उत्तर प्रदेश के मौसम ने एक ऐसा अचानक और भयानक यू-टर्न लिया है, जिसने आम जनजीवन से लेकर किसानों के खेतों तक भारी उथल-पुथल मचा दी है। फाल्गुन और चैत्र के इस संधिकाल में जहां लोगों को हल्की गर्मी का अहसास होने लगा था, वहीं रविवार, 15 मार्च 2026 की सुबह प्रदेश वासियों के लिए एक बड़ा सरप्राइज लेकर आई। आसमान में उमड़ते-घुमड़ते काले बादल, तेज सर्द हवाएं, गरजती आकाशीय बिजली और फिर झमाझम बारिश—यूपी के 15 से अधिक प्रमुख शहरों में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है।
\r\n\r\nराजधानी लखनऊ में जहां धूलभरी आंधी ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने तापमान को एकदम से नीचे ला दिया। लेकिन मौसम की यह करवट सिर्फ राहत लेकर नहीं आई है; यह अपने साथ तबाही और किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें भी लेकर आई है। हाथरस में बारिश के कहर के चलते एक विशाल कोल्ड स्टोरेज की दीवार भरभरा कर गिर गई, जिसमें किसानों की गाढ़ी कमाई यानी 10 हजार बोरी आलू मलबे में दफन हो गया।
\r\n\r\nमौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 35 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का हाई अलर्ट जारी किया है, जबकि 10 संवेदनशील जिलों में भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी गई है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है और पूरे प्रशासनिक अमले को ग्राउंड जीरो पर उतार दिया है।
\r\n\r\nखबरीलाल की इस विशेष और सबसे विस्तृत रिपोर्ट में आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि यूपी के किस शहर में मौसम ने क्या सितम ढाया है, किसानों की फसलों का क्या हाल है, और आने वाले 48 घंटों में मौसम विभाग की क्या भविष्यवाणी है।
\r\n\r\nहाथरस का दर्द: पलक झपकते ही मलबे में तब्दील हुई किसानों की मेहनत, गिरा कोल्ड स्टोरेज
\r\n\r\nमौसम की इस अचानक करवट का सबसे खौफनाक मंजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में देखने को मिला। रविवार तड़के जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा था, तब मौसम ने अपनी विनाशकारी ताकत का अहसास कराया। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे, तेज हवाएं सनसना रही थीं और आकाशीय बिजली की कड़कड़ाहट से पूरा इलाका दहल रहा था। इसी दौरान एक बड़ा हादसा हो गया।
\r\n\r\nआगरा-अलीगढ़ रोड (हाईवे) पर स्थित कान्हा कोल्ड स्टोरेज में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। बारिश और तेज हवा के दबाव के कारण कोल्ड स्टोरेज के चैंबर नंबर-1 की पिछली विशालकाय दीवार अचानक भरभराकर ढह गई। दीवार का गिरना इतना भयानक था कि आसपास के इलाकों में भूकंप जैसा कंपन महसूस किया गया।
\r\n\r\n10 हजार बोरी आलू मलबे में दफन: मार्च का महीना किसानों के लिए आलू की खुदाई और उसे कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखने का समय होता है। कान्हा कोल्ड स्टोरेज के इस चैंबर में भी आसपास के सैकड़ों किसानों ने अपनी मेहनत की फसल—करीब 10 हजार बोरी आलू—भंडारित कर रखी थी। दीवार गिरने के साथ ही यह पूरा का पूरा आलू मलबे, ईंटों और कंक्रीट के नीचे बुरी तरह दब गया।
\r\n\r\nस्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। गनीमत यह रही कि यह घटना रविवार तड़के हुई। उस समय कोल्ड स्टोरेज के उस हिस्से में कोई भी मजदूर, किसान या कर्मचारी मौजूद नहीं था। यदि यह हादसा दिन के समय होता, जब वहां माल लोडिंग-अनलोडिंग का काम चल रहा होता, तो एक बहुत बड़ी जनहानि हो सकती थी। हालांकि कोई मानवीय क्षति नहीं हुई, लेकिन किसानों का जो आर्थिक नुकसान हुआ है, वह बहुत बड़ा है। मलबे में दबे आलू के खराब होने का खतरा शत-प्रतिशत है, जिससे किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। प्रशासन अब मलबे को हटाने और नुकसान का सटीक आकलन करने की कवायद में जुट गया है।
\r\n\r\nCM योगी आदित्यनाथ का कड़ा एक्शन: "तत्काल फील्ड में उतरें अफसर, एक भी किसान न रहे परेशान"
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी त्वरित कार्रवाई और प्रशासनिक कसावट के लिए जाने जाते हैं। रविवार सुबह जैसे ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र में मौसम बिगड़ने और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की खबरें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंचीं, सीएम योगी ने तत्काल एक्शन लिया।
\r\n\r\nमुख्यमंत्री ने किसी भी तरह की कागजी खानापूर्ति को दरकिनार करते हुए सीधे राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs), उप-जिलाधिकारियों (SDMs), तहसीलदारों और कृषि विभाग के आला अफसरों को सख्त निर्देश जारी किए।
\r\n\r\nमुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
