उत्तर प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। पिछले कुछ दिनों से खिल रही धूप और बढ़ते तापमान के बीच, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने एक चौंकाने वाला अपडेट जारी किया है। अगर आप सोच रहे थे कि ठंड अब पूरी तरह विदा हो चुकी है, तो ठहर जाइए। कुदरत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में 17 और 18 फरवरी को बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बौछारों का अलर्ट जारी किया है।READ ALSO:-मेरठ में 'रफ़्तार' और 'सियासत' का महाकुंभ: 22 फरवरी को PM मोदी करेंगे नमो भारत और मेट्रो का भव्य आगाज, मिशन 2027 का होगा शंखनाद
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पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता ने उत्तर भारत के वायुमंडल में हलचल मचा दी है, जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य जिलों में देखने को मिलेगा। हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है, जो न केवल ठंडक का अहसास कराएगी बल्कि दिन के तापमान को भी नीचे गिराएगी।
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आइये, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर मौसम विभाग ने क्या भविष्यवाणी की है, किन जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर होगा, किसानों के लिए क्या सलाह है और आने वाले 48 घंटे यूपी के लिए कैसे रहने वाले हैं।
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पश्चिमी विक्षोभ: मौसम में बदलाव का मुख्य कारण

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इस अचानक बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह विक्षोभ वर्तमान में पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर भारत के क्षेत्रों के ऊपर बना हुआ है। जब यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, तो यह पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश लेकर आएगा।
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उत्तर प्रदेश, अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, इस सिस्टम के प्रभाव क्षेत्र में आ रहा है। अरब सागर से उठने वाली नमी वाली हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ का टकराव यूपी के पश्चिमी जिलों में बादलों की एक मोटी परत बनाएगा। यही कारण है कि 17 फरवरी से ही मौसम का मिजाज बिगड़ना शुरू हो जाएगा।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी के महीने में इस तरह के विक्षोभ का आना सामान्य है, लेकिन इस बार हवाओं की गति और बारिश की तीव्रता कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक हो सकती है। यह 'विंटर रेन' (Winter Rain) रबी की फसलों के लिए 'गोल्डन ड्रॉप्स' भी साबित हो सकती है, लेकिन अगर हवा तेज रही तो यह मुसीबत भी बन सकती है।
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तारीख दर तारीख: कैसा रहेगा मौसम का हाल?

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मौसम विभाग ने 17 और 18 फरवरी को लेकर जो मैप तैयार किया है, वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पश्चिमी यूपी से शुरू होकर यह सिस्टम मध्य यूपी की तरफ बढ़ेगा।
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17 फरवरी: पश्चिमी यूपी में आंधी और बारिश की दस्तक

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सप्ताह की शुरुआत में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को मौसम में बदलाव महसूस होने लगेगा। 17 फरवरी की सुबह या दोपहर तक आसमान में बादल छाने लगेंगे और शाम होते-होते कई जिलों में बूंदाबांदी शुरू हो सकती है।
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    प्रभावित जिले: नोएडा (Gautam Buddha Nagar), गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़, मथुरा, और सहारनपुर।
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    हवा की गति: 30 से 40 किमी/घंटा।
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    चेतावनी: कुछ स्थानों पर बिजली गिरने (Lightning strikes) और तेज झोंके वाली हवाओं (Gusty winds) की संभावना है। एनसीआर (NCR) के निवासियों को ऑफिस से लौटते समय बारिश का सामना करना पड़ सकता है।
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18 फरवरी: बारिश का विस्तार और मध्य यूपी में असर

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अगले दिन यानी 18 फरवरी को, पश्चिमी विक्षोभ का असर पूर्व की ओर खिसकेगा। बारिश का दायरा बढ़कर राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के जिलों तक पहुँच जाएगा।
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    प्रभावित जिले: लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी, और फतेहपुर।
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    मौसम का हाल: इन जिलों में दिन भर रुक-रुक कर बारिश हो सकती है। सूर्य देवता के दर्शन दुर्लभ होंगे और दिन का अधिकतम तापमान तेजी से गिरेगा।
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    ठंड की वापसी: बारिश के कारण न्यूनतम तापमान में ज्यादा गिरावट भले न हो, लेकिन दिन के समय होने वाली 'शीत लहर' (Wind Chill Factor) लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर सकती है।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश: मौसम साफ रहने के आसार

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जहां पश्चिमी और मध्य यूपी बारिश से भीग रहे होंगे, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के जिले जैसे प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया और आजमगढ़ में मौसम के शुष्क रहने का अनुमान है। यहाँ बादल आ सकते हैं, लेकिन भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम है। यहाँ अच्छी धूप निकलने से दिन का मौसम सुहावना बना रहेगा।
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तापमान में उतार-चढ़ाव: ठंड अभी गई नहीं है

