उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 (SIR - Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची का ड्राफ्ट (मसौदा) जारी होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नामों के कटने का शोर है, वहीं दूसरी तरफ इन नामों को वापस जुड़वाने या नए नाम शामिल कराने की होड़ में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहले ही दिन बड़ी बढ़त बना ली है।READ ALSO:-यूपी में 'वोटर लिस्ट' पर चली चुनाव आयोग की कैंची: 15 करोड़ में से 2.89 करोड़ नाम हुए 'गायब'; लखनऊ-गाजियाबाद में सबसे ज्यादा छंटनी, जानें क्या आपका भी नाम कट गया?
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प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के कार्यालय से जारी ताजा आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर बीजेपी का नेटवर्क अन्य दलों के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्रिय नजर आ रहा है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP), जिसके पास बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की भारी-भरकम फौज है, वह प्रक्रिया शुरू होने के पहले 24 घंटों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई है।
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'ख़बरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम सीईओ कार्यालय के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि आखिर किस पार्टी के पास कितने 'सिपाही' (BLA) हैं और 6 मार्च को आने वाली फाइनल लिस्ट से पहले कौन बाजी मार रहा है।
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पहले 24 घंटे का रिपोर्ट कार्ड - कौन कितना सक्रिय?

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मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को यूपी में मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया गया। इसके ठीक अगले दिन यानी बुधवार (7 जनवरी) की शाम 5 बजे तक की स्थिति बेहद दिलचस्प है। सीईओ कार्यालय ने जो डेटा साझा किया है, वह पार्टियों की संगठनात्मक क्षमता (Organizational Strength) की पोल खोलता है।
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दावों की रेस (Claims for Name Addition)

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मसौदा सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों ने नाम शामिल करवाने के लिए कुल 128 दावे (Claims) प्रस्तुत किए हैं।
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राजनीतिक दल
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प्रस्तुत दावे (Form-6)
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स्थिति
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भारतीय जनता पार्टी (BJP)
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105
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सबसे आगे (सुपर एक्टिव)
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बहुजन समाज पार्टी (BSP)
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17
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दूसरे नंबर पर
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समाजवादी पार्टी (SP)
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06
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काफी पीछे (सुस्त शुरुआत)
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कांग्रेस (INC)
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00
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खाता नहीं खुला
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आम आदमी पार्टी (AAP)
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00
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\r\n
खाता नहीं खुला
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\r\n
अपना दल (S)
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00
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\r\n
खाता नहीं खुला
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विश्लेषण:

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आंकड़े साफ बताते हैं कि बीजेपी ने पहले ही दिन 82% (128 में से 105) दावे अकेले प्रस्तुत किए। यह दर्शाता है कि बीजेपी के बूथ एजेंट लिस्ट जारी होते ही काम पर लग गए थे। वहीं, मुख्य विपक्षी दल होने के नाते समाजवादी पार्टी से बड़ी संख्या की उम्मीद थी, लेकिन उनके खाते में सिर्फ 6 फॉर्म आए। यह सपा नेतृत्व के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा सबसे जोर-शोर से उठाया था।
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किसके पास कितनी 'फौज'? (Booth Level Agents का गणित)

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वोटर लिस्ट को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की भी होती है। यूपी में पार्टियों ने अपनी-अपनी फौज तैनात कर रखी है।
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कुल BLA की संख्या: 5 लाख 76 हजार 611
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पार्टी-वार BLA की ताकत:

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सीईओ कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार, विभिन्न दलों ने अपने एजेंट नियुक्त किए हैं:
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  1. \r\n

    समाजवादी पार्टी (SP):

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    • \r\n
      एजेंट्स की संख्या: 1,56,971
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    • \r\n
    • \r\n
      सक्रियता: डेढ़ लाख से ज्यादा एजेंट होने के बावजूद, पहले दिन मात्र 6 दावे आना संगठन में समन्वय की कमी या सुस्ती की ओर इशारा करता है।
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    • \r\n
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n

    बहुजन समाज पार्टी (BSP):

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      \r\n
    • \r\n
      एजेंट्स की संख्या: 1,53,469
      \r\n
    • \r\n
    • \r\n
      सक्रियता: बसपा, सपा से संख्या में थोड़ी पीछे है, लेकिन सक्रियता में आगे दिखी। उन्होंने 17 दावे प्रस्तुत किए।
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    • \r\n
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  4. \r\n
  5. \r\n

    कांग्रेस (Congress):

