बिजनौर (धामपुर): लालच इंसान को कितना अंधा और क्रूर बना सकता है, इसकी एक रूह कंपा देने वाली बानगी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में देखने को मिली है। पैसों की हवस ने रिश्तों और दोस्ती का कत्ल कर दिया। जनपद बिजनौर के धामपुर थाना क्षेत्र में पिछले एक महीने से अधिक समय से लापता चल रहे एक 38 वर्षीय व्यक्ति की गुमशुदगी का पुलिस ने बेहद खौफनाक और सनसनीखेज खुलासा किया है।Read also:-मेरठ के सेंट्रल मार्केट में महिलाओं का हल्ला बोल: आवास विकास की 'भेदभावपूर्ण' कार्रवाई के खिलाफ सड़क पर उतरीं माताएं-बहनें, प्रशासन को अल्टीमेटम
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जिस व्यक्ति को परिवार वाले जिंदा समझकर उसकी वापसी की बाट जोह रहे थे, दरिंदों ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पैसे हड़पने की नीयत से पहले तो युवक की गला घोंटकर हत्या की, और फिर अपने इस जघन्य अपराध को छिपाने के लिए उसके शव को पेट्रोल डालकर एक नहर के किनारे जला दिया। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए घटना के मुख्य सूत्रधार सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी निशानदेही पर मृतक का कंकाल व अन्य अहम साक्ष्य बरामद कर लिए हैं।
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कैसे शुरू हुई यह खौफनाक कहानी? (8 मार्च 2026)

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इस पूरी घटना की शुरुआत 8 मार्च 2026 को हुई थी। बिजनौर जिले के नूरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहल्ला हजरतनगर के निवासी अकबर अली के परिवार में उस दिन कोहराम मच गया, जब उनका 38 वर्षीय बेटा इसरार अहमद अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया।
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इसरार घर से कुछ काम के लिए निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आने लगा। काफी खोजबीन और रिश्तेदारों के यहां पूछताछ करने के बाद भी जब इसरार का कोई सुराग नहीं मिला, तो उसके बड़े भाई अफसर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। अफसर ने धामपुर थाने में अपने छोटे भाई की गुमशुदगी (Missing Person Report) की लिखित सूचना दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गुमशुदगी दर्ज कर जांच का पहिया घुमा दिया।
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गुमशुदगी से अपहरण तक: पुलिस की तफ्तीश में आया नया मोड़

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शुरुआती दौर में यह एक सामान्य गुमशुदगी का मामला लग रहा था, लेकिन धामपुर पुलिस ने जब इसरार के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स (CDR), उसकी आखिरी लोकेशन और उसके संपर्कों को खंगालना शुरू किया, तो कहानी कुछ और ही इशारा कर रही थी।
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पुलिस की गहन जांच और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इसरार अहमद अपनी मर्जी से कहीं नहीं गया है, बल्कि उसके ही एक करीबी परिचित आशु सिद्दीकी और उसके कुछ अन्य साथियों ने मिलकर इसरार का अपहरण (Kidnapping) कर लिया है। साक्ष्य हाथ लगते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और दर्ज गुमशुदगी के मामले को गंभीर धाराओं में तब्दील कर दिया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(1) BNS (अपहरण और बंधक बनाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया और आरोपियों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी गई।
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12 अप्रैल का दिन: मुखबिर की सटीक सूचना और आरोपियों की गिरफ्तारी

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जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, इसरार के परिवार की उम्मीदें टूट रही थीं। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही थीं। आखिरकार, पुलिस की यह मेहनत रंग लाई।
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12 अप्रैल 2026 को धामपुर पुलिस को अपने एक खास मुखबिर से एक बेहद अहम और सटीक सूचना मिली कि इसरार के अपहरण में शामिल संदिग्ध इलाके में ही कहीं छिपे हुए हैं और भागने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने जाल बिछाया और घेराबंदी करते हुए तीन संदिग्ध युवकों को धर दबोचा।
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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान: पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, पकड़े गए तीनों आरोपी शातिर किस्म के अपराधी हैं। उनके नाम और पते इस प्रकार हैं:
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    आशु उर्फ आकिब (पुत्र एजाज हुसैन) - निवासी ग्राम तिबड़ी। (यह इस घटना का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है)
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    शहनवाज अहमद उर्फ शानू (पुत्र अली हसन) - निवासी ग्राम तिबड़ी।
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    जाबिर (पुत्र अली हसन) - निवासी पाडली माण्डू।
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पूछताछ में खुला मौत का खौफनाक राज (कबूलनामा)

