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उत्तर प्रदेश में वाहन चलाने वालों के लिए एक बेहद जरूरी और चिंताजनक खबर है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग (UP Transport Department) ने वाहनों के प्रदूषण जांच सिस्टम में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे आम जनता की परेशानियां अचानक काफी बढ़ गई हैं। अब वाहनों के प्रदूषण सर्टिफिकेट के लिए मोबाइल पर ओटीपी (One Time Password) को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग द्वारा लागू किए गए इस यूपी प्रदूषण प्रमाण पत्र ओटीपी नियम के कारण प्रदेश भर में हजारों की संख्या में वाहन स्वामियों को बिना सर्टिफिकेट के निराश लौटना पड़ रहा है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य भले ही जांच केंद्रों के फर्जीवाड़े को रोकना हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके कारण भारी अव्यवस्था फैल गई है। जिन लोगों का प्रदूषण सर्टिफिकेट खत्म हो गया है, उन पर अब 10,000 रुपये के भारी-भरकम जुर्माने की तलवार लटक रही है।Read also:-महा-बदलाव: यूपी में अब प्रॉपर्टी खरीदना नहीं रहा जोखिम का सौदा, योगी सरकार के 5 'ब्रह्मास्त्र' जिन्होंने भू-माफियाओं की उड़ाई नींद
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पुरानी और नई व्यवस्था में अंतर: क्यों आई यह समस्या?

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परिवहन विभाग द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था को समझने से पहले पुरानी व्यवस्था को जानना जरूरी है। पहले पुरानी प्रक्रिया के तहत प्रदूषण जांच केंद्र (PUC Center) के संचालक ग्राहक के किसी भी चालू मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर वाहन का जांच प्रमाण पत्र (Pollution Certificate) आसानी से जारी कर देते थे। इससे उन लोगों को काफी सुविधा होती थी जिनके पुराने मोबाइल नंबर बंद हो चुके थे या खो गए थे।
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लेकिन अब नए नियमों के तहत, यूपी प्रदूषण प्रमाण पत्र ओटीपी केवल उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जा रहा है जो वाहन के पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC - Registration Certificate) में आधिकारिक रूप से दर्ज है। परिवहन मुख्यालय का तर्क है कि इससे सीधे वाहन मालिक के पास जानकारी पहुंचेगी। लेकिन यही नियम अब एक बड़ी समस्या बन गया है। आधिकारिक आंकड़ों और प्रदूषण केंद्र संचालकों के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत वाहनों के आरसी में मोबाइल नंबर या तो अपडेट ही नहीं हैं या फिर पुराने नंबर हैं। 
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75% वाहनों में मोबाइल नंबर की समस्या और आधार-आरसी विसंगति

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इस नए नियम ने सबसे बड़ी परेशानी पुराने वाहन स्वामियों के लिए खड़ी कर दी है। तमाम पुराने वाहनों में आवेदकों के मोबाइल नंबर सालों पहले बदल चुके हैं। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि मूल वाहन मालिक की मृत्यु के बाद वह नंबर हमेशा के लिए बंद हो गया है और परिवार का कोई अन्य सदस्य उस वाहन का उपयोग कर रहा है। ऐसे में आरसी पर दर्ज पुराने नंबर पर ओटीपी न जा पाने के चलते प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया बीच में ही लटक जाती है।
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समस्या केवल मोबाइल नंबर बंद होने तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ी तकनीकी अड़चन आधार (Aadhaar) और आरसी (RC) के नाम में विसंगति होना है। अगर कोई वाहन स्वामी 'परिवहन सेवा' पोर्टल पर अपना नया मोबाइल नंबर अपडेट करना चाहता है, तो इसके लिए ई-केवाईसी या आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है। लेकिन वाहन स्वामी की आरसी और आधार कार्ड के नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर होने के कारण पोर्टल पर नया नंबर अपडेट करना संभव नहीं हो पा रहा है। कई बार सर्वर डाउन रहने की वजह से भी सही नंबर होने पर ओटीपी वाहन स्वामी के पास नहीं पहुंचता। 
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HSRP नियम और 10,000 रुपये के चालान का खौफ

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जनता की परेशानी केवल ओटीपी तक ही सीमित नहीं है। परिवहन विभाग ने 16 अप्रैल से एक और सख्त नियम लागू कर दिया है। अब बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) वाली गाड़ियों को भी प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जिन वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी है, उनका डाटा पोर्टल स्वीकार नहीं कर रहा है।
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नए मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के अनुसार, वाहन का वैद्य प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने पर सीधे 10,000 रुपये के चालान का प्रावधान है। आम जनता के लिए यह स्थिति किसी मानसिक उत्पीड़न से कम नहीं है। एक तरफ पोर्टल की खामियों से मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हो रहा है, और दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ (RTO) की चेकिंग में 10,000 रुपये का चालान कटने का डर लगातार बना हुआ है। लोग प्रदूषण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन संचालक सिस्टम के आगे बेबस हैं।
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पीयूसी ऑपरेटर एसोसिएशन की परिवहन विभाग से मांगें

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ओटीपी संकट से परेशान जनता और ग्राहकों के साथ रोज-रोज हो रहे विवादों को देखते हुए प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों की यूनियन ने अब प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। पीयूसी ऑपरेटर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सुनील कुमार पाल का कहना है कि विभाग ने बिना किसी जमीनी तैयारी और डेटा सुधार के यह सख्त प्रक्रिया लागू कर दी है।
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संगठन ने परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) को एक पत्र भेजकर इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने का आग्रह किया है। यूनियन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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    समानांतर व्यवस्था: जब तक पोर्टल पर सभी वाहन स्वामियों का डेटा पूरी तरह अपडेट नहीं हो जाता, तब तक पुरानी (किसी भी चालू नंबर पर ओटीपी) और नई प्रक्रिया को कुछ समय के लिए समानांतर (Parallel) रूप से चलने दिया जाए।
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    अस्थाई नंबर अपडेट सुविधा: पीयूसी केंद्रों को आवश्यक दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, पुरानी आरसी) पोर्टल पर अपलोड करके अस्थाई तौर पर नया मोबाइल नंबर अपडेट करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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    आरटीओ से बाद में प्रमाणीकरण: इस अस्थाई सुविधा से वाहन स्वामियों को तुरंत प्रदूषण सर्टिफिकेट मिल जाएगा और बाद में वे आरटीओ कार्यालय जाकर अपने कागजात आधिकारिक रूप से प्रमाणित करा सकेंगे। (Internal link to related article: Traffic Rules and New Challan Penalties in Uttar Pradesh)
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परिवहन विभाग का रुख और संभावित समाधान

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जनता और पीयूसी संचालकों के बढ़ते दबाव के बीच परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस समस्या का संज्ञान लिया है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर राधेश्याम ने स्पष्ट किया है कि पीयूसी संगठन का पत्र विभाग को मिल गया है और उत्पन्न हुई इस तकनीकी समस्या के समाधान पर पूरी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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विभाग यह रणनीति बनाने की कोशिश कर रहा है कि आधार और आरसी की विसंगति को कैसे बाईपास या ठीक किया जाए ताकि लोग आसानी से अपना मोबाइल नंबर अपडेट कर सकें। हालांकि, विभाग ने यह भी साफ किया है कि पारदर्शिता और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए डिजिटल प्रक्रिया को तो अपनाना ही होगा, लेकिन इसके लिए एक व्यावहारिक और सहज मार्ग जरूर निकाला जाएगा।
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निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि प्रदूषण नियंत्रण पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और इसमें डिजिटल पारदर्शिता का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन तकनीकी खामियों के साथ नियम लागू करने से आम नागरिक बेवजह पिस रहा है। यूपी प्रदूषण प्रमाण पत्र ओटीपी का यह नया नियम फिलहाल जनता के लिए सुविधा कम और मुसीबत ज्यादा बन गया है। 75 प्रतिशत वाहनों के आरसी में नंबर अपडेट न होना यह दर्शाता है कि सिस्टम को अभी और सुव्यवस्थित करने की जरूरत है। जब तक विभाग इन खामियों को दूर करके मोबाइल नंबर अपडेट करने की प्रक्रिया को आसान नहीं बनाता, तब तक 10,000 रुपये के चालान के डर से वाहन स्वामियों की परेशानी कम होने वाली नहीं है। उम्मीद है कि परिवहन विभाग जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकालेगा जिससे आम लोगों को स्थायी राहत मिल सके।
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यूपी परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण सर्टिफिकेट के लिए आरसी में दर्ज मोबाइल नंबर पर ओटीपी अनिवार्य करने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश के 75% पुराने वाहनों में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं और आरसी-आधार में नाम का अंतर होने से पोर्टल पर नंबर बदल भी नहीं पा रहा है। साथ ही 16 अप्रैल से बिना HSRP (हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट) वाले वाहनों का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनाने पर भी रोक लगा दी गई है। सर्टिफिकेट न होने पर 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। पीयूसी यूनियन ने परिवहन आयुक्त से पुरानी व्यवस्था को कुछ समय तक चालू रखने की अनुमति मांगी है, जिस पर विभाग गंभीरता से विचार कर रहा है।
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