उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंगलवार को प्रदेश सचिवालय में एक बेहद अहम और मैराथन कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, शहरी आवास की समस्या को दूर करने, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक UP Cabinet decisions (यूपी कैबिनेट के फैसले) लिए गए। सरकार ने कुल 9 ऐसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अपनी अंतिम मुहर लगाई है, जिनका सीधा और सकारात्मक असर प्रदेश की आम जनता, नौकरीपेशा वर्ग, किसानों, महिलाओं, ग्रामीण आबादी और युवाओं के दैनिक जीवन पर पड़ेगा।READ ALSO:-यूपी में जमीन माफियाओं पर 'डिजिटल स्ट्राइक': खतौनी में नाम होने पर ही होगी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला
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योगी सरकार का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' (One Trillion Dollar Economy) बनाना है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए, इस बैठक में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के समानांतर विकास का खाका तैयार किया गया है। जहां एक ओर 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026' के तहत हजारों गांवों को शहर से जोड़ने की पहल की गई है, वहीं दूसरी ओर शहरों के सुनियोजित विकास और सस्ते मकानों के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये का फंड जारी किया गया है। इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ओला और उबर जैसी ऐप-बेस्ड टैक्सी सेवाओं पर नकेल कसने का बड़ा फैसला भी लिया गया है।
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इस बेहद विस्तृत और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम UP Cabinet decisions के तहत लिए गए हर एक फैसले का गहराई से अध्ययन करेंगे और यह जानेंगे कि इन नीतियों के लागू होने से आम आदमी को क्या फायदे होंगे, किस वर्ग को कितनी राहत मिलेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
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1. मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना: 8 शहरों के विकास के लिए 425 करोड़ का भारी-भरकम फंड

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भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण (Urbanization) के कारण पुराने शहरों पर आबादी का भारी दबाव पड़ रहा है। शहरों की सड़कें, सीवर लाइनें और अन्य बुनियादी सुविधाएं इस बढ़ती आबादी का बोझ उठाने में सक्षम नहीं रह गई हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए, योगी सरकार ने UP Cabinet decisions के तहत 'मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नये शहर प्रोत्साहन योजना' को मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के बड़े और छोटे शहरों के बाहरी इलाकों (Outskirts) में नई, आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त टाउनशिप (Townships) बसाना है।
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मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों में नई आवासीय योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और विकास कार्यों के लिए कुल 425 करोड़ रुपये की 'सीड कैपिटल' (Seed Capital) देने का ऐतिहासिक फैसला किया गया है। सरकार यह धनराशि विकास प्राधिकरणों (Development Authorities) और आवास विकास परिषद को अधिकतम 20 साल के लिए कर्ज के रूप में दे रही है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के किसानों से सीधे जमीन खरीद सकें और बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकें।
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किन शहरों को मिला कितना फंड और क्या है मास्टर प्लान?

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    वाराणसी (Varanasi): प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विकास पर सरकार का विशेष फोकस है। यहां 'वर्ल्ड सिटी एक्सपो भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना' (World City Expo) लाने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण को 200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया गया है। इस फंड से ग्राम गंजारी, हरपुर, शिवसागर और मढ़नी के इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इससे वाराणसी शहर का विस्तार होगा और बढ़ते पर्यटन (Tourism) के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
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    बरेली (Bareilly): रुहेलखंड के प्रमुख शहर बरेली के विकास प्राधिकरण को 150 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि से आसपुर, खूबचंद, अडूपुरा, जागीर, अहिलादपुर, बरकापुर, कुम्हरा, कलापुर, मोहरनियां, नवदिया, कुर्मियांनव व हरहरपुर जैसे एक दर्जन गांवों की जमीन लेकर नई आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी, जिनमें चौड़ी सड़कें, पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल होंगे।
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    प्रतापगढ़ (Pratapgarh): कटरा रोड प्रतापगढ़ के सुनियोजित विकास के लिए आवास विकास परिषद को 50 करोड़ रुपये की सीड कैपिटल दी गई है।
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    बांदा और उरई (Banda and Orai): बुंदेलखंड क्षेत्र के इन दो महत्वपूर्ण शहरों के विकास को गति देने के लिए आवास विकास परिषद को बांदा के लिए 30 करोड़ रुपये और उरई के लिए भी 30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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    चित्रकूट और गाजीपुर (Chitrakoot and Ghazipur): धार्मिक नगरी चित्रकूट में भूमि अधिग्रहण के लिए 20 करोड़ रुपये और पूर्वांचल के गाजीपुर जिले के विस्तार के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मऊ जिले को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
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इस UP Cabinet decisions के लागू होने से न केवल इन 8 शहरों की सूरत बदलेगी, बल्कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर (Construction Sector) में उछाल आने से हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार (Employment) के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। रियल एस्टेट सेक्टर को भी इस कदम से संजीवनी मिलेगी।
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2. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026: 12,200 ग्राम सभाओं तक पहुंचेगी टैक्स-फ्री बस सेवा