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- \r\n एसी कमरों से बाहर आएं अधिकारी: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कोई भी अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट तैयार नहीं करेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल फील्ड (ग्राउंड जीरो) पर उतरना होगा।\r\n \r\n
- \r\n किसानों से सीधा संवाद: अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित गांवों में जाएं, किसानों के बीच बैठें, उनसे सीधा संवाद करें और उनकी पीड़ा को समझें।\r\n \r\n
- \r\n पारदर्शी और त्वरित नुकसान आकलन: बेमौसम बारिश, तेज आंधी और संभावित ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना, मटर और अन्य रबी की फसलों को जो भी नुकसान हुआ है, उसका तत्काल और पूरी पारदर्शिता के साथ आकलन (Survey) किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n राहत आयुक्त (Relief Commissioner) को निर्देश: सीएम योगी ने राहत आयुक्त कार्यालय को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। राहत आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रदेश के सभी जिलों के फील्ड अधिकारियों से सीधे और निरंतर संपर्क में रहें।\r\n \r\n
- \r\n समय पर मिले मुआवजा: सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि फसलों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त होते ही, बिना किसी लालफीताशाही (Red tapism) के, पीड़ित किसानों को तत्काल सरकारी मुआवजे (Compensation) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अन्नदाता को किसी भी सूरत में भटकना न पड़े।\r\n \r\n
मुख्यमंत्री के इन निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश का प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है और राजस्व विभाग की टीमें गांवों की ओर कूच कर चुकी हैं।
\r\n\r\nफसलों पर संकट के काले बादल: किसानों की बढ़ी धड़कनें, दाने खराब होने का खौफ
\r\n\r\nयह बेमौसम बारिश शहरों में रहने वाले आम लोगों के लिए भले ही गर्मी से राहत और 'सुहाने मौसम' का पैगाम लेकर आई हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए यह आसमान से बरसती आफत है। 15 मार्च का समय उत्तर प्रदेश के कृषि चक्र में बेहद संवेदनशील होता है। इस समय रबी की फसलें (विशेषकर गेहूं) अपने अंतिम चरण में होती हैं।
\r\n\r\nगेहूं की फसल पर सबसे बड़ा खतरा: खेतों में इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह से तैयार खड़ी है। बालियों में दाने भर चुके हैं और फसल पकने की कगार पर है। फसल का वजन इस समय सबसे अधिक होता है। ऐसे में जब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलती है और साथ में बारिश होती है, तो भारी बालियों वाली गेहूं की फसल जमीन पर बिछ जाती है। इसे कृषि विज्ञान की भाषा में फसल का गिरना (Crop Lodging) कहा जाता है।
\r\n\r\nकिसानों का दर्द और विशेषज्ञों की चिंता: खबरीलाल की टीम ने कई जिलों में किसानों से बात की। किसानों का कहना है कि:
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- \r\n "साहब, पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। गेहूं की फसल जमीन पर लेट गई है। अब जब हम हार्वेस्टर या मजदूरों से इसकी कटाई करवाएंगे, तो आधी फसल खेत में ही छूट जाएगी।"\r\n \r\n
- \r\n "पानी लगने से बालियों में मौजूद दाने काले पड़ जाएंगे या सड़ने लगेंगे। इससे उपज की गुणवत्ता (Quality) और मात्रा (Quantity) दोनों में भारी गिरावट आएगी, जिससे हमें मंडी में सही भाव नहीं मिलेगा।"\r\n \r\n
कृषि विशेषज्ञों (Agricultural Experts) की राय: विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार नमी (Moisture) बने रहने से खेतों में फंगस और अन्य खतरनाक रोग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से सरसों और चना की फसल पर इस बारिश का बेहद नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, इस सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है। कृषि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जिन इलाकों में तेज हवा नहीं चली है और केवल हल्की बूंदाबांदी हुई है, वहां कुछ पछेती (Late-sown) दलहनी फसलों, गन्ने की नई बुवाई और ग्रीष्मकालीन सब्जियों (लौकी, तोरई, कद्दू आदि) को इस बारिश से संजीवनी मिल सकती है। सिंचाई का एक चक्र बच जाने से उन किसानों को आंशिक फायदा भी हो सकता है।READ ALSO:-महाघोटाला: 5000 करोड़ के पान मसाला और सुपारी सिंडिकेट का पर्दाफाश, 250 करोड़ की GST डकारने वालों पर मेरठ कोर्ट का कड़ा प्रहार
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मौसम विज्ञान: आखिर यूपी में अचानक क्यों आया यह बड़ा बदलाव?
