लखनऊ: उत्तर प्रदेश की शहरी तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। अगर आप लखनऊ, कानपुर, वाराणसी या प्रयागराज जैसे पुराने शहरों में रहते हैं और जर्जर इमारतों के गिरने के डर के साये में जी रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद राहत भरी है। योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में पहली बार एक व्यापक और महत्वकांक्षी यूपी शहरी पुनर्विकास नीति (UP Urban Redevelopment Policy) लाने जा रही है।READ ALSO:-घर पर ताला तो वोटर लिस्ट से नाम साफ? चुनाव आयोग का नया 'SIR' नियम जान लें, वरना पछताएंगे!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस नीति का सीधा मकसद शहरों को सुरक्षित, सुंदर और आधुनिक बनाना है। प्रस्तावित योजना के तहत, दशकों पुरानी खतरनाक और जर्जर इमारतों को ध्वस्त करके उनकी जगह अत्याधुनिक हाईराइज बिल्डिंग्स (बहुमंजिला इमारतें) खड़ी की जाएंगी। खास बात यह है कि सरकार इसके लिए नियमों में बड़ी ढील और शुल्कों में भारी छूट देने की तैयारी कर रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

25 साल पुरानी इमारतों का होगा कायाकल्प

\r\n\r\n
आवास विभाग द्वारा तैयार किए गए इस मेगा प्लान के मुताबिक, यूपी शहरी पुनर्विकास नीति के दायरे में वे इमारतें आएंगी जो 25 साल या उससे अधिक पुरानी हैं। सरकार का मानना है कि शहर के मुख्य इलाकों में पुरानी इमारतें जमीन का बड़ा हिस्सा घेरे हुए हैं, लेकिन उनकी हालत खस्ता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य: किसी भी पुरानी इमारत को तोड़ने और पुनर्विकास (Redevelopment) की अनुमति तभी मिलेगी, जब उसका स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाएगा। रिपोर्ट में यदि इमारत 'असुरक्षित' या 'जर्जर' पाई जाती है, तभी उसे इस नीति का लाभ मिलेगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बड़े भू-खंडों पर लागू: यह नीति केवल बड़े प्लॉट और हाउसिंग सोसायटियों पर लागू होगी। छोटे व्यक्तिगत मकान या एकल भवन फिलहाल इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे। साथ ही, लीज पर दी गई जमीनों पर पुनर्निर्माण की मंजूरी नहीं मिलेगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

बिल्डरों और आम जनता को मिलेगी बंपर छूट

\r\n\r\n
इस यूपी शहरी पुनर्विकास नीति को सफल बनाने के लिए योगी सरकार खजाना खोलने को तैयार है। पुनर्विकास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Viable) बनाने के लिए कई तरह की वित्तीय रियायतें दी जाएंगी:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    विकास शुल्क में राहत: पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए डेवलपमेंट चार्ज में लगभग 50 प्रतिशत तक की छूट देने पर सहमति बन रही है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    लैंड यूज़ चेंज: यदि जर्जर इमारत की जमीन का उपयोग बदलना है (जैसे रिहायशी से कमर्शियल), तो इसके लिए लगने वाले शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    इम्पैक्ट फीस में कमी: यदि कोई प्रोजेक्ट जोन रेगुलेशन से हटकर किसी अन्य उपयोग की अनुमति चाहता है, तो प्रभाव शुल्क (Impact Fee) में भी 25 प्रतिशत की राहत संभव है।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    मिश्रित उपयोग: अब उसी जमीन पर नीचे दुकानें और ऊपर आवास (Mixed Use) बनाने की अनुमति होगी, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए घर खरीदना सस्ता और आसान होगा। 
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बंद पड़ी मिलों और कारखानों की जमीन का बदलेगा उपयोग

\r\n\r\n
शहर के बीचों-बीच सालों से बंद पड़े कारखाने और मिलें जो अब कबाड़ बन चुकी हैं, वे भी इस यूपी शहरी पुनर्विकास नीति का हिस्सा होंगी। प्रस्ताव के अनुसार, जो उद्योग तीन साल या उससे अधिक समय से बंद हैं या 'बीमार' घोषित हो चुके हैं, उनकी जमीन पर मल्टी-स्टोरी कॉम्प्लेक्स बनाए जा सकेंगे। शर्त यह होगी कि इन कारखानों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए और शहर के भीतर की कीमती जमीन का उपयोग रिहायशी या वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए हो। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

गुजरात और महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर तैयारी

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कदम महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में चल रही सफल नीतियों का अध्ययन करने के बाद उठाया है। मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में 'री-डेवलपमेंट पॉलिसी' के तहत हजारों पुरानी सोसायटियों का कायाकल्प हो चुका है। गुजरात में को-ऑपरेटिव सोसायटियों के लिए अलग नियम हैं, जिससे लोगों को पुराने छोटे फ्लैट के बदले नए और बड़े फ्लैट मिले हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
योगी सरकार को उम्मीद है कि यूपी शहरी पुनर्विकास नीति लागू होने से न केवल शहरों का 'स्काईलाइन' बदलेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी बूम आएगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और लोगों को सुरक्षित आशियाना मिलेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जल्द लगेगी कैबिनेट की मुहर

\r\n\r\n
सूत्रों के मुताबिक, आवास विभाग ने इस नीति का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगते ही लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ और गाजियाबाद जैसे शहरों में पुराने जर्जर मोहल्लों की जगह चमचमाती हाईराइज बिल्डिंग्स दिखने लगेंगी। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
योगी सरकार की यह प्रस्तावित यूपी शहरी पुनर्विकास नीति राज्य के शहरी नियोजन में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। 25 साल पुराने जर्जर मकानों को हटाकर आधुनिक हाईराइज बनाने का यह फैसला न केवल जान-माल की सुरक्षा करेगा, बल्कि शहर की कीमती जमीन का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित करेगा। शुल्क में छूट और मिश्रित उपयोग की मंजूरी से यह योजना बिल्डरों और आम जनता दोनों के लिए 'विन-विन' (Win-Win) स्थिति लेकर आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें