बिजनौर/नहटौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इंसान और वन्यजीवों (Human-Wildlife Conflict) के बीच चल रहा संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई खूंखार जंगली जानवर रिहायशी इलाकों के इतने करीब आ जाए कि लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो जाए, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। बिजनौर के नहटौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सीकरी बुजुर्ग (Sikri Buzurg) और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से एक ऐसा ही खौफ पसरा हुआ था। यहां एक विशालकाय और आदमखोर प्रवृत्ति का गुलदार (Leopard/तेंदुआ) लगातार देखा जा रहा था।READ ALSO:-मेरठ में 'स्मार्ट मीटर' का बड़ा झटका: लखनऊ के एक आदेश से 3000 से ज्यादा घरों और दुकानों की बत्ती गुल, त्योहार से पहले अंधेरे में डूबे गंगानगर और आबूलेन के व्यापारी
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लेकिन, आज सुबह सीकरी बुजुर्ग गांव के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर लेकर आई। वन विभाग की एक सोची-समझी रणनीति और सटीक जाल बिछाने की वजह से यह खूंखार गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। बकरी का शिकार करने के लालच में यह गुलदार वन विभाग द्वारा आम के बाग में लगाए गए लोहे के पिंजरे में फंस गया। इसके पकड़े जाने के बाद पूरे इलाके के किसानों, महिलाओं और बच्चों ने राहत की एक बहुत बड़ी सांस ली है। आइए इस पूरे घटनाक्रम, वन विभाग के रेस्क्यू ऑपरेशन और बिजनौर में गुलदार के बढ़ते आतंक के कारणों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 यूपी के नहटौर (बिजनौर) के सीकरी बुजुर्ग गांव में बकरी का शिकार करने आया आदमखोर तेंदुआ पकड़ा गया। बिजनौर में गुलदार पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। pic.twitter.com/CIHrh4scT7
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) March 1, 2026
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1. दहशत के साये में था सीकरी बुजुर्ग और नहटौर का इलाका
\r\n\r\nनहटौर क्षेत्र का सीकरी बुजुर्ग गांव और इसके आसपास के इलाके मुख्य रूप से कृषि प्रधान हैं। यहां गन्ने और आम के बाग बहुतायत में हैं। पिछले एक पखवाड़े (15 दिनों) से गांव के बाहरी छोर और खेतों के आसपास इस गुलदार की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी।
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- \r\n खेतों में जाना हुआ था बंद: गन्ने के खेतों में काम करने वाले किसानों ने सबसे पहले इस गुलदार को देखा था। इसके बाद से गांव में दहशत का यह आलम था कि किसानों ने अकेले खेतों की सिंचाई करना या फसल काटना बंद कर दिया था। लोग समूह बनाकर, हाथों में लाठी-डंडे लेकर और शोर मचाते हुए खेतों की ओर जाते थे।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों और मवेशियों पर था सबसे बड़ा खतरा: गुलदार की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वह बहुत ही खामोशी से शिकार करता है। गांव वालों को सबसे ज्यादा डर अपने छोटे बच्चों और पालतू मवेशियों (गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते) का था। शाम ढलते ही गांव की गलियां सूनी हो जाती थीं और लोग अपने घरों के दरवाजे भीतर से बंद कर लेते थे।\r\n \r\n
- \r\n कई मवेशियों को बना चुका था निवाला: सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह गुलदार अब तक गांव के कई आवारा कुत्तों और एक-दो छोटे मवेशियों को अपना निवाला बना चुका था। खून मुंह लगने के कारण इसके 'आदमखोर' (Man-Eater) होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था।\r\n \r\n
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2. ग्रामीणों का फूटा गुस्सा और वन विभाग से की गई सख्त मांग
\r\n\r\nलगातार बढ़ती दहशत और रोज-रोज गुलदार के दिखाई देने (Sighting) के बाद सीकरी बुजुर्ग और आसपास के ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। जब स्थिति बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लामबंद हुए और उन्होंने स्थानीय प्रशासन तथा वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों से तुरंत कार्रवाई करने की गुहार लगाई।
