उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 1.46 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि का बहुप्रतीक्षित फैसला अब राज्य मंत्री परिषद के पास पहुंच गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की चार सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि मानदेय बढ़ोतरी एक बड़ा वित्तीय निर्णय है, जिसे लेने का अधिकार उसके पास नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनी इस समिति के प्रस्ताव को अब सीधे शासन और मंत्री परिषद के लेवल पर भेजा गया है। शिक्षामित्रों की निगाहें अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस वादे पर टिकी हैं, जिसमें उन्होंने मानदेय को लेकर सकारात्मक कदम उठाने की बात कही थी।READ ALSO:-मेरठ मार्केट ध्वस्तीकरण पर सियासत गर्म: अखिलेश बोले- 'BJP का रिटर्न गिफ्ट', पीड़ित बिलख रहे और पटाखे छूट रहे हैं: सपा विधायक अतुल प्रधान
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2017 से ₹10,000 पर मानदेय स्थिर
\r\n\r\nशिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि की मांग लंबे समय से चल रही है, खासकर 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके नियमितीकरण (Regularization) को रद्द किए जाने के बाद।
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- \r\n वर्तमान मानदेय: परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 1.46 लाख शिक्षामित्रों को वर्ष 2017 से ₹10,000 प्रति माह का मानदेय मिल रहा है। इससे पहले वे मात्र ₹3,500 मासिक पाते थे।\r\n \r\n
- \r\n समिति का गठन: इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 जनवरी 2024 के आदेश के बाद मानदेय बढ़ोतरी के मुद्दे पर विचार करने के लिए इस चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n समिति के सदस्य: इस समिति में बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल, एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार, परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी और मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक राकेश सिंह शामिल थे।\r\n \r\n
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समिति का प्रस्ताव और वित्तीय बाधा
\r\n\r\nसमिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाना एक बड़ा वित्तीय फैसला है, और इस पर निर्णय लेना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
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- \r\n वित्तीय निर्णय का अधिकार नहीं: समिति ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया कि किसी अधिकारी या समिति द्वारा इस तरह का बड़ा वित्तीय निर्णय लेना विधिक रूप से सही नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n मंत्री परिषद की सहमति: रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर फैसला मंत्री परिषद ने ही लिया था। इसलिए, अब भी मानदेय बढ़ोतरी पर अंतिम निर्णय मंत्री परिषद को ही लेना चाहिए।\r\n \r\n
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CM Yogi के वादे से बंधी उम्मीद
\r\n\r\nबेसिक शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट सौंपने के बाद कहा है कि भले ही समिति के अधिकार सीमित थे, लेकिन मानदेय बढ़ोतरी की उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं।
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- \r\n मुख्यमंत्री का आश्वासन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर घोषणा की थी कि शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n निगाहें टिकीं: अब 1.46 लाख शिक्षामित्रों और उनके परिवारों की निगाहें राज्य मंत्री परिषद की अगली बैठक पर टिकी हैं कि क्या CM Yogi इस बार अपने वादे को पूरा करते हुए उनके मानदेय में वृद्धि करेंगे।\r\n \r\n
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जल्द फैसले की संभावना
\r\n\r\nइस मुद्दे का सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े 1.46 लाख परिवारों पर पड़ेगा। चूंकि समिति ने गेंद वापस शासन के पाले में डाल दी है, इसलिए जल्द ही इस विषय पर उच्च स्तरीय विचार-विमर्श शुरू होने की उम्मीद है।
Sabse pehle comment karne wale banein.