\r\n\r\nमार्च के मध्य में आमतौर पर उत्तर प्रदेश में चिलचिलाती धूप और लू (Heatwave) की शुरुआत हो जाती है। तो फिर अचानक आसमान से यह आफत क्यों बरसने लगी? इस वैज्ञानिक कारण को समझने के लिए खबरीलाल की टीम ने लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह से विस्तार से बात की।
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मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने स्पष्ट किया, "इस पूरे मौसमी बदलाव का मुख्य कारण एक बेहद सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Active Western Disturbance) है। भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाली नमी युक्त सर्द हवाएं जब हिमालयी क्षेत्रों से टकराती हैं, तो मैदानी इलाकों में मौसम एकदम से पलट जाता है। इसी विक्षोभ के कारण आज से प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो गया है।"
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48 घंटे का हाई अलर्ट: अतुल सिंह ने आगे बताया कि अगले दो दिनों (48 घंटों) तक उत्तर प्रदेश के पूर्वी (Purvanchal) और पश्चिमी (Paschim UP) दोनों ही हिस्सों में मौसम बेहद अस्थिर रहेगा। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की खतरनाक रफ्तार से आंधी चलेगी। बादलों की भीषण गर्जना के साथ कई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने (Lightning strikes) और ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी पूरी आशंका है।
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19 मार्च को आएगा एक और तूफान: सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है। मौसम विभाग के राडार और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, 19 मार्च से एक नया और अधिक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश में सक्रिय होने जा रहा है। इसका व्यापक असर पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा, जिससे मार्च के अंत तक मौसम का मिजाज ठंडा और अस्थिर बना रह सकता है।
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यूपी के प्रमुख शहरों का विस्तृत हाल: कहां बरसी राहत, कहां गिरी आफत?
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश एक विशाल राज्य है, और मौसम का असर हर जिले में अलग-अलग तरह से देखने को मिल रहा है। आइए एक नजर डालते हैं प्रदेश के प्रमुख शहरों के ताजा हालात पर:
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1. नवाबों का शहर लखनऊ: धूलभरी आंधी और बूंदाबांदी राजधानी लखनऊ में रविवार की सुबह की शुरुआत एक खौफनाक धूलभरी आंधी के साथ हुई। तेज हवाओं ने पूरे शहर को धूल के गुबार में ढक लिया, जिससे दृश्यता (Visibility) बेहद कम हो गई। इसके कुछ ही देर बाद आसमान में घने काले बादल छा गए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। वीकेंड होने के कारण जो लोग सुबह-सुबह बाइक या स्कूटी से बाहर निकले थे, उन्हें अचानक रेनकोट निकालने पड़े। मौसम खुशनुमा जरूर हुआ, लेकिन आंधी ने शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा दी।
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2. एनसीआर का हाल (नोएडा और गाजियाबाद): 40 किमी की रफ्तार से चलीं हवाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे नोएडा और गाजियाबाद में मौसम पूरी तरह से बदल गया है। गाजियाबाद में सुबह से ही तेज हवाओं के साथ लगातार बूंदाबांदी हो रही है। मौसम विभाग ने आज गाजियाबाद में लगभग 8 मिलीमीटर बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही सर्द हवाओं ने लोगों को वापस गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर कर दिया है। सुबह न्यूनतम तापमान 17°C तक गिर गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 31°C रहने का अनुमान है।
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3. क्रांतिधरा मेरठ: ठंडक का लौट आया अहसास मेरठ में सुबह के समय झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। तेज बारिश के बाद चल रही ठंडी हवाओं से लोगों को एक बार फिर से दिसंबर-जनवरी वाली ठंडक का अहसास हो रहा है। दिन का तापमान लुढ़ककर 24 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने मेरठ और आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटों तक हल्की बारिश और तेज हवा चलने की प्रबल संभावना जताई है।