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गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर कड़ाई से (थर्ड डिग्री और मनोवैज्ञानिक दबाव के साथ) पूछताछ की, तो वे ज्यादा देर तक अपने झूठ पर टिक नहीं सके। उन्होंने पुलिस के सामने टूटते हुए अपना जुर्म कबूल कर लिया। उनका कबूलनामा इतना खौफनाक था कि सुनने वालों की रूह कांप गई।
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हत्या का कारण: पैसों का लालच आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने इसरार अहमद का अपहरण किसी रंजिश के चलते नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ उसके पैसे हड़पने के उद्देश्य से किया था। आरोपियों को पता था कि इसरार के पास अच्छी-खासी रकम है। इसी लालच में उन्होंने एक खौफनाक साजिश रची और इसरार को धोखे से अपने साथ ले गए।
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हत्या का तरीका: गला घोंटा और फिर पेट्रोल डालकर जलाया आरोपियों ने बताया कि पैसे लूटने के बाद उन्होंने इसरार को रास्ते से हटाने का फैसला किया ताकि कोई गवाह न बचे। उन्होंने बेहद ठंडे दिमाग से इसरार की रस्सी से गला घोंटकर (Strangulation) निर्मम हत्या कर दी।
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हत्या करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती शव को ठिकाने लगाने की थी। अपनी पहचान छिपाने, सबूत मिटाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने इसरार के शव को एक सुनसान इलाके में ले जाकर उस पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। आग की लपटों में इसरार का शरीर जलकर खाक हो गया, जिसके बाद उन्होंने अधजले शव को थाना नूरपुर क्षेत्र के दौलतपुर चौकी के पास एक नहर के किनारे झाड़ियों में फेंक दिया।
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पुलिस की बरामदगी: घटनास्थल से मिले खौफनाक साक्ष्य

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आरोपियों के इस खौफनाक इकबालिया बयान के बाद, पुलिस की एक फोरेंसिक टीम आरोपियों को लेकर उस स्थान पर पहुंची जहां उन्होंने शव को जलाकर फेंका था।
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पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर नूरपुर-मुरादाबाद मार्ग पर स्थित गोहावर दौलतपुर पोषक नहर के किनारे घनी झाड़ियों के बीच सघन तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया। इस तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ जो लगा, वह इस पूरी वारदात की क्रूरता को बयां कर रहा था।
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घटनास्थल से बरामद हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य:

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    कंकाल (Skeleton): पुलिस को झाड़ियों के बीच से मृतक इसरार अहमद का जला हुआ कंकाल बरामद हुआ है, जिसे डीएनए (DNA) जांच और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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    हत्या का हथियार: वह रस्सी जिससे इसरार का गला घोंटा गया था, और एक जरी केन (जिसमें संभवतः पेट्रोल लाया गया था)।
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    मृतक की पहचान: इसरार की चप्पल और उसके हाथ का ब्रेसलेट।
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    इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: मौके से 2 मोबाइल फोन (सैमसंग कंपनी के) भी बरामद किए गए हैं, जो मृतक या आरोपियों के हो सकते हैं। इन फोनों की साइबर सेल द्वारा जांच की जा रही है।
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आगे की कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने बढ़ाईं गंभीर धाराएं

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धामपुर पुलिस ने इस मामले को अब अपहरण से हत्या के मुकदमे में बदल दिया है। चूंकि आरोपियों ने हत्या करने के बाद सबूत नष्ट करने का गंभीर अपराध भी किया है, इसलिए पुलिस ने दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कठोर धाराओं की वृद्धि की है।
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    लागू की गई नई धाराएं: पुलिस ने मामले में 103(1) (हत्या), 3(5) (समान आशय से कई व्यक्तियों द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य), और 238 BNS (अपराध के साक्ष्य को मिटाना या झूठी जानकारी देना) की धाराएं जोड़ दी हैं।
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    न्यायिक हिरासत: कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों (आशु, शहनवाज और जाबिर) को भारी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया, जहां से माननीय न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है।
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समाज के लिए एक कड़ा सबक

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बिजनौर के धामपुर की यह घटना समाज के लिए एक बहुत बड़ा और कड़वा सबक है। यह इस बात का प्रमाण है कि पैसों की अंधी दौड़ में इंसानियत किस कदर दम तोड़ रही है। जिन लोगों पर इसरार ने भरोसा किया होगा, उन्हीं ने चंद रुपयों की खातिर उसकी जान ले ली। हालांकि, बिजनौर पुलिस की त्वरित और वैज्ञानिक जांच ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से सबूत मिटाने की कोशिश करें, कानून के लंबे हाथों से वे बच नहीं सकते। अब इसरार के परिवार को इंतजार है तो बस इस बात का कि अदालत इन हत्यारों को जल्द से जल्द उनके किए की कड़ी सजा दे।
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