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उत्तर प्रदेश की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन परिवहन (Transport) के साधनों के अभाव में आज भी राज्य के हजारों गांव मुख्यधारा के विकास से कटे हुए हैं। ग्रामीण आबादी को अपने ब्लॉक, तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए डग्गामार वाहनों, ट्रैक्टर-ट्रॉली या महंगे ऑटो-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है, जो न केवल असुरक्षित हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बोझिल हैं। ग्रामीणों की इस पीड़ा को समझते हुए, योगी सरकार ने UP Cabinet decisions के तहत अब तक का सबसे बड़ा ग्रामीण कनेक्टिविटी (Rural Connectivity) प्रोजेक्ट लॉन्च किया है— 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026'।
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आगामी पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) से ठीक पहले कैबिनेट द्वारा लिया गया यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (Transport Minister Dayashankar Singh) ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य में अभी भी 12,200 ऐसी ग्राम सभाएं (Gram Sabhas) हैं, जहां आज तक कोई सरकारी या अधिकृत बस सेवा नहीं पहुंची है। नई पॉलिसी के तहत अब इन सभी 12,200 गांवों को बस सेवा से जोड़ा जाएगा।
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योजना की प्रमुख विशेषताएं और संचालन की रणनीति:

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    परमिट और टैक्स से 100% छूट: इस महत्वाकांक्षी योजना में प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है। इन ग्रामीण रूट्स पर बसें चलाने वाले निजी संचालकों (Private Operators) को सरकार ने परमिट फीस (Permit Fee) और सभी प्रकार के रोड टैक्स (Road Tax) से पूरी तरह मुक्त रखा है। इससे ऑपरेटरों की लागत कम होगी और वे ग्रामीणों से बेहद कम और रियायती किराया वसूल सकेंगे।
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    छोटी बसों (Mini Buses) का होगा इस्तेमाल: यूपी के ग्रामीण इलाकों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह तय किया गया है कि इन रास्तों पर बड़ी बसें नहीं चलाई जाएंगी। करीब 5000 गांवों में सड़कें इतनी संकरी हैं कि वहां बड़ी बसों को मोड़ने में भारी दिक्कत होती है। इसलिए, सरकार ने इन रूट्स के लिए अधिकतम 7 मीटर लंबी और अधिकतम 28 सीट क्षमता वाली मिनी बसों के संचालन को मंजूरी दी है। ये छोटी बसें संकरे रास्तों पर भी आसानी से दौड़ सकेंगी।
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    गांव में होगा रात्रि विश्राम (Night Halt): इस योजना का सबसे अनूठा पहलू यह है कि ये बसें अपना दिन का सफर खत्म करने के बाद वापस शहर के डिपो में नहीं जाएंगी, बल्कि रात में उसी गांव में रुकेंगी। सुबह-सुबह (Early Morning) ये बसें गांव से रवाना होंगी और ब्लॉक व तहसील होते हुए सुबह 10 बजे तक ग्रामीणों को जिला मुख्यालय (District Headquarters) तक पहुंचाएंगी।
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    रोजगार का सृजन (Job Creation): इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर और क्लीनर (Cleaner) अनिवार्य रूप से उसी गांव या आसपास के इलाकों के ही नियुक्त किए जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा, बल्कि रात में गांव में रुकने और सुबह ड्यूटी पर आने में कर्मचारियों को कोई परेशानी नहीं होगी। यह कदम गांव से पलायन रोकने में भी मददगार साबित होगा।
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किराया निर्धारण और निगरानी व्यवस्था:

