उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं और पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने यूपी टीईटी 2026 परीक्षा (UP TET 2026 Exam) के नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस में 3 बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इन संशोधनों के बाद प्रदेश के उन 50 हजार शिक्षकों ने राहत की सांस ली है, जिनके पास अब तक टीईटी (TET - Teacher Eligibility Test) में बैठने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ही नहीं थी। इसके साथ ही, बीएड (B.Ed) और बीटीसी (BTC/D.El.Ed) कर रहे लाखों छात्रों के लिए भी पात्रता के नियमों को स्पष्ट कर दिया गया है।READ ALSO:-यूपी में फिर लौटा आंधी-तूफान का खौफ: 26 से 30 मार्च तक झमाझम बारिश और ओलावृष्टि का हाई अलर्ट, किसानों की धड़कनें तेज!
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आयोग द्वारा 20 मार्च को परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया गया था। पूरे चार साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में यह परीक्षा आयोजित होने जा रही है। शिक्षा विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस बार यूपी टीईटी 2026 परीक्षा में 15 से 20 लाख आवेदकों के शामिल होने की पूरी संभावना है। यह परीक्षा केवल नए अभ्यर्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन 1.86 लाख कार्यरत शिक्षकों के लिए भी जीवनदान साबित होगी, जो अब तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि आयोग ने कौन से तीन बड़े बदलाव किए हैं, इसका शिक्षकों और छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, और इस पूरी प्रक्रिया की पृष्ठभूमि क्या है।
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1.86 लाख शिक्षकों पर मंडरा रहा था नौकरी जाने का संकट
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में वर्तमान में लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने अपनी नियुक्ति के बाद से अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है। इन शिक्षकों के सामने एक बहुत बड़ा कानूनी और रोजगार का संकट खड़ा हो गया था। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के तहत, इन सभी शिक्षकों को सितंबर 2027 से पहले हर हाल में टीईटी पास करना अनिवार्य है। यदि वे इस तय समय सीमा तक टीईटी पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी नौकरी छिन सकती है।
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इन 1.86 लाख शिक्षकों में से लगभग 50 हजार शिक्षक ऐसे थे, जो एक अलग ही कानूनी पचड़े में फंसे हुए थे। इन 50 हजार शिक्षकों के पास टीईटी परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (Minimum Educational Qualification) ही नहीं थी। जब वे फॉर्म ही नहीं भर सकते थे, तो परीक्षा पास करने और नौकरी बचाने का सवाल ही पैदा नहीं होता था।
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मीडिया की भूमिका: 24 घंटे के भीतर बदला गया फैसला
\r\n\r\nइस गंभीर मुद्दे को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया। इस खबर में उन 50 हजार शिक्षकों के दर्द और तकनीकी उलझनों को शासन और प्रशासन के सामने रखा गया था जो अपात्र घोषित कर दिए गए थे।
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इस खबर का असर इतना तेज हुआ कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने मामले का संज्ञान लिया और महज 24 घंटे के भीतर नोटिफिकेशन में संशोधन करते हुए नई गाइडलाइंस जारी कर दीं।
\r\n\r\nयूपी टीईटी 2026 परीक्षा: आयोग द्वारा किए गए 3 बड़े बदलाव (विस्तृत विश्लेषण)
\r\n\r\nआयोग ने नोटिफिकेशन में जो तीन महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, उन्होंने लाखों अभ्यर्थियों की चिंताओं को दूर कर दिया है। आइए इन तीनों बदलावों को आसान भाषा में समझते हैं:
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- बदलाव 1: सभी कार्यरत शिक्षक अब परीक्षा के लिए होंगे पात्र \r\n
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यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर, 2025 के फैसले से प्रभावित प्रदेश के सभी सहायक अध्यापक अब यूपी टीईटी 2026 परीक्षा में बैठने के लिए पूरी तरह से पात्र माने जाएंगे।
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पहले क्या नियम था? इससे पहले जारी किए गए मूल विज्ञापन में कहा गया था कि केवल वे ही उम्मीदवार टीईटी परीक्षा में बैठ सकते हैं जिन्होंने ग्रेजुएशन (स्नातक) और बीटीसी (D.El.Ed) या इसके समकक्ष कोई कोर्स किया हो। इस नियम के कारण वे 50 हजार सहायक अध्यापक फॉर्म भरने से वंचित हो गए थे, जिनकी नियुक्ति दशकों पहले अलग नियमों के तहत हुई थी।
