भारतीय न्याय प्रणाली में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और आम जनता को त्वरित, सुलभ व सस्ता न्याय दिलाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय लोक अदालत' (National Lok Adalat) का आयोजन एक संजीवनी के समान है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में आगामी 12 सितंबर, 2026 को एक विशाल और भव्य राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस महा-आयोजन को सफल बनाने और अधिक से अधिक लोगों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए बिजनौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है।READ ALSO:-बिजनौर में अब नहीं खैर! नवागत SP कृष्णकुमार विश्नोई ने संभाला चार्ज, कहा- 'अपराधियों पर होगा जीरो टॉलरेंस'
\r\n\r\n\r\n\r\n
सोमवार, 24 अगस्त 2026 को जिला जजी परिसर स्थित ए०डी०आर० (ADR) भवन में मैराथन बैठकों का दौर चला, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों, बैंक प्रबंधकों और न्यायिक अधिकारियों के साथ रणनीति तय की गई। अब तक 82,000 से अधिक वादों (मुकदमों) को निस्तारण के लिए चिन्हित कर लिया गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
\r\n\r\n 
मार्गदर्शन और अध्यक्षता: शीर्ष अधिकारियों की देखरेख में रूपरेखा तैयार
\r\n\r\nइस वृहद आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मा० राष्ट्रीय एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सख्त दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (बिजनौर), श्री संजय कुमार सप्तम के कुशल मार्गदर्शन में पूरी कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी क्रम में 24 अगस्त की शाम 03:30 बजे ए०डी०आर० भवन के सभागार में एक अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल ऑफिसर और अपर जनपद न्यायाधीश श्री लोकेश नागर ने की। वहीं, पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, श्रीमती स्वाति चन्द्रा द्वारा किया गया।
\r\n\r\n 
इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के नोडल अधिकारी और जिले के प्रमुख बैंकों के प्रबंधकगण उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी 12 सितंबर को होने वाली लोक अदालत के लिए अधिक से अधिक मामलों को छांटना और जनता के बीच इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आंकड़ों की जुबानी: 82 हज़ार से अधिक मामलों का होगा समाधान
\r\n\r\nलोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इसमें वर्षों से लंबित पड़े छोटे-मोटे विवाद आपसी सुलह-समझौते के आधार पर एक ही दिन में खत्म हो जाते हैं। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों ने अपने-अपने चिन्हित वादों का जो आंकड़ा पेश किया, वह उत्साहजनक है:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n राजस्व विभाग (Revenue Department): उप-जिलाधिकारी बिजनौर ने बैठक में अवगत कराया कि राजस्व विभाग से जुड़े जमीनी और अन्य विवादों के कुल 59,812 वादों को अब तक चिन्हित किया गया है। किसानों और ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है।\r\n \r\n
- \r\n बैंक वसूली (Bank Recovery Cases): जिले के अग्रणी बैंक प्रबंधक द्वारा जानकारी दी गई कि विभिन्न बैंकों से कर्ज वसूली और अन्य वित्तीय विवादों से जुड़े लगभग 22,000 मामलों को लोक अदालत में निस्तारण के लिए रखा जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n दूरसंचार विभाग (Telecom Department): बीएसएनएल और अन्य दूरसंचार कंपनियों के बिल व सेवा संबंधी कुल 800 वादों को भी सुलह के लिए चिन्हित किया गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन आंकड़ों को देखकर यह स्पष्ट है कि 12 सितंबर का दिन बिजनौर के हजारों परिवारों के लिए कानूनी विवादों से आजादी का दिन साबित होगा।
\r\n\r\nसुविधाओं का रखा जाएगा पूरा ध्यान: प्रशासन को कड़े निर्देश
\r\n\r\nचूंकि लोक अदालत वाले दिन जजी परिसर में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, इसलिए नोडल ऑफिसर श्री लोकेश नागर ने जनता की सुविधाओं को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n स्वास्थ्य सुविधाएं: उप-मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), बिजनौर को निर्देशित किया गया है कि वे लोक अदालत के दिन पक्षकारों और आम जनता के लिए उचित मेडिकल कैंप और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करें।\r\n \r\n
- \r\n मूलभूत व्यवस्थाएं: उप-जिलाधिकारी (SDM) को निर्देश दिए गए हैं कि वे जजी परिसर में पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखें ताकि दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को कोई परेशानी न हो।\r\n \r\n
\r\n\r\n
न्यायिक अधिकारियों के साथ दूसरी अहम बैठक
