एक तरफ जहां देश 'डिजिटल इंडिया' और 'स्मार्ट विलेज' की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से आई तस्वीरें विकास के इन तमाम दावों को मुंह चिढ़ा रही हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि 21वीं सदी में भी किसी गांव के मुख्य रास्ते से गुजरने के लिए लोगों को नाव की जरूरत महसूस हो? बिजनौर के थाना मंडावर क्षेत्र के गांव दयालवाला में आज हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहाँ 'विकास' की गंगा तो नहीं बही, लेकिन गांव का मुख्य मार्ग 'गंदे नाले' और 'तालाब' में जरूर तब्दील हो गया है। इस नारकीय स्थिति से तंग आकर अब गांव की मातृशक्ति ने मोर्चा संभाल लिया है।READ ALSO:-बिजनौर: 'शिक्षा के मंदिर' में मासूमों के कंधों पर सफाई का बोझ, गुरुजी धूप सेकने में व्यस्त – व्यवस्था पर तमाचा जड़ता वायरल वीडियो
\r\n\r\n\r\n\r\n
घटनास्थल: दयालवाला गांव, मंडावर (बिजनौर)
\r\n\r\nबिजनौर जिला, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और कृषि के लिए जाना जाता है, आज प्रशासन की उदासीनता के कारण चर्चा में है। मामला मंडावर थाना क्षेत्र के दयालवाला गांव का है। यह गांव आज प्रशासनिक उपेक्षा का एक जीता-जागता स्मारक बन चुका है। गांव से बाहर निकलने वाला मुख्य मार्ग, जो ग्रामीणों की लाइफलाइन है, पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 बिजनौर में सिस्टम फेल!दयालवाला गांव में सड़क बनी तालाब, महिलाओं ने गंदे पानी में खड़े होकर किया प्रदर्शन। ग्राम प्रधान और प्रशासन नदारद। क्या यही है विकास? pic.twitter.com/sfFUHdi5c5
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) February 1, 2026
\r\n\r\n
यह कोई बारिश का पानी नहीं है जो दो दिन में सूख जाएगा; यह उस अव्यवस्था का पानी है जो निकासी (Drainage) न होने के कारण गांव के बीचों-बीच जमा हो गया है। स्थिति यह है कि सड़क अब सड़क नहीं रही, बल्कि एक गंदे तालाब का रूप ले चुकी है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
महिलाओं का 'जल सत्याग्रह': पानी में खड़े होकर विरोध
\r\n\r\nआमतौर पर ग्रामीण महिलाएं घर की चारदीवारी तक ही सीमित रहती हैं, लेकिन जब समस्या बच्चों के भविष्य और परिवार की सेहत पर बन आए, तो वे दुर्गा का रूप धरने में देर नहीं लगातीं। दयालवाला में भी यही देखने को मिला।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गांव की दर्जनों महिलाएं अपने घरों से बाहर निकलीं और उस गंदे, बदबूदार पानी के बीचों-बीच जाकर खड़ी हो गईं। घुटनों तक गंदे पानी में खड़े होकर इन महिलाओं ने ग्राम प्रधान और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह दृश्य किसी सामान्य प्रदर्शन का नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक 'जल सत्याग्रह' जैसा प्रतीत हो रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
महिलाओं का कहना था, "हम इस नरक में जीने को मजबूर हैं। हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बुजुर्ग बीमार हैं और उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता नहीं है। अगर हम आज चुप रहे, तो कल हैजा और डेंगू हमारे बच्चों को निगल जाएगा।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
आरोप के घेरे में ग्राम प्रधान: विकास या विनाश?
\r\n\r\nप्रदर्शनकारी महिलाओं और ग्रामीणों का गुस्सा सीधे तौर पर मौजूदा ग्राम प्रधान पर फूटा। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n विकास कार्यों में शून्य: ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद प्रधान ने गांव की सुध नहीं ली। गांव के विकास के लिए सरकार से आने वाला पैसा कहां जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है।\r\n \r\n
- \r\n नालियों का अभाव: गांव में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। नालियां या तो बनी नहीं हैं या पूरी तरह चोक (बंद) पड़ी हैं, जिससे घरों का गंदा पानी सड़क पर जमा हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n अनदेखी: आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रधान ने समस्या का समाधान करना तो दूर, मौके पर आकर देखना भी मुनासिब नहीं समझा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, "प्रधान जी केवल वोट मांगने आते हैं। अब जब गांव तालाब बन गया है, तो वे गायब हैं। क्या यही है उनका 'सबका साथ, सबका विकास'?"
