लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व यानी चुनाव की निष्पक्षता और सुचिता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहा एक महाअभियान अब अपने अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है। प्रदेश भर में मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चलाया गया 'विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान' (Special Intensive Revision - SIR) पूरा हो चुका है। इस मैराथन प्रक्रिया के बाद जो जिलावार रिपोर्ट और आंकड़े छनकर बाहर आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि प्रदेश की चुनावी जनसांख्यिकी (Electoral Demography) में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रहे हैं।READ ALSO:-उत्तर प्रदेश में 'सर्दी के सितम' पर सरकार का 'वॉर्म' एक्शन: सीएम योगी ने संभाली कमान, अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश- 'ठंड से एक भी व्यक्ति को न हो परेशानी'
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आयोग की तरफ से आगामी 31 दिसंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट (प्रारूप) आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा। लेकिन, उससे ठीक पहले जिलावार सामने आई रिपोर्ट्स ने सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच हलचल मचा दी है। एसआईआर (SIR) की यह विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि मतदाता सूची को 'शुद्ध' (Purify) करने के इस अभियान में प्रदेश के बड़े शहर और महानगर सबसे बड़े 'फिसड्डी' साबित हुए हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर संगम नगरी प्रयागराज और औद्योगिक हब कानपुर तक, मतदाता सूची पर आयोग की ऐसी कैंची चली है कि लाखों नाम लिस्ट से गायब हो गए हैं।
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जिलाकुल वोटरइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम डिजिटाइज़्डइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग%इतने वोटर्स की मौतजिनका पता नहीं चलास्थायी रूप से स्थानांतरितपहले से नामांकितअन्यकुल वोट कटेकटे वोट का प्रतिशत
1सहारनपुर26,42,67522,10,14183.6374,66690,0152,05,47447,54914,8354,32,53916.37
2मुजफ्फरनगर21,12,58617,68,36783.7157,18592,4471,56,12427,96110,5053,44,22216.29
3मेरठ26,99,82020,34,18375.3588,6631,81,0073,13,02239,61843,3346,65,64724.66
4गाजियाबाद28,37,99120,19,85271.1763,8243,19,9733,59,93731,78742,8018,18,32528.83
5बुलंदशहर26,63,71822,60,34884.8657,08677,1112,35,28526,1457,7614,03,38815.14
6गौतम बुद्ध नगर18,65,67314,18,20176.0237,5541,41,9812,20,16135,52312,2604,47,47923.98
7बागपत9,76,7987,99,49981.8523,65433,4301,00,71912,5076,9901,77,30018.15
8आगरा36,00,07127,63,12876.751,06,3582,96,2193,36,62854,59343,1678,36,96523.25
9अलीगढ़27,96,37922,76,19081.4075,5001,51,3512,53,49729,9409,9255,20,21318.60
10मथुरा19,47,36815,73,57480.8155,8931,13,6781,77,77123,8232,6403,73,80519.20
            
11फिरोजाबाद19,02,01215,57,25981.8753,43386,2601,65,61334,6274,8223,44,75518.13
12मैनपुरी14,03,41311,76,53883.8338,64967,24099,06618,0423,8832,26,88016.17
13एटा13,11,96710,91,54183.2032,60563,6291,01,06413,6869,4512,20,44516.80
14हाथरस11,63,5259,73,90983.7030,11440,78897,75218,6162,3481,89,61816.30
15बरेली34,05,82026,91,06779.011,15,2702,35,1382,92,17860,18411,9987,14,76820.99
16बदायूं24,18,40819,25,41279.6182,0811,85,6701,75,23543,3606,6864,93,03320.39
17शहारनपुर23,15,53818,11,61678.2496,5441,56,7871,95,20951,1834,2195,03,94221.76
18पीलीभीत14,67,98812,68,21686.3937,09352,87993,90615,0228771,99,77713.61
19मुरादाबाद24,59,45520,71,84484.2454,0671,07,7261,70,04048,5377,2583,87,62815.76
20रामपुर17,57,74114,36,17081.7144,89185,2031,36,45238,29516,7313,21,57218.29
21बिजनौर27,50,31923,23,16084.4772,60279,8022,32,06432,25710,4514,27,17615.53
22अमरोहा13,70,37411,89,19786.7828,12432,82785,80816,16018,2751,81,19413.22
23कानपुर नगर35,38,26126,36,11174.501,04,0463,10,0563,91,62767,48028,9779,02,18625.50
24कानपुर देहात13,36,17711,32,22084.7435,60252,1181,01,02913,3561,8612,03,96615.26
25इटावा12,29,6319,96,61381.0537,96679,96994,36014,6456,0912,33,04018.95
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आखिर क्यों कटे इतने बड़े पैमाने पर वोट? कौन से जिले रहे सबसे आगे और कौन से पीछे? किन कारणों से आपका नाम भी लिस्ट से हट सकता है? आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं यूपी की वोटर लिस्ट का पूरा गणित और आपके जिले का हाल।
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महानगरों में महा-सफाई: लखनऊ और प्रयागराज में रिकॉर्ड कटौती

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एसआईआर प्रक्रिया का सबसे बड़ा और गहरा आघात प्रदेश के बड़े महानगरों को लगा है। ये आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि शहरी क्षेत्रों में मतदाता सूची में कितनी बड़ी खामियां मौजूद थीं और कैसे लाखों लोग बिना वैध पात्रता के वोटर लिस्ट में जगह बनाए हुए थे।
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जिलाकुल वोटरइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम डिजिटाइज़्डइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग %इतने वोटर्स की मौतजिनका पता नहीं चलापता बदलने वालेपहले से नामांकनअन्यकुल वोट कटेकितने फीसदी वोट कटे
26फर्रुखाबाद13,98,00911,07,18479.2039,0111,07,3931,12,89324,7076,8562,90,86020.81
27कन्नौज12,89,22010,11,12578.4338,04497,9041,18,45019,9103,8082,78,11621.57
28औरैया10,28,6858,70,63084.6429,71540,63779,6597,4006591,58,07015.37
29प्रयागराज46,92,86035,36,55475.361,73,8123,67,1364,88,9591,07,08719,34511,56,33924.64
30फतेहपुर19,32,44116,16,97383.6861,41874,5591,47,18329,4532,8543,15,46716.32
31प्रतापगढ़25,25,13020,25,02080.1988,8861,22,0342,24,30549,73515,1525,00,12619.81
32कौशांबी12,20,79210,01,09382.0039,83042,6101,03,48430,4763,3062,19,70618.00
33झांसी15,77,33713,57,72586.0837,75849,7771,09,09312,05410,9322,19,61413.92
34ललितपुर9,58,7958,63,34890.0516,76919,58152,2406,36050095,4509.96
35जालौन12,97,56010,85,50183.6632,50170,14193,1149,9966,3422,12,09416.35
36हमीरपुर8,39,7317,49,17189.2215,19532,69937,7463,0021,91990,56110.78
37महोबा6,86,9596,01,60787.5814,94829,82835,4764,93716585,35412.42
38बांदा13,49,52111,74,10087.0030,16953,01277,9379,9304,3731,75,42113.00
39चित्रकूट7,38,9486,37,95686.3314,83532,37045,9707,6531681,00,99613.67
40वाराणसी31,53,70525,80,50081.8276,2431,85,7082,53,04147,09011,1355,73,21718.18
41जौनपुर35,70,85129,81,30883.491,03,1251,34,6552,68,27772,76010,7245,89,54616.51
42गाजीपुर29,51,47825,42,78986.1574,14782,8172,00,39049,6031,7394,08,69613.85
43चंदौली14,88,82112,58,73484.5543,05446,0501,10,04827,9802,9542,30,08615.45
44मिर्जापुर19,10,30015,67,53882.0653,83383,0241,69,27534,6851,9523,42,76917.94
45सोनभद्र14,05,07811,53,11482.0732,88465,2611,23,04627,7962,9752,51,96517.93
46भदोही12,33,32410,27,00483.2734,51636,9891,06,12725,8562,8322,06,32016.73
47आजमगढ़37,14,25831,47,65084.751,02,3831,23,9912,63,69647,89428,6525,66,61615.26
48मऊ17,13,35014,13,12782.4844,11691,3491,37,37325,1582,2403,00,23617.52
49बलिया25,10,59620,54,61781.8490,55684,4662,20,39747,80012,7594,55,97818.16
50गोरखपुर36,66,53330,20,90882.391,32,9701,05,4113,20,21878,8498,1866,45,63417.61
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राजधानी लखनऊ: 12 लाख नामों पर चला 'रेड पेन'