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4. बुलंदशहर: घने बादलों ने किया दिन में अंधेरा बुलंदशहर जिले में रविवार की सुबह से ही बादलों ने सूर्य देव को पूरी तरह ढक लिया। घने काले बादलों के साथ तेज हवाएं चलने लगीं और कई ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में अच्छी खासी बारिश दर्ज की गई। इस बारिश ने पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही चिलचिलाती गर्मी और उमस से लोगों को बड़ी राहत दी है।
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5. बिजनौर: आकाशीय बिजली का खौफ और सुहाना मौसम बिजनौर जिले में मौसम का मिजाज अचानक और नाटकीय रूप से बदल गया। तड़के आसमान में डरावने काले बादल छा गए और आकाशीय बिजली भीषण रूप से कड़कने लगी, जिससे लोग सहम गए। इसके कुछ देर बाद झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिससे मौसम बेहद सुहाना हो गया। बारिश रुकने के बाद चल रही ठंडी हवाओं ने माहौल को खुशनुमा बना दिया है, लेकिन बिजनौर के किसानों में गेहूं की फसल को लेकर भारी दहशत है।
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6. हापुड़: पारा 3 डिग्री लुढ़का, किसानों के लिए 'मिक्सड फीलिंग्स' हापुड़ में रविवार सुबह हुई हल्की बारिश ने तापमान के ग्राफ को सीधा 3 डिग्री नीचे गिरा दिया है। अधिकतम तापमान 29°C और न्यूनतम तापमान 18°C दर्ज किया गया। हापुड़ के कुछ कृषि जानकारों का मानना है कि यह हल्की बारिश वर्तमान में कुछ फसलों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, किसान इस बात से डरे हुए हैं कि यदि बारिश का यह सिलसिला रुका नहीं और लगातार जारी रहा, तो खेतों में पानी भर जाएगा और जड़ें सड़ने लगेंगी।
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7. गोंडा: आंधी ने तोड़े पेड़, बिजली सप्लाई ठप पूर्वांचल की ओर बढ़ें तो गोंडा जिले में मौसम ने रौद्र रूप दिखाया। रविवार सुबह अचानक तेज हवाओं के साथ इतनी जोरदार बारिश शुरू हुई कि दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया। आकाशीय बिजली लगातार कड़कती रही। शहर से लेकर कर्नलगंज, तरबगंज, मनकापुर और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में इस तूफान का भारी असर दिखा। आंधी की गति इतनी तेज थी कि कई जगहों पर पेड़ों की भारी-भरकम टहनियां टूटकर बिजली के तारों पर गिर गईं, जिससे पूरे जिले की बिजली सप्लाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
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8. धर्मनगरी वाराणसी: AQI 222, शाम तक बदलेगा मिजाज बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी (काशी) में रविवार की सुबह मौसम साफ रहा। अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय हवा शांत थी और शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 222 (खराब श्रेणी) दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग का स्पष्ट पूर्वानुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ का असर जौनपुर-प्रयागराज होते हुए वाराणसी में शाम तक पहुंच जाएगा और यहां भी मौसम में भारी बदलाव देखने को मिलेगा।
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9. बरेली: बादलों का डेरा नाथ नगरी बरेली में सुबह से ही आसमान में काले बादलों का मजबूत डेरा है। दिन का तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया। ठंडी हवाएं चल रही हैं और अगले 24 घंटों में बारिश का अलर्ट यहां भी लागू है।
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बुंदेलखंड में कुदरत का अजीब खेल: एक तरफ आंधी-पानी, दूसरी तरफ भयंकर लू
\r\n\r\nजहां एक तरफ पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश बारिश और ठंड से ठिठुर रहा है, वहीं बुंदेलखंड क्षेत्र में मौसम का एक बिल्कुल विपरीत और अजीबोगरीब रूप देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका इस समय भयंकर गर्मी की चपेट में है।
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पिछले 24 घंटों के आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो बांदा जिला पूरे प्रदेश में सबसे गर्म शहर रहा। यहां आसमान से आग बरस रही है और अधिकतम तापमान 40.2°C के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। इसी तरह झांसी में पारा 38.3°C और उरई (जालौन) में 37.8°C पहुंच गया है। एक ही राज्य में मौसम का यह दोहरा चरित्र (Dual character) जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का एक स्पष्ट संकेत है।
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स्वास्थ्य चेतावनी (Health Advisory): बदलते मौसम में क्या कहते हैं डॉक्टर?