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    सस्ता और किफायती टिकट: परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण बसों का किराया स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में गठित एक विशेष कमेटी द्वारा तय किया जाएगा। इस कमेटी में मुख्य विकास अधिकारी (CDO), पुलिस अधीक्षक (SP), एआरटीओ (ARTO) और एआरएम (ARM) सदस्य होंगे। यह कमेटी सुनिश्चित करेगी कि किराया आम ग्रामीणों, किसानों और छात्रों की पहुंच के भीतर हो।
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    समय सारिणी (Time Table): बस संचालक को ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार सेवा प्रदान करनी होगी। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक इन बसों को स्थानीय यात्रियों की जरूरत के हिसाब से डायवर्ट किया जा सकता है। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम रात 8 बजे तक वापस गांव पहुंच जाएंगी।
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    वाहन की आयु और आवेदन प्रक्रिया: इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष निर्धारित की गई है, लेकिन शुरुआत में इन्हें पहले 10 साल के लिए ही परिचालन की इजाजत (Permit Authorization) दी जाएगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन के भीतर पूरी की जाएगी और आवेदक को अगले 15 दिनों में वाहन उपलब्ध कराना होगा। कुल 45 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न की जाएगी।
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इस सेवा के शुरू होने से विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने में, मरीजों को जिला अस्पताल पहुंचने में, और किसानों को अपनी उपज (Agricultural Produce) शहर की मंडियों में बेचने जाने में भारी सहूलियत मिलेगी। यह UP Cabinet decisions का एक ऐसा हिस्सा है जो ग्रामीण उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाएगा।
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3. ओला, उबर और रैपिडो का पंजीकरण अनिवार्य: यात्रियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम

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शहरी क्षेत्रों में यातायात को सुगम बनाने में ऐप-बेस्ड कैब एग्रीगेटर्स (App-based Cab Aggregators) जैसे ओला (Ola), उबर (Uber), और रैपिडो (Rapido) की अहम भूमिका है। लेकिन, पिछले कुछ समय से इन सेवाओं से जुड़ी सुरक्षा में चूक, मनमाना किराया (Surge Pricing), और ड्राइवर के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं। अब तक इन कंपनियों पर परिवहन विभाग का कोई सीधा नियंत्रण नहीं था। इस अराजकता को खत्म करने के लिए, UP Cabinet decisions में एक बेहद सख्त और दूरगामी फैसला लिया गया है।
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कैबिनेट ने यात्रियों (Passengers), विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा (Safety) और सुविधा के दृष्टिगत राज्य में संचालित होने वाली सभी एग्रीगेटर टैक्सी कंपनियों के लिए 'अनिवार्य पंजीकरण' (Mandatory Registration) का कानून लागू कर दिया है।
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क्या है मोटर व्हीकल एक्ट का नया संशोधन? परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 (Motor Vehicle Act 1988) की धारा 93 की नियमावली में 1 जुलाई 2025 को महत्वपूर्ण संशोधन किया था। इस केंद्रीय नियमावली (Central Guidelines) को अब उत्तर प्रदेश में पूरी सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है। यूपी में अधिसूचना (Notification) जारी होने के साथ ही यह व्यवस्था प्रभाव में आ जाएगी।
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नए नियमों का क्या होगा सीधा असर?

