खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट (रिपोर्टर: शकील अहमद, बिजनौर): उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा तेजी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर (Smart Meters) और प्रीपेड बिजली व्यवस्था (Prepaid Electricity System) अब आम जनता के लिए सुविधा कम और सिरदर्द ज्यादा बनते जा रहे हैं। बिजनौर (Bijnor) जिले के स्योहारा (Syohara) कस्बे से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां स्मार्ट मीटर की तेज रफ्तार और आए दिन के भारी-भरकम बिलों से परेशान महिलाओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। गुरुवार को दर्जनों की संख्या में आक्रोशित महिलाओं ने स्योहारा बिजली घर (पावर हाउस) का घेराव किया और विभाग की नीतियों के खिलाफ जमकर हंगामा काटा।READ ALSO:-बिजनौर में जानलेवा स्टंट का खौफनाक Video Viral: गर्दन पर कुल्हाड़ी रखकर फोड़ा नारियल, सीने पर तोड़ी ईंट; दर्शकों की अटकी सांसें
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इस जोरदार प्रदर्शन ने पूरे कस्बे का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महिलाओं के इस आंदोलन में स्थानीय पुरुषों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कंधे से कंधा मिलाकर बिजली विभाग की मनमानी का विरोध किया। लोगों का साफ तौर पर कहना है कि यह नई प्रीपेड व्यवस्था उनके लिए किसी आर्थिक उत्पीड़न (Financial Harassment) से कम नहीं है।
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स्मार्ट मीटर और प्रीपेड सिस्टम: सुविधा या आर्थिक उत्पीड़न का नया हथियार?
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दरअसल, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) द्वारा राज्य भर में पुराने मीटरों को हटाकर उनकी जगह प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। विभाग का तर्क है कि इससे बिजली चोरी रुकेगी और बिलिंग में पारदर्शिता आएगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
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स्योहारा में प्रदर्शन कर रही महिलाओं और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब से उनके घरों में ये नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, तब से उनके बिजली के बिल पहले की तुलना में दोगुने या तिगुने आने लगे हैं। सबसे बड़ी समस्या इस मीटर के 'प्रीपेड रिचार्ज सिस्टम' (Prepaid Recharge System) को लेकर है। मोबाइल फोन की तरह अब लोगों को बिजली के लिए पहले से रिचार्ज कराना पड़ता है। लोगों की शिकायत है कि बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी पूर्व सूचना के, चाहे रात के 12 बज रहे हों या भयंकर गर्मी पड़ रही हो, घरों की बिजली अचानक गुल हो जाती है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए हर कुछ दिनों में हजार-दो हजार रुपये का रिचार्ज कराना असंभव हो गया है।
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स्योहारा बिजली घर पर महिलाओं का 'रणचंडी' रूप

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स्मार्ट मीटर की इन्हीं खामियों से तंग आकर स्योहारा की महिलाओं ने अपने घरों से निकलकर सीधे बिजली घर का रुख किया। सुबह होते ही बड़ी संख्या में महिलाएं स्योहारा पावर हाउस पर इकट्ठा हो गईं और बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। महिलाओं के चेहरों पर साफ गुस्सा और निराशा देखी जा सकती थी।
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प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "हम गरीब लोग हैं, रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं। पहले महीने के अंत में एक बार बिल आता था, जिसे हम किसी तरह जोड़-घटाकर भर देते थे। लेकिन अब तो हर तीसरे दिन मोबाइल पर मैसेज आ जाता है कि बैलेंस खत्म हो रहा है, तुरंत रिचार्ज करें। अगर रात में बैलेंस खत्म हो जाए तो हमारे छोटे-छोटे बच्चे गर्मी और मच्छरों के बीच अंधेरे में रोते रहते हैं। ऊपर से ये मीटर पुराने मीटरों की तुलना में बहुत तेज भागते हैं। क्या सरकार हमें इस तरह से लूटना चाहती है?" महिलाओं ने एक सुर में मांग उठाई कि उनके घरों से तुरंत इन 'लुटेरे' स्मार्ट मीटरों को हटाया जाए और पुरानी बिलिंग व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।
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प्रदर्शन में गूंजीं ये प्रमुख मांगें और गंभीर आरोप

