रिपोर्ट: शकील अहमद | न्यूज़ डेस्क, बिजनौर
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शांति, कानून व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। माननीय उच्च न्यायालय (High Court) और उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी किए गए सख्त दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, बिजनौर पुलिस ने जिलेभर के धार्मिक स्थलों पर बजने वाले तेज आवाज के लाउडस्पीकरों (Loudspeakers) के खिलाफ एक व्यापक और निष्पक्ष अभियान चलाया है।READ ALSO:-मेरठ में बेखौफ बदमाश: पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की बंद मीट फैक्ट्री में हथियारों के बल पर धावा, गार्डों को बंधक बनाकर 4 घंटे तक मचाई लूट
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06 सितंबर 2026 तक प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस महा-अभियान के तहत पूरे जिले से कुल 2509 ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकरों) को धार्मिक स्थलों से सम्मानजनक तरीके से हटाया गया है या उनकी आवाज को तय मानकों के भीतर किया गया है। यह कार्रवाई आम जनमानस, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को तेज शोर से होने वाली परेशानियों से निजात दिलाने के लिए की गई है।
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कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा: बिना किसी भेदभाव के चला अभियान
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस की इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि इसे पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अंजाम दिया गया। पुलिस प्रशासन ने किसी एक विशेष धर्म या समुदाय को लक्षित करने के बजाय, कानून को सभी के लिए समान रूप से लागू किया है। जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पीस कमेटी (Peace Committee) की बैठकों और धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित करने के बाद यह कार्रवाई की गई।
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हटाए गए कुल 2509 लाउडस्पीकरों का विवरण इस प्रकार है:
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- \r\n मस्जिदों से कार्रवाई: जिलेभर की विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों से कुल 1323 लाउडस्पीकर हटाए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n मंदिरों से कार्रवाई: विभिन्न छोटे-बड़े मंदिरों और आश्रमों से कुल 1116 ध्वनि विस्तारक यंत्र उतारे गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n गुरुद्वारों से कार्रवाई: सिख समुदाय के धार्मिक स्थलों यानी गुरुद्वारों से कुल 70 लाउडस्पीकर हटाकर ध्वनि मानकों को लागू किया गया है।\r\n \r\n
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इस संतुलित कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि प्रशासन के लिए नियम और कानून सर्वोपरि हैं और ध्वनि प्रदूषण किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी धार्मिक स्थल से हो रहा हो।
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क्या कहते हैं ध्वनि प्रदूषण के नियम (Noise Pollution Rules)?
\r\n\r\nअक्सर लोगों में यह भ्रांति होती है कि वे अपने आयोजनों या धार्मिक स्थलों पर कितनी भी तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजा सकते हैं। लेकिन भारतीय कानून और 'ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम' स्पष्ट रूप से आवाज की सीमा तय करते हैं। बिजनौर पुलिस ने इस अभियान के दौरान आम जनता और धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों को इन नियमों के प्रति जागरूक भी किया।
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कानून के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के लिए ध्वनि की अधिकतम सीमा (Decibel Level) इस प्रकार निर्धारित की गई है:
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- \r\n आवासीय क्षेत्र (Residential Areas):\r\n\r\n
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- \r\n दिन के समय (सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक): अधिकतम 55 डेसीबल (dB)\r\n \r\n
- \r\n रात के समय (रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक): अधिकतम 45 डेसीबल (dB)\r\n \r\n
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- \r\n वाणिज्यिक क्षेत्र (Commercial Areas):\r\n\r\n
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- \r\n दिन के समय: अधिकतम 65 डेसीबल (dB)\r\n \r\n
- \r\n रात के समय: अधिकतम 55 डेसीबल (dB)\r\n \r\n
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- \r\n औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Areas):\r\n\r\n
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- \r\n दिन के समय: 75 डेसीबल\r\n \r\n
- \r\n रात के समय: 70 डेसीबल\r\n \r\n
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- \r\n शांत क्षेत्र (Silence Zones - अस्पताल, स्कूल, कोर्ट के आसपास):\r\n\r\n
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- \r\n दिन के समय: 50 डेसीबल\r\n \r\n
- \r\n रात के समय: 40 डेसीबल\r\n \r\n
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पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन तय डेसीबल मानकों का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और उपकरण जब्त कर लिए जाएंगे।
\r\n\r\nध्वनि प्रदूषण से होने वाले नुकसान और जनहित का मुद्दा
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यह कार्रवाई केवल न्यायालय के आदेश का पालन भर नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनहित और स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है।
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- \r\n छात्रों की पढ़ाई में बाधा: तेज आवाज के कारण बोर्ड परीक्षाओं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की एकाग्रता भंग होती है।\r\n \r\n
- \r\n मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी: अस्पतालों के आसपास या घरों में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हृदय रोगियों, रक्तचाप (Blood Pressure) के मरीजों और बुजुर्गों के लिए तेज शोर जानलेवा साबित हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n मानसिक तनाव: लगातार तेज आवाज में रहने से चिड़चिड़ापन, सुनने की क्षमता में कमी और अनिद्रा (Insomnia) जैसी गंभीर बीमारियां पनपती हैं।\r\n \r\n
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यही कारण है कि बिजनौर की आम जनता, विशेषकर प्रबुद्ध वर्ग और छात्रों ने पुलिस के इस कदम की भारी प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन के इस कदम से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी और शहर का माहौल बेहतर होगा।
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बिजनौर पुलिस की आमजन से अपील और शिकायत का तंत्र
\r\n\r\nइस सफल अभियान के बाद, बिजनौर पुलिस ने जिले के सभी नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों, डीजे संचालकों और आयोजनकर्ताओं से एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों, शादी-समारोहों या किसी भी प्रकार के सार्वजनिक कार्यक्रम में ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर/डीजे) का इस्तेमाल निर्धारित डेसीबल मानकों के अनुरूप ही करें। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आपके द्वारा बजाए जा रहे संगीत या माइक की आवाज आपके परिसर से बाहर जाकर किसी अन्य व्यक्ति के लिए सिरदर्द न बने।
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यहाँ दर्ज कराएं शिकायत: यदि जिले में किसी भी नागरिक को अपने आसपास तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर या डीजे से परेशानी हो रही है, या कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर रहा है, तो वह बेझिझक पुलिस से संपर्क कर सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
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- \r\n नागरिक सीधे अपने नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दे सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर यूपी-112 (UP-112) पर कॉल कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n या फिर सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर के सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर 9454400254 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\r\n \r\n
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बिजनौर पुलिस का यह एक्शन यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। धर्म और आस्था के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने की छूट अब किसी को नहीं दी जाएगी। प्रशासन का यह कदम न केवल ध्वनि प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि समाज में शांति और आपसी सद्भाव का एक नया वातावरण भी तैयार करेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.