उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं और सालों से अल्प वेतन में काम कर रहे अनुदेशकों के लिए रविवार का दिन एक ऐतिहासिक खुशखबरी लेकर आया। लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग की कायाकल्प यात्रा को नई उड़ान देते हुए प्रदेश में 21,508 नए शिक्षकों और अनुदेशकों की भर्ती का महा-ऐलान किया है। इसके साथ ही सरकार ने 'अंशकालिक अनुदेशकों' (Part-time Instructors) को बड़ा तोहफा देते हुए उनके मानदेय में भारी वृद्धि की है और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये के मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर से जोड़ने की घोषणा की है।READ ALSO:-नौचंदी मेले में मौत का खौफ? 'जीरो ग्रेविटी' झूले के 'लाइव एक्सीडेंट' वाले वायरल वीडियो ने मचाई भारी खलबली; जानिए पुलिस जांच में क्या निकला खौफनाक सच!
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उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने और स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के अनुपात (Student-Teacher Ratio) को दुरुस्त करने के लिए योगी सरकार फुल एक्शन मोड में आ गई है। नए 'शिक्षा सेवा चयन आयोग' के गठन के बाद अब राज्य में भर्तियों के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए हैं। आइए, सीएम योगी द्वारा की गई इन ऐतिहासिक घोषणाओं, मानदेय वृद्धि और बेसिक शिक्षा के बदलते स्वरूप को विस्तार से समझते हैं।
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21,508 पदों पर बंपर भर्ती: नए शिक्षा आयोग को भेजा गया प्रस्ताव
\r\n\r\nलोकभवन सभागार में आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं को सबसे बड़ी सौगात दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की कि राज्य में जल्द ही 21,508 पदों पर सीधी भर्तियां की जाएंगी। इन भर्तियों का स्पष्ट वर्गीकरण इस प्रकार है:
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- \r\n नए शिक्षकों की भर्ती: 11,508 पद\r\n \r\n
- \r\n नए अनुदेशकों की भर्ती: 10,000 पद (उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए)\r\n \r\n
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भर्ती प्रक्रिया में तेजी: सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब शिक्षक भर्तियों में पूरी पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए नए 'शिक्षा सेवा चयन आयोग' (Education Service Selection Commission) का विधिवत गठन कर लिया गया है। यह आयोग विभिन्न स्तरों पर योग्य शिक्षकों का चयन कर रहा है। सरकार ने अपनी तरफ से 11,508 नए शिक्षकों के लिए अधियाचन (प्रस्ताव) आयोग को भेज दिया है। जल्द ही आयोग की तरफ से इसका विस्तृत विज्ञापन (Notification) जारी होने की उम्मीद है।
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अनुदेशकों की बल्ले-बल्ले: मानदेय में हुआ बंपर इजाफा (अब मिलेंगे ₹17,000)
\r\n\r\nरविवार का यह सम्मान समारोह मुख्य रूप से प्रदेश के उन हजारों अनुदेशकों को समर्पित था, जो सालों से बेसिक शिक्षा की रीढ़ बने हुए हैं। सीएम योगी ने उनके संघर्ष और योगदान को सराहते हुए उनके मानदेय (Honorarium) में ऐतिहासिक वृद्धि की घोषणा की और बढ़े हुए मानदेय के चेक भी वितरित किए।
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- \r\n अनुदेशकों का संघर्ष और सरकार का फैसला: सीएम योगी ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2011-12 में जब अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू की गई थी, तब उन्हें मात्र 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्ष 2022 तक यानी पूरे एक दशक तक उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई।\r\n \r\n
- \r\n 2022 में हुई थी वृद्धि: साल 2022 में योगी सरकार ने इसमें 2,000 रुपये की मामूली वृद्धि की थी (मानदेय 9,000 रुपये हुआ था), लेकिन मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया कि सरकार स्वयं भी इस छोटी सी वृद्धि से संतुष्ट नहीं थी।\r\n \r\n
- \r\n अब ₹17,000 प्रतिमाह: बढ़ती महंगाई और अनुदेशकों की मेहनत को देखते हुए अब राज्य सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय सीधे बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इससे प्रदेश के लगभग 24,717 अनुदेशकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।\r\n \r\n
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स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा: मिलेगा 5 लाख का फ्री 'कैशलेस' इलाज
\r\n\r\nयोगी सरकार अब केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संविदा कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में भी ला रही है।
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मुख्यमंत्री ने मंच से एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अनुदेशकों और उनके परिवारों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार उन्हें आयुष्मान योजना की तर्ज पर 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर (Cashless Health Insurance) प्रदान कर रही है।
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- \r\n पोर्टल पर तुरंत कराएं रजिस्ट्रेशन: सीएम ने सभी अनुदेशकों से अपील की है कि वे बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर तत्काल अपना पंजीकरण (Registration) करा लें।\r\n \r\n
