बिजनौर/बरेली: उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) का ध्येय वाक्य 'सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा' है। पुलिस का काम समाज में शांति व्यवस्था कायम करना और अफवाहों को रोकना होता है। लेकिन क्या हो जब वर्दी पहनने वाला एक सिपाही ही अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए एक ऐसी झूठी और संवेदनशील साजिश रच दे, जिससे न केवल दो पक्षों बल्कि पूरे इलाके का माहौल खराब हो सकता था?READ ALSO:-मेरठ में बिजली संकट की आहट: 168 संविदा कर्मचारियों की छंटनी पर भड़का आक्रोश, विक्टोरिया पार्क पर जोरदार प्रदर्शन; '8 घंटे ही करेंगे काम, नहीं इस्तेमाल करेंगे अपना निजी मोबाइल'
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बिजनौर पुलिस महकमे में 28 मार्च 2026 की रात एक ऐसा ही शर्मनाक वाकया हुआ। हल्दौर थाने में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल ने 'डायल 112' (Dial 112) का दुरुपयोग करते हुए अपने गांव के एक विरोधी के घर में 'गौकशी' (गौहत्या) होने की झूठी सूचना दे दी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में गौकशी की सूचना किसी 'बारूद की ढेरी' पर चिंगारी फेंकने जैसी होती है। लेकिन बरेली पुलिस की त्वरित और निष्पक्ष जांच ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
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आइए, विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा घटनाक्रम कैसे शुरू हुआ, सिपाही की असली मंशा क्या थी और एसपी बिजनौर ने इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए क्या कड़ा संदेश दिया है।
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1. साजिश की रात: 28 मार्च 2026, समय रात 9:00 बजे
\r\n\r\nयह पूरा घटनाक्रम बिजनौर और बरेली, इन दो अलग-अलग जिलों से जुड़ा हुआ है। आरोपी सिपाही का नाम गुलाम मुर्तजा (पीएनओ नंबर/आरक्षी 998) है। वह मूल रूप से बरेली जिले के थाना शीशगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम 'बूची' का निवासी है और वर्तमान में उसकी तैनाती बिजनौर जिले के थाना हल्दौर में थी।
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डायल 112 पर वो सनसनीखेज कॉल: पुलिस रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिनांक 28 मार्च 2026 की रात लगभग 21:00 बजे (रात 9 बजे) उत्तर प्रदेश पुलिस के आपातकालीन नंबर 'डायल 112' पर एक कॉल आई।
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कॉल करने वाले ने बेहद गंभीर और सनसनीखेज दावा किया। उसने कंट्रोल रूम को बताया कि बरेली के शीशगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम बूची में एक व्यक्ति के घर के अंदर गौकशी (Cow Slaughter) की जा रही है और वहां गोवंशीय पशुओं को वध के लिए बांधकर रखा गया है।
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सूचना इतनी संवेदनशील थी कि डायल 112 के कंट्रोल रूम ने बिना एक पल गंवाए तुरंत बरेली के थाना शीशगढ़ की पुलिस को अलर्ट कर दिया।
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2. बरेली पुलिस का एक्शन और साजिश का पर्दाफाश
\r\n\r\nगौकशी की सूचना मिलते ही शीशगढ़ थाने की पुलिस फोर्स, पीआरवी (PRV) की गाड़ियां और स्थानीय अधिकारी तुरंत ग्राम बूची में बताए गए पते पर पहुंच गए। गांव में अचानक इतनी भारी पुलिस फोर्स देखकर हड़कंप मच गया।
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सर्च ऑपरेशन और हकीकत: पुलिस ने जिस घर की सूचना दी गई थी, वहां पूरी मुस्तैदी के साथ दबिश दी और सघन चेकिंग की। लेकिन पुलिस अधिकारियों के उस वक्त होश उड़ गए जब उन्हें मौके पर न तो कोई गोवंशीय पशु मिला, न वध करने के कोई औजार मिले और न ही ऐसा कोई कृत्य वहां हो रहा था।
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कॉल डिटेल से खुली पोल: जब पुलिस ने मौके पर पाया कि सूचना 100% असत्य और भ्रामक (Fake) है, तो उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर यह सनसनीखेज झूठी सूचना दी किसने थी? जब सर्विलांस और कंट्रोल रूम के जरिए उस नंबर और कॉलर की पहचान की गई, तो जो नाम सामने आया उसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया।
\r\n\r\nयह कॉल किसी और ने नहीं, बल्कि बिजनौर के हल्दौर थाने में तैनात खाकीधारी आरक्षी गुलाम मुर्तजा ने की थी।
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3. साजिश की असली वजह: गांव की राजनीति और निजी स्वार्थ
\r\n\r\nआखिर एक पुलिस वाले ने ऐसा दुस्साहस क्यों किया? इसका खुलासा प्रारंभिक विभागीय जांच में हुआ।
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राजनीतिक प्रतिस्पर्धा (Political Rivalry): प्रारंभिक जांच में यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आई कि सिपाही गुलाम मुर्तजा का अपने पैतृक गांव बूची में कुछ लोगों से राजनीतिक और निजी विवाद चल रहा था। गांव की प्रधानी, पंचायत चुनाव या आपसी वर्चस्व की इस लड़ाई में वह अपने विरोधियों को सबक सिखाना चाहता था।
