उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले से अपराध जगत की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आमतौर पर वाहन चोर किसी गाड़ी को चुराने के बाद उसे कबाड़ी बाजार में कटवा देते हैं या किसी दूर-दराज के इलाके में औने-पौने दामों पर बेच देते हैं। लेकिन, बिजनौर के रेहड़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने जिन दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, उनका 'मोडस ऑपरेंडी' (Modus Operandi) यानी अपराध करने का तरीका किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। इन अपराधियों ने न सिर्फ दिनदहाड़े एक बाइक चुराई, बल्कि पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसका पूरा 'डीएनए' (DNA) ही बदल दिया। यूपी (UP) की नंबर प्लेट हटाकर उस पर उत्तराखंड (UK) की फर्जी नंबर प्लेट लगा दी गई और हद तो तब हो गई जब आरोपियों के पास से उसी फर्जी नंबर की एक बिल्कुल असली दिखने वाली जाली आरसी (Registration Certificate) भी बरामद हुई।READ ALSO:-मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला: 37 फर्जी कंपनियां, 293 करोड़ की GST चोरी! 'सफेदपोश' अपराधियों की जमानत खारिज, जानिए कैसे बुना गया था लूट का जाल
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बिजनौर पुलिस, विशेषकर थाना रेहड़ की पुलिस टीम ने असाधारण तत्परता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर इस पूरी आपराधिक साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक चोरी की बाइक की बरामदगी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे बड़े नेक्सस (Nexus) की तरफ इशारा करती है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे चोरी के वाहनों को 'सफेद' (White/Legal) बनाकर सड़कों पर दौड़ा रहा है।
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आइए, इस पूरे मामले की जड़, घटना के टाइमलाइन, आरोपियों की शातिराना चालों और उन पर लगाई गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई और बेहद सख्त धाराओं का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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घटना की शुरुआत - बादीगढ़ चौराहे से गायब हुई बाइक (The Incident)

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हर बड़े अपराध की शुरुआत एक छोटी सी लापरवाही या पलक झपकने की देरी से होती है। यह घटना 25 मार्च 2026 की है।
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बिजनौर जिले के थाना रेहड़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम इमरतपुर के निवासी अभिषेक कुमार (पुत्र अशोक कुमार) रोजमर्रा की तरह अपने काम से निकले थे। अभिषेक के पास एक काले रंग की बजाज प्लेटिना (Bajaj Platina) मोटरसाइकिल थी, जिसका असली रजिस्ट्रेशन नंबर UP20AC-0865 था।
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अभिषेक अपनी बाइक लेकर थाना रेहड़ क्षेत्र के ही व्यस्त बादीगढ़ चौराहे के पास पहुंचे। वहां स्थित एक लाइब्रेरी के बाहर उन्होंने अपनी बाइक खड़ी की और अंदर चले गए। यह एक सामान्य दिन था और चौराहे पर आम चहल-पहल थी। लेकिन, चोरों की नजरें पहले से ही इस बाइक पर गड़ी हुई थीं। जैसे ही अभिषेक लाइब्रेरी के अंदर गए, अज्ञात चोरों ने मास्टर चाबी (Master Key) या लॉक तोड़ने की तकनीक का इस्तेमाल किया और पलक झपकते ही बाइक लेकर वहां से रफूचक्कर हो गए।
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जब अभिषेक वापस लौटे, तो अपनी बाइक को नदारद पाकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आसपास पूछताछ करने और तलाशने के बाद जब बाइक का कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने तुरंत थाना रेहड़ का रुख किया।
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पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया (FIR Registered)

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थाना रेहड़ पुलिस ने पीड़ित अभिषेक कुमार की तहरीर (Complaint) मिलते ही बिना कोई समय गंवाए मामला दर्ज किया। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने मु.अ.सं. 12/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) (जो कि वाहन चोरी से संबंधित है) में अभियोग पंजीकृत कर लिया और अज्ञात चोरों की तलाश शुरू कर दी
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ऑपरेशन रेहड़' - 24 घंटे में कैसे खुला राज? (The Investigation)