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    बिना रजिस्ट्रेशन संचालन अवैध: अब ओला, उबर या कोई भी अन्य सेवा प्रदाता कंपनी बिना राज्य परिवहन विभाग में पंजीकरण (Registration) कराए, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के, और बिना ड्राइवरों के मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) के अपनी एक भी गाड़ी सड़क पर नहीं उतार पाएगी।
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    ड्राइवर की पूरी कुंडली सरकार के पास: पहले सरकार या परिवहन विभाग को यह पता ही नहीं होता था कि ऐप के माध्यम से कौन सी गाड़ी कौन व्यक्ति चला रहा है। अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी आसानी से कैब ड्राइवर बन जाते थे। अब हर ड्राइवर का मेडिकल टेस्ट (Medical Test), पुलिस वेरिफिकेशन, और वाहन का फिटनेस टेस्ट (Fitness Test) अनिवार्य कर दिया गया है।
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    लाइसेंसिंग और नवीनीकरण फीस (Fee Structure): कैब कंपनियों को रेगुलेट करने के लिए सरकार ने शुल्क का निर्धारण भी कर दिया है। एग्रीगेटर के रूप में आवेदन करने की प्रारंभिक फीस 25 हजार रुपये तय की गई है। वहीं, जो बड़ी कंपनियां 50 से 100 या इससे अधिक गाड़ियां एक साथ संचालित करती हैं, उन्हें लाइसेंसिंग फीस (Licensing Fee) के रूप में पांच लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा करने होंगे। इस लाइसेंस का रिन्युअल (Renewal) हर पांच साल पर होगा, जिसके लिए पांच हजार रुपये का नवीनीकरण शुल्क देना होगा।
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    अत्याधुनिक मॉनिटरिंग ऐप (State-of-the-art App): यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग एक अपना अत्याधुनिक ऐप और कमांड सेंटर विकसित करेगा। इस सिस्टम में सभी कैब कंपनियों, उनकी गाड़ियों के नंबर, जीपीएस लोकेशन (GPS Location), और ड्राइवरों का पूरा डेटाबेस एक जगह स्टोर रहेगा। आपातकालीन स्थिति में पैनिक बटन (Panic Button) दबाते ही पुलिस और परिवहन विभाग सीधे उस गाड़ी को ट्रैक कर सकेंगे।
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इस अहम UP Cabinet decisions से कैब सेवाओं में जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) आएगी, जिससे आम जनता निर्भय होकर इन सेवाओं का लाभ उठा सकेगी।
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4. पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0: शहरों में दूर होगी आवासीय समस्या, बनेंगे सस्ते और बड़े मकान

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उत्तर प्रदेश के शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण 'अफोर्डेबल हाउसिंग' (Affordable Housing) एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। मध्यम वर्ग (Middle Class) और निम्न आय वर्ग के लोग प्रॉपर्टी के आसमान छूते दामों के कारण अपना खुद का घर खरीदने का सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए, योगी कैबिनेट ने मंगलवार को UP Cabinet decisions के तहत 'पीएम आवास योजना-शहरी 2.0' (PMAY-U 2.0) को प्रदेश में लागू करने की नई और उदार नीति को मंजूरी दे दी है।
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नई हाउसिंग पॉलिसी में क्या हुए हैं बड़े बदलाव? अब तक पीएम आवास योजना के तहत मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS - Economically Weaker Section) के लिए ही छोटे मकान बनाए जाते थे। लेकिन नई नीति के तहत, अब ईडब्ल्यूएस के साथ-साथ 'निम्न आय वर्ग' (LIG - Low Income Group) और 'मध्यम आय वर्ग' (Mini MIG - Middle Income Group) के लोगों के लिए भी सस्ते और गुणवत्तापूर्ण मकान बनाए जाएंगे। इससे शहर में रहने वाले उस बड़े मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी जो किराए के मकानों (Rented Houses) में जीवन गुजारने को मजबूर है।
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मकानों का आकार और कीमत:

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    EWS मकानों का क्षेत्रफल बढ़ा: सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों का क्षेत्रफल (Carpet Area) बढ़ाकर 30 वर्ग मीटर (लगभग 322 स्क्वायर फीट) कर दिया गया है। पहले ये मकान बेहद छोटे हुआ करते थे, जिससे बड़े परिवारों को दिक्कत होती थी।
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    कीमत पर नियंत्रण: इन 30 वर्ग मीटर वाले बड़े ईडब्ल्यूएस मकानों की अधिकतम कीमत सरकार ने लगभग 9 लाख रुपये तक सीमित कर दी है। यदि कोई विकास प्राधिकरण या बिल्डर इससे अधिक क्षेत्रफल वाला मकान बनाता है, तो उसकी कीमत उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA - Real Estate Regulatory Authority) की सहमति से ही तय की जाएगी, ताकि खरीदारों से मनमानी कीमत न वसूली जा सके।
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    लॉटरी सिस्टम से आवंटन: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन सभी मकानों का आवंटन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड लॉटरी पद्धति (Lottery System) के माध्यम से किया जाएगा। इसमें किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप या भाई-भतीजावाद की कोई गुंजाइश नहीं होगी।
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प्राइवेट बिल्डरों (Private Builders) को भारी इंसेंटिव (Incentives): सरकार यह जानती है कि बिना प्राइवेट सेक्टर की मदद के इतने बड़े पैमाने पर मकान नहीं बनाए जा सकते। इसलिए 'भागीदारी में किफायती आवास' (AHP - Affordable Housing in Partnership) और 'किफायती किराया आवास' (ARH - Affordable Rental Housing) घटकों के तहत विकास प्राधिकरणों के साथ-साथ प्राइवेट बिल्डरों को भी इन मकानों को बनाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।
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    बिल्डरों को अपनी बड़ी और महंगी टाउनशिप परियोजनाओं के साथ इन छोटे और किफायती मकानों को बनाने की कानूनी सुविधा (Flexibility) दी जाएगी।
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    उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सरकार भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क (Land Use Change Fee), मानचित्र अनुमोदन शुल्क (Map Approval Fee), और वाह्य विकास शुल्क (External Development Charges - EDC) में भारी छूट देगी।
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    इसके अलावा, बिल्डरों को अतिरिक्त एफएआर (FAR - Floor Area Ratio) भी मुफ्त में दिया जाएगा, जिससे वे अधिक मंजिलें बना सकेंगे और उनकी लागत कम होगी।
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लाभार्थियों को मिलेगी सीधी सब्सिडी: इस UP Cabinet decisions के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों को किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार सब्सिडी (Subsidy) भी प्रदान करेगी।
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    ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार (State Government) की ओर से 1 लाख रुपये (कुल 2.50 लाख रुपये) का सीधा अनुदान दिया जाएगा।
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    लाभार्थियों को मकान की रजिस्ट्री (Property Registration) कराते समय स्टांप शुल्क (Stamp Duty) में भी भारी छूट दी जाएगी, जिससे उन पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
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    इसके अलावा, शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं (Working Women), औद्योगिक श्रमिकों और अन्य पात्र ईडब्ल्यूएस व एलआईजी परिवारों के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत निजी व सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा बड़े-बड़े हॉस्टल और कॉम्प्लेक्स बनाकर उन्हें सस्ते किराए (Rental Housing) पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
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भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के सुचारू संचालन के लिए आवास विभाग द्वारा जल्द ही विस्तृत शासनादेश (Government Order) जारी कर दिए जाएंगे।
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5. दलित उत्थान: अवैध कब्जे वाले कांशीराम आवास खाली कराकर पात्रों को दिए जाएंगे