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फरवरी का दूसरा पखवाड़ा अक्सर गर्मी की आहट लेकर आता है, लेकिन इस बार बारिश ने ब्रेक लगा दिया है। मौसम विभाग के अनुसार:
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    अधिकतम तापमान (Maximum Temperature): बारिश और बादलों के कारण दिन का तापमान जो 26-28 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा था, वह गिरकर 21°C से 24°C के बीच आ सकता है। यह सामान्य से 3-4 डिग्री कम होगा।
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  • \r\n
    न्यूनतम तापमान (Minimum Temperature): रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट नहीं होगी क्योंकि बादल रात की गर्मी (Earth's radiation) को रोक लेते हैं। फिर भी, यह 9°C से 11°C के बीच बना रहेगा।
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इसका मतलब है कि आपको अपने गर्म कपड़े, जैकेट और स्वेटर अभी पैक नहीं करने चाहिए। खास तौर पर सुबह और शाम के समय दोपहिया वाहन चालकों को अच्छी खासी ठंड लग सकती है।
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जिला-वार मौसम विश्लेषण (District-wise Breakdown)

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आइए जानते हैं प्रदेश के प्रमुख शहरों में मौसम कैसा रहने वाला है:
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    नोएडा और गाजियाबाद: दिल्ली से सटे इन इलाकों में प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल सकती है। बारिश हवा में मौजूद धूल और प्रदूषकों (PM 2.5) को नीचे बैठा देगी। 17 तारीख की शाम को ट्रैफिक धीमा हो सकता है।
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  • \r\n
    मेरठ और मुजफ्फरनगर: यह क्षेत्र 'गन्ना बेल्ट' है। यहाँ बारिश मध्यम हो सकती है। किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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  • \r\n
    लखनऊ: नवाबों के शहर में 18 फरवरी को मौसम सुहाना रहेगा। हल्की से मध्यम बारिश शहर की धूल को धो देगी, लेकिन जलभराव की समस्या निचले इलाकों में हो सकती है।
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  • \r\n
  • \r\n
    कानपुर: औद्योगिक नगरी में भी 18 तारीख को बारिश के आसार हैं। गंगा किनारे होने के कारण यहाँ हवाओं में नमी ज्यादा रहेगी।
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  • \r\n
    मथुरा और आगरा: 17 फरवरी को यहाँ भी मौसम बदलेगा। पर्यटकों को ताजमहल या बांके बिहारी मंदिर जाते समय छाता साथ रखने की सलाह दी जाती है।
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किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी (Farmers' Corner)

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उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, और इस समय खेतों में रबी की फसलें (गेहूँ, सरसों, आलू, दलहन) लहलहा रही हैं। ऐसे में यह बेमौसम बारिश और आंधी 'दोधारी तलवार' साबित हो सकती है।
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फायदे (Pros):

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    गेहूँ (Wheat): अगर बारिश हल्की होती है, तो यह गेहूँ की फसल के लिए अमृत समान है। इससे दाने मोटे होंगे और सिंचाई की लागत बचेगी।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    तापमान नियंत्रण: बढ़ते तापमान से गेहूँ की फसल समय से पहले पकने लगती है (Terminal Heat Stress)। बारिश तापमान कम करेगी, जिससे फसल को पकने का पूरा समय मिलेगा और पैदावार बढ़ेगी।
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नुकसान (Cons):

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  1. \r\n
    सरसों (Mustard) और अरहर: जिन खेतों में सरसों पककर तैयार खड़ी है या कटाई हो चुकी है, वहाँ बारिश भारी नुकसान पहुँचा सकती है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    आलू (Potato): आलू की खुदाई का काम चल रहा है। अगर खेतों में पानी भरा, तो आलू सड़ने का खतरा पैदा हो जाएगा।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    तेज हवा (Lodging): सबसे बड़ा खतरा बारिश से नहीं, बल्कि 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं से है। इससे लंबी फसलें (जैसे सरसों और भारी बालियों वाला गेहूँ) गिर सकती हैं, जिसे 'लॉजिंग' कहते हैं। इससे उत्पादन घट सकता है।
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  6. \r\n
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कृषि वैज्ञानिकों की सलाह:

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  • \r\n
    सिंचाई रोक दें: मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए किसान भाई अभी खेतों में सिंचाई न करें।
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  • \r\n
  • \r\n
    जल निकासी: जिन खेतों में आलू या सब्जी लगी है, वहाँ जल निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध करें ताकि पानी जमा न हो।
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  • \r\n
  • \r\n
    कीटनाशक छिड़काव: बारिश के तुरंत बाद कीटनाशकों का छिड़काव न करें, क्योंकि वह धुल जाएगा। मौसम साफ होने का इंतजार करें।
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  • \r\n
  • \r\n
    कटी फसल: अगर खेत में कटी हुई फसल पड़ी है, तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुँचाएं या तिरपाल से ढक दें।
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  • \r\n
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स्वास्थ्य और जीवनशैली पर प्रभाव (Health Advisory)

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मौसम में यह अचानक बदलाव स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील है। इसे 'सैंडविच मौसम' कहा जाता है—कभी गर्मी, कभी सर्दी। ऐसे में फ्लू और वायरल बुखार का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
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क्या करें:

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    बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल: तापमान में गिरावट बच्चों और बुजुर्गों को जल्दी बीमार कर सकती है। उन्हें पूरे कपड़े पहनाकर रखें।
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  • \r\n
  • \r\n
    खान-पान: ठंडी चीजों (कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम) से परहेज करें। अदरक वाली चाय, सूप और गर्म पानी का सेवन बढ़ाएं।
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  • \r\n
  • \r\n
    भीगने से बचें: यह बारिश मानसूनी नहीं है, यह ठंडी बारिश है। इसमें भीगने से निमोनिया या तेज बुखार हो सकता है। रेनकोट और छाता हमेशा साथ रखें।
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  • \r\n
  • \r\n
    मच्छर जनित रोग: बेमौसम बारिश कहीं-कहीं पानी जमा कर सकती है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। अपने घर के आसपास सफाई रखें।
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  • \r\n
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यातायात और सुरक्षा (Traffic & Safety Tips)

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बारिश और तेज हवाएं सड़क सुरक्षा के लिए भी चुनौती पेश करती हैं।
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    वाहन चलाते समय: गीली सड़कों पर टायरों की पकड़ (Grip) कम हो जाती है। अपनी गाड़ी की स्पीड कम रखें और अचानक ब्रेक लगाने से बचें।
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  • \r\n
  • \r\n
    विजिबिलिटी: बारिश के दौरान विजिबिलिटी कम हो सकती है, इसलिए अपनी हेडलाइट्स या फॉग लाइट्स ऑन रखें।
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  • \r\n
  • \r\n
    पेड़ों और खंभों से दूरी: तेज आंधी में पुराने पेड़ या होर्डिंग्स गिरने का खतरा रहता है। अपनी गाड़ी कभी भी कमजोर पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे पार्क न करें।
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  • \r\n
  • \r\n
    टू-व्हीलर राइडर्स: हेलमेट का शीशा साफ रखें और अच्छी क्वालिटी का रेनकोट पहनें ताकि ध्यान न भटके।
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  • \r\n
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क्या यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का संकेत है?

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अक्सर फरवरी में पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, लेकिन इनकी तीव्रता और आवृत्ति (Frequency) में बदलाव जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करता है। कभी फरवरी बेहद गर्म होती है, तो कभी आंधी-तूफान वाली। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण 'एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स' (Extreme Weather Events) बढ़ रहे हैं।
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इस साल भी हमने देखा कि जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ी और फिर अचानक तापमान बढ़ा। अब यह बारिश का स्पेल (Spell) बता रहा है कि मौसम अब पहले जैसा अनुमानित (Predictable) नहीं रहा। यह किसानों और आम जनता दोनों के लिए अनुकूलन (Adaptation) की मांग करता है।
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सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

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अगले 48 घंटे उत्तर प्रदेश, खास तौर पर पश्चिमी और मध्य यूपी के निवासियों के लिए हलचल भरे रहने वाले हैं। 17 और 18 फरवरी को घर से निकलने से पहले एक बार आसमान की ओर जरूर देखें और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखें।
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यह बारिश जहाँ प्रदूषण को कम करेगी और कुछ फसलों को जीवनदान देगी, वहीं शहरी जीवन की रफ्तार को थोड़ा धीमा भी कर सकती है। IMD की चेतावनी को हल्के में न लें। अपनी दिनचर्या की योजना मौसम के अनुसार ही बनाएं।
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याद रखने योग्य मुख्य बातें:

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  1. \r\n
    तारीख: 17 फरवरी (पश्चिम यूपी), 18 फरवरी (मध्य यूपी)।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    अलर्ट: बारिश, 30-40 किमी/घंटा हवा, आंधी।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    तैयारी: छाता रखें, गर्म कपड़े पहनें, वाहन धीरे चलाएं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    किसान: सिंचाई रोकें और जल निकासी सुनिश्चित करें।
    \r\n
  8. \r\n
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मौसम के हर पल के अपडेट और लाइव जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें। हम आपको हर जिले की रिपोर्ट सबसे पहले पहुँचाएंगे।
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FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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प्रश्न: क्या पूरे उत्तर प्रदेश में बारिश होगी?
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उत्तर: नहीं, मौसम विभाग के अनुसार मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश (वाराणसी, प्रयागराज) में मौसम ज्यादातर साफ रहेगा।
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प्रश्न: क्या इस बारिश से ठंड वापस आएगी?
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उत्तर: हाँ, दिन के तापमान में गिरावट आएगी और तेज हवाओं के कारण सुबह-शाम की ठंडक बढ़ जाएगी, लेकिन कड़ाके की सर्दी (Cold Wave) की वापसी की संभावना कम है।
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प्रश्न: यह बारिश कितने दिन तक चलेगी?
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उत्तर: यह सिस्टम मुख्य रूप से 17 और 18 फरवरी के लिए सक्रिय है। 19 फरवरी से मौसम धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है।
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प्रश्न: क्या ओले गिरने की संभावना है?
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उत्तर: कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना जताई गई है, जो फसलों के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
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