उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने राजस्व वसूली और सरकारी कार्यों में लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से अवैध खनन पर लगाम लगाने और सरकारी विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि राजस्व वसूली में पिछड़ने वाले विभागों के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।READ ALSO:-बिजनौर: छेड़छाड़ का विरोध करने की मिली 'सजा-ए-मौत'! पिता-पुत्र ने युवती को खिलाया ज़हर, तड़प-तड़प कर हुई मौत, 48 घंटे में हत्यारे पिता-पुत्र गिरफ्तार
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सीएम डैशबोर्ड पर रैंकिंग सुधारने का दबाव

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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट सभागार में मासिक राजस्व स्टाफ एवं कर-करेत्तर (Tax-Non Tax) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए। राजस्व वसूली कार्य की समीक्षा के दौरान यह संज्ञान में आया कि मंडी, वाणिज्य कर, परिवहन, विद्युत, खनन और बाट-माप विभाग अपने लक्ष्य के सापेक्ष अपेक्षित प्रगति नहीं कर रहे हैं।
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    DM की चेतावनी: जिलाधिकारी ने कम राजस्व वसूली करने वाले विभागीय अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि उनके विभाग की रैंकिंग सीएम डैशबोर्ड (CM Dashboard) पर प्रभावित होती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और इसकी सूचना उनके उच्च अधिकारियों को भी दी जाएगी।
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खनन वाहनों की जांच और दंडात्मक कार्रवाई

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अवैध खनन और उसके परिवहन को रोकने के लिए जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
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    सख्त निर्देश: उप संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) को खनन का परिवहन करने वाले सभी वाहनों की नंबर प्लेट की जांच करने को कहा गया है।
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    दंडात्मक कार्रवाई: यदि नंबर प्लेट संदिग्ध, अपूर्ण (Incomplete) या अपठनीय (Unreadable) पाई जाती है, तो वाहन स्वामी के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। यह कदम अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने का एक सीधा प्रयास है।
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    भूमि विक्रय की अनुमति: इसके अतिरिक्त, सभी उप जिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि धारा 98 से संबंधित भूमि विक्रय (Land Sale) के प्रकरणों में निर्धारित मानकों और गहन जांच के बाद ही अनुमति पत्र प्रदान किए जाएं।
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लंबित वादों के निस्तारण पर जोर

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जिलाधिकारी ने न्यायिक प्रक्रिया और राजस्व विभाग के लंबित मामलों को निपटाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
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    प्राथमिकता: उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से निपटाने का आदेश दिया।
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    पुराने वादों का निस्तारण: जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि 5 वर्ष और 3 वर्ष से अधिक पुराने वादों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी वाद को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
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    न्यायालय का बोझ: सभी पीठासीन अधिकारियों को वादों के निस्तारण में विशेष ध्यान देने और धारा 34 और 24 के लंबित प्रकरणों को निर्धारित समयावधि में निस्तारित करने को कहा गया, ताकि न्यायालयों पर अनावश्यक बोझ कम हो सके।
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प्रशासन की कार्यक्षमता में सुधार

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जिलाधिकारी जसजीत कौर द्वारा जारी किए गए ये सख्त निर्देश बिजनौर जिले में राजस्व संग्रह और न्यायिक प्रशासन की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन कदमों से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण होने और सामान्य जनता के लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की उम्मीद है।
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