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सामाजिक न्याय (Social Justice) और वंचित वर्गों के कल्याण की दिशा में UP Cabinet decisions में एक बेहद संवेदनशील और सख्त कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना (Finance Minister Suresh Kumar Khanna) ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि कैबिनेट ने पिछली सरकारों के कार्यकाल में बनी 'कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना' (Kanshiram Awas Yojana) के मकानों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला किया है।
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क्या है मामला और क्या होगी कार्रवाई? प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने हजारों कांशीराम आवासों के आवंटन और वर्तमान स्थिति को लेकर सरकार को लगातार गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। यह संज्ञान में आया था कि इन कॉलोनियों में दबंगों, भू-माफियाओं और अपात्र लोगों ने बड़े पैमाने पर अनधिकृत कब्जा (Illegal Occupation) कर रखा है, जबकि जिन गरीब दलित (Dalit) परिवारों के लिए ये मकान बनाए गए थे, वे आज भी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। कई मकान तो सालों से बंद पड़े-पड़े खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।
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इस अन्याय को खत्म करने के लिए योगी सरकार ने एक विशेष अभियान (Special Drive) चलाने का निर्णय लिया है:
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    अवैध कब्जों की पहचान और बेदखली: राज्य भर के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से कांशीराम आवास कॉलोनियों का डोर-टू-डोर सर्वे (Survey) कराएं। जो भी व्यक्ति बिना वैध आवंटन पत्र (Allotment Letter) के इन मकानों में रह रहा है, उसे तुरंत नोटिस देकर बाहर निकाला जाएगा और मकान खाली कराया जाएगा।
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    मकानों का कायाकल्प (Refurbishment): खाली कराए गए इन मकानों की हालत सुधारने के लिए सरकार विशेष फंड जारी करेगी। इन खंडहर हो चुके मकानों की पूरी रंगाई-पुताई (Painting), मरम्मत, बिजली-पानी की फिटिंग और सीवर की सफाई कराई जाएगी।
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    पात्र दलितों को पुनः आवंटन: मकानों का कायाकल्प होने के बाद, प्रशासन एक नई और पारदर्शी सूची तैयार करेगा। इसके बाद, इन आवासों को पूरी तरह से निशुल्क उन पात्र, बेघर और जरूरतमंद दलित परिवारों (Dalit Families) को आवंटित किया जाएगा, जो वास्तव में इसके हकदार हैं।
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यह UP Cabinet decisions सरकार की 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति को चरितार्थ करता है और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करता है।
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6. उच्च शिक्षा के शिक्षकों को बड़ा तोहफा: 5 लाख का कैशलेस इलाज

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शिक्षक समाज का निर्माता होता है, लेकिन विडंबना यह थी कि जीवन भर दूसरों का भविष्य संवारने वाले उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को बीमारी के समय इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। उनके पास चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की कोई सुगम व्यवस्था नहीं थी। शिक्षकों की इस पुरानी और जायज मांग को पूरा करते हुए, UP Cabinet decisions में एक बेहद संवेदनशील प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई है।
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क्या है नई कैशलेस चिकित्सा योजना (Cashless Medical Scheme)? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं, ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस - Teacher's Day) के पावन अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की ऐतिहासिक घोषणा की थी। मंगलवार की कैबिनेट बैठक में इस घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए योजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।
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प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Higher Education Minister Yogendra Upadhyay) ने फैसले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया:
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    कौन-कौन होंगे योजना में शामिल? इस योजना का दायरा बहुत विस्तृत रखा गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले अशासकीय सहायता प्राप्त (Aided) महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित (Regular) एवं स्ववित्तपोषित (Self-financed) पाठ्यक्रमों के शिक्षक, मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित प्राइवेट महाविद्यालयों के शिक्षक, तथा सभी राज्य विश्वविद्यालयों (State Universities) में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा।
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    शिक्षणेत्तर कर्मचारियों (Non-Teaching Staff) को भी लाभ: केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षणेत्तर (क्लर्क, चपरासी, लैब असिस्टेंट आदि) कर्मचारियों को भी इस सुरक्षा छतरी (Safety Net) के दायरे में लाया गया है।
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    5 लाख रुपये का हेल्थ कवर: इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक लाभार्थी शिक्षक/कर्मचारी और उनके आश्रित (Dependent) परिवार के सदस्यों को हर साल 5 लाख रुपये तक की 'कैशलेस चिकित्सा सुविधा' (Cashless Treatment) उपलब्ध कराई जाएगी।
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    सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज: लाभार्थी केवल सरकारी अस्पतालों में ही नहीं, बल्कि योजना से संबद्ध (Empaneled) बेहतरीन कॉरपोरेट और निजी अस्पतालों (Private Hospitals) में भी बिना एक भी पैसा खर्च किए अपना गंभीर से गंभीर ऑपरेशन या इलाज करा सकेंगे। चिकित्सा की दरें (Package Rates) 'प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना' (Ayushman Bharat) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगी।
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प्रीमियम और आर्थिक भार:

