बिजनौर गुलदार न्यूज़ (Bijnor Leopard News): उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला पिछले काफी समय से गुलदारों (तेंदुओं) की दहशत का पर्याय बना हुआ है। आए दिन यहां से गुलदार के हमले या उनके देखे जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। इसी कड़ी में बिजनौर के थाना शेरकोट क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां ग्राम भनौटी में सड़क किनारे एक गुलदार घायल और बेसुध अवस्था में पड़ा मिला है। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानिए इस पूरी घटना का आंखों देखा हाल, वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन और बिजनौर में लगातार बढ़ रहे गुलदार-मानव संघर्ष की पूरी कहानी।READ ALSO:-भारत का 'सुदर्शन चक्र' है शेषनाग-150: 1000KM दूर से करेगा स्वार्म अटैक, बिना GPS के पल भर में कबाड़ होगा दुश्मन का एयर डिफेंस
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

शेरकोट के भनौटी गांव में कैसे मिला घायल गुलदार?

\r\n\r\n
गुरुवार की सुबह जब थाना शेरकोट क्षेत्र के ग्राम भनौटी के ग्रामीण अपने खेतों की ओर जा रहे थे, तब उनकी नजर सड़क किनारे पड़ी एक विशालकाय आकृति पर पड़ी। जब लोग हिम्मत करके थोड़ा करीब गए, तो उनके होश उड़ गए। वहां एक विशाल और खूंखार गुलदार खून से लथपथ और घायल अवस्था में पड़ा हुआ था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
गुलदार के घायल होने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे भनौटी गांव और आसपास के इलाकों में फैल गई। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि गुलदार घायल था और उठने की स्थिति में नहीं था, फिर भी लोगों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता था। ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए गुलदार से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखी और तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और वन विभाग (Forest Department) को दी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आपसी संघर्ष (Territorial Fight) में घायल होने की आशंका

\r\n\r\n
गुलदार के शरीर पर मौजूद चोटों और घावों को देखकर प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई जा रही है कि यह किसी अन्य नर गुलदार के साथ आपसी संघर्ष (Territorial Fight) का शिकार हुआ है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गुलदार (Leopards) बेहद एकांतप्रिय और क्षेत्रीय (Territorial) जानवर होते हैं। वे अपने इलाके (Territory) की सुरक्षा के लिए किसी भी अन्य नर गुलदार से भिड़ जाते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
बिजनौर के जंगलों और गन्ने के खेतों में गुलदारों की संख्या काफी अधिक हो गई है, जिसके कारण उनके बीच जगह और शिकार को लेकर वर्चस्व की जंग आम बात हो गई है। अक्सर इन खूनी संघर्षों में कमजोर गुलदार गंभीर रूप से घायल हो जाता है या मारा जाता है। भनौटी गांव में मिले इस गुलदार की हालत भी किसी ऐसे ही हिंसक संघर्ष की गवाही दे रही है। (
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वन विभाग का त्वरित एक्शन और रेस्क्यू ऑपरेशन

\r\n\r\n
ग्रामीणों की सूचना मिलते ही बिजनौर वन विभाग (Bijnor Forest Department) में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के आला अधिकारियों ने तुरंत एक रेस्क्यू टीम का गठन किया। पिंजरा, ट्रैंक्विलाइजर गन (बेहोश करने वाली बंदूक), जाल और मेडिकल किट के साथ वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस बल मौके के लिए रवाना हो गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
रेस्क्यू और उपचार की योजना: मौके पर पहुंचकर वन विभाग की प्राथमिकता सबसे पहले भीड़ को नियंत्रित करना और गुलदार को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू करना है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    सुरक्षा घेरा: पुलिस और वन रक्षकों द्वारा इलाके की घेराबंदी की जाएगी ताकि कोई भी ग्रामीण गुलदार के करीब न जा सके, क्योंकि घायल जानवर अपनी जान बचाने के लिए अचानक और भी ज्यादा आक्रामक हो सकता है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    ट्रैंक्विलाइजेशन: जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) द्वारा गुलदार को ट्रैंक्विलाइज (हल्का बेहोश) किया जाएगा ताकि उसे सुरक्षित रूप से पिंजरे में शिफ्ट किया जा सके।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    मेडिकल जांच और उपचार: वन विभाग गुलदार को अपने कब्जे में लेकर तुरंत पशु चिकित्सालय ले जाएगा, जहां उसके घावों का उपचार किया जाएगा।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इस गुलदार को वापस किसी घने जंगल (जैसे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व या शिवालिक वन प्रभाग) में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बिजनौर क्यों बना है गुलदारों की 'राजधानी'? (Bijnor Leopard Menace)

