बिजनौर (ब्यूरो चीफ शकील अहमद): मई महीने की झुलसाने वाली गर्मी और हीटवेव के बीच बिजली विभाग के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए एक नई मुसीबत बन गए हैं। उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों (Prepaid Smart Meters) की तेज भागती रीडिंग और अचानक कटने वाली बिजली को लेकर लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने लगा है। सोमवार को बिजनौर जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट परिसर) पर उस वक्त भारी गहमागहमी और तनाव देखने को मिला, जब शहर के मोहल्ला कस्साबान रेती से आई दर्जनों महिलाओं ने बिजली विभाग और स्मार्ट मीटर के विरोध में मोर्चा खोल दिया।READ ALSO:-मेरठ में मौत बनकर बरसी आग: गहरी नींद में सो रहे थे लोग, धू-धू कर जला मकान; पिता और 8 साल की मासूम की तड़प-तड़प कर मौत
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भीषण गर्मी की परवाह किए बिना कलेक्ट्रेट पहुंचीं इन महिलाओं के चेहरों पर बिजली विभाग (UPPCL) की कार्यप्रणाली को लेकर साफ आक्रोश झलक रहा था। महिलाओं ने हाथों में बिजली के बिल और ज्ञापन लेकर जमकर नारेबाजी की। उनका सीधा आरोप था कि जब से उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, तब से उनकी जिंदगी अंधकारमय हो गई है। रिचार्ज खत्म होते ही बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली गुल हो जाती है, जिससे इस चिलचिलाती गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों का हाल बेहाल हो जाता है।
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"4 दिन में खत्म हो जाता है रिचार्ज, कहां से लाएं पैसा?"
\r\n\r\nप्रदर्शन कर रही महिलाओं ने मीडिया से बातचीत में अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वे बिजनौर कोतवाली शहर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहल्ला कस्साबान रेती की निवासी हैं। इस मोहल्ले में मुख्य रूप से दलित और मुस्लिम आबादी निवास करती है। यहां रहने वाले ज्यादातर परिवार दिहाड़ी मजदूरी, रिक्शा चालन या छोटे-मोटे काम करके अपना और अपने बच्चों का पेट पालते हैं।
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महिलाओं का कहना है कि इन नए स्मार्ट मीटरों का बिल पुराने मीटरों की तुलना में दोगुना-तिगुना आ रहा है। सबसे बड़ी और गंभीर परेशानी यह है कि रोज कमाने-खाने वाले दिहाड़ी मजदूर एक साथ पूरे महीने का भारी-भरकम रिचार्ज नहीं करा सकते। वे बमुश्किल 100-200 रुपयों का रिचार्ज कराते हैं, लेकिन मीटर इतनी तेजी से पैसे काटता है कि चार दिन के अंदर ही बैलेंस शून्य हो जाता है और बिजली काट दी जाती है। बार-बार रिचार्ज कराना उनके बजट से पूरी तरह बाहर हो चुका है।
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हीटवेव का कहर और बिना बिजली के कट रही रातें
\r\n\r\nमई 2026 में पड़ रही इस भयानक हीटवेव (Heatwave) और 40 डिग्री से ऊपर जाते तापमान के बीच बिना बिजली के रहना किसी अमानवीय सजा से कम नहीं है। महिलाओं ने प्रशासन को बताया कि दिन के समय जब पारा आसमान छू रहा होता है, तब स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होने के कारण उनके घरों के पंखे बंद हो जाते हैं।
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छोटे-छोटे बच्चे गर्मी और उमस से बिलखते रहते हैं, और बुजुर्गों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महिलाओं का स्पष्ट कहना था कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे इस प्रीपेड सिस्टम को झेलने में असमर्थ हैं। उन्होंने प्रशासन से सख्त लहजे में गुहार लगाई है कि गरीबों की मजबूरी को समझते हुए इन प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को तुरंत उखाड़ा जाए और उनके स्थान पर पहले की तरह पुराने (पोस्टपेड) मीटर दोबारा लगाए जाएं, ताकि वे महीने के अंत में अपनी सुविधा और बचत के अनुसार बिल जमा कर सकें।
