भारत वर्ष त्योहारों का देश है, और यहाँ हर त्योहार की अपनी एक अलग छटा होती है। लेकिन इन त्योहारों की असली खूबसूरती तब और निखर कर सामने आती है, जब इनमें धर्म और संप्रदाय की दीवारें गिर जाती हैं और केवल इंसानियत का रंग बाकी रहता है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से होली के पावन पर्व पर एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और समाज को एक बड़ा संदेश देने वाली खबर सामने आई है।Read also:-मिडिल ईस्ट युद्ध की लपटें पहुंची भारतीय रसोई तक, होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने से LPG और तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा
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होली, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत और रंगों के उत्सव के रूप में जाना जाता है, बिजनौर के अफजलगढ़ में एक नए ही रूप में मनाई गई। यहाँ रंग तो उड़े, लेकिन वे केवल गुलाल के नहीं थे, बल्कि वे रंग थे मुहब्बत के, भाईचारे के और उस 'गंगा-जमुनी तहजीब' के जिसके लिए उत्तर प्रदेश पूरे देश में जाना जाता है। थाना अफजलगढ़ क्षेत्र के मोहल्ला बेगम सराय में मुस्लिम समाज के लोगों ने होली खेल रहे हिंदू भाइयों (हुलियारों) का जिस गर्मजोशी और प्यार से स्वागत किया, उसने पूरे जिले में एक मिसाल कायम कर दी है।
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मोहल्ला बेगम सराय: जहाँ फूलों से हुआ हुलियारों का स्वागत
\r\n\r\nघटना बिजनौर जिले के थाना अफजलगढ़ के अंतर्गत आने वाले मोहल्ला बेगम सराय की है। होली के दिन सुबह से ही पूरे मोहल्ले में हर्षोल्लास का माहौल था। ढोल-नगाड़ों की थाप पर हुलियारों की टोली रंग-गुलाल उड़ाते हुए और फाग गाते हुए मोहल्ले से गुजर रही थी। हुलियारों के चेहरे रंगों से पटे हुए थे और हर कोई 'होली है' के नारों से आसमान गुंजायमान कर रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 यूपी के बिजनौर (थाना अफजलगढ़) से सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल। मोहल्ला बेगम सराय में कलवा कुरैशी और मुस्लिम युवाओं ने होली के हुलियारों पर पुष्प वर्षा कर एकता का संदेश दिया। pic.twitter.com/KYeVv2apeG
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) March 5, 2026
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आमतौर पर मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में त्योहारों के दौरान पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है, लेकिन बेगम सराय का नज़ारा पुलिस और प्रशासन के लिए भी सुकून देने वाला था। जब हुलियारों की यह टोली मुस्लिम बहुल इलाके से गुजरी, तो छतों और रास्तों पर खड़े मुस्लिम समाज के युवाओं ने अपने हाथों में फूलों की टोकरियां ले रखी थीं। जैसे ही टोली उनके करीब आई, मुस्लिम युवाओं ने उन पर गुलाब और गेंदे के फूलों की भारी बारिश शुरू कर दी। अचानक हुई इस पुष्प वर्षा से हुलियारे भी एक पल के लिए हैरान रह गए और फिर खुशी से झूम उठे।
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कलवा कुरैशी: भाईचारे के इस अनोखे जश्न के सूत्रधार
\r\n\r\nइस पूरी पहल के पीछे मोहल्ले के ही एक जागरूक और सम्मानित नागरिक, कलवा कुरैशी और उनके युवा साथियों की अहम भूमिका रही। कलवा कुरैशी ने महसूस किया कि आज के समय में जब समाज में कई बार छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो जाता है, ऐसे में त्योहार ही वह मौका होते हैं जब दिलों की दूरियों को मिटाया जा सकता है।
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उन्होंने मोहल्ले के अन्य मुस्लिम युवकों को इकट्ठा किया और होली के जुलूस का स्वागत करने की योजना बनाई। कलवा कुरैशी का मानना है कि हमारे पूर्वजों ने हमेशा हमें मिल-जुलकर रहना सिखाया है। उन्होंने मीडिया और स्थानीय लोगों से बात करते हुए बताया, "त्योहार किसी एक मजहब के नहीं होते। जब हमारे हिंदू भाई हमारे त्योहारों में शामिल होते हैं और हमें बधाइयां देते हैं, तो यह हमारा भी फर्ज बनता है कि हम उनकी खुशियों में शरीक हों। होली रंगों का त्योहार है, और हमने इसमें अपने प्यार के फूल मिलाकर इसे और भी खूबसूरत बनाने की एक छोटी सी कोशिश की है।"