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
दुभर हुआ ग्रामीणों का निकलना: थम गई जिंदगी
\r\n\r\nमुख्य मार्ग के जलमग्न होने से गांव की पूरी दिनचर्या प्रभावित हो गई है:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n स्कूली बच्चे: सबसे ज्यादा परेशानी उन मासूम बच्चों को हो रही है जिन्हें स्कूल जाने के लिए इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे पानी में गिर जाते हैं, जिससे उनकी ड्रेस और किताबें खराब हो जाती हैं। कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।\r\n \r\n
- \r\n बुजुर्ग और बीमार: अगर गांव में कोई मेडिकल इमरजेंसी हो जाए, तो एम्बुलेंस का घर तक पहुंचना नामुमकिन है। खाट पर लिटाकर मरीज को मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।\r\n \r\n
- \r\n आजीविका पर संकट: दिहाड़ी मजदूर और किसान, जिन्हें काम के लिए शहर जाना होता है, उन्हें भी इसी कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बीमारियों का न्योता: स्वास्थ्य संकट की आहट
\r\n\r\nजमा हुआ गंदा पानी केवल आने-जाने की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक 'हेल्थ बम' (Health Bomb) है जो कभी भी फट सकता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n मच्छरों का प्रकोप: ठहरा हुआ पानी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मच्छरों के लिए प्रजनन का सबसे मुफीद स्थान है। गांव में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n संक्रमण: गंदे पानी के संपर्क में आने से बच्चों और महिलाओं को त्वचा संबंधी रोग (Skin Diseases) हो रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n बदबू: पानी के सड़ने से पूरे इलाके में ऐसी दुर्गंध है कि सांस लेना दूभर हो गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
प्रशासनिक उदासीनता: क्या बड़े हादसे का है इंतजार?
\r\n\r\nयह मामला मंडावर थाना क्षेत्र का है और स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे यह सब हो रहा है। सवाल उठता है कि क्या खंड विकास अधिकारी (BDO) और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) को इस स्थिति की जानकारी नहीं है? ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासनों के उन्हें कुछ नहीं मिला। फाइलों में शायद गांव 'ओडीएफ प्लस' (ODF Plus) या आदर्श ग्राम हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह किसी स्लम से भी बदतर है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
चेतावनी: 'नदी आंदोलन' और आर-पार की लड़ाई
\r\n\r\nअब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट चुका है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यह केवल एक शुरुआत है। उन्होंने इसे 'नदी आंदोलन' का नाम दिया है—यह तंज है उस व्यवस्था पर जिसने सड़क को नदी बना दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि जिला प्रशासन और ग्राम प्रधान ने तत्काल प्रभाव से पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की और पक्की सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया, तो वे:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जिला मुख्यालय पर धरना देंगे।\r\n \r\n
- \r\n आगामी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n सड़क पर चक्का जाम करेंगे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
समाधान की तत्काल आवश्यकता
\r\n\r\nबिजनौर के दयालवाला गांव की यह तस्वीर राज्य के पंचायती राज व्यवस्था की कलई खोलने के लिए काफी है। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल संज्ञान ले। केवल कागजों पर स्वच्छता अभियान चलाने से गांव साफ नहीं होंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जरूरत है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n जिलाधिकारी (DM) बिजनौर इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करें।\r\n \r\n
- \r\n ग्राम प्रधान के वित्तीय रिकॉर्ड्स और विकास कार्यों की जांच हो।\r\n \r\n
- \r\n तत्काल प्रभाव से पंप लगाकर पानी निकाला जाए और सड़क निर्माण शुरू हो।\r\n \r\n
\r\n\r\n
जब तक यह नहीं होता, तब तक दयालवाला के निवासी उस 'तालाब' को पार करने के लिए मजबूर रहेंगे, जो कभी उनका 'रास्ता' हुआ करता था। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इन महिलाओं की आवाज को अनसुना करता है या फिर अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.