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स्योहारा बिजली घर पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान जनता ने बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने कुछ बेहद गंभीर आरोप और स्पष्ट मांगें रखीं:
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    तेज मीटर रीडिंग: लोगों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि स्मार्ट मीटरों की रीडिंग सामान्य से बहुत ज्यादा तेज चलती है, जिससे खपत कम होने के बावजूद बिल बहुत अधिक आ रहा है।
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    रिचार्ज की समस्या: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बार-बार बड़े अमाउंट का रिचार्ज कराना संभव नहीं है। इसे मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न बताया गया।
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    अघोषित कटौती: बैलेंस खत्म होने पर अचानक बिजली काट दी जाती है, जिससे कई बार घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, टीवी) भी खराब हो रहे हैं।
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    स्मार्ट मीटर हटाने की मांग: उपभोक्ताओं की स्पष्ट मांग है कि जब तक इन मीटरों की तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक इन मीटरों को हटाकर पुराने पारंपरिक मीटर ही लगाए जाएं।
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महिलाओं के समर्थन में उतरा पूरा कस्बा: इन स्थानीय लोगों ने दिया साथ

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इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि यह केवल कुछ महिलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज ने एकजुट होकर इसका समर्थन किया। बिजली घर पर महिलाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय पुरुष भी मौके पर पहुंचे।
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प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल रहीं महिलाएं: शबाना, रूबी, ताहिरा, रायसन, तरन्नुम, अफसाना, रोशन, कुलसुम, खेरुनिशा और साइमा जैसी दर्जनों महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर विभाग को अपनी समस्याओं से अवगत कराया और डटकर विरोध किया।
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इन स्थानीय पुरुषों और युवाओं ने दिया समर्थन: महिलाओं की इस लड़ाई में सलीम (सफियाबाद), साजिद, दानिश, रिहान, मोहम्मद, मौ. जैद, डॉ. रुकमुद्दीन, अहमदुल्लाह और मोहम्मद शौकीन सहित कस्बे के कई संभ्रांत नागरिकों और युवाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने एक स्वर में कहा कि विभाग की तानाशाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।
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अधिकारियों का आश्वासन और मौजूदा हालात: क्या निकलेगा कोई हल?

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बिजली घर पर भारी हंगामे और नारेबाजी की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग (Electricity Department) के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति को बिगड़ता देख विभाग के कई वरिष्ठ कर्मचारी और अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे।
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अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं और स्थानीय नेताओं के साथ शांतिपूर्वक वार्ता की। उन्होंने जनता की समस्याओं और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों को ध्यान से सुना। वार्ता के दौरान बिजली कर्मचारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत करते हुए आश्वासन दिया कि वे उनकी समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराएंगे। अधिकारियों ने वादा किया है कि जिन घरों में मीटर के तेज चलने की शिकायत है, वहां तकनीकी टीम भेजकर मीटरों की जांच कराई जाएगी और बिलों में जो भी गड़बड़ी या विसंगति होगी, उसे जल्द से जल्द सुधारा जाएगा।
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आक्रोश अभी भी बरकरार: विभाग के इस ठोस आश्वासन के बाद फिलहाल स्योहारा बिजली घर पर माहौल शांत हो गया है और लोगों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। हालांकि, कस्बे के लोगों में अभी भी इस नई व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश बरकरार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अधिकारियों के केवल कोरे आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। अगर एक हफ्ते के भीतर उनकी समस्याओं का कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया और स्मार्ट मीटर की धांधली बंद नहीं हुई, तो वे दोबारा और भी बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
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यह पूरी घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कोई भी नई तकनीक या व्यवस्था तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक वह आम जनता की आर्थिक स्थिति और व्यावहारिक सहूलियतों के अनुकूल न हो। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिजनौर का बिजली विभाग और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन जनता के इस आक्रोश को शांत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। खबरीलाल की टीम इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।
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