एक बेजोड़ संगम है। इसे स्थानीय भक्तों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा अपार श्रद्धा के साथ "मिनी हरिद्वार" (Mini Haridwar) की संज्ञा दी गई है।READ ALSO:-मेरठ स्कूल हॉलिडे ब्रेकिंग: आसमान से बरस रही आग! भीषण गर्मी के चलते 26 मई तक बंद रहेंगे कक्षा 10 तक के स्कूल, DM का सख्त आदेश
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मंदिर के रक्षक: चौधरी जोगिंदर सिंह तोमर जी का सेवा भाव

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किसी भी तीर्थ या मंदिर की आत्मा केवल उसकी मूर्तियों में नहीं, बल्कि उन लोगों के सेवा भाव में बसती है जो उस धरोहर को निस्वार्थ भाव से सहेजते हैं। बैकुंठ धाम की भव्यता और दिव्यता के पीछे एक ऐसे ही समर्पित व्यक्तित्व का हाथ है— चौधरी जोगिंदर सिंह तोमर जी (हाजीपुर के पूर्व प्रधान)।
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यह मंदिर उनके पुश्तैनी आस्था का प्रतीक है। इन्हीं के पूर्वजों ने सदियों पहले इस मंदिर की वह भव्य रूपरेखा तैयार की थी, जो आज एक विशाल 'देवलोक' का रूप ले चुकी है।
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    अद्भुत समर्पण: आज के इस भौतिकवादी युग में जहाँ लोगों के पास फुर्सत नहीं है, वहीं तोमर जी स्वयं हर दिन मंदिर में मौजूद रहते हैं। वे मंदिर में आने वाले हर यात्री और श्रद्धालु को व्यक्तिगत रूप से पूरा समय देते हैं।
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    मार्गदर्शक की भूमिका: वे न केवल पूरे मंदिर के दर्शन कराते हैं, बल्कि अत्यंत प्रेम और आत्मीयता के साथ प्रत्येक मूर्ति, झांकी और मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की कथाएं भी सुनाते हैं। सच कहा जाए तो, जोगिंदर सिंह तोमर जी जैसे लोग ही धर्म की असली धरोहर हैं। पूर्वजों की बनाई इस महान विरासत को संभालना और यात्रियों के प्रति ऐसा सेवा भाव दिखाना आज के समय में अत्यंत दुर्लभ है।
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बैकुंठ धाम की अलौकिक और विहंगम विशेषताएं

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इस मंदिर में प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो आप सीधे बैकुंठ में आ गए हों। मंदिर की वास्तुकला और मूर्तिकला इतनी सजीव है कि दर्शनार्थी मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। आइए जानते हैं इस सिद्ध पीठ की 7 प्रमुख विशेषताएं:
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1. 33 कोटि देवी-देवताओं का दुर्लभ महासंगम

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आमतौर पर भक्तों को अलग-अलग देवताओं के दर्शन के लिए अलग-अलग तीर्थों की यात्रा करनी पड़ती है। लेकिन यहाँ भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ, श्री नारायण (विष्णु-लक्ष्मी) परिवार, परमपिता ब्रह्मा जी, विघ्नहर्ता गणेश जी और वैदिक ज्ञान के प्रतीक 'सप्त ऋषि' एक ही प्रांगण में एक साथ विराजमान हैं।
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2. अद्भुत और विराट स्वरूप

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यहाँ भगवान के उन स्वरूपों के दर्शन होते हैं, जिनका वर्णन केवल पुराणों में मिलता है। इनमें भगवान शिव और माता शक्ति का 'अर्धनारीश्वर स्वरूप', तांडव करते महादेव का 'नटराज अवतार', महाभारत काल का वासुदेव श्रीकृष्ण का 'विराट रूप' और भोलेनाथ की जटाओं से 'गंगा अवतरण' का दृश्य अत्यंत प्राणवान लगता है।
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3. माँ गंगा का साक्षात् चमत्कार (The Ganga Miracle)