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ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि अगर वन विभाग ने जल्द ही इस गुलदार को नहीं पकड़ा, तो यह किसी दिन किसी इंसान (खासकर बच्चों या महिलाओं) पर जानलेवा हमला कर सकता है। किसानों ने चेतावनी दी थी कि जब तक गुलदार पकड़ा नहीं जाता, वे खेतों में काम करने नहीं जाएंगे, जिससे उनकी फसलों का भारी नुकसान हो रहा था। ग्रामीणों के इस कड़े रुख और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर वन प्रभाग (Bijnor Forest Division) तुरंत हरकत में आया।
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3. ऑपरेशन 'गुलदार': आम के बाग में बिछाया गया जाल
\r\n\r\nवन विभाग की टीम ने मौके का मुआयना किया। विशेषज्ञों ने गुलदार के पगमार्क (पंजों के निशान) ट्रैक किए और उसकी आवाजाही का रूट (रूट मैप) तैयार किया। जांच में पाया गया कि गुलदार गन्ने के खेतों से निकलकर गांव के किनारे स्थित एक बड़े आम के बाग में शरण लेता है।
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पिंजरा लगाने की रणनीति: वन विभाग के रेंजर और उनकी टीम ने उसी आम के बाग को रेस्क्यू ऑपरेशन का केंद्र बनाया। वहां एक मजबूत लोहे का ट्रेंकुलाइजर-प्रूफ पिंजरा (Trap Cage) स्थापित किया गया।
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- \r\n बकरी का चारा (Bait): गुलदार को पिंजरे की ओर आकर्षित करने के लिए पिंजरे के एक सुरक्षित हिस्से में एक जिंदा बकरी को बांधा गया।\r\n \r\n
- \r\n कैमोफ्लाज (Camouflage): पिंजरे को प्राकृतिक रूप देने के लिए उसे टहनियों, पत्तों और झाड़ियों से अच्छी तरह से ढक दिया गया ताकि गुलदार को यह महसूस न हो कि यह कोई इंसानी जाल है।\r\n \r\n
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अधिकारी जानते थे कि गुलदार शिकार के लालच में रात के अंधेरे में जरूर बाहर निकलेगा। इसके बाद वन विभाग की टीम और ग्रामीण दूर से निगरानी करते रहे।
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4. वह रात जब पिंजरे में फंसा 'मौत का साया'
\r\n\r\nकल रात (बीती रात) इलाके में गजब की शांति थी। रात के किसी प्रहर में, अपनी फितरत के अनुसार, गुलदार गन्ने के खेतों से निकलकर आम के बाग में पहुंचा। बकरी की आवाज सुनकर वह सीधे पिंजरे की तरफ आकर्षित हुआ।
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- \r\n शिकार का प्रयास और कैद: जैसे ही गुलदार ने बकरी पर हमला करने के लिए पिंजरे के मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश किया और मांस (या बकरी) की तरफ झपट्टा मारा, पिंजरे का ऑटोमेटिक ट्रिगर दब गया। पलक झपकते ही लोहे का भारी भरकम दरवाजा नीचे गिर गया और कई दिनों से इलाके में खौफ का दूसरा नाम बन चुका यह खूंखार गुलदार पिंजरे के अंदर हमेशा के लिए कैद हो गया।\r\n \r\n
- \r\n दहाड़ों से गूंज उठा बाग: पिंजरे में खुद को फंसा हुआ पाकर गुलदार बुरी तरह से बौखला गया। उसने लोहे की सलाखों पर दांत मारे, पंजे चलाए और जोर-जोर से दहाड़ना शुरू कर दिया। उसकी इन भयानक दहाड़ों से रात के सन्नाटे में पूरा इलाका गूंज उठा। आवाज सुनकर ग्रामीणों को यह भान हो गया कि उनका 'दुश्मन' आखिरकार पकड़ा गया है।\r\n \r\n
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5. सुबह होते ही उमड़ा हुजूम: लगा ग्रामीणों का जमावड़ा
\r\n\r\nजैसे ही सुबह की पहली किरण फूटी, नहटौर के सीकरी बुजुर्ग गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई कि आम के बाग में रखा गया पिंजरा खाली नहीं है, बल्कि उसमें साक्षात 'मौत' कैद है।
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देखते ही देखते पिंजरे के आसपास सैकड़ों ग्रामीणों का भारी जमावड़ा लग गया। युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे—हर कोई उस खूंखार जानवर को अपनी आंखों से देखना चाहता था जिसने उनकी नींदें हराम कर दी थीं। कई युवा अपने मोबाइल फोन निकालकर गुलदार के वीडियो और तस्वीरें बनाने लगे, जो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। पिंजरे के अंदर मौजूद गुलदार भीड़ को देखकर लगातार गुर्रा रहा था और हमले की कोशिश कर रहा था, जिससे लोहे का पिंजरा भी हिल रहा था।
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ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए भीड़ को पिंजरे से एक सुरक्षित दूरी पर रखा और तुरंत बिजनौर वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी।
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6. वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन और आगे की प्रक्रिया