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    इस विश्वस्तरीय स्वास्थ्य बीमा योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी 2,479.70 रुपये का वार्षिक प्रीमियम (Annual Premium) अपनी जेब से भरेगी।
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    प्रदेश भर में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी इस योजना से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
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    इस पूरी योजना पर राज्य सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त आर्थिक व्यय वहन करना पड़ेगा। इस व्यय की पूरी व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के नियमित बजट (Budget) से की जाएगी।
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    योजना का संचालन और निगरानी 'राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी' (SACHIS - साचीज) के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाएगा, ताकि कार्ड बनने और क्लेम सेटलमेंट में कोई देरी न हो।
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यह UP Cabinet decisions शिक्षा जगत में काम करने वाले लाखों परिवारों के लिए एक रक्षा कवच साबित होगा, जिससे वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर शिक्षण कार्य पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
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7. कानपुर इंफ्रास्ट्रक्चर: ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा पर 2 नए पुल, 753 करोड़ का प्रोजेक्ट

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औद्योगिक नगरी कानपुर (Kanpur) और उसके पार उन्नाव जिले के बीच विकसित की जा रही 'ट्रांसगंगा सिटी' (Trans Ganga City) उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) द्वारा बसाए जा रहे इस आधुनिक औद्योगिक और आवासीय शहर की सफलता इसकी बेहतर कनेक्टिविटी पर निर्भर करती है।
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वर्तमान में कानपुर शहर को उन्नाव और लखनऊ से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग 'गंगा बैराज' (Ganga Barrage) है। ट्रांसगंगा सिटी के पूरी तरह से विकसित होने और वहां फैक्ट्रियों के शुरू होने के बाद, इस मार्ग पर भारी ट्रकों और हल्के वाहनों का यातायात (Traffic Volume) कई गुना बढ़ जाएगा। इससे मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर भीषण जाम (Traffic Jam) की समस्या उत्पन्न होने का गंभीर खतरा था।
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जाम से मुक्ति और सुगम यातायात के लिए UP Cabinet decisions: इस भविष्य की चुनौती को ध्यान में रखते हुए और यातायात के भारी दबाव को कम करने के लिए, योगी कैबिनेट ने गंगा नदी (Ganga River) पर नए पुलों के निर्माण के एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दे दी है।
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    एक की बजाय दो अलग-अलग पुल: शुरुआत में एक चार लेन (Four-lane) का बड़ा पुल बनाने का विचार था। लेकिन, ट्रैफिक इंजीनियरिंग (Traffic Engineering) और सुरक्षा मानकों का अध्ययन करने के बाद, कैबिनेट ने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए चार लेन के एक पुल की बजाय 'दो-दो लेन के दो अलग-अलग उच्च स्तरीय सेतु' (Two Separate Two-lane Bridges) बनाने का समझदारी भरा निर्णय लिया है। इनमें से एक पुल का इस्तेमाल कानपुर से ट्रांसगंगा सिटी जाने वाले वाहनों के लिए (One-way) और दूसरे पुल का इस्तेमाल वहां से वापस आने वाले वाहनों के लिए किया जाएगा। इससे आमने-सामने की टक्कर (Head-on Collisions) की संभावना खत्म हो जाएगी और ट्रैफिक निर्बाध रूप से बहेगा।
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    पहुंच मार्ग (Approach Roads): गंगा नदी पर इन पुलों के साथ-साथ शहर और हाईवे को जोड़ने वाले उच्च गुणवत्ता के एप्रोच रोड्स (पहुंच मार्ग) का भी निर्माण किया जाएगा।
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प्रोजेक्ट की कुल लागत और फंडिंग:

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    इस पूरी भव्य परियोजना की कुल स्वीकृत लागत (Total Estimated Cost) लगभग 753.13 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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    इस भारी-भरकम राशि की फंडिंग एक विशेष व्यवस्था के तहत की जाएगी। इसमें से 460 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि राज्य सरकार के महत्वाकांक्
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