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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के थाना कोतवाली शहर क्षेत्र से पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। खुद को 'न्यायिक अधिकारी' बताकर बैंक से ₹35 लाख का ऋण (Loan) लेने पहुँची एक महिला आयशा परवीन और उसके एक साथी अनस को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 17 अक्टूबर 2025 को की गई। पुलिस के अनुसार, इस महिला ने अपने परिवार और गाँव को यह झूठ बताकर भ्रमित किया था कि उसका चयन जज के पद पर हो गया है ।READ ALSO:-सनसनी: बिजनौर-शेरकोट में विवाहिता की संदिग्ध मौत, कब्रिस्तान के पास पेड़ से लटका मिला शव!
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गिरफ्तार की गई अभियुक्ता आयशा परवीन (उम्र 28 वर्ष) मुज़फ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र की रहने वाली है । उसके साथ गिरफ्तार किया गया सह-अभियुक्त अनस बिजनौर के मण्डावर थाना क्षेत्र का निवासी है ।
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    शैक्षणिक पृष्ठभूमि: पूछताछ के दौरान आयशा परवीन ने बताया कि उसने और अनस ने देहरादून (उत्तराखंड) के लिब्रा कॉलेज से एलएलबी (LLB) की पढ़ाई की थी । वह पीसीएस (ज्यूडिशियल) की तैयारी भी कर रही थी । 
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    झूठ की शुरुआत: परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद, आयशा ने अपने परिवार और पूरे गाँव में यह झूठी खबर फैला दी कि उसका चयन जज (न्यायिक अधिकारी) के पद पर हो गया है ।  
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    विलासितापूर्ण जीवन: इस झूठ को आधार बनाकर, अभियुक्ता और उसके साथी विलासितापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों से धन उगाही करने लगे ।
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बैंक में हुआ पर्दाफाश, कार पर लिखा था "न्यायाधीश"

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आयशा परवीन और उसके साथियों का पर्दाफाश तब हुआ जब वे एक बड़े वित्तीय फ्रॉड को अंजाम देने पहुँचे।
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    घटनास्थल: 17 अक्टूबर 2025 को आयशा अपने साथी अनस, और एक चालक नीरज कुमार के साथ बिजनौर के एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), सिविल लाइन में पहुँची। 
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    लोन की मांग: आयशा ने स्वयं को 'न्यायिक अधिकारी' बताते हुए ₹35 लाख के ऋण संबंधी कागजात प्रस्तुत किए । घटना में प्रयुक्त वाहन (सं० UP12BW1458) पर भी "न्यायाधीश" लिखा था।  
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    बैंक को शक: बैंक कर्मियों को उसके व्यवहार और कागजात पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी ।  
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    गिरफ्तारी: सूचना पर थाना कोतवाली शहर पुलिस मय साइबर टीम के तत्काल मौके पर पहुँची और तीनों व्यक्तियों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया ।
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Official Statements: फर्जी आईडी कार्ड और दस्तावेज़ बरामद

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पुलिस ने आयशा और अनस को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया है । पुलिस ने उनके पास से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज़ और गैजेट्स बरामद किए हैं:
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    फर्जी दस्तावेज़: अभियुक्ता के नाम से फर्जी जज आईडी कार्ड , सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और फ़ॉर्म-16 आदि बरामद हुए हैं।  फर्जी जज आईडी:
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    दो फर्जी जज आईडी कार्ड बरामद हुए, जिनमें डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट लखीमपुर खीरी (ID No. LAKHI 3980001540688) और डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट रामपुर के पते थे।  
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    झूठा रिजल्ट: पुलिस ने यूपी लोक सेवा आयोग, प्रयागराज का एक फर्जी रिजल्ट भी बरामद किया है, जिसमें आयशा परवीन का नाम ज्यूडिशियल सर्विस (सिविल जज) परीक्षा के लिए दिखाया गया था।  
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    बरामदगी: एक कार (UP12BW1458) और तीन मोबाइल फ़ोन (आईफोन 15 प्रो मैक्स सहित) भी जब्त किए गए हैं।
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संगठित फ्रॉड का खुलासा

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इस गिरफ्तारी से स्पष्ट होता है कि आयशा और उसके साथी संगठित रूप से Cyber Fraud के माध्यम से लोगों और वित्तीय संस्थाओं को धोखा दे रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में 16 अक्टूबर 2025 को मु०अ०सं० 881/2025 धारा 318(4)/338/336(3)/340(2) बीएनएस के तहत मामला पंजीकृत किया था। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है ।
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