\r\n\r\nसूचना मिलते ही वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT), पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Doctor) और स्थानीय पुलिस बल पूरे साजो-सामान के साथ सीकरी बुजुर्ग के उस आम के बाग में पहुंच गए।
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- \r\n भीड़ को किया गया नियंत्रित: पुलिस ने सबसे पहले मौके से भीड़ को पीछे हटाया और एक सुरक्षित परिधि (Safe Zone) का निर्माण किया। गुलदार पहले से ही बहुत ज्यादा स्ट्रेस (तनाव) में था, और ज्यादा शोरगुल से उसकी जान को खतरा हो सकता था।\r\n \r\n
- \r\n मेडिकल चेकअप: वन विभाग के पशु चिकित्सकों ने दूर से ही गुलदार की शारीरिक स्थिति का मुआयना किया। यह देखा गया कि कहीं पिंजरे में संघर्ष करने के दौरान उसे कोई गंभीर चोट तो नहीं आई है। प्रथम दृष्टया गुलदार पूरी तरह से स्वस्थ और पूर्ण वयस्क (Adult) पाया गया।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित स्थानांतरण: इसके बाद, पूरी सावधानी के साथ पिंजरे को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली या वन विभाग के रेस्क्यू वाहन पर लादा गया।\r\n \r\n
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गुलदार को कहां ले जाया जाएगा? वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए इस गुलदार को सबसे पहले बिजनौर स्थित वन प्रभाग के एनिमल रेस्क्यू सेंटर में ले जाया जाएगा। वहां इसका संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण (Health Checkup) होगा। अगर यह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और इसका स्वभाव इंसानों के लिए अत्यधिक खतरनाक (Man-eater confirmed) नहीं हुआ, तो उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इसे बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amanagarh Tiger Reserve) या कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे किसी घने जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, जहां इंसानी आबादी न के बराबर हो।
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गहराई से विश्लेषण: बिजनौर में आखिर क्यों बढ़ रहा है गुलदारों का आतंक?
\r\n\r\nनहटौर के सीकरी बुजुर्ग में गुलदार का पकड़ा जाना कोई इकलौती घटना नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, और अफजलगढ़ के इलाकों में गुलदारों का निकलना अब एक आम लेकिन खतरनाक दिनचर्या बन चुका है। इसके पीछे कई भौगोलिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हैं:
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1. गन्ने के खेत: गुलदारों का नया 'जंगल' (Sugarcane Leopards) बिजनौर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख गन्ना उत्पादक जिला है। यहां हजारों हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। गन्ने की फसल जब 10 से 12 फीट ऊंची हो जाती है, तो वह एक घने जंगल (Micro-forest) का रूप ले लेती है।
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- \r\n गुलदारों को इन गन्ने के खेतों में छिपने की बेहतरीन जगह मिलती है।\r\n \r\n
- \r\n मादा गुलदार गन्ने के खेतों को अपने शावकों (Cubs) को जन्म देने और पालने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान मानती हैं क्योंकि यहां उन्हें इंसानों से सुरक्षा और पानी आसानी से मिल जाता है।\r\n \r\n
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2. सिकुड़ते प्राकृतिक जंगल (Habitat Loss) मानव आबादी के विस्तार, जंगलों की कटाई और हाईवे/सड़कों के निर्माण के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) लगातार सिकुड़ रहा है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व या कॉर्बेट के जंगलों से भटक कर गुलदार अक्सर खाने की तलाश में इंसानी बस्तियों की तरफ आ जाते हैं।
\r\n\r\n3. आसान शिकार की चाहत (Easy Prey) जंगलों में शिकार (हिरण, चीतल) करने में गुलदार को बहुत ऊर्जा और मेहनत खर्च करनी पड़ती है। इसके विपरीत, गांवों के आसपास उन्हें आवारा कुत्ते, बकरियां, बछड़े और सुअर आसानी से मिल जाते हैं। 'ईजी प्रे' (आसान शिकार) का यह लालच ही उन्हें गांवों की ओर खींच लाता है।
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वन विभाग की एडवाइजरी: गुलदार से बचाव के लिए क्या करें ग्रामीण?