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फंसाने की घिनौनी चाल: अपने रसूख और पुलिसिया जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए मुर्तजा ने सोचा कि अगर वह 'गौकशी' जैसी गंभीर धारा में अपने विरोधी को फंसा देगा, तो विरोधी न सिर्फ जेल चला जाएगा बल्कि समाज में भी उसकी बदनामी होगी। अपने इसी घिनौने और निजी स्वार्थ (Personal Vendetta) की पूर्ति के लिए उसने डायल 112 का बेजा इस्तेमाल किया और पुलिस तंत्र को गुमराह किया।
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उसने यह नहीं सोचा कि उसकी इस भ्रामक और सांप्रदायिक सूचना से गांव में दो गुटों के बीच दंगा या तनाव भी भड़क सकता था।
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4. एसपी बिजनौर का 'हंटर': तत्काल प्रभाव से निलंबन (Suspension)
\r\n\r\nबरेली पुलिस की जांच रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जब बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP Bijnor) महोदय के पास पहुंची, तो उन्होंने इस कृत्य को पुलिस नियमावली और अनुशासन का घोर उल्लंघन माना।
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एक रक्षक द्वारा ही सिस्टम को हैक करने और निर्दोष को फंसाने की इस साजिश पर एसपी बिजनौर ने कड़ा और त्वरित एक्शन लिया।
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आधिकारिक आदेश:
\r\n\r\nएसपी बिजनौर कार्यालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है:
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\r\n\r\n\r\n"आरक्षी 998 गुलाम मुर्तजा द्वारा भ्रामक एवं असत्य सूचना देकर पुलिस को गुमराह किया गया। जिस कारण आमजन में पुलिस विभाग की छवि धूमिल (Tarnished) हुई। अपने कर्तव्यों के प्रति इस घोर लापरवाही, उदासीनता व स्वेच्छाचारिता का परिचय दिए जाने के फलस्वरूप पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा आरक्षी गुलाम मुर्तजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया गया है।"\r\n
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सिपाही मुर्तजा को लाइन हाजिर करते हुए उसके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी बैठा दी गई है। अगर जांच में उस पर लगे आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त (Dismiss) भी किया जा सकता है।
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5. पुलिस फोर्स के लिए एसपी का सख्त अल्टीमेटम
\r\n\r\nइस घटना ने यह साबित कर दिया है कि महकमे में छिपे ऐसे इक्का-दुक्का लोग पूरी खाकी वर्दी को बदनाम कर देते हैं। इस घटना को एक नजीर (Example) बनाते हुए पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने जिले के सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक कड़ा दिशा-निर्देश और चेतावनी (Warning) जारी की है।
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एसपी का स्पष्ट संदेश:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"जनपद के समस्त पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारीगण यह भली-भांति जान लें कि ऐसा कोई भी कृत्य न करें जो विधि (कानून) के प्रतिकूल हो। यदि किसी भी पुलिसकर्मी का विधि के प्रतिकूल कृत्य या तथ्य संज्ञान में आता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी रियायत के कड़ी दण्डात्मक (Punitive) और विभागीय कार्यवाही की जाएगी।"\r\n
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एसपी ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की वर्दी किसी को भी अपने निजी दुश्मन निपटाने या कानून को अपने हाथ में लेने का लाइसेंस नहीं देती है।
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सिस्टम की सफाई जरूरी है
\r\n\r\nसिपाही गुलाम मुर्तजा का यह कृत्य इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब रक्षक ही कानून के साथ खिलवाड़ करने लगे, तो आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा कैसे डगमगा जाता है। झूठी एफआईआर दर्ज कराना या 112 नंबर का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष को फंसाना एक गंभीर अपराध है।
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यह बिजनौर और बरेली पुलिस की त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का ही नतीजा है कि एक बेगुनाह ग्रामीण जेल जाने से बच गया और एक भ्रष्ट सिपाही बेनकाब होकर सस्पेंड हो गया। समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि ऐसे 'वर्दी वाले अपराधियों' पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी अपनी शक्तियों का ऐसा दुरुपयोग करने की जुर्रत न कर सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.