उत्तर प्रदेश में ठंड की विदाई का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने वाला है। फरवरी का महीना अपने आधे सफर को तय कर चुका है और अब दिन में कड़ी धूप लोगों को गर्मी का अहसास कराने लगी है। हालांकि, सुबह और शाम की गुलाबी ठंड अभी भी बरकरार है। इस बीच, मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में मौसम बिगड़ने की चेतावनी जारी की है।Read also:-RRTS MAHA-COVERAGE: दिल्ली से मेरठ अब 'पलक झपकते' ही! 22 फरवरी को PM मोदी देंगे सदी की सबसे बड़ी सौगात; नमो भारत और मेट्रो की 'डबल रफ्तार' से बदलेगी NCR की तकदीर
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ताजा अपडेट के मुताबिक, एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है, जिसके चलते 17 और 18 फरवरी को उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह बदलता मौसम न केवल आम जनजीवन को प्रभावित करेगा, बल्कि किसानों के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। इसके साथ ही, वर्ष 2026 की गर्मियों को लेकर भी बेहद डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
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पश्चिमी विक्षोभ की वापसी: 17 और 18 फरवरी को क्या होगा?
\r\n\r\nलखनऊ मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। आमतौर पर फरवरी के महीने में पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति कम हो जाती है, लेकिन इस बार यह सिस्टम फिर से बन रहा है।
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- \r\n बारिश की संभावना: 17 फरवरी की शाम से मौसम में बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा। 18 फरवरी को प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n तेज हवाएं: बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। यह हवाएं दिन के तापमान में थोड़ी गिरावट ला सकती हैं, लेकिन रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n पहाड़ों पर बर्फबारी: मैदानी इलाकों में बारिश के साथ ही उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर बर्फबारी का अनुमान है। इसका सीधा असर यूपी के तराई वाले जिलों पर पड़ेगा, जहां ठंडी हवाएं सिहरन पैदा कर सकती हैं।\r\n \r\n
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रविवार का मौसम: बांदा सबसे गर्म
\r\n\r\nबीते रविवार (15 फरवरी) को प्रदेश के मौसम में गर्मी की धमक साफ महसूस की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार:
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- \r\n बांदा: प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।\r\n \r\n
- \r\n झांसी: बुंदेलखंड का यह शहर गर्मी के मामले में दूसरे नंबर पर रहा, जहां पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।\r\n \r\n
- \r\n लखनऊ और कानपुर: राजधानी लखनऊ में भी दिन के समय धूप में तेजी महसूस की गई, हालांकि रात का तापमान सामान्य के करीब बना हुआ है।\r\n \r\n
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मौसम विभाग का कहना है कि 18 फरवरी के बाद जब पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होगा, तो अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की और बढ़ोतरी होगी। यानी फरवरी के अंत तक उत्तर प्रदेश से ठंड पूरी तरह विदा हो जाएगी और मार्च की शुरुआत तपिश के साथ होगी।
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किसानों के लिए अलर्ट: बारिश और हवा से फसलों को खतरा
\r\n\r\nइस समय उत्तर प्रदेश के खेतों में रबी की फसलें, विशेषकर गेहूं (Wheat) और सरसों (Mustard), अपनी परिपक्वता की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं।
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1. गेहूं की फसल पर असर (Wheat Lodging Risk)
\r\n\r\nकृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं की फसल में दाने भरने की प्रक्रिया (Grain Filling Stage) शुरू हो चुकी है। इस समय पौधे का ऊपरी हिस्सा भारी होता है।