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एफआईआर दर्ज होने के बाद, रेहड़ थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) श्री राजीव कुमार वर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत पुलिस टीमों का गठन किया। चौराहे और आसपास के मार्गों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए, मुखबिरों (Informers) का जाल बिछाया गया और स्थानीय गैरेज व संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई।
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अभियोग की विवेचनात्मक कार्यवाही (Investigative Action) के दौरान, पुलिस के स्थानीय खुफिया नेटवर्क (Local Intelligence) ने बहुत सटीक काम किया। पुलिस को सूचना मिली कि इस चोरी में स्थानीय ग्राम दहलावाला के ही कुछ संदिग्ध युवक शामिल हो सकते हैं। विवेचना के दौरान दो नाम प्रमुखता से प्रकाश में आए:
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    साजन (पुत्र हुलशन सिंह)
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    राजीव कुमार (पुत्र हरपाल सिंह) (दोनों निवासी: ग्राम दहलावाला, थाना रेहड़, जनपद बिजनौर)
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सूचना पक्की होने के बाद, पुलिस ने एक अचूक जाल बिछाया और 25 मार्च 2026 की देर रात/अगले दिन चेकिंग के दौरान इन दोनों वांछित अभियुक्तों को धर दबोचा। लेकिन असली चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने उनके पास से बरामद की गई मोटरसाइकिल की जांच की।
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आरोपियों की शातिराना चाल - जाली RC और फर्जी नंबर प्लेट का तिलिस्म (The Modus Operandi)

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जब पुलिस ने साजन और राजीव कुमार को रोका, तो वे उसी बजाज प्लेटिना पर सवार थे जो बादीगढ़ चौराहे से चोरी हुई थी। लेकिन एक नजर में कोई भी उस बाइक को पहचान नहीं सकता था। अपराधियों ने पुलिस और चेकिंग से बचने के लिए एक बेहद 'हाई-टेक' और शातिराना तरीका (Criminal Mastermind) अपनाया था।
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1. UP की बाइक, UK का नंबर (The Border Advantage)

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बिजनौर जिले की भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। बिजनौर की सीमाएं सीधे तौर पर उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य से लगती हैं। अपराधियों ने इसी भौगोलिक लाभ (Geographical Advantage) को अपने अपराध का हथियार बनाया। उन्होंने चोरी की गई बाइक की असली यूपी की नंबर प्लेट (UP20AC-0865) को तुरंत उखाड़ कर फेंक दिया और उसकी जगह उत्तराखंड राज्य के देहरादून RTO की एक फर्जी नंबर प्लेट UK07 6810 लगा दी।
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ऐसा क्यों किया गया? * अक्सर अंतर-राज्यीय सीमाओं (Inter-state borders) पर दूसरे राज्य के नंबर वाली गाड़ियों को देखकर पुलिस यह सोच सकती है कि ये कोई मुसाफिर या पर्यटक हैं।
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    यदि यूपी पुलिस के वायरलेस सेट पर UP20 नंबर की बाइक की चोरी की सूचना प्रसारित होती है, तो चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर यूपी के नंबरों पर ही रहती है। UK नंबर प्लेट लगाकर वे पुलिस की नजरों से आसानी से बचकर निकल सकते थे।
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2. जाली आरसी (Fake RC) - सिस्टम में सेंधमारी

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नंबर प्लेट बदलना तो फिर भी एक आम हथकंडा है, लेकिन इन चोरों ने जो दूसरा काम किया, वह एक बड़े और संगठित गिरोह (Organized Syndicate) की ओर इशारा करता है। पुलिस को तलाशी के दौरान इन आरोपियों की जेब से UK07 6810 नंबर की एक फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) भी बरामद हुई।
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यह आरसी देखने में बिल्कुल असली मालूम पड़ती थी। अगर कोई सामान्य ट्रैफिक पुलिसकर्मी या सिपाही इन्हें रोकता और कागजात मांगता, तो वे यह जाली आरसी दिखाकर आसानी से साफ बच निकलते। फर्जी आरसी बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है; इसके लिए कंप्यूटर, प्रिंटर, खास तरह के कागज और RTO के फॉर्मेट की गहरी जानकारी होनी चाहिए। इस बरामदगी ने यह साबित कर दिया कि साजन और राजीव सिर्फ छिटपुट वाहन चोर नहीं हैं, बल्कि ये एक ऐसे नेक्सस का हिस्सा हैं जो चोरी की गाड़ियों को जाली दस्तावेजों के सहारे 'कानूनी' (Legal) जामा पहनाने का काला कारोबार करता है।
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कानूनी शिकंजा - BNS की इन 6 सबसे सख्त धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा (Decoding the Law)

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जैसे ही पुलिस को फर्जी नंबर प्लेट और जाली आरसी मिली, मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई। अब यह सिर्फ एक साधारण चोरी का मामला नहीं रह गया था; यह राज्य के साथ धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी (Forgery) और आपराधिक षड्यंत्र का एक बड़ा 'व्हाइट-कॉलर क्राइम' बन चुका था।
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रेहड़ पुलिस ने बिना किसी ढिलाई के, बरामदगी के आधार पर तुरंत मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त और गैर-जमानती धाराओं की वृद्धि (Addition) कर दी। आइए, इन सभी धाराओं का एक विस्तृत कानूनी विश्लेषण करते हैं, ताकि आम जनता समझ सके कि इन अपराधों की सजा कितनी गंभीर है:
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1. धारा 303(2) BNS: चोरी का दंड (Theft)

