धामपुर (बिजनौर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आम दिनचर्या का सफर मौत के सफर में तब्दील हो गया। धामपुर थाना क्षेत्र में मुख्य मार्ग से गुजर रहे एक 58 वर्षीय बाइक सवार के ऊपर अचानक एक विशालकाय पेड़ भरभरा कर गिर पड़ा। इस अप्रत्याशित हादसे में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए और अंततः अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं स्थानीय लोगों में सड़क किनारे खड़े खतरनाक पेड़ों की अनदेखी करने वाले संबंधित विभागों के खिलाफ भारी रोष देखने को मिल रहा है।READ ALSO:-दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को महा-तोहफा: 48 हजार करोड़ से बिछेगा मेट्रो का नया जाल, 7 नए रूट और 65 स्टेशनों से बदलेगी आउटर दिल्ली की तकदीर
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क्या है पूरा घटनाक्रम? सफर जो बन गया आखिरी

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प्राप्त पुलिस सूचना और स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना रविवार, 03 मई 2026 की है। धामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुहागपुर के रहने वाले 58 वर्षीय नरेश पुत्र बाबूराम किसी निजी काम के सिलसिले में अपनी मोटरसाइकिल से धामपुर शहर की ओर आ रहे थे। वह अपनी सामान्य गति से सड़क पर चल रहे थे और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मौत उनके रास्ते में घात लगाए बैठी है।
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जैसे ही नरेश धामपुर के भीड़भाड़ वाले इलाके आरएसएम तिराहा (RSM Tiraha) के पास पहुंचे, अचानक सड़क किनारे खड़ा एक पुराना और भारी-भरकम पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे उनकी चलती मोटरसाइकिल पर गिर गया। पेड़ का सबसे भारी हिस्सा सीधे नरेश के सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से पर लगा। पेड़ गिरने की गति और प्रहार इतना तेज था कि नरेश अपनी बाइक समेत सड़क पर बुरी तरह से गिर पड़े और उनके सिर से भारी मात्रा में खून बहने लगा। हेलमेट होने या न होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि वे मौके पर ही अचेत हो गए।
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चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़: सीएचसी में टूटा दम

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अचानक पेड़ गिरने और तेज धमाके की आवाज सुनकर आरएसएम तिराहा के पास मौजूद राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों में हड़कंप मच गया। लोग तुरंत नरेश की मदद के लिए दौड़े। भारी पेड़ की टहनियों के नीचे दबे लहूलुहान नरेश को देखकर लोगों ने बिना कोई समय गंवाए स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी।
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आसपास के लोगों की मदद से नरेश को पेड़ के नीचे से बाहर निकाला गया और उन्हें अत्यंत गंभीर अवस्था में धामपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC Dhampur) में भर्ती कराया गया। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया और उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन सिर में आई गंभीर अंदरूनी चोटों (Severe Head Trauma) और अत्यधिक खून बह जाने के कारण, इलाज के दौरान ही नरेश ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अस्पताल परिसर का माहौल बेहद गमगीन हो गया।
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पुलिस की त्वरित कार्रवाई: पंचायतनामा और विधिक प्रक्रिया शुरू

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घटना की सूचना मिलते ही धामपुर थाने की पुलिस फोर्स तुरंत घटनास्थल और फिर सीएचसी धामपुर पहुंच गई। पुलिस ने सबसे पहले शव को अपने कब्जे में लिया और मृतक के पास से मिले दस्तावेजों/मोबाइल के आधार पर उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी।
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, "दिनांक 03.05.2026 को थाना धामपुर पर सूचना प्राप्त हुई थी कि सुहागपुर निवासी नरेश सड़क दुर्घटना के शिकार हुए हैं। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई है। पुलिस टीम द्वारा नियमानुसार शव का पंचायतनामा (Inquest) भरने की कार्यवाही की जा रही है। इसके पश्चात शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बिजनौर भेजा जाएगा। मामले में अग्रिम विधिक कार्यवाही (Legal Proceedings) प्रचलित है।" पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि घटनास्थल (आरएसएम तिराहा) से पेड़ की टहनियों को हटाकर यातायात सुचारू कर दिया गया है और मौके पर पूरी तरह से शांति व्यवस्था कायम है।
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ग्राम सुहागपुर में पसरा मातम: परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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जैसे ही नरेश की मौत की मनहूस खबर उनके पैतृक गांव सुहागपुर पहुंची, पूरे गांव में मातम का सन्नाटा पसर गया। परिवार के सदस्य जो कुछ देर पहले तक नरेश के सही-सलामत घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, वे इस खबर को सुनकर बदहवास हो गए। मृतक की पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों का कहना है कि नरेश एक बेहद सीधे और मिलनसार व्यक्ति थे और परिवार के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। इस अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को एक गहरे सदमे में धकेल दिया है। नरेश के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ जमा हो गई है।
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प्रशासनिक लापरवाही पर उठते गंभीर सवाल: मौत के इंतजार में खड़े सूखे पेड़?

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यह घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं है, बल्कि यह लोक निर्माण विभाग (PWD), वन विभाग (Forest Department) और स्थानीय नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। उत्तर प्रदेश के कई राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों के किनारे ऐसे सैकड़ों पुराने, सूखे और जर्जर पेड़ खड़े हैं, जो अंदर से पूरी तरह खोखले हो चुके हैं।
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बारिश के मौसम में या तेज आंधी चलने पर अक्सर ये पेड़ गिर जाते हैं, लेकिन आरएसएम तिराहा जैसी व्यस्त जगह पर सामान्य मौसम में पेड़ का गिरना यह दर्शाता है कि पेड़ की जड़ें पूरी तरह गल चुकी थीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों को सड़क किनारे खड़े ऐसे खतरनाक पेड़ों को काटने या छांटने के लिए प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन प्रशासन तब तक नहीं जागता जब तक कि कोई जान न चली जाए।
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क्षेत्रीय लोगों की प्रमुख मांगें:

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    मुआवजे की मांग: ग्रामीणों और परिजनों की मांग है कि चूंकि यह हादसा पूरी तरह से प्राकृतिक न होकर प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है, इसलिए मुख्यमंत्री राहत कोष से पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
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    खतरनाक पेड़ों का सर्वे: वन विभाग और पीडब्ल्यूडी संयुक्त रूप से एक अभियान चलाकर जिले भर में सड़क किनारे खड़े उन सभी सूखे और खतरनाक पेड़ों का सर्वे करें और उन्हें तुरंत हटाएं ताकि भविष्य में किसी और 'नरेश' को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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    यातायात सुरक्षा ऑडिट: क्षेत्रीय सड़कों का सेफ्टी ऑडिट हो, ताकि मानसून से पहले ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
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बिजनौर के धामपुर में हुआ यह सड़क हादसा इस बात की दर्दनाक याद दिलाता है कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव में थोड़ी सी भी चूक किसी के लिए मौत का फरमान बन सकती है। एक परिवार ने अपना मुखिया खो दिया है, जिसकी भरपाई कोई व्यवस्था नहीं कर सकती। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन नींद से जागता है और जिले के अन्य हिस्सों में मंडरा रहे ऐसे ही खतरों को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी कुछ दिनों के शोर के बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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