पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अचानक बदले मौसमी मिजाज ने लोगों को एक बार फिर ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। ताज़ा यूपी मौसम (UP Weather) बुलेटिन के अनुसार, बारिश के बाद सर्द हवाओं ने गलन काफी बढ़ा दी है। तापमान में लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार, 19 फरवरी की सुबह से ही राजधानी लखनऊ और गोरखपुर समेत कई जिलों में घने बादल छाए हुए हैं। फरवरी के मध्य में अचानक ठंड बढ़ने के चलते सुबह-सुबह लोग चौराहों पर अलाव के पास बैठे और खुद को गर्म रखते नज़र आए।Read also:-ऑपरेशन 'सुरक्षा कवच': PM मोदी के स्वागत में 'छावनी' बना मेरठ; SPG ने रचा सुरक्षा का ऐसा 'हाई-टेक चक्रव्यूह' कि परिंदा भी न मार सके पर; 3D मैपिंग और ड्रोन से चप्पे-चप्पे पर नजर
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हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जनता को राहत देते हुए आज प्रदेशभर में 'ग्रीन अलर्ट' जारी किया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब धीरे-धीरे आसमान साफ होगा। IMD का कहना है कि अगले 4 दिनों तक राज्य भर में मौसम पूरी तरह से साफ रहेगा और धूप निकलेगी। बुधवार के आंकड़ों की बात करें तो बांदा 8.2°C न्यूनतम तापमान के साथ प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा। वहीं, मथुरा, नोएडा और बुलंदशहर में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि मेरठ और बरेली में दिन भर काले बादल डेरा डाले रहे। (Internal link to related article)
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पश्चिमी विक्षोभ का असर और आज का यूपी मौसम (UP Weather)
\r\n\r\nलखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह ने मौसम के इस अचानक बदलाव के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि मध्य पाकिस्तान और उसके आसपास के पंजाब इलाके में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हुआ था। इसी मौसमी प्रणाली का सीधा असर पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक देखा गया।
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इसी दबाव के कारण नोएडा, गाजियाबाद, मथुरा और बुलंदशहर जैसे इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब यह प्रणाली आगे बढ़ चुकी है, लेकिन इसके पीछे आने वाली पछुआ हवाएं (Westerly Winds) अपने साथ पहाड़ों की ठंडक ला रही हैं। इन सर्द हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में अभी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आ सकती है। हालांकि, अधिकतम तापमान में किसी विशेष बदलाव की उम्मीद नहीं है और दिन में धूप निकलने से लोगों को राहत मिलेगी।
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तापमान जानिए- गेहूं-सरसों की फसल गिरी तो पैदावार कम होगी
\r\n\r\nफरवरी के महीने में होने वाली यह बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। कृषि विशेषज्ञों ने राज्य के किसानों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। अगर तेज हवा के साथ बारिश का यह दौर वापस लौटता है, तो रबी की प्रमुख फसलें—खासकर गेहूं और सरसों—खेतों में गिर सकती हैं।
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फसल गिरने (Lodging) से पौधों का पोषण चक्र टूट जाता है, जिससे गेहूं की बालियों में दाने कमजोर और पतले रह सकते हैं। इसका सीधा असर कुल पैदावार और किसानों की आय पर पड़ेगा। मौसम विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि वे कटी हुई फसलों को भूलकर भी खुले आसमान के नीचे न रखें। उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित और ढकी हुई जगह पर भंडारण करने को कहा गया है ताकि किसी भी अचानक होने वाले मौसमी बदलाव से बचा जा सके।
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इस साल यूपी में कम क्यों पड़ी ठंड? (Climate Analysis)
\r\n\r\nइस साल उत्तर प्रदेश के लोगों ने महसूस किया होगा कि कड़ाके की वह ठंड नहीं पड़ी, जिसके लिए दिसंबर और जनवरी जाने जाते हैं। नोएडा स्थित स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत इस यूपी मौसम (UP Weather) के बदलते पैटर्न को विस्तार से समझाते हैं। उनके अनुसार, पिछले 2 सालों के मुकाबले इस बार यूपी में ठंड का प्रकोप काफी कम रहा है।
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दिसंबर और जनवरी के महीनों में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ज्यादा दर्ज किए गए। आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच ठंड और बारिश के दिनों में लगभग 36 फीसदी की कमी देखी गई। इस बार 'एक्सट्रीम कोल्ड वेव' (Extreme Cold Wave) या हाड़ कंपाने वाली ठंड देखने को नहीं मिली। पलावत बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में 'ला-नीना' (La-Nina) का एक्टिव न होना रहा। जब ला-नीना मजबूत होता है, तो उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार इसकी अनुपस्थिति ने सर्दियों को हल्का कर दिया।
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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश भी इस बात से सहमति जताते हैं। वे बताते हैं कि इस बार प्रदेश में सर्दियों के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता और फ्रीक्वेंसी काफी कम रही। आम तौर पर पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश लाने वाले ये विक्षोभ इस बार कमजोर रहे, जिससे ठंड के सीजन में होने वाली बारिश (Winter Rain) भी सामान्य से बहुत कम हुई।
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मौसम का बदलाव और भीषण गर्मी की दस्तक
\r\n\r\nबनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि अब ठंड अपने बिल्कुल अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे लेकिन लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। अभी वसंत का मौसम (Spring Season) चल रहा है, जो अगले 2-3 हफ्तों तक ऐसा ही बना रहेगा।