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पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह ने किया हस्तक्षेप
\r\n\r\nमहिलाओं के इस बड़े और उग्र प्रदर्शन की भनक लगते ही इलाके में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गईं। महिलाओं की परेशानी और कलेक्ट्रेट पर उनके जमावड़े को देखते हुए बिजनौर के पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह तुरंत कलेक्ट्रेट परिसर पहुंच गए। उन्होंने तपती धूप में प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बीच जाकर उनकी पूरी समस्या को ध्यान से सुना।
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मामले की गंभीरता को समझते हुए पूर्व सांसद ने मौके से ही बिजली विभाग के आला अधिकारियों (XEN/SDO) और प्रशासनिक अफसरों को फोन मिलाया। उन्होंने अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए कड़े निर्देश दिए कि गरीबों के घरों की बिजली इस तरह से न काटी जाए और स्मार्ट मीटरों में आ रही तकनीकी कमियों (ज्यादा बिल आना, तेजी से बैलेंस कटना) की तुरंत जांच कराकर महिलाओं की समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। पूर्व सांसद के इस आश्वासन और उनके द्वारा अधिकारियों को लगाई गई फटकार के बाद महिलाओं का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ।
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एसडीएम रितु रानी ने लिया ज्ञापन, दिया कार्रवाई का भरोसा
\r\n\r\nकाफी देर चले इस प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद, प्रशासन की तरफ से एसडीएम सदर (SDM Sadar) रितु रानी ने कलेक्ट्रेट परिसर में आकर महिलाओं से मुलाकात की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपनी मांगों से संबंधित और जिलाधिकारी (DM Bijnor) को संबोधित एक लिखित ज्ञापन एसडीएम रितु रानी को सौंपा।
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एसडीएम ने महिलाओं की सभी शिकायतों को पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ सुना। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि उनके ज्ञापन को तुरंत जिलाधिकारी और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिया जाएगा। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि विभाग को स्मार्ट मीटरों की चेकिंग करने और गरीबों को बेवजह परेशान न करने के निर्देश जारी किए जाएंगे।
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प्रदर्शन में इन महिलाओं ने बुलंद की आवाज
\r\n\r\nकलेक्ट्रेट पर अपने हकों की आवाज बुलंद करने और प्रशासन को कुंभकर्णी नींद से जगाने पहुंची इन महिलाओं में भारी एकजुटता देखी गई। प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से मंजू रानी, शाहाना शाह, ओमवती, रामरति, खानम, उषा, कुंती, कविता, कृष्ण, बबली, डोली, लक्ष्मी, काजल, आशा, पूजा, निर्मला, शारदा, शमसीदा, पिंकी, रेखा, ममता, बलेश, मुनेश, प्रेमवती, अंकित, सुमित्रा देवी, रानी, लक्ष्मी, रेणुका और सरोज सहित कई अन्य स्थानीय महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद थीं।
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स्मार्ट मीटर: सुविधा या सफेद हाथी?
\r\n\r\nबिजनौर का यह प्रदर्शन कोई अकेली घटना नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर योजना को लेकर उपभोक्ता लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उपभोक्ता परिषद भी कई बार ऊर्जा मंत्री और बिजली निगम के सामने स्मार्ट मीटरों की तेज भागती रीडिंग के मुद्दे उठा चुका है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्मार्ट मीटर एक 'सफेद हाथी' साबित हो रहे हैं। एक तरफ सरकार निर्बाध बिजली देने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ प्रीपेड सिस्टम के कारण उपभोक्ता अपने ही घर में बिजली से वंचित हो रहे हैं। बिजनौर प्रशासन के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इन गरीब परिवारों की मांग पर क्या एक्शन लेता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.