बिजनौर (8 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance against Corruption) नीति के तहत भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में बुधवार को बिजनौर जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्रों में से एक, 'विकास भवन' (Vikas Bhavan) में उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब विजिलेंस (सतर्कता) टीम ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।READ ALSO:-सीलिंग पर कांग्रेस का हल्ला बोल: महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा बोले— "शर्म आए भाजपा नेताओं को, व्यापारियों से माफी मांगकर तुरंत दें इस्तीफा"
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विजिलेंस की टीम ने सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित विकास भवन में छापेमारी करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) रिजवान अहमद को उनके ही सरकारी कार्यालय से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों (Red-Handed) दबोच लिया। एक आला दर्जे के अधिकारी की उनके ही चेंबर में हुई इस सरेआम गिरफ्तारी से पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में दहशत का माहौल है।
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क्या है पूरा मामला? 50 हजार की डिमांड और 20 हजार पर 'डील'
\r\n\r\nदरअसल, पंचायती राज विभाग अक्सर विकास कार्यों और फंड के आवंटन को लेकर चर्चाओं में रहता है। जानकारी के मुताबिक, बिजनौर में तैनात डीपीआरओ रिजवान अहमद ने एक ग्राम पंचायत से जुड़े किसी महत्वपूर्ण कार्य (संभवतः बिल पास करने या काम की स्वीकृति) के एवज में एक ग्राम पंचायत सचिव (Secretary) से मोटी रकम की डिमांड की थी।
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सूत्रों के अनुसार, डीपीआरओ ने इस काम के बदले सेक्रेटरी से 50 हज़ार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सेक्रेटरी इस नाजायज मांग से बेहद परेशान था। लेकिन इसके बाद सेक्रेटरी ने भ्रष्ट अधिकारी के सामने घुटने टेकने के बजाय सिस्टम से लड़ने का फैसला किया। सेक्रेटरी ने डीपीआरओ को रिश्वत देने के लिए हामी भर दी, लेकिन साथ ही इसकी पूरी गुप्त शिकायत एंटी करप्शन (विजिलेंस) टीम को कर दी।
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विजिलेंस का खुफिया जाल: केमिकल लगे नोट और पक्की घेराबंदी
\r\n\r\nसेक्रेटरी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने इस घूसखोर अधिकारी को पकड़ने के लिए एक 'पूर्व नियोजित योजना' (Trap) तैयार की। योजना के तहत सेक्रेटरी को 20 हजार रुपये (पहली किश्त के रूप में) लेकर डीपीआरओ कार्यालय भेजा गया। इन नोटों पर विजिलेंस टीम द्वारा एक विशेष केमिकल (Phenolphthalein Powder) लगाया गया था, जो पानी के संपर्क में आते ही लाल रंग छोड़ देता है।
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बुधवार दोपहर का वक्त था। विकास भवन में रोजमर्रा की तरह भारी भीड़ और चहल-पहल थी। सेक्रेटरी तय योजना के मुताबिक सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित विकास भवन में डीपीआरओ रिजवान अहमद के चेंबर में पहुंचा। जैसे ही सेक्रेटरी ने रिश्वत के 20 हजार रुपये डीपीआरओ के हाथ में पकड़ाए, पहले से ही सादे कपड़ों में कार्यालय के आसपास और अंदर घात लगाए बैठी विजिलेंस टीम ने अचानक धावा बोल दिया।
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टीम ने झपट्टा मारकर डीपीआरओ को मौके पर ही धर दबोचा। जब उनके हाथ धुलवाए गए तो पानी का रंग लाल हो गया, जो रिश्वत लेने का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण था। इस नाटकीय और धड़ाधड़ हुई कार्रवाई को देखकर कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों के होश उड़ गए।
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बंद कमरे में घंटों पूछताछ और खंगाले गए दस्तावेज
\r\n\r\nडीपीआरओ की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने कार्यालय को अंदर से बंद कर लिया। आरोपी डीपीआरओ रिजवान अहमद से चेंबर में ही कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की गई। इस दौरान टीम ने:
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- \r\n उनके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया।\r\n \r\n
- \r\n कार्यालय में रखी अलमारियों और महत्वपूर्ण फाइलों को खंगाला।\r\n \r\n
- \r\n पंचायती राज विभाग से जुड़े कई टेंडर और पेमेंट रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए।\r\n \r\n
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इस पूरी कार्रवाई के दौरान विकास भवन का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और विजिलेंस के लोग तैनात थे। पूरे विकास भवन परिसर में अधिकारियों और बाबुओं के बीच दहशत फैल गई। कई कर्मचारी तो अपनी कुर्सियां छोड़कर खिसकते नजर आए। हर किसी की जुबान पर बस इसी 'ट्रैप' की चर्चा गर्म थी।
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आगे की कार्रवाई: डीपीआरओ को बरेली ले गई विजिलेंस टीम
\r\n\r\nविकास भवन में प्रारंभिक पूछताछ और आवश्यक कागजी कार्रवाई (पंचनामा) पूरी करने के बाद विजिलेंस टीम आरोपी डीपीआरओ रिजवान अहमद को गिरफ्तार कर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने साथ बरेली ले गई।
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अब बरेली स्थित एंटी करप्शन कोर्ट (Anti-Corruption Court) में उन्हें पेश किया जाएगा। विजिलेंस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस 'भ्रष्टाचार के नेक्सस' में डीपीआरओ के साथ विकास भवन के कुछ अन्य बाबू या बड़े अधिकारी भी शामिल हैं?
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भ्रष्टाचार पर 'खौफ' का संदेश
\r\n\r\nबिजनौर विकास भवन में डीपीआरओ जैसे क्लास-1 लेवल के अधिकारी की इस गिरफ्तारी ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी दफ्तरों में बैठकर 'कमीशनखोरी' करने वालों की अब खैर नहीं है। ग्राम पंचायत स्तर पर विकास के नाम पर जो भ्रष्टाचार का दीमक सिस्टम को खोखला कर रहा है, विजिलेंस का यह 'ऑपरेशन क्लीन' उस पर एक बड़ा प्रहार है।
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(बिजनौर से जुड़ी हर बड़ी खबर और विजिलेंस की इस कार्रवाई के आगे के अपडेट्स के लिए 'खबरीलाल' के साथ जुड़े रहें।)
Sabse pehle comment karne wale banein.