बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक बीजेपी नेता से हुआ विवाद कारोबारी भाइयों खालिद और तालिब के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। उनकी दशकों पुरानी सल्तनत पर अब योगी सरकार का हंटर चला है। शिकायतों के बाद हुई जांच में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और प्रतिबंधित पेड़ों के अवैध कटान का खुलासा होने पर प्रशासन ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में न केवल उनकी चार आरा मशीनों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, बल्कि अवैध रूप से बसाई जा रही कॉलोनी पर बुलडोजर चलाकर करोड़ों की सरकारी जमीन को भी कब्जा मुक्त कराया गया।READ ALSO:-फ्लाईओवर पर मौत का झपट्टा: मॉर्निंग वॉक पर निकले कपड़ा कारोबारी को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, पुल से नीचे गिरकर दर्दनाक मौत
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एक विवाद और खुल गई पोल
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इस पूरे एक्शन की पटकथा 6 जुलाई को भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रोबिन सिंह और कारोबारी खालिद के बीच हुए एक विवाद के बाद लिखी गई। रोबिन सिंह ने न केवल खालिद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, बल्कि मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी (DM) तक ले गए। उन्होंने शिकायत में कारोबारी भाइयों पर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर एक अवैध साम्राज्य खड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया था।
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DM के आदेश पर हुई जांच, परतें खुलती गईं
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डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एसडीएम सदर रितु रानी को जांच के आदेश दिए। नायब तहसीलदार सार्थक चावला के नेतृत्व में राजस्व टीम ने जब पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
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    अवैध कॉलोनी और कब्जा: जांच में पता चला कि ग्राम छिल्लोर बंगर में कारोबारी भाइयों ने 109 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर कब्जा कर एक अवैध कॉलोनी का निर्माण शुरू कर दिया था। प्रशासन ने तत्काल जेसीबी की मदद से इस जमीन को खाली कराया और कॉलोनी के मुख्य गेट को ध्वस्त कर दिया।
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    'जंगल' की जमीन पर क्रेशर: हद तो तब हो गई जब जांच में पता चला कि इनके तीन स्टोन क्रेशर भी सरकारी जमीन पर चल रहे हैं। राजस्व अभिलेखों (1359 फसली) में यह जमीन 'झाड़ी जंगल' के रूप में दर्ज है, जिस पर किसी भी तरह का व्यावसायिक निर्माण पूरी तरह से अवैध है। प्रशासन ने इस मामले में उन्हें नोटिस जारी किया है।
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    आरा मशीनों पर अवैध कटान: वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जब उनकी चार आरा मशीनों (काली मंदिर के पास, मछली बाजार और चांदपुर रोड स्थित) की जांच की, तो वहां सागौन और शीशम जैसी प्रतिबंधित लकड़ियों का अवैध कटान पाया गया। इसके अलावा, वन अधिनियम का उल्लंघन, पर्यावरण को नुकसान और दस्तावेजों में भारी विसंगतियां भी मिलीं, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से चारों लाइसेंस निलंबित कर दिए गए।
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इन आरोपों की पुष्टि के बाद, काली मंदिर के पास, मछली बाजार चाहशीरी बी-21 और चांदपुर रोड बिजनौर स्थित कारोबारी भाइयों द्वारा संचालित चारों आरा मशीनों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
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प्रशासन के इस कड़े रुख से बिजनौर में अवैध रूप से सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वालों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के बीच हड़कंप मच गया है।
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