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- \r\n अगर 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चलती है और साथ में बारिश होती है, तो फसल के गिरने (Lodging) का खतरा बढ़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n जमीन पर गिरी हुई फसल में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) ठीक से नहीं हो पाता, जिससे दाने कमजोर रह जाते हैं और उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n नमी बढ़ने से गेहूं में फफूंदजनित रोगों (Fungal Diseases) का खतरा भी बढ़ सकता है।\r\n \r\n
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2. सरसों की फसल को नुकसान
\r\n\r\nसरसों की फसल इस समय कटाई के लिए या तो तैयार है या पूरी तरह पक चुकी है।
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- \r\n तेज बारिश से सरसों की फलियां फट सकती हैं, जिससे दाने खेत में ही बिखर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n अगर फसल काटकर खेत में सूखने के लिए रखी गई है, तो बारिश उसे खराब कर सकती है, जिससे तेल की गुणवत्ता (Oil Content) पर असर पड़ेगा।\r\n \r\n
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मौसम विभाग की सलाह: किसानों को सलाह दी गई है कि वे अगले 2-3 दिनों तक सिंचाई रोक दें। अगर फसल कट चुकी है, तो उसे सुरक्षित स्थानों पर भंडारित करें या तिरपाल से ढक दें। कीटनाशकों का छिड़काव भी मौसम साफ होने तक टालने की सलाह दी गई है।
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अब तक कैसा रहा मौसम: 2025-26 की सर्दियों का विश्लेषण
\r\n\r\nइस बार उत्तर प्रदेश में ठंड का पैटर्न पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अलग रहा। नोएडा स्थित स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) के उपाध्यक्ष और मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि यूपी में पिछले 2 साल के मुकाबले इस बार कम ठंड पड़ी।
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प्रमुख बिंदु:
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- \r\n तापमान सामान्य से अधिक: दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किए गए।\r\n \r\n
- \r\n कोहरे में कमी: 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच घने कोहरे (Dense Fog) के दिनों में लगभग 36 फीसदी की कमी देखी गई।\r\n \r\n
- \r\n कोल्ड डे (Cold Day) की स्थिति: इस बार 'एक्सट्रीम कोल्ड डे' (जब दिन का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला जाता है) की घटनाएं बहुत कम हुईं।\r\n \r\n
- \r\n वजह: इसका मुख्य कारण 'ला-नीना' (La Nina) का सक्रिय न होना बताया जा रहा है। प्रशांत महासागर में ला-नीना की स्थिति नहीं बन पाई, जो आमतौर पर भारत में कड़ाके की ठंड और अच्छे मानसून के लिए जिम्मेदार होती है।\r\n \r\n
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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने भी इस बात की पुष्टि की है। उनके अनुसार, इस बार पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता (Intensity) और आवृत्ति (Frequency) दोनों कम रही। पहाड़ों पर कम बर्फबारी हुई, जिससे मैदानी इलाकों में बर्फीली हवाएं (Icy Winds) कम पहुंचीं। इसी वजह से प्रदेश में शीत लहर (Cold Wave) का प्रकोप लंबे समय तक नहीं रहा।
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अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान: 18 फरवरी के बाद क्या?
\r\n\r\nबीएचयू (BHU) के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि अब ठंड अपने अंतिम चरण में है। वर्तमान में वसंत ऋतु (Spring Season) का प्रभाव है, लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।
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- \r\n आगामी बदलाव: अगले 2-3 हफ्तों तक मौसम में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होगा। सुबह और रात में हल्की ठंड रहेगी, जो सुखद महसूस होगी।\r\n \r\n
- \r\n दोपहर की धूप: धूप की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n बूंदाबांदी वाले जिले: 18 फरवरी के आसपास हाथरस, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, ललितपुर और झांसी जैसे जिलों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश प्री-मानसून गतिविधियों (Pre-monsoon activities) की तरह नहीं, बल्कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने का असर होगी।\r\n \r\n
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भविष्यवाणी: कब से पड़ेगी भीषण गर्मी और कितना जाएगा पारा?
\r\n\r\nसाल 2026 की गर्मियां उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने जो अनुमान लगाए हैं, वे चिंताजनक हैं।
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1. मार्च से ही लू (Heatwave) के थपेड़े
\r\n\r\nबीएचयू के वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, मार्च के पहले हफ्ते से ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा।
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- \r\n आमतौर पर होली के आसपास हल्की गर्मी शुरू होती है, लेकिन इस बार मार्च की शुरुआत से ही तापमान में तेजी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई जिलों (खासकर बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी) में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।\r\n \r\n
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2. मई-जून में 45 डिग्री का टॉर्चर
\r\n\r\nअप्रैल में तापमान 40 डिग्री के पार जाने की संभावना है। मई और जून, जो गर्मी के पीक महीने होते हैं, इस बार रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।
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- \r\n अनुमान है कि कई जिलों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज, बांदा, आगरा और झांसी जैसे गर्म शहरों में यह 47 डिग्री तक भी जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n रात की गर्मी: सबसे बड़ी चिंता 'वार्म नाइट्स' (Warm Nights) को लेकर है। रात के समय भी तापमान कम नहीं होगा, जिससे उमस (Humidity) और बेचैनी बनी रहेगी।\r\n \r\n
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3. हीट वेव (Heat Wave) की लंबी अवधि
\r\n\r\nसाल 2026 में हीट वेव के दिनों की संख्या (Number of Heatwave Days) सामान्य से काफी ज्यादा रहने का अनुमान है।
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- \r\n मार्च से मई के दौरान उत्तर भारत, मध्य भारत और मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n सिर्फ तटीय क्षेत्रों (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल) को छोड़कर पूरे देश में गर्मी का प्रकोप देखने को मिलेगा।\r\n \r\n
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4. अल-नीनो (El Nino) का साया
\r\n\r\nहालांकि ला-नीना कमजोर रहा, लेकिन अब वैज्ञानिकों की नजर अल-नीनो पर है। अगर 2026 के मध्य में अल-नीनो की स्थिति बनती है या यह मजबूत होता है, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है और गर्मी की अवधि लंबी खिंच सकती है।
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गर्मी का साइड इफेक्ट: खेती और अर्थव्यवस्था पर असर
\r\n\r\nमौसम का यह उग्र रूप सिर्फ शरीर को ही नहीं झुलसाएगा, बल्कि इसका सीधा असर हमारी थाली और जेब पर भी पड़ेगा। बीएचयू के कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह ने इस बाबत गंभीर चेतावनी दी है।
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फसलों का समय से पहले पकना (Forced Maturity)
\r\n\r\nजब तापमान अचानक बढ़ता है, तो गेहूं जैसी फसलों में 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' (Terminal Heat Stress) की स्थिति पैदा हो जाती है।
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- \r\n दाने सिकुड़ना: गर्मी के कारण फसल अपनी जीवन चक्र को जल्दी पूरा करने की कोशिश करती है। इससे गेहूं के दाने पूरी तरह भर नहीं पाते और सिकुड़ जाते हैं (Shriveled Grains)।\r\n \r\n
- \r\n पैदावार में कमी: दाने कमजोर होने से प्रति बीघा पैदावार में भारी गिरावट आती है।\r\n \r\n
- \r\n दलहनी फसलें: चना और मटर जैसी फसलों को भी गर्म हवाओं से नुकसान होता है। फूल झड़ने लगते हैं और फलियां सूख जाती हैं।\r\n \r\n
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सिंचाई का बढ़ता खर्च
\r\n\r\nप्रोफेसर सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के कारण मिट्टी की नमी (Soil Moisture) बहुत तेजी से सूखती है।
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- \r\n किसानों को फसल बचाने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ेगी।\r\n \r\n
- \r\n डीजल और बिजली का खर्च बढ़ेगा, जिससे खेती की लागत (Input Cost) में इजाफा होगा।\r\n \r\n
- \r\n जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर (Groundwater Level) पहले से नीचे है, वहां पानी का संकट गहरा सकता है।\r\n \r\n
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क्लाइमेट चेंज: क्यों बिगड़ रहा है मौसम का गणित?
