मेरठ, डिजिटल डेस्क (परिवहन और राजनीति)। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के भविष्य, निजीकरण की अटकलों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं पर शनिवार को पूर्णविराम लग गया। योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) ने क्रांतिधरा मेरठ से एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि "परिवहन निगम का निजीकरण (Privatization) किसी भी कीमत पर नहीं होगा।"Read also:-यूपी में स्कूल की छुट्टी: सीएम योगी का आदेश, भीषण ठंड के चलते 1 जनवरी तक नर्सरी से 12वीं तक के सभी स्कूल बंद
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मंत्री ने परिवहन निगम को प्रदेश का 'संकट का साथी' बताते हुए इसके आधुनिकीकरण का एक नया ब्लूप्रिंट पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि निजीकरण के बजाय सरकार पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल के जरिए बस स्टेशनों का कायाकल्प करेगी, जिससे यात्रियों को हवाई अड्डों (Airports) जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी। यह घोषणा उन्होंने मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 'उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ' के 20वें त्रैवार्षिक अधिवेशन के दौरान की।
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निजीकरण का डर खत्म: कर्मचारियों को मिला अभयदान

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शनिवार को मोदीपुरम स्थित कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में भारतीय मजदूर संघ (BMS) और भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ के बैनर तले आयोजित इस अधिवेशन में प्रदेश भर के 75 जिलों से आए कर्मचारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। लंबे समय से कर्मचारियों के मन में यह आशंका थी कि सरकार धीरे-धीरे रोडवेज को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।
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इस डर को दूर करते हुए मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मंच से स्पष्ट किया:

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"परिवहन निगम केवल एक विभाग नहीं, बल्कि प्रदेश का 'संकट का साथी' है। चाहे कोरोना काल हो या महाकुंभ जैसी विशाल चुनौतियां, रोडवेज के पहिए कभी नहीं थमे। सरकार की मंशा इसे बेचने की नहीं, बल्कि इसे और सशक्त बनाने की है। निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है, हम इसे सरकारी नियंत्रण में रखते हुए ही मुनाफे में लाएंगे।"
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मंत्री के इस बयान के बाद सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह बयान उन हजारों संविदा और नियमित कर्मचारियों के लिए संजीवनी की तरह है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे।
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विजन 2026: एयरपोर्ट की तर्ज पर बस अड्डे

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निजीकरण को नकारने के साथ ही मंत्री ने विकास का एक वैकल्पिक मॉडल भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लेगी, लेकिन स्वामित्व सरकार का ही रहेगा।
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पीपीपी मॉडल की खासियतें:

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    हाईटेक सुविधाएं: बस अड्डों को मल्टी-स्टोरी इमारतों में बदला जाएगा, जहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फूड कोर्ट, साफ-सुथरे वेटिंग लाउंज और आधुनिक शौचालय होंगे।
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    एयरपोर्ट जैसा अहसास: जिस तरह एयरपोर्ट पर यात्रियों को सुरक्षा और सुविधाएं मिलती हैं, वैसी ही व्यवस्था प्रमुख बस अड्डों पर की जाएगी।
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    राजस्व वृद्धि: पीपीपी मॉडल से न केवल स्टेशनों का विकास होगा, बल्कि निगम को कमर्शियल गतिविधियों से अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा, जिससे घाटे की भरपाई हो सकेगी।
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महाकुंभ 2025: एक ऐतिहासिक सफलता

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अपने संबोधन में दयाशंकर सिंह ने हाल ही में संपन्न हुए (संदर्भ: 2025 के परिप्रेक्ष्य में) प्रयागराज महाकुंभ-2025 की सफलता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इसे परिवहन निगम की क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
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मंत्री ने कहा, "महाकुंभ 2025 में दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालु आए थे। उस दौरान परिवहन निगम ने इतिहास रचा। हमारी बसों का संचालन 24 घंटे बिना रुके हुआ। ड्राइवरों, कंडक्टरों और अधिकारियों ने दिन-रात एक कर दिया ताकि कोई भी श्रद्धालु पैदल न रहे। यह समर्पण साबित करता है कि सरकारी तंत्र अगर ठान ले, तो वह किसी भी निजी एजेंसी से बेहतर सेवा दे सकता है।"
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बसों का बेड़ा: 8500 से 14000 तक का सफर

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परिवहन मंत्री ने आंकड़ों के जरिए अपनी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विभाग का कार्यभार संभाला था, तब निगम की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी।
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    पहले की स्थिति: उस समय निगम के पास बसों का बेड़ा मात्र 8,500 बसों का था, जिनमें से कई खस्ताहाल थीं।
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    वर्तमान स्थिति: आज सरकार के प्रयासों से यह बेड़ा बढ़कर 14,000 बसों का हो गया है।
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    नई बसें: इसमें अत्याधुनिक एसी बसें, स्लीपर बसें और प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं।
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बसों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और यात्रियों को बस के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता। मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में बेड़े में और भी नई बसें जोड़ी जाएंगी, विशेषकर ग्रामीण रूटों के लिए।
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अनुशासन और राष्ट्रहित: संगठन का मंत्र

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अधिवेशन का उद्घाटन भारतीय मजदूर संघ (BMS) के अखिल भारतीय महामंत्री रविंद्र हिम्मते ने किया। उन्होंने संगठन के 70 वर्ष पूरे होने पर सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
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    श्रम कोड का स्वागत: प्रदेश महामंत्री अनिल उपाध्याय ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कोड (Labour Codes) का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये सुधार श्रमिकों के हित में हैं और इससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।
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    अनुशासन सर्वोपरि: भारतीय मजदूर संघ के संगठन मंत्री अनुपम ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा, "कोई भी संगठन 50 या 70 वर्षों तक तभी जीवित रहता है और सेवा कर पाता है, जब उसका एक-एक कार्यकर्ता अनुशासित हो। अनुशासन ही हमारी शक्ति है।"
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संगीत सोम बोले- समाधान कराना मेरा सौभाग्य

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विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद पूर्व विधायक और फायरब्रांड नेता संगीत सोम ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय मजदूर संघ की कार्यशैली की प्रशंसा की। संगीत सोम ने कहा:
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"बीएमएस के कार्यकर्ता अन्य संगठनों से अलग हैं। आप लोग केवल अपनी मांगों के लिए नहीं लड़ते, बल्कि राष्ट्रहित, उद्योग हित और जनहित को भी प्राथमिकता देते हैं। आप लोगों की समस्याओं का समाधान कराने का माध्यम बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।"
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कर्मचारियों की समस्याएं और समाधान

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अधिवेशन में केवल भाषण ही नहीं हुए, बल्कि कर्मचारियों की जमीनी समस्याओं पर भी मंथन हुआ। अनिल कुमार ने बताया कि अधिवेशन में उठी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों और समस्याओं का एक मांग पत्र तैयार किया गया है। इसे निगम के प्रबंध निदेशक (MD) के समक्ष रखा जाएगा और संवाद के जरिए इनका निदान कराया जाएगा।
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प्रमुख मुद्दे जो चर्चा में रहे:

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    संविदा कर्मियों का नियमितीकरण।
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    समान कार्य-समान वेतन।
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    पुरानी बसों के मेंटेनेंस के लिए बजट।
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    कार्यशालाओं (Workshops) का आधुनिकीकरण।
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अधिवेशन का समापन और नई कार्यकारिणी

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भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष विनय शर्मा ने जानकारी दी कि यह 20वां त्रैवार्षिक अधिवेशन दो दिवसीय है। शनिवार को उद्घाटन सत्र के बाद, रविवार को संगठन की प्रांतीय कार्यकारिणी (State Executive) की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद अधिवेशन का समापन होगा।
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कार्यक्रम का सफल संचालन भारत भूषण और सत्य नारायण यादव ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर अनुज शर्मा, राजीव त्यागी, चंद्रभानु, राकेश, ओमप्रकाश सहित हजारों कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
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रोडवेज के लिए 'अच्छे दिन'?

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मेरठ के इस अधिवेशन से जो संदेश निकला है, वह यूपी रोडवेज के लिए सकारात्मक है। मंत्री द्वारा निजीकरण को खारिज करना कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा। वहीं, बस स्टेशनों को एयरपोर्ट जैसा बनाने की योजना अगर धरातल पर सही तरह से उतरती है, तो यह उत्तर प्रदेश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक क्रांतिकारी बदलाव होगा। 14,000 बसों का मजबूत बेड़ा और महाकुंभ जैसी परीक्षाओं में सफलता यह बताती है कि यूपी रोडवेज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब देखना यह है कि पीपीपी मॉडल की यह योजना कितनी जल्दी मूर्त रूप लेती है।
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