\r\n\r\n
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बिजनौर में कोई गुलदार देखा गया हो। बिजनौर गुलदार न्यूज़ आए दिन अखबारों और न्यूज़ पोर्टल्स की सुर्खियां बनती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर बिजनौर में ही इतने गुलदार क्यों पाए जाते हैं? इसके पीछे कुछ प्रमुख भौगोलिक और पर्यावरणीय कारण हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    गन्ने के विशाल खेत (Sugarcane Fields): बिजनौर की पहचान उसके गन्ने के खेतों से है। गन्ने के खेत 10 से 12 फीट ऊंचे होते हैं, जो गुलदारों के लिए एक प्राकृतिक जंगल का काम करते हैं। इन खेतों में छिपना, शिकार करना और शावकों को जन्म देना गुलदारों के लिए बेहद आसान और सुरक्षित होता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की निकटता: बिजनौर का एक बड़ा हिस्सा अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटा हुआ है। जंगलों में बाघों (Tigers) की बढ़ती आबादी के कारण गुलदारों को जंगल के बाहरी इलाकों और इंसानी बस्तियों की ओर धकेल दिया गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    आसान शिकार: गांवों के आसपास लावारिस कुत्ते, सूअर, बकरियां और बछड़े आसानी से मिल जाते हैं, जो गुलदारों का पसंदीदा और आसान शिकार होते हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ग्रामीणों में दहशत और वन विभाग की अपील

\r\n\r\n
इस घटना ने एक बार फिर शेरकोट और आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। किसानों का कहना है कि गन्ने की छिलाई और खेतों में पानी चलाने का समय आ गया है, ऐसे में खेतों के आसपास गुलदार की मौजूदगी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे संयम बरतें। विभाग ने कुछ सुरक्षा दिशा-निर्देश (Safety Guidelines) भी जारी किए हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    खेतों में अकेले न जाएं, हमेशा समूह (Group) में जाएं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    खेतों में जाते समय अपने साथ डंडा रखें और शोर मचाते हुए या गाना गाते हुए जाएं ताकि गुलदार को इंसानों की मौजूदगी का अहसास हो जाए और वह दूर चला जाए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रात के समय घरों से बाहर निकलने से बचें और बच्चों को बिल्कुल भी अकेला न छोड़ें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    यदि गुलदार दिखाई दे, तो उसे भगाने या मारने का प्रयास न करें, तुरंत वन विभाग या डायल 112 पर पुलिस को सूचना दें। (Internal link: वन्यजीव संघर्ष के दौरान बचाव के अचूक तरीके यहां जानें)
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर के थाना शेरकोट क्षेत्र के ग्राम भनौटी में घायल गुलदार का मिलना एक तरफ जहां वन्यजीवों के आपसी संघर्ष को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ यह मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की बढ़ती समस्या की ओर भी इशारा करता है। वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है, जो एक सराहनीय कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपचार के बाद गुलदार की स्थिति कैसी रहती है। खबरीलाल की टीम इस बिजनौर गुलदार न्यूज़ पर अपनी नजर बनाए हुए है और रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी हर ताज़ा अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर जिले के शेरकोट थाना क्षेत्र के भनौटी गांव में आज सुबह सड़क किनारे एक घायल गुलदार मिलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया गुलदार के किसी अन्य जंगली जानवर के साथ आपसी संघर्ष में घायल होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है और भीड़ को हटाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। वन विभाग का कहना है कि घायल गुलदार को पिंजरे में कैद कर उसका उचित उपचार कराया जाएगा और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें