[लखनऊ/ब्यूरो - खबरीलाल न्यूज़ डेस्क]: उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) अब केवल लाठी-डंडे और पुरानी फाइलों तक सीमित नहीं रही है। बदलते दौर और बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए यूपी पुलिस अब 'डिजिटल सुपरकॉप' (Digital Supercop) की भूमिका में आ गई है। अपराधियों को पकड़ने के लिए अब पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक नेटवर्किंग को अपना हथियार बना लिया है।READ ALSO:-आम जनता को नए साल का 'बंपर' तोहफा: यूपी के इन 5 शहरों में सस्ती हुई सीएनजी और पीएनजी, ग्रीन गैस लिमिटेड ने घटाए दाम, देखिए पूरी रेट लिस्ट!
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खबरीलाल को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस तकनीकी सेवाएं मुख्यालय द्वारा एक विशेष अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों को हाईटेक ट्रेनिंग दी गई है। इस मुहिम का मकसद पुलिस को इतना स्मार्ट बनाना है कि वे डिजिटल दुनिया में छिपे अपराधियों को भी पाताल से खोज निकालें।
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क्या है 'मिशन डिजिटल सुपरकॉप'?

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दरअसल, उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीकी सेवाएं मुख्यालय ने दुनिया की दिग्गज नेटवर्किंग कंपनी सिस्को (CISCO) के साथ मिलकर 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया था। शुक्रवार को इस कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन इसकी गूंज अब अपराधियों के कानों तक जरूर पहुंचेगी।
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 up police trained to catch criminals with ai hindi latest news

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ट्रेनिंग में क्या सिखाया गया? इस विशेष कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को उन हथियारों से लैस किया गया है जो आज के दौर में सबसे ज्यादा जरूरी हैं:
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    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): कैसे एआई की मदद से डेटा खंगाला जाए और अपराधियों के पैटर्न को समझा जाए।
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    साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security): हैकिंग, फिशिंग और ऑनलाइन ठगी को रोकने के उन्नत तरीके।
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    कंप्यूटर नेटवर्किंग (Computer Networking): डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखना और अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना।
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120 अधिकारियों की 'फौज' तैयार

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यह ट्रेनिंग केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं थी। खबरीलाल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डिजिटल स्किलिंग प्रोग्राम में पूरे प्रदेश से चुने हुए अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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    प्रतिभागी: प्रदेश के सभी जनपदों और कमिश्नरेट से डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर्स (DC) को बुलाया गया था।
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    संख्या: कुल मिलाकर 120 से अधिक क्षेत्र स्तरीय अधिकारी और मुख्यालय के 14 पुलिस कार्मिकों ने इसमें हिस्सा लिया।
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अब ये 120 अधिकारी अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों के लिए 'मास्टर ट्रेनर' की भूमिका निभाएंगे और साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई को धार देंगे।
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एक्सपर्ट्स ने समझाए बारीकी गुर

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इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पुलिस को ट्रेनिंग देने के लिए खुद इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स मौजूद थे। CISCO के विशेषज्ञ इशविन्दर सिंह (Ishvinder Singh) समेत 4 अतिथि वक्ताओं ने पुलिसकर्मियों को डिजिटल दुनिया की जटिलताओं को बहुत ही सरल भाषा में समझाया।
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फोकस एरिया:

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    कैसे साइबर अपराधी अपनी पहचान छुपाते हैं?
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    डार्क वेब पर निगरानी कैसे रखी जाए?
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    नेटवर्क में सेंधमारी को कैसे रोका जाए?
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महानिदेशक की प्राथमिकता और भविष्य की रणनीति

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यह पूरा कार्यक्रम पुलिस महानिदेशक (DG) राजीव कृष्ण की प्राथमिकताओं के अनुरूप आयोजित किया गया था। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि अपराधी हाईटेक हो रहे हैं, तो पुलिस को उनसे दो कदम आगे रहना होगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे मॉडर्न एआई (Modern AI) का इस्तेमाल कर क्राइम कंट्रोल कर सकें।
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समापन समारोह में क्या बोले अधिकारी? प्रशिक्षण का समापन करते हुए शुभम पटेल (SP/सहायक निदेशक, यूपी पुलिस कंप्यूटर केंद्र) ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही।
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"साइबर और डिजिटल अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए पुलिस बल का तकनीकी रूप से दक्ष होना अब कोई 'विकल्प' नहीं, बल्कि समय की 'आवश्यकता' है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से हमारी कार्यक्षमता को नई दिशा मिलेगी।" - शुभम पटेल, एसपी
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आम जनता को क्या होगा फायदा?

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खबरीलाल का मानना है कि इस ट्रेनिंग का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा।
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    साइबर ठगी पर लगाम: आए दिन होने वाली ऑनलाइन ठगी (OTP फ्रॉड, केवाईसी फ्रॉड) के मामलों को सुलझाने में तेजी आएगी।
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    तेज जांच: एआई की मदद से पुलिस अब संदिग्धों की पहचान जल्दी कर पाएगी।
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    स्मार्ट पुलिसिंग: थानों में तकनीकी जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मौजूदगी से पीड़ितों की सुनवाई बेहतर तरीके से होगी।
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डिजिटल युग की नई पुलिस

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उत्तर प्रदेश पुलिस का यह कदम सराहनीय है। 'डिजिटल सुपरकॉप' बनने की दिशा में यह ट्रेनिंग एक मील का पत्थर साबित होगी। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर इस ट्रेनिंग का असर कितनी जल्दी दिखाई देता है। लेकिन एक बात तय है - यूपी पुलिस अब अपडेट हो गई है।
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FAQ: यूपी पुलिस की डिजिटल ट्रेनिंग

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Q1: यूपी पुलिस को किसने ट्रेनिंग दी है?
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Ans: यूपी पुलिस तकनीकी सेवाएं मुख्यालय ने CISCO (सिस्को) के सहयोग से यह ट्रेनिंग आयोजित की थी।
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Q2: इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य क्या था?
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Ans: पुलिस को साइबर सिक्योरिटी, एआई (AI) और नेटवर्किंग में एक्सपर्ट बनाना, ताकि साइबर अपराधों को रोका जा सके।
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Q3: कितने अधिकारियों ने हिस्सा लिया?
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Ans: प्रदेश भर के 120 से अधिक अधिकारियों और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर्स ने इसमें भाग लिया।
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Q4: क्या इससे साइबर क्राइम कम होगा?
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Ans: बिल्कुल, पुलिस के तकनीकी रूप से दक्ष होने पर साइबर अपराधों की जांच में तेजी आएगी और अपराधियों को पकड़ना आसान होगा।
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