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किन शिक्षकों को मिला फायदा? आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में विशेष छूट दी जाएगी। इस छूट का लाभ मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणी के शिक्षकों को मिलेगा:
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- \r\n 1998 से पहले नियुक्त शिक्षक: वे शिक्षक जो 1998 से पहले केवल इंटरमीडिएट (12वीं पास) और दो साल की बीटीसी के आधार पर भर्ती हुए थे। उस समय ग्रेजुएशन अनिवार्य नहीं था।\r\n \r\n
- \r\n मृतक आश्रित (Compassionate Appointees): वे लोग जिन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी और वे बिना ग्रेजुएट या नियमित बीटीसी किए नौकरी करते हुए 'अनट्रेंड ग्रेड' से 'सहायक अध्यापक' बने थे।\r\n \r\n
- \r\n बीपीएड (B.P.Ed) शिक्षक (1999-2004): 1999 से 2004 के बीच बीपीएड डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले सहायक अध्यापक।\r\n \r\n
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विशेष नोट: इन सभी शिक्षकों ने विभाग द्वारा आयोजित 'स्पेशल बीटीसी' (Special BTC) का छह महीने का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हुआ है और शिक्षा विभाग ने इन्हें इसका विधिवत प्रमाण पत्र भी जारी किया है। इसलिए, अब इन्हें टीईटी देने से नहीं रोका जा सकता।
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बदलाव 2: बीएड या टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स में अध्ययनरत (Pursuing) छात्र भी कर सकेंगे आवेदन
\r\n\r\nयह बदलाव उन लाखों युवा छात्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो वर्तमान में शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कर रहे हैं।
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- पहले की स्थिति: सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के 4 अगस्त, 2022 के स्पष्टीकरण से पहले, कई राज्यों में यह नियम था कि केवल वे ही छात्र टीईटी दे सकते हैं जो अपने कोर्स (बीएड/बीटीसी) के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे हों या अपनी अंतिम परीक्षा दे चुके हों (Appearing in Final Year)। \r\n
- नया संशोधन: अब यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। संशोधन के जरिए यह छूट दी गई है कि बीएड (B.Ed) या किसी भी मान्यता प्राप्त टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स (TTC) में प्रवेश ले चुका कोई भी छात्र (Pursuing Candidate) यूपी टीईटी 2026 परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। इसका मतलब है कि अगर आपने कल ही बीएड या बीटीसी के प्रथम सेमेस्टर में एडमिशन लिया है, तो भी आप आज टीईटी का फॉर्म भरने के लिए कानूनी रूप से पात्र हैं। इससे छात्रों को अपना कोर्स पूरा होने से पहले ही टीईटी पास करके भविष्य की शिक्षक भर्तियों के लिए तैयार रहने का मौका मिलेगा। \r\n
- बदलाव 3: बीएड (B.Ed) वाले छात्र प्राथमिक स्तर (Primary Level Paper-1) की परीक्षा से बाहर \r\n
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तीसरा बदलाव एक बहुप्रतीक्षित स्पष्टीकरण था, जो सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में किया गया है।
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मूल विज्ञापन की गलती: आयोग ने जब मूल विज्ञापन जारी किया था, तब उसमें एक बड़ी तकनीकी खामी थी। उसमें बीएड डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक (कक्षा 1 से 5, Paper-1) के लिए टीईटी देने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन एक शर्त के साथ। शर्त यह थी कि नियुक्ति के बाद उन्हें 2 साल के अंदर एसबीटीसी (SBTC) का 6 महीने का ब्रिज कोर्स पूरा करना होगा।
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संशोधन के बाद की स्थिति: हाईकोर्ट, एनसीटीई और माननीय सुप्रीम कोर्ट के हालिया सख्त आदेशों (जिसमें बीएड को प्राथमिक शिक्षक भर्ती से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है) के बाद, आयोग ने अपनी गलती सुधारते हुए इस बिंदु को नोटिफिकेशन से हटा दिया है। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि अब बीएड वाले अभ्यर्थी प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए टीईटी (Paper-1) में नहीं बैठ पाएंगे। वे केवल उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए आयोजित होने वाले टीईटी (Paper-2) के लिए ही पात्र माने जाएंगे। प्राथमिक स्तर के लिए केवल बीटीसी / डीएलएड (D.El.Ed) वाले उम्मीदवार ही पात्र होंगे।
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शिक्षक संघों और अभ्यर्थियों में खुशी की लहर