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बैकुंठ धाम की जिस विशेषता ने इसे "मिनी हरिद्वार" का दर्जा दिलाया है, वह है यहाँ होने वाला प्राकृतिक चमत्कार। मंदिर के ठीक पास से बहने वाली पवित्र गंगा नदी की जलधारा सीधे मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करती है। यह निर्मल जलधारा सबसे पहले एक सुंदर पालने में झूल रहे बाल-मुकुंद (लड्डू गोपाल) के कोमल चरणों को स्पर्श करती है, और उसके बाद वही पवित्र जल सीधे नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिरकर साक्षात् 'जलाभिषेक' करता है।
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4. नवग्रह शांति और माँ जगदंबा

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भक्तों की ग्रह-दशाओं की शांति के लिए एक अलग और भव्य 'नवग्रह मंदिर' का निर्माण किया गया है। इसी परिसर में आदिशक्ति माँ जगदंबा के नौ रूपों (नवदुर्गा) की भी अति सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं।
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5. पौराणिक झांकियां: पुराणों का सजीव चित्रण

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यह मंदिर सनातन धर्म के इतिहास का एक खुला संग्रहालय है। यहाँ की झांकियां आपको भावविभोर कर देंगी:
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    समुद्र मंथन का दृश्य
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    भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का वध
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    राजा बलि का अहंकार तोड़ते वामन अवतार
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    रामायण काल की माता सीता की वाटिका, भावुक 'भरत मिलाप' और सूर्पनखा प्रसंग
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6. 300 वर्ष पुराना सिद्ध पीपल वृक्ष: पितृ दोष निवारण

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मंदिर प्रांगण के पिछले हिस्से में एक विशाल और अत्यंत जागृत पीपल का वृक्ष है, जो लगभग 200 से 300 वर्ष पुराना बताया जाता है। दूर-दूर से लोग यहाँ आकर पितरों की शांति (Pitru Shanti) और पितृ दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
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7. भगवान कल्कि और मनोकामना पूर्ति का रहस्य

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पूरी परिक्रमा के बाद अंत में मुख्य द्वार पर कलयुग के अंतिम अवतार 'भगवान कल्कि' देवदत्त नामक घोड़े पर सवार दिखाई देते हैं। यहाँ की सबसे बड़ी मान्यता है कि सभी देवताओं के दर्शन के बाद अंत में यदि भगवान कल्कि को नमन करके सच्चे मन से कोई भी प्रार्थना की जाए और उनसे विदा ली जाए, तो वह मनोकामना शत-प्रतिशत पूरी होती है।
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एक नज़र में: बैकुंठ धाम हाजीपुर (Quick Guide)

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विवरण
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जानकारी
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मंदिर का नाम
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बैकुंठ धाम (प्रसिद्ध नाम: मिनी हरिद्वार)
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मंदिर के संरक्षक
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चौधरी जोगिंदर सिंह तोमर जी (पूर्व प्रधान)
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मुख्य आकर्षण
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33 कोटि देवता, गंगा जलाभिषेक, कल्कि अवतार
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स्थान / पता
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ग्राम हाजीपुर, अकबराबाद से 2 किमी दूर, नजीबाबाद रोड
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जिला व राज्य
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बिजनौर, उत्तर प्रदेश
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हाजीपुर गांव (अकबराबाद से मात्र 2 किमी दूर) स्थित यह बिजनौर बैकुंठ धाम वास्तव में आध्यात्मिकता और परम शांति का एक अनूठा केंद्र है। यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कला, मूर्तिकला और पौराणिक कथाओं का एक जीवंत संग्रहालय भी है। यदि आप भी एक ही स्थान पर सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं और 'मिनी हरिद्वार' के चमत्कारिक दर्शन करना चाहते हैं, तो सपरिवार इस पवित्र सिद्ध पीठ की यात्रा अवश्य करें।
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बिजनौर के अकबराबाद-नजीबाबाद मार्ग पर हाजीपुर गांव में स्थित बिजनौर बैकुंठ धाम को स्थानीय लोग 'मिनी हरिद्वार' कहते हैं। यहां एक ही प्रांगण में 33 कोटि देवी-देवताओं, शिव परिवार, नारायण परिवार और नवग्रहों के दर्शन होते हैं। गंगा नदी द्वारा लड्डू गोपाल के चरण स्पर्श और 300 साल पुराने पीपल के पेड़ पर पितृ शांति पूजा यहां की प्रमुख अलौकिक विशेषताएं हैं। मुख्य द्वार पर भगवान कल्कि के दर्शन कर श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। )
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