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कलवा कुरैशी के साथ मोहल्ले के कई अन्य मुस्लिम युवकों ने पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने हुलियारों को रोककर उन्हें गले लगाया, होली की शुभकामनाएं दीं और गुझिया व मिठाइयां भी खिलाईं।
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गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश की संस्कृति में 'गंगा-जमुनी तहजीब' का एक विशेष स्थान है। यह शब्द उस मिली-जुली संस्कृति को दर्शाता है जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय सदियों से शांति, सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान के साथ रहते आए हैं। बिजनौर की इस घटना ने इस तहजीब को केवल कागजों या भाषणों से निकालकर हकीकत में जमीन पर उतार दिया है।
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जब मुस्लिम युवकों द्वारा हुलियारों पर फूल बरसाए जा रहे थे, तो दोनों समुदायों के लोगों की आंखों में एक अलग ही चमक थी। हुलियारों ने भी मुस्लिम भाइयों को गले लगाकर उन्हें रंगों के इस त्योहार की बधाई दी। कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो धर्म की सारी सीमाएं मिट गई हों और केवल 'इंसानियत' ही एकमात्र धर्म रह गया हो। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद कई बुजुर्गों की आंखें छलक आईं, क्योंकि उन्हें अपना वह पुराना दौर याद आ गया जब गांव-कस्बों में हर त्योहार इसी तरह साझा रूप से मनाया जाता था।
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वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में इस घटना का महत्व
\r\n\r\nआज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में, जहाँ कई बार नकारात्मक खबरें और भ्रामक जानकारियां समाज में तेजी से फैलती हैं और सांप्रदायिक तनाव का कारण बनती हैं, बिजनौर की यह खबर किसी ठंडी हवा के झोंके से कम नहीं है। यह घटना साबित करती है कि ग्राउंड जीरो पर, आम हिंदुस्तानी आज भी नफरत से ज्यादा मुहब्बत को तरजीह देता है।
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कलवा कुरैशी जैसे लोग समाज के असली हीरो हैं। वे किसी बड़े मंच से भाषण नहीं देते, बल्कि अपने छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली कार्यों से समाज को दिशा दिखाते हैं। इस पुष्प वर्षा ने उन सभी ताकतों को एक करारा जवाब दिया है जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत की आत्मा उसके बहुलवाद (Pluralism) और अनेकता में एकता में बसती है।
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पुलिस और प्रशासन ने भी ली राहत की सांस
\r\n\r\nत्योहारों के सीजन में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस को दिन-रात गश्त करनी पड़ती है। लेकिन जब समाज के लोग खुद आगे आकर शांति और सौहार्द की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लेते हैं, तो प्रशासन का काम आधा रह जाता है।
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थाना अफजलगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने भी मोहल्ला बेगम सराय के लोगों की इस पहल की सराहना की है। जब दोनों समुदाय एक-दूसरे की मान्यताओं और खुशियों का सम्मान करते हैं, तो वहां विवाद की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि जिले के अन्य हिस्सों और राज्य के बाकी शहरों को भी बिजनौर के इस छोटे से मोहल्ले से सीख लेनी चाहिए।
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बिजनौर का ऐतिहासिक सौहार्द
\r\n\r\nबिजनौर जिला, जो कि गंगा नदी के किनारे बसा है, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस जिले ने हमेशा से साहित्यकारों, कवियों और विचारकों को जन्म दिया है जिन्होंने सूफीवाद और भक्ति आंदोलन की परंपराओं को आगे बढ़ाया। बिजनौर के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, एक साथ उठने-बैठने, सुख-दुख साझा करने की एक लंबी परंपरा रही है।
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अफजलगढ़ में हुई यह घटना कोई अचानक हुई चीज नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही उसी परंपरा का विस्तार है। जब कलवा कुरैशी और उनके साथियों ने हुलियारों का स्वागत किया, तो वे असल में अपने बुजुर्गों द्वारा दी गई उसी तालीम को आगे बढ़ा रहे थे जो उन्हें अपने पड़ोसियों से प्यार करना सिखाती है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