\r\n\r\nशाम 04:30 बजे, श्री लोकेश नागर (अपर जनपद न्यायाधीश) की ही अध्यक्षता में न्यायिक अधिकारियों के साथ दूसरी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसका संचालन भी सचिव श्रीमती स्वाति चन्द्रा ने किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस बैठक में जिले के सभी सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। अधिकारियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित ऐसे मुकदमों की पहचान करें जिन्हें लोक अदालत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश: नोडल अधिकारी ने जोर देकर कहा कि जिन मुकदमों को चिन्हित किया गया है, उनके पक्षकारों तक नोटिस की तामीला कम से कम दो बार अवश्य कराई जाए। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी पक्षकार जानकारी के अभाव में लोक अदालत के लाभ से वंचित न रह जाए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
12 सितंबर की लोक अदालत में किन मामलों का होगा निपटारा?
\r\n\r\nअगर आपका भी कोई मुकदमा कोर्ट में लंबित है, तो आप इस राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठा सकते हैं। आगामी लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकृति के मामलों का निस्तारण किया जाएगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n शमनीय आपराधिक वाद (Compoundable Criminal Cases): ऐसे छोटे आपराधिक मामले जिनमें कानून आपसी सुलह की इजाजत देता है (जैसे मारपीट, गाली-गलौज के सामान्य मामले)।\r\n \r\n
- \r\n धारा 138 एन०आई० एक्ट (Cheque Bounce): चेक बाउंस होने से जुड़े विवाद।\r\n \r\n
- \r\n मोटर एक्सीडेंट क्लेम (MACP): सड़क दुर्घटना में मुआवजे से संबंधित दावे।\r\n \r\n
- \r\n श्रम वाद (Labour Disputes): मजदूरों और नियोक्ताओं के बीच के विवाद।\r\n \r\n
- \r\n बैंक वसूली (Bank Recovery): लोन डिफॉल्ट या क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले।\r\n \r\n
- \r\n विद्युत अधिनियम (Electricity Act Cases): बिजली चोरी या बिल विवाद (शमनीय मामले)।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व और सिविल वाद: जमीन, बंटवारे, या दीवानी के सामान्य मामले।\r\n \r\n
- \r\n मोटर वाहन ई-चालान: ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गए ई-चालान का भुगतान और निपटारा।\r\n \r\n
- \r\n लघु आपराधिक वाद: चालानी रिपोर्ट, नगर पालिका के चालान आदि।\r\n \r\n
- \r\n पारिवारिक वाद (Pre-Litigation): पति-पत्नी के विवाद या घरेलू झगड़े जो अभी कोर्ट में नहीं गए हैं, उन्हें 'प्री-लिटिगेशन' (मुकदमा पूर्व) स्तर पर ही काउंसलिंग के जरिए सुलझाया जाएगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
आम जनता के लिए अपील (लोक अदालत के फायदे)
\r\n\r\nराष्ट्रीय लोक अदालत न्याय पाने का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n इसमें किसी भी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती है।\r\n \r\n
- \r\n यदि कोई पुराना लंबित मुकदमा लोक अदालत में खत्म होता है, तो जमा की गई कोर्ट फीस वापस (Refund) कर दी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n इसमें सुनाया गया फैसला अंतिम होता है और इसकी कहीं कोई अपील नहीं होती, जिससे सालों-साल चलने वाली कानूनी लड़ाई हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n सबसे बड़ी बात, इसमें दोनों पक्षों की जीत होती है, किसी की हार नहीं होती क्योंकि फैसला आपसी रजामंदी से होता है, जिससे आपसी भाईचारा बना रहता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बिजनौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे आगामी 12 सितंबर, 2026 को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर धन और समय दोनों की बचत करें। अधिक जानकारी के लिए पक्षकार अपने संबंधित न्यायालय या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
भारतीय न्याय प्रणाली में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और आम जनता को त्वरित, सुलभ व सस्ता न्याय दिलाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय लोक अदालत' (National Lok Adalat) का आयोजन एक संजीवनी के समान है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में आगामी 12 सितंबर, 2026 को एक विशाल और भव्य राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस महा-आयोजन को सफल बनाने और अधिक से अधिक लोगों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए बिजनौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सोमवार, 24 अगस्त 2026 को जिला जजी परिसर स्थित ए०डी०आर० (ADR) भवन में मैराथन बैठकों का दौर चला, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों, बैंक प्रबंधकों और न्यायिक अधिकारियों के साथ रणनीति तय की गई। अब तक 82,000 से अधिक वादों (मुकदमों) को निस्तारण के लिए चिन्हित कर लिया गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मार्गदर्शन और अध्यक्षता: शीर्ष अधिकारियों की देखरेख में रूपरेखा तैयार
\r\n\r\nइस वृहद आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मा० राष्ट्रीय एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सख्त दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (बिजनौर), श्री संजय कुमार सप्तम के कुशल मार्गदर्शन में पूरी कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी क्रम में 24 अगस्त की शाम 03:30 बजे ए०डी०आर० भवन के सभागार में एक अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल ऑफिसर और अपर जनपद न्यायाधीश श्री लोकेश नागर ने की। वहीं, पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, श्रीमती स्वाति चन्द्रा द्वारा किया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के नोडल अधिकारी और जिले के प्रमुख बैंकों के प्रबंधकगण उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी 12 सितंबर को होने वाली लोक अदालत के लिए अधिक से अधिक मामलों को छांटना और जनता के बीच इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आंकड़ों की जुबानी: 82 हज़ार से अधिक मामलों का होगा समाधान
\r\n\r\nलोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इसमें वर्षों से लंबित पड़े छोटे-मोटे विवाद आपसी सुलह-समझौते के आधार पर एक ही दिन में खत्म हो जाते हैं। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों ने अपने-अपने चिन्हित वादों का जो आंकड़ा पेश किया, वह उत्साहजनक है:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n राजस्व विभाग (Revenue Department): उप-जिलाधिकारी बिजनौर ने बैठक में अवगत कराया कि राजस्व विभाग से जुड़े जमीनी और अन्य विवादों के कुल 59,812 वादों को अब तक चिन्हित किया गया है। किसानों और ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है।\r\n \r\n
- \r\n बैंक वसूली (Bank Recovery Cases): जिले के अग्रणी बैंक प्रबंधक द्वारा जानकारी दी गई कि विभिन्न बैंकों से कर्ज वसूली और अन्य वित्तीय विवादों से जुड़े लगभग 22,000 मामलों को लोक अदालत में निस्तारण के लिए रखा जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n दूरसंचार विभाग (Telecom Department): बीएसएनएल और अन्य दूरसंचार कंपनियों के बिल व सेवा संबंधी कुल 800 वादों को भी सुलह के लिए चिन्हित किया गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन आंकड़ों को देखकर यह स्पष्ट है कि 12 सितंबर का दिन बिजनौर के हजारों परिवारों के लिए कानूनी विवादों से आजादी का दिन साबित होगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सुविधाओं का रखा जाएगा पूरा ध्यान: प्रशासन को कड़े निर्देश
\r\n\r\nचूंकि लोक अदालत वाले दिन जजी परिसर में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, इसलिए नोडल ऑफिसर श्री लोकेश नागर ने जनता की सुविधाओं को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n स्वास्थ्य सुविधाएं: उप-मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), बिजनौर को निर्देशित किया गया है कि वे लोक अदालत के दिन पक्षकारों और आम जनता के लिए उचित मेडिकल कैंप और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करें।\r\n \r\n
- \r\n मूलभूत व्यवस्थाएं: उप-जिलाधिकारी (SDM) को निर्देश दिए गए हैं कि वे जजी परिसर में पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखें ताकि दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को कोई परेशानी न हो।\r\n \r\n
\r\n\r\n
न्यायिक अधिकारियों के साथ दूसरी अहम बैठक
\r\n\r\nशाम 04:30 बजे, श्री लोकेश नागर (अपर जनपद न्यायाधीश) की ही अध्यक्षता में न्यायिक अधिकारियों के साथ दूसरी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसका संचालन भी सचिव श्रीमती स्वाति चन्द्रा ने किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस बैठक में जिले के सभी सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। अधिकारियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित ऐसे मुकदमों की पहचान करें जिन्हें लोक अदालत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश: नोडल अधिकारी ने जोर देकर कहा कि जिन मुकदमों को चिन्हित किया गया है, उनके पक्षकारों तक नोटिस की तामीला कम से कम दो बार अवश्य कराई जाए। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी पक्षकार जानकारी के अभाव में लोक अदालत के लाभ से वंचित न रह जाए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
12 सितंबर की लोक अदालत में किन मामलों का होगा निपटारा?
\r\n\r\nअगर आपका भी कोई मुकदमा कोर्ट में लंबित है, तो आप इस राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठा सकते हैं। आगामी लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकृति के मामलों का निस्तारण किया जाएगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n शमनीय आपराधिक वाद (Compoundable Criminal Cases): ऐसे छोटे आपराधिक मामले जिनमें कानून आपसी सुलह की इजाजत देता है (जैसे मारपीट, गाली-गलौज के सामान्य मामले)।\r\n \r\n
- \r\n धारा 138 एन०आई० एक्ट (Cheque Bounce): चेक बाउंस होने से जुड़े विवाद।\r\n \r\n
- \r\n मोटर एक्सीडेंट क्लेम (MACP): सड़क दुर्घटना में मुआवजे से संबंधित दावे।\r\n \r\n
- \r\n श्रम वाद (Labour Disputes): मजदूरों और नियोक्ताओं के बीच के विवाद।\r\n \r\n
- \r\n बैंक वसूली (Bank Recovery): लोन डिफॉल्ट या क्रेडिट कार्ड के बकाए के मामले।\r\n \r\n
- \r\n विद्युत अधिनियम (Electricity Act Cases): बिजली चोरी या बिल विवाद (शमनीय मामले)।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व और सिविल वाद: जमीन, बंटवारे, या दीवानी के सामान्य मामले।\r\n \r\n
- \r\n मोटर वाहन ई-चालान: ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गए ई-चालान का भुगतान और निपटारा।\r\n \r\n
- \r\n लघु आपराधिक वाद: चालानी रिपोर्ट, नगर पालिका के चालान आदि।\r\n \r\n
- \r\n पारिवारिक वाद (Pre-Litigation): पति-पत्नी के विवाद या घरेलू झगड़े जो अभी कोर्ट में नहीं गए हैं, उन्हें 'प्री-लिटिगेशन' (मुकदमा पूर्व) स्तर पर ही काउंसलिंग के जरिए सुलझाया जाएगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
आम जनता के लिए अपील (लोक अदालत के फायदे)
\r\n\r\nराष्ट्रीय लोक अदालत न्याय पाने का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n इसमें किसी भी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती है।\r\n \r\n
- \r\n यदि कोई पुराना लंबित मुकदमा लोक अदालत में खत्म होता है, तो जमा की गई कोर्ट फीस वापस (Refund) कर दी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n इसमें सुनाया गया फैसला अंतिम होता है और इसकी कहीं कोई अपील नहीं होती, जिससे सालों-साल चलने वाली कानूनी लड़ाई हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n सबसे बड़ी बात, इसमें दोनों पक्षों की जीत होती है, किसी की हार नहीं होती क्योंकि फैसला आपसी रजामंदी से होता है, जिससे आपसी भाईचारा बना रहता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बिजनौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे आगामी 12 सितंबर, 2026 को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर धन और समय दोनों की बचत करें। अधिक जानकारी के लिए पक्षकार अपने संबंधित न्यायालय या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Sabse pehle comment karne wale banein.