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इस दौरान सुबह और रात के समय हल्की गुलाबी ठंड का अहसास होगा, जबकि दोपहर में चटक धूप थोड़ी तेज और चुभने वाली महसूस होगी। वेदर एक्सपर्ट महेश पलावत के अनुसार, 18-19 फरवरी के आसपास जो हल्की बूंदाबांदी हाथरस, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, ललितपुर और झांसी जैसे इलाकों में देखने को मिली है, वह सर्दियों की आधिकारिक विदाई का संकेत है।
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अब पढ़िए कब से पड़ेगी भीषण गर्मी और कितना पहुंचेगा पारा
\r\n\r\n1. मार्च के पहले हफ्ते से गर्मी की शुरुआत BHU के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव कहते हैं कि मार्च के पहले हफ्ते से ही यूपी मौसम (UP Weather) पूरी तरह से अपना मिजाज बदल लेगा और राज्य में गर्मी का लंबा दौर शुरू हो जाएगा। दिन और रात, दोनों के तापमान में तेजी से उछाल आएगा। अनुमान है कि मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई दक्षिणी और बुंदेलखंड के जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
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2. मई-जून में 42 से 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा प्रोफेसर श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छूने लगेगा। असली परीक्षा मई और जून के महीनों में होगी, जब राज्य के कई जिलों (विशेषकर प्रयागराज, झांसी, आगरा और बांदा) में अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि केवल दिन में ही लू नहीं चलेगी, बल्कि रात के समय भी गर्मी और उमस से लोगों को राहत नहीं मिलेगी। यह स्थिति काफी हद तक 'अल नीनो' (El-Nino) के प्रभाव पर निर्भर करेगी। अगर अल नीनो की स्थिति मजबूत होती है, तो यह गर्मी ऐतिहासिक और ज्यादा जानलेवा हो सकती है।
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3. हीट वेव (Heat Wave) ज्यादा दिनों तक चलेगी मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यूपी समेत लगभग पूरे देशभर में मार्च से मई के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान अपने सामान्य स्तर से अधिक ही रहेगा। खासकर मार्च के महीने में पूरे देश में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की प्रबल संभावना है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस साल लू (Heat Wave) के दिनों की संख्या सामान्य से बहुत ज्यादा रहेगी। केवल पूर्वोत्तर भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल) को छोड़कर उत्तर और मध्य भारत भट्टी की तरह तपेगा।
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4. गर्मी से फसलों को होगा भारी नुकसान BHU के कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह के अनुसार, आने वाला मार्च का महीना किसानों के लिए एक बड़ी और नई चुनौती लेकर आ रहा है। तापमान का यह अचानक और समय से पहले बढ़ना रबी की फसल, विशेष रूप से गेहूं के लिए घातक साबित हो सकता है। इसे 'टर्मिनल हीट' (Terminal Heat) कहते हैं। अत्यधिक गर्मी से गेहूं के दाने पकने से पहले ही सूख जाते हैं और पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, जिससे प्रति हेक्टेयर पैदावार में भारी गिरावट आती है। इसके अलावा, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी दलहन-तिलहन फसलों को भी नुकसान होगा। तेज धूप और बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी की नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ती है और खेती की लागत बढ़ जाती है।
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5. समय से पहले बढ़ती गर्मी, हालात और बिगड़ेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ध्रुवसेन सिंह का विश्लेषण डराने वाला है। उनके अनुसार, साल 2026 में गर्मी समय से काफी पहले आ गई है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग के चलते हीट वेव की घटनाएं अब ज्यादा बार, ज्यादा तीव्रता के साथ और लंबे समय तक हो रही हैं। इसके अलावा, बड़े शहरों (जैसे लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा) में 'अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट' (Urban Heat Island Effect) के कारण हालात ग्रामीण इलाकों से भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। कंक्रीट के जंगल, कम होते पेड़ और गाड़ियों का धुआं मिलकर शहरी तापमान को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं।
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कुल मिलाकर, वर्तमान का यूपी मौसम (UP Weather) एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अभी भले ही बारिश के बाद कुछ दिनों के लिए ठंडी हवाओं ने गलन बढ़ा दी हो और IMD ने 4 दिनों के लिए साफ मौसम का ग्रीन अलर्ट दिया हो, लेकिन यह मात्र एक फौरी राहत है। किसानों को अपनी फसलों को लेकर बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। वहीं, आम जनता को अभी से मार्च और आने वाले महीनों की झुलसाने वाली गर्मी और लंबी हीट वेव के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो जाना चाहिए।
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पश्चिमी यूपी में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से तापमान में 3 डिग्री की गिरावट आई है और सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। IMD ने अगले 4 दिनों तक मौसम साफ रहने का 'ग्रीन अलर्ट' जारी किया है। कृषि विशेषज्ञों ने बेमौसम बारिश से गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान की चेतावनी दी है। वहीं, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस साल कम ठंड पड़ने के बाद अब मार्च से ही भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा, और मई-जून तक प्रदेश के कई जिलों में पारा 45°C तक पहुंच सकता है, जिससे हीट वेव का खतरा काफी बढ़ जाएगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.