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उत्तर प्रदेश की सत्ता का केंद्र और सबसे हाईप्रोफाइल जिला लखनऊ, वोट कटने के मामले में पूरे प्रदेश में अव्वल नंबर पर है। जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की टीमों द्वारा घर-घर जाकर किए गए सत्यापन (बीएलओ सर्वे) के बाद लखनऊ में 12,00,161 (12 लाख से अधिक) मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा है।
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    वजह: इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना यह दर्शाता है कि राजधानी में बड़ी तादाद में ऐसे लोग मतदाता सूची में दर्ज थे जो या तो यहां से पलायन कर चुके हैं (Shifted), या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या फिर जिनके नाम दोहरी जगह दर्ज थे।
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    शिफ्टेड वोटर्स: लखनऊ में लगभग 5.35 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जो अपने दर्ज पते से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके थे, लेकिन उनका नाम अभी भी पुरानी जगह पर चल रहा था।
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जिलाकुल वोटरइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम डिजिटाइज़्डइलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग%इतने वोटर्स की मौतजिनका पता नहीं चला%पता बदलने वालेपहले से नामांकनअन्यकुल वोट कटेकितने फीसदी वोट कटे
51महाराजगंज19,92,45916,91,43784.8957,07271,8631,30,35739,3742,3633,01,02915.11
52देवरिया24,09,00919,94,21082.7867,18084,1982,17,70030,45115,2914,14,82217.22
53कुशीनगर26,95,03021,92,39081.3581,6721,57,3911,96,99160,0276,5805,02,66118.65
54बस्ती19,00,43016,02,14384.3057,46754,4041,48,05537,2771,0842,98,28715.70
55सिद्धार्थनगर19,61,87215,62,97279.6777,4931,04,2991,65,75141,6509,7253,98,91820.33
56संतकबीर नगर13,37,18610,70,31680.0443,79457,5251,20,45841,7563,3372,66,87019.96
57लखनऊ39,94,53527,94,39769.961,28,2424,27,7055,35,85549,04659,31312,00,16130.05
58उन्नाव23,25,05319,17,88282.4981,80985,1451,94,56841,2204,4374,07,17917.51
59रायबरेली21,34,04917,85,18483.6567,80876,1191,70,50829,3365,0963,48,86716.35
60सीतापुर31,90,80625,67,03480.451,29,1011,73,2272,46,90155,57919,0036,23,81719.55
61हरदोई30,19,41524,74,73381.961,02,2121,25,8082,51,84151,54113,2885,44,69718.04
62खीरी28,89,87223,84,06982.5089,6561,87,2041,70,77748,3819,8035,05,82117.50
63गोंडा25,52,00720,82,36981.601,05,3561,06,6841,93,34648,77015,4604,69,64618.40
64बहराइच26,48,34421,07,01679.5682,2351,40,0552,22,74887,9108,4045,41,35220.44
65बलरामपुर15,83,02711,71,82674.0263,1391,59,7211,33,37137,09217,9064,11,22925.98
66श्रावस्ती8,17,8486,82,85683.4928,97929,13751,11424,6411,1241,34,99516.51
67अयोध्या19,07,80015,70,25882.3155,4141,00,5461,47,53523,95210,0983,37,54517.69
68सुल्तानपुर18,43,78915,26,83482.8158,70762,5781,55,73330,5929,3683,16,97817.19
69बाराबंकी23,31,64919,58,49584.0071,40790,3551,76,69527,4767,2373,73,17016.00
70अंबेडकरनगर18,70,77616,12,22886.1844,52446,2621,41,89019,3396,5422,58,55713.82
71कासगंज10,57,9168,85,67883.7228,52457,80170,04110,6615,2451,72,27216.28
72अमेठी14,36,52811,69,28781.4056,15559,0691,23,49524,2644,2702,67,25318.60
73हापुड़11,56,6998,98,79677.7035,71656,4541,21,48320,27224,0012,57,92622.30
74शामली9,75,6978,12,23783.2527,80845,82578,3869,9821,4621,63,46316.75
75संभल15,70,30612,51,70579.7158,13880,1091,23,45533,55123,3623,18,61520.29
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संगम नगरी प्रयागराज: 11.56 लाख वोटर्स लिस्ट से बाहर

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वोट कटने के मामले में प्रयागराज (इलाहाबाद) प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। यहां की मतदाता सूची से 11,56,339 (11.5 लाख से अधिक) नाम काटे गए हैं।
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    मृतक मतदाता: प्रयागराज में मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने का आंकड़ा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा। यहां 1,73,812 ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। यह प्रदेश के किसी भी जिले में मृतकों की सबसे बड़ी संख्या है।
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    लापता: करीब 3.67 लाख मतदाता ऐसे थे जिनका सत्यापन के दौरान कोई अता-पता नहीं चला।
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पश्चिम यूपी का हाल: गाजियाबाद और मेरठ में भारी कटौती

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो अपनी राजनीतिक जागरूकता और चुनावी सरगर्मियों के लिए जाना जाता है, वहां भी एसआईआर प्रक्रिया का बड़ा असर दिखा है।
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    गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा होने के कारण गाजियाबाद में 'फ्लोटिंग पॉपुलेशन' (अस्थायी जनसंख्या) बहुत अधिक है। यहां 8,18,325 वोट कटे हैं, जो कुल वोटर्स का 28.83% है। यहां करीब 3.59 लाख लोग ऐसे मिले जो शिफ्ट हो चुके थे। यह प्रतिशत के लिहाज से सबसे अधिक कटौतियों में से एक है।
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    गौतम बुद्ध नगर (नोएडा): हाईटेक सिटी नोएडा में 4,47,479 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। यहां करीब 23.98% मतदाताओं की छंटनी हुई है। यहां भी सबसे बड़ा कारण लोगों का शिफ्ट होना (1.41 लाख) और रिपीट एंट्रीज रहा।
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    मेरठ: क्रांतिधरा मेरठ में 6,65,647 (24.66%) नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं।
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    सहारनपुर: यहां 4,32,539 (16.37%) नाम कटे हैं।
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फर्रुखाबाद से गोरखपुर तक: पूर्वांचल और मध्य यूपी का गणित

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आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, फर्रुखाबाद से लेकर गोरखपुर तक के बेल्ट में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की सूची में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। इस पूरे क्षेत्र में करीब 97 लाख वोटर्स के नाम सूची से काटे गए हैं।
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    गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में 6,45,634 नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं। यहां 3.20 लाख लोग अपने मूल पते से स्थानांतरित मिले, जबकि 1.32 लाख मृतक मतदाताओं के नाम हटाए गए।
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    जौनपुर: पूर्वांचल के अहम जिले जौनपुर में 5,89,546 मतदाताओं के नाम कटे हैं। यहां भी मृतकों (1.03 लाख) और शिफ्टेड (2.68 लाख) की संख्या काफी अधिक थी।
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    आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में 5,66,616 नाम हटाए गए हैं। यहां भी 1 लाख से अधिक मृतक मतदाताओं के नाम लिस्ट में चल रहे थे।
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    बलिया: बलिया जिले में 4,55,978 मतदाताओं की छंटनी हुई है।
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    कानपुर नगर: औद्योगिक राजधानी कानपुर में 9,02,186 (25.50%) मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं। यहां 3.91 लाख लोग ऐसे थे जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके थे।
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महाराजगंज से संभल तक: तराई और अवध क्षेत्र का हाल

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नेपाल सीमा से सटे महाराजगंज से लेकर संभल तक के जिलों का हाल भी कुछ अलग नहीं है। इस बेल्ट में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 98 लाख नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं।
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    सीतापुर: लखनऊ से सटे सीतापुर जिले में 6,23,817 वोट कटे हैं।
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    हरदोई: यहां 5,44,697 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
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    बहराइच: तराई के जिले बहराइच में 5,41,352 नाम कटे हैं।
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    लखीमपुर खीरी: यहां 5,05,821 नामों की कटौती हुई है।
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    कुशीनगर: भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में 5,02,661 वोट कटे हैं।
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    गोंडा: यहां 4,69,646 मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हुए हैं।
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डिजिटाइजेशन में 'हीरो' बने छोटे जिले: ललितपुर और अंबेडकरनगर अव्वल

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जहां एक ओर बड़े शहर मतदाता सूची के प्रबंधन और शुद्धता में पिछड़ गए, वहीं प्रदेश के कुछ छोटे जिलों ने डेटा प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग और डिजिटाइजेशन में बेहतरीन काम किया है। यह दर्शाता है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो व्यवस्था को कितना सुधारा जा सकता है।
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    ललितपुर: बुंदेलखंड के इस जिले ने एसआईआर प्रक्रिया में प्रतिशत के लिहाज से सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। यहां 90.05% वोटर रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यहां केवल 9.96% वोट ही कटे, जो प्रदेश में सबसे कम है। इसका अर्थ है कि यहां की वोटर लिस्ट पहले से काफी दुरुस्त थी।
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    अंबेडकरनगर: इन 25 जिलों के समूह में अंबेडकरनगर जिला एसआईआर प्रक्रिया में सबसे आगे रहा। यहां 86.18 फीसदी मतदाता रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन हुआ है और यहां 13.82% वोट कटे।
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    हमीरपुर: यहां 89.22% डिजिटाइजेशन हुआ और केवल 10.78% वोट कटे।
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आखिर क्यों कटे करोड़ों वोट? (वजह और विस्तृत विश्लेषण)