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा इतनी जल्दी किए गए इन तीन संशोधनों का शिक्षक संघों ने खुले दिल से स्वागत किया है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री शिवशंकर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, "आयोग के इन तीन बड़े संशोधनों से उन 50 हजार सहायक अध्यापकों के सिर से नौकरी जाने की तलवार हट गई है जो अब तक अपात्र थे। इसके साथ ही, तीन से चार लाख उन नए अभ्यर्थियों को भी एक बहुत बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने हाल ही में बीएड या बीटीसी में प्रवेश लिया है। अब वे बिना किसी तनाव के अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।"
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चार साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही इस यूपी टीईटी 2026 परीक्षा ने प्रदेश के युवाओं में एक नई ऊर्जा भर दी है। कोरोना महामारी और उसके बाद नए शिक्षा आयोग (UPESSC) के गठन में हुई देरी के कारण पिछले कई वर्षों से यूपी में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी थी।
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क्या है यूपी टीईटी (UP TET) और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET) राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए एक अनिवार्य प्रारंभिक सीढ़ी है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने के बाद, राष्ट्रीय स्तर पर एनसीटीई (NCTE) ने यह नियम अनिवार्य कर दिया था कि कोई भी व्यक्ति बिना टीईटी (या सीटीईटी) पास किए कक्षा 1 से 8 तक का सरकारी शिक्षक नहीं बन सकता।
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टीईटी प्रमाणपत्र की आजीवन वैधता: पहले यूपी टीईटी प्रमाणपत्र की वैधता केवल 5 वर्ष हुआ करती थी। लेकिन हाल ही के वर्षों में एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यूपी टीईटी प्रमाणपत्र को आजीवन (Lifetime) वैध कर दिया है। इसका अर्थ है कि यदि कोई अभ्यर्थी एक बार इस परीक्षा को पास कर लेता है, तो उसे दोबारा टीईटी देने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि वह अपने अंकों (Score) में सुधार न करना चाहे।
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परीक्षा का पैटर्न (Exam Pattern)
\r\n\r\nयूपी टीईटी परीक्षा दो स्तरों पर आयोजित की जाती है:
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- \r\n पेपर 1 (Primary Level): कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए (केवल D.El.Ed/BTC वाले पात्र)।\r\n \r\n
- \r\n पेपर 2 (Upper Primary Level): कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए (B.Ed और D.El.Ed दोनों पात्र)।\r\n \r\n
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दोनों पेपर 150 अंकों के होते हैं और इनमें 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाते हैं। परीक्षा के लिए 2.5 घंटे (150 मिनट) का समय दिया जाता है। इस परीक्षा में कोई नकारात्मक अंकन (Negative Marking) नहीं होता है, जो छात्रों के लिए एक बड़ा फायदा है।
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50 हजार शिक्षकों की पृष्ठभूमि: कैसे पैदा हुआ था यह संकट?
\r\n\r\nयह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर ये 50 हजार शिक्षक अपात्र कैसे हुए और सरकार को नियमों में बदलाव क्यों करना पड़ा। उत्तर प्रदेश में 1990 के दशक और 2000 की शुरुआत में शिक्षा मित्रों और अन्य अनौपचारिक माध्यमों से भारी संख्या में शिक्षकों की भर्तियां हुई थीं। उस समय सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी थी।
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- \r\n शैक्षणिक मानकों का अभाव: उस दौर में शिक्षकों की भर्ती के लिए ग्रेजुएशन या विशिष्ट प्रशिक्षण जैसे कड़े नियम लागू नहीं थे। कई लोग केवल 12वीं (इंटरमीडिएट) पास करके और बेसिक ट्रेनिंग लेकर स्कूलों में पढ़ाने लगे थे।\r\n \r\n
- \r\n RTE 2009 का प्रभाव: जब 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ, तो पूरे देश में शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े मानक तय किए गए। सरकार ने सभी गैर-प्रशिक्षित या कम योग्यता वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और उन्हें टीईटी पास करने का अल्टीमेटम दिया।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी पचड़े: यूपी सरकार ने इन पुराने शिक्षकों को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें 6 महीने की 'स्पेशल बीटीसी' कराकर बचाने की कोशिश की। लेकिन जब टीईटी का फॉर्म ऑनलाइन हुआ, तो सॉफ्टवेयर में न्यूनतम योग्यता 'ग्रेजुएशन' सेट कर दी गई। इसके कारण ये इंटरमीडिएट पास शिक्षक फॉर्म ही नहीं भर पा रहे थे।\r\n \r\n
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अब UPESSC के नए बदलाव ने सॉफ्टवेयर और कागजी नियमों के इस अंतर को खत्म कर दिया है, जिससे 1.86 लाख शिक्षकों के परिवार भुखमरी के कगार पर जाने से बच गए हैं।
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यूपी टीईटी 2026 परीक्षा के लिए कैसे करें स्मार्ट तैयारी?
\r\n\r\nचूंकि परीक्षा में 15 से 20 लाख उम्मीदवार बैठने वाले हैं, इसलिए प्रतिस्पर्धा (Competition) बेहद कड़ी होने वाली है। 50 हजार सेवारत शिक्षकों के लिए भी यह परीक्षा पास करना एक चुनौती होगी क्योंकि वे लंबे समय से स्कूली शिक्षा दे रहे हैं लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से दूर हैं।
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तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स:
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- \r\n सिलेबस को गहराई से समझें: बाल विकास एवं शिक्षण विधि (CDP), भाषा-1 (हिंदी), भाषा-2 (अंग्रेजी/संस्कृत/उर्दू), गणित, और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के सिलेबस का प्रिंटआउट निकाल लें और उसी के अनुसार पढ़ाई करें।\r\n \r\n
- \r\n NCERT और SCERT की किताबें: यूपी बोर्ड की कक्षा 1 से 8 तक की किताबों (SCERT) का गहन अध्ययन करें। पर्यावरण और गणित के अधिकांश प्रश्न सीधे इन्हीं किताबों से पूछे जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र (PYQs): पिछले 10 वर्षों के यूपी टीईटी के पेपर हल करें। इससे आपको आयोग की मानसिकता और प्रश्नों के स्तर (Difficulty Level) का सटीक अंदाजा लग जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n मॉक टेस्ट का अभ्यास: समय प्रबंधन (Time Management) के लिए नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें, क्योंकि 150 मिनट में 150 प्रश्न पढ़ना और ओएमआर (OMR) शीट भरना चुनौतीपूर्ण होता है।\r\n \r\n
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नए आयोग (UPESSC) के सामने चुनौतियां
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) का गठन प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी शिक्षकों की भर्ती को एक ही छत के नीचे लाने के लिए किया गया है। इससे पहले परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) प्रयागराज यूपी टीईटी का आयोजन कराता था। नए आयोग के लिए इतनी बड़ी संख्या (लगभग 20 लाख) में छात्रों की परीक्षा बिना किसी पेपर लीक या धांधली के सफलतापूर्वक आयोजित कराना एक अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
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हाल ही में देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं को देखते हुए, यूपी सरकार और आयोग परीक्षा केंद्रों की निगरानी, सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था और प्रश्न पत्रों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रहे हैं।
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अंततः, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा यूपी टीईटी 2026 परीक्षा के नियमों में किए गए ये तीन बदलाव राज्य की शिक्षा व्यवस्था और लाखों परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक कदम हैं। जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित 50 हजार शिक्षकों को अपनी आजीविका बचाने का सुनहरा अवसर मिला है, वहीं दूसरी ओर बीएड और बीटीसी कर रहे लाखों युवा छात्रों के लिए पात्रता की स्थिति स्पष्ट हो गई है। बीएड वालों को प्राथमिक से बाहर करना भले ही कुछ छात्रों को निराश कर सकता है, लेकिन यह कानूनी रूप से एक अनिवार्य कदम था। अब सभी उम्मीदवारों और शिक्षकों को अपना पूरा ध्यान 15 से 20 लाख की भीड़ में अपनी जगह पक्की करने और परीक्षा की तैयारी पर लगाना चाहिए। सितंबर 2027 की डेडलाइन अब दूर नहीं है, इसलिए हर एक दिन कीमती है।
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सारांश (Summary): यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यूपी टीईटी-2026 के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत तीन अहम बदलाव हुए हैं— पहला, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता न रखने वाले 50 हजार कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा में बैठने की छूट मिल गई है; दूसरा, बीएड या बीटीसी के प्रथम वर्ष (अध्ययनरत) के छात्र भी अब आवेदन कर सकते हैं; और तीसरा, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बीएड डिग्री धारकों को प्राथमिक स्तर (पेपर-1) की टीईटी से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। इन बदलावों से 1.86 लाख कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है और लाखों नए छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
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