लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (Right to Education - RTE) को लेकर एक नया अध्याय शुरू हो गया है। सरकार ने उन लाखों गरीब और वंचित परिवारों की पुकार सुन ली है, जिनके सपने अक्सर दस्तावेजों की कमी के कारण फाइलों में दबकर रह जाते थे। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश के लिए अनिवार्य नियमों में एक ऐसा संशोधन किया है, जिसे 'गेम चेंजर' माना जा रहा है।READ ALSO:-Meerut News: "साहब! एक बार मौके पर आकर देखिए..." सीवर लाइन डालकर भागा ठेकेदार, बेगमपुल की 'जीवन ज्योति वाली गली' में पैदल चलना भी हुआ दुश्वार
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अब उत्तर प्रदेश के किसी भी निजी गैर-सहायता प्राप्त (Private Non-Aided) स्कूल में आरटीई के तहत अपने बच्चे का दाखिला कराने के लिए आपको 'बच्चे के आधार कार्ड' (Child's Aadhar Card) की अनिवार्यता से नहीं जूझना पड़ेगा।
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यह खबर उन अभिभावकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो पिछले कई सालों से अपने बच्चों के बायोमेट्रिक्स अपडेट न होने या आधार कार्ड न बन पाने की वजह से आवेदन फॉर्म भरने से ही वंचित रह जाते थे।
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क्या है नया आदेश? (The Core Announcement)

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बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सरथी सेन शर्मा ने हाल ही में सभी जिलाधिकारियों (DMs) और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) को एक सर्कुलर जारी किया है। इस आदेश के अनुसार:
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    अनिवार्यता खत्म: आरटीई के तहत ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय बच्चे का आधार कार्ड अब 'अनिवार्य दस्तावेज' (Mandatory Document) की श्रेणी से हटा दिया गया है।
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    वैकल्पिक व्यवस्था: आवेदन पत्र में अब केवल माता या पिता (अभिभावक) का आधार विवरण देना पर्याप्त होगा।
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    उद्देश्य: इस फैसले का एकमात्र उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों (Genuine Beneficiaries) को तकनीकी बाधाओं के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित होने से बचाना है।
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क्यों लिया गया यह फैसला? 'ईज ऑफ लिविंग' की पहल

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सरकार के इस कदम के पीछे एक गहरी सोच और जमीनी हकीकत छिपी है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों और शिकायतों पर गौर करें तो सामने आता है कि आरटीई के तहत आवेदन करने वाले बच्चों की उम्र आमतौर पर 3 से 6 साल के बीच होती है।
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    बायोमेट्रिक समस्या: 5 साल से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड (बाल आधार) बनते तो हैं, लेकिन अक्सर उनके बायोमेट्रिक्स अपडेट नहीं होते।
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    तकनीकी पेंच: कई बार आधार केंद्रों पर तकनीकी खामियों या भीड़ के कारण गरीब मजदूर वर्ग के लोग अपने बच्चों का आधार समय पर नहीं बनवा पाते।
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    नतीजा: एडमिशन की तारीख निकल जाती है और बच्चा स्कूल जाने से वंचित रह जाता है।
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अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) है। यानी सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक इतनी आसानी से पहुंचे कि उन्हें किसी भी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े। बच्चे के आधार की बाध्यता हटाना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
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वित्तीय सहायता के लिए 'आधार' अब भी जरूरी, लेकिन किसका?

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इस नियम में बदलाव का मतलब यह कतई नहीं है कि आधार का महत्व खत्म हो गया है। सरकार ने पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलन बनाया है।
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फीस प्रतिपूर्ति का गणित: आरटीई के तहत, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस सरकार द्वारा वहन की जाती है। इसके अलावा, बच्चे को यूनिफॉर्म, किताबें और स्टेशनरी के लिए 5000 रुपये सालाना (राशि समय-समय पर बदल सकती है) की सहायता दी जाती है।
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    यह पैसा अब सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में भेजा जाता है।
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    सरकार ने साफ किया है कि यह पैसा बच्चे के खाते में नहीं, बल्कि अभिभावक (माता या पिता) के खाते में जाएगा।
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    इसलिए, अभिभावक का बैंक खाता आधार से लिंक (Aadhar Seeded) होना अनिवार्य है।
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सरल शब्दों में समझें:

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    एडमिशन के लिए: बच्चे का आधार नहीं चाहिए। (माता-पिता का आधार चलेगा)।
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    पैसा पाने के लिए: माता-पिता का आधार-लिंक्ड बैंक खाता चाहिए।
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आरटीई अधिनियम और 25% सीटों का आरक्षण (The 25% Rule Explained)

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कई अभिभावकों को अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि आरटीई के तहत एडमिशन कैसे और कितनी सीटों पर होता है। सरकार ने नए आदेश में इस पर भी स्थिति स्पष्ट की है।
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धारा 12(1)(c) का प्रावधान: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) यह अनिवार्य करती है कि सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल अपनी प्रवेश कक्षा (Entry Level Class) की कुल क्षमता का 25% हिस्सा अलाभित समूह (Disadvantaged Group) और दुर्बल वर्ग (Weaker Section) के बच्चों के लिए आरक्षित रखेंगे।
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उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपके शहर के एक बड़े प्रतिष्ठित स्कूल 'एबीसी पब्लिक स्कूल' में कक्षा 1 (या प्री-प्राइमरी) में कुल 100 सीटें हैं।
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    नियम के मुताबिक, स्कूल को 25 सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रखनी होंगी।
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    इन 25 सीटों पर पढ़ने वाले बच्चों से स्कूल एक भी पैसा फीस नहीं ले सकता।
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    इनकी फीस की भरपाई राज्य सरकार स्कूल को करती है।
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प्रवेश कक्षा क्या है? यह नियम केवल स्कूल की शुरुआती कक्षा पर लागू होता है।
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    अगर स्कूल प्री-नर्सरी से शुरू होता है, तो 25% सीटें प्री-नर्सरी में होंगी।
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    अगर स्कूल कक्षा 1 से शुरू होता है, तो 25% सीटें कक्षा 1 में होंगी।
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कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria)

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नए नियमों के बाद पात्रता की शर्तें और भी स्पष्ट हो गई हैं। आवेदन करने के लिए परिवार को निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी एक में आना चाहिए:
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A. अलाभित समूह (Disadvantaged Group):

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  1. \r\n
    अनुसूचित जाति (SC) के बच्चे।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    अनुसूचित जनजाति (ST) के बच्चे।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (OBC - Non Creamy Layer) के बच्चे।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    एचआईवी (HIV) प्रभावित बच्चे या ऐसे माता-पिता के बच्चे।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    निशक्त (Divyang) बच्चे।
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  10. \r\n
  11. \r\n
    निराश्रित और बेघर बच्चे।
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  12. \r\n
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B. दुर्बल वर्ग (Weaker Section - EWS):

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  1. \r\n
    ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये (या सरकार द्वारा निर्धारित सीमा) से कम है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    बीपीएल (BPL) कार्ड धारक परिवार।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    दिव्यांग माता-पिता के बच्चे।
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  6. \r\n
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आवेदन प्रक्रिया 2026: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

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अब जब बच्चे के आधार की बाधा हट गई है, तो आवेदन प्रक्रिया और भी सरल हो गई है। यहाँ जानिए कि आप 2026 सत्र के लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं:
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चरण 1: ऑनलाइन पोर्टल पर जाएं सबसे पहले उत्तर प्रदेश आरटीई की आधिकारिक वेबसाइट (rte25.upsdc.gov.in) पर जाएं।
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चरण 2: पंजीकरण (Registration)

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    'Online Application / Student Login' पर क्लिक करें।
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  • \r\n
    'New Student Registration' चुनें।
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    अपना जिला, क्षेत्र (शहरी/ग्रामीण), टाउन/ब्लॉक और ग्राम पंचायत/वार्ड चुनें।
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  • \r\n
    बच्चे का नाम, मोबाइल नंबर और जन्म तिथि भरें। (ध्यान दें: आधार नंबर वाले कॉलम में अब बच्चे का आधार अनिवार्य नहीं होगा)।
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चरण 3: आवेदन फॉर्म भरना

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    पंजीकरण के बाद मोबाइल पर आए रजिस्ट्रेशन नंबर से लॉग इन करें।
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  • \r\n
    अभिभावक विवरण: माता-पिता का नाम और आधार नंबर भरें।
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  • \r\n
    पता: अपना सही पता भरें (याद रखें, आप केवल अपने वार्ड/ग्राम पंचायत या उससे सटे वार्ड के स्कूलों के लिए ही आवेदन कर सकते हैं)।
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  • \r\n
    दस्तावेज़ अपलोड: आवश्यक दस्तावेजों की फोटो साफ स्कैन करके अपलोड करें।
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चरण 4: स्कूल का चयन (School Choice)

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    आपको अपने क्षेत्र के निजी स्कूलों की सूची दिखाई देगी।
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    आप अपनी पसंद के अनुसार अधिकतम स्कूलों का चयन कर सकते हैं। सलाह दी जाती है कि ज्यादा से ज्यादा स्कूल चुनें ताकि नाम आने की संभावना बढ़ जाए।
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चरण 5: लॉटरी और परिणाम

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    तय तारीख पर जिला स्तर पर कंप्यूटर आधारित लॉटरी निकाली जाएगी।
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    अगर आपके बच्चे का नाम लिस्ट में आता है, तो आपको एसएमएस के जरिए सूचना मिलेगी।
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    इसके बाद आपको अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करके संबंधित स्कूल में जाना होगा।
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दस्तावेजों की चेकलिस्ट (New Document Checklist)

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नए नियमों के बाद, आवेदन के लिए अब आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इसे नोट कर लें:
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  1. \r\n
    जन्म प्रमाण पत्र (Age Proof):
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    • \r\n
      नगर निगम/पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
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      अस्पताल/एएनएम का रिकॉर्ड।
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      या आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड।
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    • \r\n
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      (अगर इनमें से कुछ नहीं है, तो अभिभावक का शपथ पत्र भी मान्य हो सकता है)।
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    • \r\n
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  2. \r\n
  3. \r\n
    निवास प्रमाण पत्र (Address Proof):
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    • \r\n
      माता-पिता का आधार कार्ड।
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    • \r\n
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      राशन कार्ड।
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    • \r\n
      वोटर आईडी कार्ड।
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      बिजली/पानी का बिल।
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    • \r\n
      मूल निवास प्रमाण पत्र।
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    • \r\n
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  4. \r\n
  5. \r\n
    पात्रता दस्तावेज (Category Proof):
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      EWS के लिए: आय प्रमाण पत्र (तहसीलदार द्वारा जारी)।
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    • \r\n
    • \r\n
      अलाभित समूह के लिए: जाति प्रमाण पत्र / मेडिकल सर्टिफिकेट (दिव्यांगता के लिए)।
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  7. \r\n
    फोटो: बच्चे की पासपोर्ट साइज फोटो।
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  8. \r\n
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नोट: बच्चे का आधार कार्ड अब इस लिस्ट में अनिवार्य नहीं है।
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अभिभावकों और स्कूलों की प्रतिक्रिया

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सरकार के इस फैसले का समाज के विभिन्न वर्गों ने स्वागत किया है।
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अभिभावक संघ का मत: लखनऊ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, "यह एक स्वागत योग्य कदम है। पिछले साल कई बच्चे सिर्फ इसलिए फॉर्म नहीं भर पाए क्योंकि उनका आधार अपडेट नहीं था। सरकार ने जमीनी समस्या को समझा है।"
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स्कूल प्रबंधन की चिंता: हालांकि, कुछ निजी स्कूलों के संगठनों ने दबी जुबान में चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि बिना आधार के फर्जीवाड़ा बढ़ सकता है। एक ही बच्चा कई जगह आवेदन कर सकता है। लेकिन सरकार का तर्क है कि माता-पिता के आधार से डी-डुप्लीकेशन (De-duplication) किया जा सकता है, इसलिए यह चिंता निराधार है।
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क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

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भले ही नियम आसान हो गए हों, लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी हैं:
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    जागरूकता की कमी: ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोगों को आरटीई के बारे में पता नहीं है।
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  • \r\n
    स्कूलों की मनमानी: कई बार लॉटरी में नाम आने के बाद भी निजी स्कूल बहाने बनाकर एडमिशन देने से मना कर देते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दस्तावेज़ सत्यापन: बीएसए कार्यालय में दस्तावेजों के सत्यापन में लगने वाला समय और भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है।
    \r\n
  • \r\n
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सरकार ने जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रवेश प्रक्रिया की मॉनिटरिंग खुद करें और किसी भी स्कूल की मनमानी पर सख्त कार्रवाई करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

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Q1: क्या अब बच्चे का आधार बिल्कुल नहीं बनवाना पड़ेगा?
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A: नहीं, ऐसा नहीं है। एडमिशन के लिए अनिवार्यता हटी है। लेकिन भविष्य में छात्रवृत्ति, और अन्य सरकारी लाभों के लिए बच्चे का आधार बनवाना बेहतर होगा। आप एडमिशन के बाद आराम से आधार बनवा सकते हैं।
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Q2: अगर मेरे पास आय प्रमाण पत्र नहीं है तो क्या राशन कार्ड चलेगा?
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A: अगर आपके पास बीपीएल (BPL) या अंत्योदय राशन कार्ड है, तो आपको अलग से आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।
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Q3: क्या मैं अपने बच्चे का एडमिशन शहर के किसी भी स्कूल में करा सकता हूं?
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A: नहीं। आरटीई का नियम 'नेबरहुड स्कूल' (Neighborhood School) के सिद्धांत पर काम करता है। आप केवल अपने वार्ड या ग्राम पंचायत (और विस्तार होने पर 1-3 किमी के दायरे) में स्थित स्कूलों के लिए ही आवेदन कर सकते हैं।
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Q4: अगर स्कूल एडमिशन देने से मना कर दे तो क्या करें?
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A: आप तुरंत अपने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से लिखित शिकायत करें। आप 1076 (सीएम हेल्पलाइन) पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय 'अंत्योदय' की भावना को चरितार्थ करता है। शिक्षा किसी दस्तावेज की मोहताज नहीं होनी चाहिए। बच्चे के आधार कार्ड की अनिवार्यता हटाकर सरकार ने गरीब परिवारों के लिए निजी स्कूलों के दरवाजे और चौड़े कर दिए हैं।
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अब जिम्मेदारी हम सब की है। अगर आप अपने आसपास किसी ऐसे परिवार को जानते हैं जो अपने बच्चे को पढ़ाना चाहता है लेकिन नियमों की जानकारी के अभाव में चुप बैठा है, तो उन तक यह खबर जरूर पहुंचाएं। एक छोटी सी जानकारी किसी बच्चे का भविष्य बदल सकती है।
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