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यह धारा तब लगाई गई थी जब अभिषेक कुमार ने बाइक चोरी की शिकायत की थी। यह चल संपत्ति (Movable Property) की चोरी से संबंधित है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
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2. धारा 317(2) BNS: चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना (Receiving Stolen Property)

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चूंकि आरोपियों के पास से चोरी की हुई बजाज प्लेटिना बाइक बरामद हुई है, और वे जानते थे कि यह संपत्ति चोरी की है, इसलिए यह धारा लगाई गई। इसके तहत भी 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
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3. धारा 318(4) BNS: धोखाधड़ी और बेईमानी (Cheating)

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फर्जी नंबर प्लेट लगाकर और जाली आरसी दिखाकर पुलिस, प्रशासन और आम जनता को धोखा देने के स्पष्ट प्रयास के लिए यह गंभीर धारा लगाई गई है। जब कोई व्यक्ति किसी अन्य रूप में खुद को या अपनी संपत्ति को प्रस्तुत करके धोखा देता है, तो इस धारा के तहत 7 साल तक की कड़ी सजा हो सकती है।
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4. धारा 338 BNS: मूल्यवान प्रतिभूति (Valuable Security) की जालसाजी

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रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) एक सरकारी दस्तावेज और 'मूल्यवान प्रतिभूति' है। किसी सरकारी दस्तावेज की नकल बनाना या उसे जाली तरीके से तैयार करना एक बेहद गंभीर अपराध है। इस धारा के तहत आरोपियों को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) या 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
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5. धारा 336(3) BNS: जालसाजी (Forgery) के उद्देश्य से मुहर या प्लेट बनाना

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यह धारा उन उपकरणों, कंप्यूटर या प्रिंटर्स की ओर इशारा करती है जिनका उपयोग उस जाली आरसी या फर्जी नंबर प्लेट को बनाने के लिए किया गया। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या मुहर की जालसाजी देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।
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6. धारा 340(2) BNS: जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना (Using Forged Document as Genuine)

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सिर्फ जाली दस्तावेज बनाना ही अपराध नहीं है, बल्कि उसे अपनी जेब में रखना और पुलिस या RTO के सामने 'असली' बताकर उसका इस्तेमाल करना एक अलग अपराध है। साजन और राजीव कुमार उस जाली आरसी को असली के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके लिए यह धारा लगाई गई है।
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इन सभी धाराओं (303(2), 317(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) BNS) के एक साथ लगने का मतलब है कि अब इन दोनों आरोपियों का लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहना तय है।
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बिजनौर पुलिस के जांबाज - जिन्होंने इस 'नेक्सस' को तोड़ा (The Heroes in Khaki)

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बिजनौर जिले के पुलिस कप्तान (SP Bijnor) के कुशल निर्देशन में थाना रेहड़ की पुलिस टीम ने जिस प्रोफेशनल तरीके से काम किया, वह काबिले तारीफ है। अक्सर चोरी के मामलों में पुलिस पर सुस्ती के आरोप लगते हैं, लेकिन 24 घंटे के भीतर माल की बरामदगी और जाली दस्तावेजों के गिरोह का भंडाफोड़ करना एक बेहतरीन पुलिसिंग (Smart Policing) का उदाहरण है।
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इस पूरे सफल 'ऑपरेशन' और गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में निम्नलिखित जांबाज अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे:
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    श्री राजीव कुमार वर्मा: प्रभारी निरीक्षक (SHO), थाना रेहड़, जनपद बिजनौर। (इन्होंने इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व किया और सटीक रणनीति बनाई)।
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  3. \r\n
    श्री भीम सिंह: उप-निरीक्षक (Sub-Inspector), थाना रेहड़।
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    श्री सोनू कुमार: उप-निरीक्षक (Sub-Inspector), थाना रेहड़।
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    दिनेश चहल (641): हेड कांस्टेबल (Head Constable), थाना रेहड़।
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  9. \r\n
    राजकुमार (1642): कांस्टेबल (Constable), थाना रेहड़।
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इस पूरी टीम ने रात-दिन एक करके न सिर्फ वादी अभिषेक कुमार की मेहनत की कमाई (उनकी बाइक) उन्हें वापस दिलाई, बल्कि समाज को उन दो अपराधियों से भी सुरक्षित किया जो भविष्य में इन जाली कागजातों का इस्तेमाल करके कोई बड़ी आपराधिक वारदात (जैसे बैंक लूट, चेन स्नैचिंग या तस्करी) को अंजाम दे सकते थे। क्योंकि अपराधी अक्सर फर्जी नंबर प्लेट की गाड़ियों का इस्तेमाल ही बड़े अपराधों के लिए करते हैं।
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आम जनता के लिए विशेष 'एडवाइजरी' - कैसे बचाएं अपना वाहन? (Public Security Guidelines)