\r\n\r\nमौसम में इस अचानक और भारी उतार-चढ़ाव (Fluctuation) का सीधा असर इंसानी शरीर की इम्युनिटी (Immunity) पर पड़ता है। कभी तेज गर्मी, तो कभी अचानक बारिश और सर्द हवाएं—यह स्थिति वायरल इंफेक्शन के लिए सबसे अनुकूल होती है।
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चिकित्सा विशेषज्ञों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने आम जनता के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है:
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- \r\n वायरल फीवर और जुकाम से बचें: तापमान में इस अचानक गिरावट से सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सर्द हवाओं से बचाकर रखें।\r\n \r\n
- \r\n हाइड्रेशन का रखें ध्यान: दोपहर के समय जब बादल छंटते हैं, तो तेज और चुभने वाली धूप निकल सकती है। इसलिए धूप में बाहर निकलने से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। नींबू पानी, ओआरएस (ORS) और नारियल पानी का सेवन करते रहें।\r\n \r\n
- \r\n खान-पान: फ्रिज का ठंडा पानी पीने से सख्त परहेज करें। हल्का और सुपाच्य भोजन लें।\r\n \r\n
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मौसम विभाग का विस्तृत अलर्ट: आपकी सुरक्षा के लिए सूची
\r\n\r\nमौसम विभाग (IMD) ने 15, 16 और 17 मार्च के लिए जो रेड और येलो अलर्ट जारी किए हैं, उनकी सूची इस प्रकार है, ताकि आप पहले से सतर्क रह सकें:
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35 जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट: देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं। इन सभी जिलों में प्रशासन को मुस्तैद कर दिया गया है।
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10 जिलों में खतरनाक ओलावृष्टि (Hailstorm) का अलर्ट: पूर्वांचल के देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और इनके आसपास के सटे हुए इलाकों में बादलों के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने की प्रबल संभावना है। ओले गिरना किसानों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होती है, क्योंकि यह फसल को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। आम लोगों को सलाह दी जाती है कि ओलावृष्टि के दौरान सुरक्षित पक्के मकानों के अंदर ही रहें और वाहनों को शेड के नीचे खड़ी करें।
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आगामी दिनों का कैलेंडर (Weather Forecast):
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- \r\n 16 मार्च (सोमवार): पश्चिमी और पूर्वी यूपी में घने बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ बौछारें पडेंगी। ओलावृष्टि की घटनाएं बढ़ सकती हैं। हवा की रफ्तार 50 किमी/घंटा तक जा सकती है।\r\n \r\n
- \r\n 17 मार्च (मंगलवार): मौसम में हल्का सुधार देखने को मिलेगा। आसमान साफ रहेगा, हालांकि कुछ हिस्सों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। सुबह के समय कहीं-कहीं हल्की धुंध (Mist) या कोहरा देखने को मिल सकता है।\r\n \r\n
- \r\n 19 मार्च: एक नया पश्चिमी विक्षोभ फिर से प्रदेश में एंट्री करेगा, जिसके लिए आगे के अलर्ट जारी किए जाएंगे।\r\n \r\n
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खबरीलाल की अपील: मौसम के इस बिगड़ते मिजाज को हल्के में न लें। आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में बिल्कुल न खड़े हों। किसान भाई अपनी काटी गई फसल को तिरपाल से ढकने का त्वरित प्रबंध करें। राज्य सरकार और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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उत्तर प्रदेश के हर शहर, हर गांव की पल-पल की सबसे तेज, सटीक और ग्राउंड-जीरो खबरों के लिए लगातार पढ़ते रहें खबरीलाल मीडिया।
Sabse pehle comment karne wale banein.