\r\n\r\nजैसे ही इस खूबसूरत वाकये की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आए, वे तेजी से वायरल होने लगे। फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर लोग बिजनौर की इस घटना की जमकर तारीफ कर रहे हैं। न केवल बिजनौर, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग इस खबर को साझा कर रहे हैं।
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नेटिजन्स का कहना है कि "यही असली भारत है।" कई लोगों ने कलवा कुरैशी और उनके दोस्तों को टैग करते हुए उनके इस कदम को सलाम किया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, "जब नफरत की खबरें हमें निराश करती हैं, तब बिजनौर के अफजलगढ़ से आई ये तस्वीरें हमारे अंदर इंसानियत के प्रति विश्वास को फिर से जगा देती हैं।"
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होली का असली संदेश: नफरत की होलिका जलाना
\r\n\r\nहोली का त्योहार मूल रूप से होलिका दहन से शुरू होता है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है। अगली सुबह रंगों से खेलकर खुशियां मनाई जाती हैं। लेकिन वास्तव में, होली का सही अर्थ अपने मन के अंदर छुपे हुए ईर्ष्या, द्वेष और नफरत के भाव को जलाना है।
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जब अफजलगढ़ के मुस्लिम युवाओं ने हुलियारों पर फूल बरसाए, तो उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से सांप्रदायिकता और दूरियों की होलिका को जलाकर राख कर दिया। उन्होंने दिखाया कि असली त्योहार तब मनाया जाता है जब आप अपने दिल के दरवाजे सभी के लिए खोल देते हैं।
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देश के अन्य हिस्सों के लिए एक नजीर
\r\n\r\nभारत एक विशाल देश है, जहाँ हर कोस पर पानी और बानी बदल जाती है। हमारी ताकत हमारी विविधता है। बिजनौर की यह घटना देश के उन सभी हिस्सों के लिए एक नजीर (उदाहरण) बननी चाहिए जहाँ कभी-कभार सांप्रदायिक छिटपुट घटनाएं देखने को मिलती हैं।
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अगर हर शहर में कलवा कुरैशी जैसे कुछ युवा आगे आएं, जो यह समझें कि दूसरे समुदाय के त्योहार में शामिल होने से उनका अपना धर्म छोटा नहीं होता, बल्कि उनकी इंसानियत और बड़ी हो जाती है, तो देश की आधी से ज्यादा समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। अमन और भाईचारे का यह मॉडल केवल पुलिस के डंडे से नहीं, बल्कि समाज की चेतना से ही स्थापित किया जा सकता है।
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युवा पीढ़ी की सकारात्मक दिशा
\r\n\r\nइस घटना का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अक्सर भटकाव का शिकार होने वाली युवा पीढ़ी अगर नफरत की बजाय प्यार के रास्ते को चुनती है, तो यह देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। मुस्लिम युवाओं द्वारा उठाया गया यह कदम यह भी दर्शाता है कि नई पीढ़ी पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर एक आधुनिक, समावेशी और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
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एक खूबसूरत कल की ओर कदम
\r\n\r\nअंत में, थाना अफजलगढ़ के मोहल्ला बेगम सराय की यह घटना सिर्फ एक न्यूज़ रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह एक उम्मीद है। यह उम्मीद है कि तमाम राजनीतिक और सामाजिक उठापटक के बीच, हिंदुस्तान के आम अवाम के दिलों में एक-दूसरे के लिए जो जगह है, वह कभी खत्म नहीं होगी।
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कलवा कुरैशी और उनके दोस्तों ने जो फूल हुलियारों पर बरसाए हैं, उनकी महक बिजनौर की सीमाओं को पार करते हुए पूरे देश में फैलनी चाहिए। होली का यह त्योहार बिजनौर वासियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा, क्योंकि इस बार रंगों में गुलाल से ज्यादा भाईचारे की मिठास घुली थी। न्यूज़ पोर्टल्स और अखबारों को ऐसी खबरों को प्रमुखता से छापना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मकता का संचार हो सके और 'गंगा-जमुनी तहजीब' का यह कारवां यूं ही आगे बढ़ता रहे।
Sabse pehle comment karne wale banein.