बिजनौर (22 अगस्त 2026): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जनपद के कई निचले इलाकों और खादर क्षेत्रों में भीषण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जलभराव के कारण सबसे बड़ा खतरा संक्रामक और जल जनित बीमारियों का होता है। इस गंभीर खतरे को भांपते हुए बिजनौर का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की तैनाती कर दी है, ताकि किसी भी संभावित महामारी को फैलने से रोका जा सके।READ ALSO:-बिजनौर में पुलिस महकमे का नया अध्याय: तेजतर्रार IPS कृष्ण कुमार विश्नोई ने संभाली SP की कमान, बोले- 'अपराधियों पर कसेगा शिकंजा'
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्राउंड जीरो की स्थिति: 5 गांव और 8500 से ज्यादा की आबादी प्रभावित

\r\n\r\n
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जिले के दो प्रमुख ब्लॉकों के कुल पांच गांवों में पानी भर गया है। इन गांवों की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 8,530 है, जो इस जलभराव से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें नावों और अन्य साधनों के जरिए इन इलाकों में पैनी नजर बनाए हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रभावित ब्लॉकों और गांवों का विस्तृत विवरण:

\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
ब्लॉक का नाम
\r\n
\r\n
प्रभावित गांवों की संख्या
\r\n
\r\n
प्रभावित गांवों के नाम
\r\n
\r\n
कुल आबादी (अनुमानित)
\r\n
\r\n
तैनात स्वास्थ्य टीम
\r\n
\r\n
जलीलपुर
\r\n
\r\n
04
\r\n
\r\n
बलिया नंगली, रायपुर खादर, खानपुर खादर, पांडुनगर चौकी
\r\n
\r\n
लगभग 7,000
\r\n
\r\n
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जलीलपुर
\r\n
\r\n
मौहम्मदपुर देवमल
\r\n
\r\n
01
\r\n
\r\n
रावली
\r\n
\r\n
लगभग 1,530
\r\n
\r\n
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चंदक
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के प्रभारियों को इन गांवों में 24 घंटे निगरानी रखने और तुरंत राहत पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

स्वास्थ्य कैंपों का आयोजन: 192 मरीजों का हुआ तत्काल इलाज

\r\n\r\n
जलभराव वाले क्षेत्रों में अक्सर दूषित पानी और मच्छरों के कारण बीमारियां तेजी से फैलती हैं। सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह के कुशल निर्देशन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलीलपुर और चंदक की मेडिकल टीमों ने बिना कोई समय गंवाए प्रभावित गांवों में डेरा डाल दिया है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
शनिवार को इन सभी 5 गांवों में विशेष स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए गए। डॉक्टरों की टीम ने घर-घर जाकर और कैंपों के माध्यम से मरीजों की जांच की।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कैंप की रिपोर्ट: आज आयोजित इन चिकित्सा कैंपों में कुल 192 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां दी गईं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बीमारियों का प्रकार: अधिकतर मरीज सामान्य वायरल बुखार, सर्दी-खांसी (नज़ला) और दूषित पानी के संपर्क में आने से होने वाले चर्म रोग (Skin infections/Fungal infections) से पीड़ित पाए गए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    राहत की खबर: स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बड़ी राहत की बात रही कि पूरे दिन चले इस सघन जांच अभियान में कोई भी गंभीर या जानलेवा बीमारी से ग्रसित रोगी नहीं मिला। सभी मरीजों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें आवश्यक दवाइयां निशुल्क उपलब्ध करा दी गई हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

निरोधात्मक कार्रवाई: महामारियों को रोकने का 'मास्टर प्लान'

\r\n\r\n
बाढ़ और जलभराव के बाद डायरिया, हैजा (Cholera), टाइफाइड और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा चरम पर होता है। इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' (Preventive Healthcare) पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि प्रभावित ग्रामों में युद्ध स्तर पर निरोधात्मक (Preventive) कार्रवाइयां चल रही हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    क्लोरिन और ओआरएस का वितरण: पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए घर-घर क्लोरीन की गोलियां (Chlorine Tablets) बांटी जा रही हैं। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन और डायरिया से बचाने के लिए जीवन रक्षक घोल (ORS) के पैकेट हर परिवार को दिए जा रहे हैं।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव: रुके हुए पानी में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनपता है। इसे नष्ट करने के लिए गांवों की गलियों और जलभराव वाले स्थानों पर नियमित रूप से फॉगिंग मशीनों से धुआं और एंटी-लार्वा रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) की उपलब्धता: बाढ़ के समय सांपों के बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप बाहर आ जाते हैं, जिससे सर्पदंश (Snake bite) की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर 'एंटी-स्नेक वेनम' (सांप के जहर का तोड़) पर्याप्त मात्रा में और 24x7 उपलब्ध करा दिया गया है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"हमारी प्राथमिकता प्रभावित गांवों के हर एक नागरिक के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। मेडिकल टीमें लगातार ग्राउंड पर मौजूद हैं। दवाओं और संसाधनों की कोई कमी नहीं है।" - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं और MOIC को दिए गए सख्त निर्देश

\r\n\r\n
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को इस आपदा के समय विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सीएमओ ने सभी आशा कार्यकत्रियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करें। यदि किसी भी गांव में जलभराव या बाढ़ से संबंधित कोई नई सूचना मिलती है या कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो उसकी सूचना तत्काल ब्लॉक के प्रभारी चिकित्साधिकारी (MOIC) को दी जाए। इससे 'क्विक रिस्पांस टीम' (QRT) तुरंत मौके पर पहुंचकर विभागीय सहायता प्रदान कर सकेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
प्रभारी चिकित्साधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलकर प्रभावित ग्रामों का निरंतर भौतिक सत्यापन और भ्रमण करते रहें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जनता के लिए स्वास्थ्य विभाग की खास अपील: 'पानी उबालकर पिएं'

\r\n\r\n
प्रशासन केवल इलाज ही नहीं कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा (Health Education) पर भी भारी जोर दे रहा है। मेडिकल टीमों द्वारा लाउडस्पीकर और चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पीने के पानी को कम से कम 10-15 मिनट तक उबालकर और छानकर ही पिएं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बासी या खुले में रखा हुआ भोजन बिल्कुल न खाएं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शौच के लिए शौचालय का ही प्रयोग करें और साबुन से हाथ अवश्य धोएं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मच्छरों से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और रात में मच्छरदानी का उपयोग करें।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि प्राकृतिक आपदा के समय यदि पूर्व-नियोजित तैयारियां हों, तो आम जनमानस को बड़े संकट से बचाया जा सकता है। फिलहाल, सभी 5 गांवों में स्थिति नियंत्रण में है और मेडिकल टीमें मोर्चे पर डटी हुई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें