लखनऊ। अपने सपनो का घर खरीदना हर इंसान की जिंदगी का एक अहम लक्ष्य होता है, लेकिन कई बार बिल्डरों की मनमानी और छिपे हुए चार्जेज घर खरीदारों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। उत्तर प्रदेश में घर खरीदारों और फ्लैट मालिकों के हितों की रक्षा करते हुए यूपी रेरा (उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक कदम उठाया है।READ ALSO:-मेरठ में बड़ा एक्शन: यूट्यूबर शादाब जकाती का 9 दिन पुराना 'जकाती ज्वैलर्स' सील, पार्किंग की जगह तान दिया था अवैध शोरूम
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यूपी रेरा ने फ्लैट ट्रांसफर से जुड़े नियमों (Flat Transfer Rules) में बड़ा बदलाव करते हुए बिल्डरों द्वारा मनमाने ढंग से वसूले जाने वाले भारी-भरकम ट्रांसफर शुल्क पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस नए फैसले से न केवल राजधानी लखनऊ और नोएडा जैसे बड़े शहरों के निवासियों को फायदा होगा, बल्कि पश्चिमी यूपी में तेजी से विकसित हो रहे मेरठ और बिजनौर जैसे शहरों में भी हाउसिंग सोसाइटियों में फ्लैट लेने वाले खरीदारों को एक बड़ी कानूनी और आर्थिक राहत मिलेगी।
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खत्म हुई बिल्डरों की मनमानी, तय की गई अधिकतम फीस
\r\n\r\nअब तक रियल एस्टेट सेक्टर में फ्लैट ट्रांसफर को लेकर कोई स्पष्ट और सख्त शुल्क सीमा लागू नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर कई बिल्डर ग्राहकों से लाखों रुपये ऐंठ रहे थे।
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नए नियमों के अनुसार:
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- \r\n पारिवारिक हस्तांतरण (वारिस के नाम): अब किसी मृतक आवंटी (Allottee) के कानूनी वारिस या परिवार के रक्त संबंधी सदस्य के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर करने पर बिल्डर अधिकतम सिर्फ 1,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस ही ले सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n थर्ड पार्टी हस्तांतरण (अन्य के नाम): यदि कोई आवंटी अपना फ्लैट किसी बाहरी या अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर करता है, तो इस स्थिति में भी बिल्डर अधिकतम 25,000 रुपये ही शुल्क के रूप में ले सकेगा।\r\n \r\n
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यूपी रेरा के चेयरमैन ने बताई पुरानी व्यवस्था की खामियां
\r\n\r\nयूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अथॉरिटी को लंबे समय से आवंटियों और उनके परिवारों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं। चेयरमैन के मुताबिक, "पहले कई बिल्डर मृतक आवंटी के वारिसों से भी फ्लैट ट्रांसफर के नाम पर अमानवीय तरीके से भारी रकम वसूल रहे थे। यह एक बेहद अनुचित प्रथा बन गई थी।"
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लाखों में होती थी वसूली: कई मामलों में यह बात सामने आई थी कि बिल्डर फ्लैट ट्रांसफर के लिए 200 रुपये से लेकर 1,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक का चार्ज ले रहे थे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी का 1500 वर्ग फीट का फ्लैट है, तो उससे ट्रांसफर के नाम पर 15 लाख से 30 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि की मांग की जा रही थी। रेरा ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और विनियम 47 में संशोधन कर इस पूरी मनमानी और अवैध वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
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सबसे बड़ी राहत: नहीं होगा कोई नया लीज या विक्रय एग्रीमेंट
\r\n\r\nयूपी रेरा के इस फैसले में एक और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कानूनी कागजी कार्रवाई से जुड़ा है। नए नियम के तहत, यदि फ्लैट किसी परिवार के सदस्य या रक्त संबंधी वारिस के नाम ट्रांसफर किया जाता है, तो इसके लिए बिल्डर कोई नया विक्रय (Sale Agreement) या लीज एग्रीमेंट (Lease Agreement) नहीं करेगा।