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बिजनौर की यह घटना हम सभी के लिए एक बहुत बड़ा सबक (Lesson) है। आज के समय में सिर्फ हैंडल लॉक (Handle Lock) लगा देना ही वाहन की सुरक्षा के लिए काफी नहीं है। चोर अब 'हाई-टेक' हो चुके हैं। यदि आप चाहते हैं कि अभिषेक कुमार की तरह आपकी बाइक या कार चोरी न हो, तो पुलिस और सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई इन सावधानियों को अपनी आदत बना लें:
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  1. \r\n
    डबल लॉकिंग सिस्टम (Double Locking): हैंडल लॉक के अलावा, हमेशा एक मजबूत 'डिस्क लॉक' (Disc Lock) या 'टायर लॉक' का इस्तेमाल करें। चोर अक्सर मास्टर चाबी से हैंडल लॉक कुछ ही सेकंड में तोड़ देते हैं, लेकिन पहिये में लगा भारी ताला तोड़ने में उन्हें समय लगता है और वे पकड़े जाने के डर से गाड़ी छोड़ देते हैं।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    GPS ट्रैकर लगवाएं (Install GPS Tracker): अपनी गाड़ी में एक अच्छी क्वालिटी का गुप्त GPS ट्रैकर लगवाएं। अगर गाड़ी चोरी भी हो जाती है, तो आप अपने मोबाइल फोन पर उसकी लाइव लोकेशन (Live Location) ट्रैक कर सकते हैं और पुलिस तुरंत उसे बरामद कर सकती है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    अलार्म सिस्टम (Anti-Theft Alarm): आजकल बाजार में मोशन-सेंसर वाले एंटी-थेफ्ट अलार्म मिलते हैं। जैसे ही कोई अनजान व्यक्ति आपकी गाड़ी को छुएगा या लॉक तोड़ने की कोशिश करेगा, यह जोर-जोर से बजने लगेगा, जिससे चोर घबराकर भाग जाएगा।
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  7. \r\n
    सुरक्षित पार्किंग (Safe Parking): हमेशा अपनी गाड़ी को किसी सुरक्षित, रोशनी वाले स्थान पर या वहां पार्क करें जहां आसपास सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) लगे हों। बादीगढ़ चौराहे की घटना बताती है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में भी गाड़ी असुरक्षित हो सकती है अगर उसे सही जगह पार्क न किया जाए।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    दस्तावेजों की जांच (Second-hand Vehicle Check): अगर आप कोई पुरानी (Second-hand) बाइक या कार खरीद रहे हैं, तो केवल आरसी (RC) देखकर भरोसा न करें। बिजनौर के इस मामले ने साबित कर दिया है कि आरसी जाली भी हो सकती है। गाड़ी खरीदने से पहले RTO के 'M-Parivahan' ऐप पर गाड़ी का चेचिस नंबर (Chassis Number) और इंजन नंबर डालकर उसका असली मालिक और रिकॉर्ड जरूर चेक करें।
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  10. \r\n
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बिजनौर की रेहड़ पुलिस द्वारा साजन और राजीव कुमार की यह गिरफ्तारी अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम है। जाली आरसी और उत्तराखंड (UK) की फर्जी नंबर प्लेट का यह 'खेल' स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वाहन चोर अब सिर्फ लोहे के व्यापारी नहीं रहे; वे एक ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट (Organized Crime Syndicate) का रूप ले रहे हैं जो दस्तावेजों की जालसाजी (Forgery) करने में भी माहिर है।
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अब पुलिस इन दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह गहराई से पूछताछ (Interrogation) कर रही है कि इन्होंने यह जाली आरसी (Fake RC) किस कंप्यूटर सेंटर या मास्टरमाइंड से बनवाई थी, और क्या इन्होंने पहले भी यूपी की गाड़ियों को उत्तराखंड में या उत्तराखंड की गाड़ियों को यूपी में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचा है? यह पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में बिजनौर पुलिस इस पूरे अंतर-राज्यीय (Inter-state) जाली दस्तावेज गिरोह के मास्टरमाइंड को भी सलाखों के पीछे पहुंचा देगी।
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(नोट: यह खबर बिजनौर पुलिस द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी किए गए आधिकारिक प्रेस नोट पर आधारित है। मामले की अग्रिम विधिक कार्यवाही माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।)
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