- \r\n अगले हफ्ते मिलेंगे कार्ड: पंजीकरण पूरा होते ही अगले सप्ताह एक और बड़ा समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी लाभार्थियों को 'स्वास्थ्य कार्ड' (Health Cards) वितरित किए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n लाखों को मिलेगा फायदा: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों, 24,296 अनुदेशकों, अन्य शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सामाजिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ना वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।\r\n \r\n
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(बता दें कि अनुदेशकों के हित में सरकार ने 2019 में महिला अनुदेशकों को पूर्ण मानदेय के साथ 6 माह का मातृत्व अवकाश और 2023 में स्वेच्छा से विद्यालय परिवर्तन की सुविधा भी दी थी।)
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'ऑपरेशन कायाकल्प' का असर: 17% से 3% पर आया ड्रॉपआउट रेट
\r\n\r\nमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की चरमराई हुई बेसिक शिक्षा व्यवस्था को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब बेसिक विद्यालयों की हालत बेहद जर्जर और दयनीय थी।
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- \r\n स्कूल बंद करने का आया था प्रस्ताव: सीएम ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 2017 में अधिकारियों ने उन स्कूलों में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव रखा था, जहां छात्रों की संख्या 100 से कम थी। लेकिन सरकार ने उस नकारात्मक प्रस्ताव को खारिज कर दिया और ‘स्कूल चलो अभियान’ तथा ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ जैसी दूरगामी योजनाओं की शुरुआत की।\r\n \r\n
- \r\n आज 96% स्कूलों में हैं बुनियादी सुविधाएं: ऑपरेशन कायाकल्प की बदौलत आज यूपी के 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, साफ शौचालय, शुद्ध पेयजल, टाइल्स और फर्नीचर जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं।\r\n \r\n
- \r\n ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट: सरकार के इन प्रयासों का ही नतीजा है कि जो बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते थे (Dropout Rate), उनका आंकड़ा 17-18 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 3 प्रतिशत के करीब रह गया है। सरकार का अगला लक्ष्य इसे शून्य (Zero) तक पहुंचाना है।\r\n \r\n
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"श्रमदान कराने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं, उनका सम्मान करें"
\r\n\r\nकार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने एक बेहद प्रासंगिक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपनी बेबाक राय रखी। अक्सर देखा जाता है कि स्कूलों में जब शिक्षक बच्चों से साफ-सफाई या बागवानी करवाते हैं, तो कुछ लोग उसका वीडियो बनाकर वायरल कर देते हैं और मीडिया में इसे बाल मजदूरी का रंग दे दिया जाता है।
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इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हर बच्चा किसी न किसी विशेष प्रतिभा के साथ जन्म लेता है, हमें बस उस प्रतिभा को पहचानने की जरूरत है। आत्म अनुशासन, समय पालन, स्वच्छता और संस्कार हमारी शिक्षा व्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जब बच्चे स्कूल में 'श्रमदान' (Voluntary work/Cleaning) करते हैं, तो कई बार मीडिया उसे नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करता है, जो कि बिल्कुल गलत है। बच्चों में अनुशासन, स्वावलंबन और स्वच्छता की भावना विकसित करने वाले शिक्षकों को दंडित या सस्पेंड करने के बजाय, उन्हें समाज में सम्मानित किया जाना चाहिए।"
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वैश्विक परिदृश्य और शिक्षा का महत्व: ईरान-अमेरिका का दिया उदाहरण
\r\n\r\nअपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के महत्व को वैश्विक परिदृश्य (Global Context) से जोड़ते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा, "आज दुनिया के किसी भी कोने में तनाव होता है, जैसे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव, तो उसका आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। ठीक उसी प्रकार, यदि हमारे देश का कोई एक बच्चा भी शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो उसका गहरा दुष्परिणाम भविष्य में पूरे समाज और राष्ट्र को भुगतना पड़ता है।"
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सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण के लिए हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना नितांत आवश्यक है। शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में हो रहे ये युगांतरकारी परिवर्तन भविष्य के सशक्त भारत की एक बहुत मजबूत नींव तैयार करेंगे।
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लोकभवन से सीएम योगी आदित्यनाथ की ये घोषणाएं स्पष्ट संकेत देती हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार अब रोजगार और शिक्षा के मोर्चे पर फ्रंटफुट पर खेल रही है। 21,500 से अधिक भर्तियों का आना प्रदेश के लाखों बी.एड (B.Ed), बीटीसी (BTC) और टीईटी (TET) पास बेरोजगार युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है। वहीं, अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि और स्वास्थ्य बीमा जैसे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार अपने संविदा कर्मचारियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
Sabse pehle comment karne wale banein.