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रेरा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब एक बार मूल आवंटी फ्लैट की पूरी कीमत बिल्डर को चुका चुका है, तो केवल नाम बदलने की प्रक्रिया के लिए दोबारा से लंबी कागजी कार्रवाई करना या उस पर लाखों रुपये का अतिरिक्त ट्रांसफर शुल्क वसूलना पूरी तरह से अनुचित और गैर-कानूनी है। पुराने एग्रीमेंट में ही एक सप्लीमेंट्री डीड या नाम दर्ज करके इस प्रक्रिया को 1000 रुपये की नाममात्र प्रोसेसिंग फीस के साथ पूरा किया जाएगा।
\r\n\r\nफ्लैट ट्रांसफर के लिए अनिवार्य डाक्यूमेंट्स (Required Documents)
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अगर कोई वारिस अपने नाम पर फ्लैट ट्रांसफर करवाना चाहता है, तो उसे एक पारदर्शी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके लिए रेरा ने कुछ दस्तावेजों को अनिवार्य किया है, जिन्हें जमा करने के बाद बिल्डर को फ्लैट ट्रांसफर करना ही होगा:
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- \r\n मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): मूल आवंटी के निधन का वैध सरकारी प्रमाण पत्र।\r\n \r\n
- \r\n उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate): कानूनी वारिस होने का न्यायालय या सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र।\r\n \r\n
- \r\n अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): यदि मृतक आवंटी के एक से अधिक कानूनी वारिस हैं, तो जिस वारिस के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर होना है, उसके पक्ष में बाकी सभी वारिसों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देना आवश्यक होगा।\r\n \r\n
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यूपी रेरा का सख्त रुख: अब तक वापस दिलाए 8,000 करोड़ रुपये
\r\n\r\nयूपी रेरा केवल नियम बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए वह जमीन पर भी सख्ती से काम कर रहा है। अथॉरिटी ने दावा किया है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कसते हुए आवंटियों को उनका हक दिलाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।
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अब तक यूपी रेरा विभिन्न माध्यमों से परेशान घर खरीदारों को करीब 8,000 करोड़ रुपये वापस दिला चुका है। इस भारी भरकम रिकवरी में:
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- \r\n रेरा द्वारा जारी किए गए रिकवरी सर्टिफिकेट (RC)\r\n \r\n
- \r\n बिल्डरों और खरीदारों के बीच कराए गए समझौते\r\n \r\n
- \r\n रेरा की अलग-अलग पीठों (Benches) के कड़े फैसले\r\n \r\n
- \r\n और सुलह मंच (Conciliation Forum) के जरिए हुई वसूली शामिल है।\r\n \r\n
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यूपी में रियल एस्टेट सेक्टर की तेज उड़ान
\r\n\r\nरेरा दिवस के अवसर पर जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट सेक्टर इस समय बूम पर है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
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- \r\n 2025 के आंकड़े: वर्ष 2025 में रियल एस्टेट में भारी उछाल देखा गया है। अकेले राजधानी लखनऊ में इस वर्ष 67 नई आवासीय और कमर्शियल परियोजनाएं (Projects) रेरा में पंजीकृत हुई हैं।\r\n \r\n
- \r\n पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड: पिछले मात्र तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश में 2 लाख से अधिक आवासीय इकाइयों (Housing Units) का विकास और निर्माण किया गया है, जो प्रदेश के बढ़ते शहरीकरण और लोगों की क्रय शक्ति को दर्शाता है।\r\n \r\n
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यूपी रेरा के चेयरमैन ने अंत में यह स्पष्ट किया कि अथॉरिटी का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता (Transparency), जवाबदेही (Accountability) और घर खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह नया नियम बिल्डरों के एकाधिकार को खत्म करने और एक आम आदमी के अपनी छत के सपने को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.