बिजनौर: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व चोरी के खिलाफ अपनाए गए सख्त रुख के बाद बिजनौर (Bijnor) जिले में जीएसटी चोरी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। जिले में फर्जी कागजात (Forged Documents) के आधार पर बोगस फर्म खोलकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग (GST Department) की जांच में अब तक ऐसी 19 फर्मों का खुलासा हुआ है, जो केवल कागजों पर चल रही थीं।READ ALSO:-Meerut News: व्यापार बचाने को सेंट्रल मार्केट के व्यापारी एकजुट, 16 दिसंबर को मौन जुलूस और CM को भेजेंगे पोस्टकार्ड
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विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन 19 फर्मों के संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन जालसाजों ने सरकार को 10 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। इस खुलासे के बाद से जिले के व्यापारियों और टैक्स चोरों में हड़कंप मचा हुआ है।
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शेरकोट और धामपुर बने फर्जीवाड़े के हॉटस्पॉट

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जीएसटी विभाग द्वारा की गई छापेमारी और डेटा विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि बिजनौर में फर्जी जीएसटी फर्म (Fake GST Firms in Bijnor) बनाने का सबसे बड़ा खेल शेरकोट इलाके में चल रहा था। विभाग द्वारा दर्ज कराई गई 19 एफआईआर में से सबसे अधिक मामले शेरकोट से जुड़े हैं।
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    शेरकोट: यहां अकेले 7 फर्मों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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    नगर कोतवाली: जिला मुख्यालय की नगर कोतवाली में भी 5 फर्जी फर्मों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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    धामपुर: गौरतलब है कि प्रदेश का ऐसा ही पहला मुकदमा धामपुर में दर्ज कराया गया था, जिसने इस पूरे रैकेट की कड़ियां खोलनी शुरू की थीं।
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धोखे से हासिल किए गए दस्तावेज: 'बोगस फर्म' का सच

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इस पूरे घोटाले का 'मोडस ऑपरेंडी' (काम करने का तरीका) बेहद शातिराना है। जांच में पता चला है कि जिन लोगों के नाम पर ये फर्में पंजीकृत थीं, उन्हें इस बात की खबर तक नहीं थी कि वे करोड़पति व्यापारी हैं। जालसाजों ने गरीब और भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, लोन पास कराने या नौकरी दिलाने के नाम पर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो हासिल किए। इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग करके जीएसटी पोर्टल पर फर्मों का पंजीकरण कराया गया।
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जब विभाग की टीम भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए पंजीकृत पतों पर पहुंची, तो वहां न तो कोई दुकान मिली और न ही कोई गोदाम। कई जगहों पर तो खाली प्लॉट या रिहायशी मकान मिले, जिनका किसी व्यवसाय से कोई लेना-देना नहीं था।
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10 करोड़ से ज्यादा की राजस्व हानि

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ज्वाइंट कमिश्नर (Joint Commissioner) जीएसटी, राजीव आर्थर ने बताया कि यह रैकेट सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। अब तक की जांच में 10 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी (GST Evasion) की पुष्टि हो चुकी है। ये फर्में बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के केवल फर्जी बिल (Invoices) काट रही थीं, ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ उठाया जा सके।
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राजीव आर्थर ने कहा, "जीएसटी की जांच में अब तक 19 ऐसी फर्में सामने आई हैं, जिन्होंने फर्जीवाड़ा कर राजस्व की चोरी की है। इन सभी फर्म संचालकों पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। हमारी जांच अभी जारी है और डेटा माइनिंग के जरिए अन्य संदिग्ध फर्मों को भी चिन्हित किया जा रहा है।"
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पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश

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जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने संबंधित थानों की पुलिस को इन मामलों में तत्काल और सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है। चूंकि यह मामला सरकारी राजस्व की चोरी और दस्तावेजों की जालसाजी (Forgery) दोनों से जुड़ा है, इसलिए पुलिस आरोपियों की धरपकड़ में जुट गई है। कई फर्म संचालक कार्रवाई की भनक लगते ही भूमिगत हो गए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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आम जनता के लिए सबक

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बिजनौर में हुए इस खुलासे ने आम जनता के लिए भी एक चेतावनी जारी की है। अक्सर लोग चंद पैसों के लालच में या जानकारी के अभाव में अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज (KYC Documents) अनजान लोगों को सौंप देते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि:
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    सरकारी योजनाओं के नाम पर किसी बिचौलिये को दस्तावेज न दें।
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    अपने आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कहां हो रहा है, इसकी समय-समय पर जांच करें।
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    नौकरी के नाम पर दस्तावेज देने से पहले कंपनी की सत्यता जांच लें।
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बिजनौर में फर्जी जीएसटी फर्म के जरिए करोड़ों की चोरी का यह मामला बताता है कि डिजिटल दौर में भी जालसाज किस तरह सिस्टम में सेंध लगा रहे हैं। 19 फर्मों पर एफआईआर और 10 करोड़ की चोरी का आंकड़ा अभी शुरुआती है; जांच आगे बढ़ने पर यह संख्या और बढ़ सकती है। प्रशासन की यह सख्ती निश्चित रूप से टैक्स चोरी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।
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