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इतने बड़े पैमाने पर (करोड़ों की संख्या में) वोटों का कटना आम जनता के मन में कई सवाल खड़े करता है। लेकिन, चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी और 'बोगस वोटिंग मुक्त' बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक थी। नाम कटने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित चार बड़े कारण सामने आए हैं:
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  1. \r\n
    स्थायी रूप से स्थानांतरण (Permanently Shifted): सबसे बड़ा कारण लोगों का पलायन या पता बदलना रहा है। रोजगार, शिक्षा या शादी के कारण लोग अपना मूल निवास छोड़कर दूसरे शहरों या राज्यों में बस जाते हैं, लेकिन पुराने पते से अपना नाम नहीं कटवाते। एसआईआर में ऐसे लाखों लोगों की पहचान की गई। लखनऊ में 5.35 लाख और प्रयागराज में 4.88 लाख लोग इसी श्रेणी में आए।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    मृत्यु (Death): कोविड महामारी या सामान्य कारणों से जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, उनके परिजनों ने फॉर्म-7 भरकर नाम नहीं कटवाया था। बीएलओ ने डोर-टू-डोर सर्वे कर मृतकों का सत्यापन किया और उनके नाम हटाए। प्रयागराज (1.73 लाख) और गोरखपुर (1.32 लाख) में यह संख्या सबसे अधिक थी।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    पता नहीं चला (Not Found/Missing): सर्वे के दौरान लाखों मतदाता ऐसे थे जो अपने दिए गए पते पर मिले ही नहीं। लखनऊ में ऐसे 4.27 लाख और गाजियाबाद में 3.19 लाख लोग थे। यह अक्सर उन जगहों पर होता है जहां किराएदार ज्यादा रहते हैं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    दोहराव/डुप्लीकेट एंट्री (Duplicate Entries): आयोग ने आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे वोटर्स की पहचान की जिनके नाम एक ही विधानसभा में दो बार, या अलग-अलग विधानसभाओं में दर्ज थे। 'एक नागरिक-एक वोट' के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने के लिए ऐसे डुप्लीकेट नाम हटाए गए।
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  8. \r\n
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अब आगे क्या? 31 दिसंबर का इंतजार और आपकी जिम्मेदारी

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एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी निगाहें 31 दिसंबर पर टिकी हैं।
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  • \r\n
    ड्राफ्ट प्रकाशन: चुनाव आयोग 31 दिसंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट (प्रारूप) प्रकाशित करेगा। यह सूची आपके मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) और जिला निर्वाचन कार्यालय पर उपलब्ध होगी। साथ ही, इसे ऑनलाइन भी चेक किया जा सकेगा।
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  • \r\n
  • \r\n
    आपत्ति का मौका: यह फाइनल लिस्ट नहीं है। अगर किसी वैध मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद आयोग दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दाखिल करने का समय देगा।
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  • \r\n
  • \r\n
    क्या करें:
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      नाम चेक करें: 31 दिसंबर के बाद सबसे पहले वोटर हेल्पलाइन ऐप या आयोग की वेबसाइट पर अपना नाम चेक करें।
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    • \r\n
    • \r\n
      फॉर्म भरें: नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6, किसी नाम पर आपत्ति के लिए फॉर्म-7 और नाम/पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरकर बीएलओ के पास जमा करें या ऑनलाइन आवेदन करें।
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    • \r\n
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सुधर रही है चुनावी व्यवस्था

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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का यह महा-शोधन अभियान निश्चित रूप से एक बड़ा और साहसिक कदम है। करोड़ों 'घोस्ट वोटर्स' (फर्जी या अनुपस्थित मतदाताओं) के हटने से आगामी चुनाव अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होने की उम्मीद है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद यह भी सुनिश्चित करना आयोग और प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि किसी भी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम तकनीकी खामी या मानवीय भूल के कारण न हट जाए। इसलिए, एक जागरूक नागरिक के तौर पर 31 दिसंबर को लिस्ट जारी होते ही अपना स्टेटस चेक करना बेहद जरूरी है।
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