\r\n\r\nलखनऊ यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ध्रुवसेन सिंह का कहना है कि साल 2026 में समय से पहले गर्मी का बढ़ना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का स्पष्ट संकेत है।
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अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island Effect)
\r\n\r\nलखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहरों में कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं।
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- \r\n पक्की इमारतें और सड़कें दिन में गर्मी सोखती हैं और रात में उसे छोड़ती हैं।\r\n \r\n
- \r\n इससे शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 2 से 4 डिग्री ज्यादा रहता है। 2026 में यह प्रभाव और गंभीर हो सकता है।\r\n \r\n
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2025 के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े
\r\n\r\nपिछला साल (2025) जलवायु के लिहाज से ऐतिहासिक रहा।
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- \r\n 125 साल का रिकॉर्ड: फरवरी 2025 में औसत न्यूनतम तापमान 1901 के बाद सबसे अधिक रहा। 1901 वह साल है जब से भारत में मौसम का रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n सबसे गर्म साल: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा, जिसमें पृथ्वी का औसत तापमान 1.55 डिग्री सेल्सियस बढ़ा।\r\n \r\n
- \r\n 2026 की भविष्यवाणी: एनवायरनमेंट और क्लाइमेट डाटा यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 दुनिया के अब तक के 4 सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है।\r\n \r\n
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समझिए विज्ञान: ला-नीना और अल-नीनो का खेल
\r\n\r\nमौसम की खबरों में अक्सर आप 'अल-नीनो' और 'ला-नीना' शब्द सुनते होंगे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये क्या हैं और 2026 में इनका क्या रोल है।
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ला-नीना (La Nina) - ठंड और बारिश का दोस्त
\r\n\r\nला-नीना एक समुद्री प्रक्रिया है जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में होती है।
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- \r\n क्या होता है: इसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ठंडा हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n भारत पर असर: जब ला-नीना सक्रिय होता है, तो भारत में मानसून अच्छा होता है और कड़ाके की ठंड पड़ती है।\r\n \r\n
- \r\n इस साल क्या हुआ: 2025 के अंत में मौसम विभाग और अमेरिका की एजेंसी NOAA ने अनुमान लगाया था कि ला-नीना एक्टिव होगा। लेकिन प्रशांत महासागर में यह स्थिति कमजोर रही। यही कारण है कि उत्तर भारत में इस बार कड़ाके की ठंड नहीं पड़ी और पश्चिमी विक्षोभ भी कमजोर रहे।\r\n \r\n
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अल-नीनो (El Nino) - गर्मी और सूखे का कारण
\r\n\r\nयह ला-नीना का ठीक उल्टा है।
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- \r\n क्या होता है: इसमें प्रशांत महासागर का पानी गर्म हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n भारत पर असर: अल-नीनो का सीधा मतलब है- कमजोर मानसून और भीषण गर्मी। यह हवाओं के पैटर्न को बदल देता है जिससे भारत की ओर आने वाले नमी युक्त बादल कम हो जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n 2026 का खतरा: वैज्ञानिकों को आशंका है कि 2026 के मध्य में अल-नीनो की स्थिति बन सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह साल खेती और पानी के लिहाज से बहुत भारी पड़ सकता है।\r\n \r\n
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आने वाली भीषण गर्मी से कैसे बचें? (Health Advisory)
\r\n\r\nचूंकि मार्च से ही लू चलने की संभावना है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभी से सतर्क रहने की सलाह दी है। गर्मी के मौसम में 'हीट स्ट्रोक' (Heat Stroke) जानलेवा हो सकता है।
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क्या करें:
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- \r\n हाइड्रेशन: दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। प्यास न लगने पर भी पानी पीते रहें।\r\n \r\n
- \r\n आहार: अपने भोजन में पानी की मात्रा वाले फल (तरबूज, खीरा, ककड़ी) शामिल करें। मसालेदार भोजन से बचें।\r\n \r\n
- \r\n कपड़े: हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें जो पसीने को सोख सकें।\r\n \r\n
- \r\n धूप से बचाव: दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें। अगर निकलना जरूरी हो तो सिर को ढककर रखें और चश्मा लगाएं।\r\n \r\n
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मौसम का यह बदलता रूप स्पष्ट कर रहा है कि प्रकृति हमें चेतावनी दे रही है। 17 और 18 फरवरी की बारिश और हवाएं जहां एक ओर ठंड की विदाई का संकेत हैं, वहीं दूसरी ओर यह आने वाले कठिन समय की आहट भी हैं। किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखनी होगी। वहीं, आम जनता को भी भीषण गर्मी का सामना करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना होगा। क्लाइमेट चेंज अब केवल किताबों की बात नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुका है।
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यूपी में 17-18 फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिससे गेहूं-सरसों की फसल को नुकसान का खतरा है। इसके बाद तापमान तेजी से बढ़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 2026 में मार्च से ही लू चलेगी और मई-जून में पारा 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। 2025 में ला-नीना के कमजोर रहने से ठंड कम पड़ी, और अब अल-नीनो की आशंका ने गर्मी का खतरा बढ़ा दिया है।
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नोट: यह लेख मौसम विभाग के ताजा अनुमानों और वैज्ञानिकों की राय पर आधारित है। मौसम संबंधी सटीक और रियल-टाइम जानकारी के लिए IMD की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।
Sabse pehle comment karne wale banein.