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      \r\n
    • \r\n
      एजेंट्स की संख्या: 94,591
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    • \r\n
    • \r\n
      सक्रियता: करीब एक लाख एजेंट होने के बाद भी कांग्रेस का 'स्कोर बोर्ड' जीरो रहा। पहले दिन एक भी नाम जुड़वाने का दावा पेश नहीं किया गया।
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    • \r\n
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n

    आम आदमी पार्टी (AAP):

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      \r\n
    • \r\n
      एजेंट्स की संख्या: 5,262 (दावे: 0)
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n

    अपना दल (सोनेलाल):

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      \r\n
    • \r\n
      एजेंट्स की संख्या: 5,397 (दावे: 0)
      \r\n
    • \r\n
    \r\n
  10. \r\n
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बीजेपी की स्थिति:

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आंकड़ों में बीजेपी के कुल एजेंट्स की सटीक संख्या का जिक्र नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि "बीजेपी के सबसे ज्यादा बूथ एजेंट्स सक्रिय हैं." और उनका परिणाम 105 दावों के रूप में दिख भी रहा है।
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2.89 करोड़ नामों की 'महा-कटौती' और उसका सच

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इस बार का पुनरीक्षण (SIR) ऐतिहासिक रहा है। सीईओ नवदीप रिणवा के मुताबिक, मंगलवार को जारी मसौदा सूची में कुल साढ़े 12 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम रखे गए हैं। लेकिन सबसे बड़ी खबर नामों का कटना है।
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क्यों हटे 2 करोड़ 89 लाख नाम?

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आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई 'क्लीनिंग' (Cleaning) का हिस्सा है। लगभग 2.89 करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए गए हैं:
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  1. \r\n
    मृत्यु (Death): लाखों मतदाता ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन नाम चल रहा था।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    स्थान परिवर्तन (Shifting): बड़ी संख्या में लोग अपना पुराना पता छोड़कर दूसरे स्थानों पर बस गए हैं।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    दोहरा नामांकन (Duplication): कई वोटर ऐसे मिले जिनका नाम दो जगह (गाँव और शहर दोनों जगह) चल रहा था।
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  6. \r\n
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महत्वपूर्ण बात:

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हैरानी की बात यह है कि 2.89 करोड़ नाम कटने के बाद भी, "इस दौरान किसी भी पार्टी ने नाम हटाने के लिए कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।" यानी जो 128 फॉर्म आए हैं, वे नाम जुड़वाने के लिए हैं। नाम कटने पर अभी किसी पार्टी ने आधिकारिक रूप से 'ऑब्जेक्शन' (Form-7) दाखिल नहीं किया है।
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आगे क्या? 6 मार्च तक का 'रोडमैप'

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चुनाव आयोग ने सभी दलों और आम जनता को स्पष्ट कर दिया है कि यह अभी 'ड्राफ्ट लिस्ट' (मसौदा) है, फाइनल नहीं। आपके पास अभी भी मौका है।
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महत्वपूर्ण तारीखें (Save The Dates):

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  • \r\n
    दावे और आपत्तियां शुरू: 6 जनवरी 2026
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  • \r\n
  • \r\n
    दावे प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख (Deadline): फरवरी 2026 (आगामी फरवरी तक)
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  • \r\n
  • \r\n
    निस्तारण: फरवरी के अंत तक सभी दावों की जांच की जाएगी।
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  • \r\n
  • \r\n
    अंतिम प्रकाशन (Final Publication): 6 मार्च 2026
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  • \r\n
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अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर (SIR) पूरा होने के बाद 6 मार्च को जो सूची प्रकाशित होगी, वही मान्य होगी।
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संगठन ही शक्ति है

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पहले 24 घंटे के रुझान ने यह साबित कर दिया है कि चुनाव सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ मैनेजमेंट (Booth Management) से लड़े जाते हैं। बीजेपी ने 105 दावे पेश करके अपनी मशीनरी की चुस्ती दिखा दी है। वहीं, सपा को अपने 1.56 लाख बीएलओ को 'स्लीपिंग मोड' से जगाना होगा, वरना 2.89 करोड़ की कटौती के बीच उनके समर्थक वोटर लिस्ट से बाहर रह सकते हैं।
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अगर आप एक जागरूक नागरिक हैं, तो पार्टियों के भरोसे न रहें। अपना नाम खुद चेक करें। 6 मार्च का इंतजार न करें, अगर नाम कटा है तो अभी फॉर्म-6 भरकर दावा पेश करें।
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