\r\n\r\nगुलदार के पकड़े जाने के बावजूद, वन विभाग ने बिजनौर और नहटौर क्षेत्र के निवासियों के लिए एक सख्त सुरक्षा एडवाइजरी (Safety Guidelines) जारी की है, क्योंकि गन्ने के खेतों में और भी गुलदार हो सकते हैं।
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- \r\n समूह में जाएं: खेतों में सिंचाई करने या फसल काटने कभी भी अकेले न जाएं। कम से कम 3-4 लोगों का समूह बनाकर जाएं।\r\n \r\n
- \r\n शोर मचाएं: खेत में घुसने से पहले या वहां काम करते समय लगातार बातचीत करते रहें, खांसते रहें या कोई गाना गाएं। शोर सुनकर गुलदार खुद ही रास्ता बदल लेता है; वह इंसानों से टकराव से बचता है।\r\n \r\n
- \r\n रोशनी का प्रबंध: रात के समय खेतों की ओर जाना बिल्कुल बंद कर दें। अगर जाना बहुत जरूरी हो, तो एक मजबूत टॉर्च या मशाल जरूर साथ रखें।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों का ध्यान: बच्चों को सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद घर से बाहर, खासकर गांव के बाहरी किनारों या खेतों के पास बिल्कुल न जाने दें। गुलदार छोटे बच्चों को आसान शिकार समझता है।\r\n \r\n
- \r\n रेडियो बजाएं: खेत में काम करते समय मोबाइल पर या छोटा रेडियो तेज आवाज में बजाकर रखें। मानवीय आवाज से जंगली जानवर दूर रहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पालतू जानवरों की सुरक्षा: अपने मवेशियों, बकरियों और कुत्तों को रात में खुले में न बांधें। उन्हें एक सुरक्षित, बंद और रोशनी वाले बाड़े (Shed) में ही रखें।\r\n \r\n
- \r\n तुरंत सूचना दें: अगर किसी भी ग्रामीण को गुलदार या उसके पंजों के निशान दिखाई देते हैं, तो खुद कोई हीरो बनने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग के टोल-फ्री नंबर या 112 डायल कर पुलिस को सूचित करें।\r\n \r\n
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बिजनौर के नहटौर स्थित सीकरी बुजुर्ग गांव में वन विभाग का यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा। एक तरफ जहां ग्रामीणों को मौत के खौफ से आजादी मिली, वहीं दूसरी तरफ एक वन्यजीव को भी बिना किसी नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ लिया गया। यह घटना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और आम जनता मिलकर किसी समस्या का सामना करते हैं, तो बड़े से बड़े खतरे को भी टाला जा सकता है।
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हालांकि, यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञों को 'मानव-वन्यजीव संघर्ष' (Human-Animal Conflict) को कम करने के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनानी होंगी। इसमें गन्ने के खेतों के आसपास फेंसिंग, वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का निर्माण और किसानों को जागरूक करने जैसे कदम शामिल होने चाहिए। फिलहाल, सीकरी बुजुर्ग के लोग आज रात बिना किसी डर के चैन की नींद सो सकेंगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
\r\n\r\nसवाल 1: बिजनौर में गुलदार किस गांव में पकड़ा गया है? जवाब: यह गुलदार बिजनौर जिले के नहटौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 'सीकरी बुजुर्ग' (Sikri Buzurg) गांव के पास एक आम के बाग में पकड़ा गया है।
\r\n\r\nसवाल 2: वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए क्या तरीका अपनाया? जवाब: वन विभाग ने गुलदार के ट्रैक को पहचान कर आम के बाग में एक लोहे का ट्रेंकुलाइजर-प्रूफ पिंजरा लगाया और उसमें शिकार के तौर पर एक जिंदा बकरी को बांधा था। शिकार के लालच में गुलदार पिंजरे में आया और कैद हो गया।
\r\n\r\nसवाल 3: पकड़े गए इस गुलदार का वन विभाग अब क्या करेगा? जवाब: रेस्क्यू किए गए गुलदार को पहले एनिमल रेस्क्यू सेंटर ले जाकर उसका मेडिकल चेकअप किया जाएगा। स्वस्थ पाए जाने पर उच्च अधिकारियों की अनुमति से उसे अमानगढ़ या कॉर्बेट के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा।
\r\n\r\nसवाल 4: पश्चिमी यूपी के गन्ने के खेतों में गुलदार इतने ज्यादा क्यों पाए जाते हैं? जवाब: ऊंचे गन्ने के खेत गुलदारों के लिए एक 'माइक्रो-फॉरेस्ट' (छोटे जंगल) का काम करते हैं। यहां उन्हें छिपने की बेहतरीन जगह, शिकार (कुत्ते/मवेशी) और पानी आसानी से मिल जाता है। मादा गुलदार गन्ने के खेतों को शावकों को जन्म देने के लिए सबसे सुरक्षित मानती हैं।
\r\n\r\nसवाल 5: अगर खेत में अचानक गुलदार सामने आ जाए तो क्या करना चाहिए? जवाब: अगर गुलदार सामने आ जाए तो कभी पीठ दिखाकर भागें नहीं, अन्यथा वह हमला कर देगा। अपनी जगह पर खड़े रहें, दोनों हाथ ऊपर उठाकर खुद को बड़ा दिखाने की कोशिश करें, जोर से चिल्लाएं और धीरे-धीरे पीछे की तरफ हटें।
Sabse pehle comment karne wale banein.