उत्तर प्रदेश में झुग्गी-झोपड़ियों और मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरी घोषणा की है। दशकों से तंबुओं और कच्चे मकानों में अमानवीय स्थिति में रह रहे लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना (UP Malin Basti Punarvikas Yojana) की शुरुआत की है। इस महात्वाकांक्षी योजना के तहत अब झुग्गीवासियों को विस्थापित नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें उसी स्थान पर 30 वर्गमीटर के आधुनिक और पक्के बहुमंजिला फ्लैट बनाकर दिए जाएंगे। इसके साथ ही, प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी कुछ विशेष समुदायों और जनजातियों को 'सीएम आवास योजना' (ग्रामीण) की पात्रता सूची में विशेष प्राथमिकता देने का अहम फैसला लिया गया है।READ ALSO:-आसमान से बरस रही आग, यूपी के 32 जिलों में 'लू' का रेड अलर्ट; बांदा में पारा 44°C पार, घरों में कैद होने को मजबूर हुए लोग
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यह कदम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गरीब तबके को एक सुरक्षित आशियाना प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस लेख में हम इस योजना के नियम, सर्वे की स्थिति और ग्रामीण इलाकों के लिए की गई नई घोषणाओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
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यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना के मुख्य नियम और सुविधाएं
\r\n\r\nमलिन बस्तियों को हटाकर लोगों को शहर के बाहर बसाने की पुरानी योजनाओं में अक्सर लोगों का रोजगार छिन जाता था। इसी समस्या को खत्म करने के लिए यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना (In-situ Slum Redevelopment) लाई गई है। नगर विकास विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन बस्तियों में कम से कम 60-70 परिवार निवास कर रहे हैं, उनका चयन इस योजना के लिए किया जाएगा।
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चयनित बस्तियों में मौजूदा झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों को पूरी तरह से हटाकर, उसी जमीन पर बहुमंजिला (Multi-story) इमारतें बनाई जाएंगी। प्रत्येक पात्र परिवार को 30 वर्गमीटर का एक हवादार फ्लैट आवंटित किया जाएगा। इन फ्लैटों में केवल चारदीवारी नहीं होगी, बल्कि जीवन जीने के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं में शामिल हैं:
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- \r\n 24 घंटे पीने के पानी की आपूर्ति\r\n \r\n
- \r\n बिजली के वैध कनेक्शन\r\n \r\n
- \r\n आधुनिक सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम\r\n \r\n
- \r\n पक्की सड़कें और स्ट्रीट लाइट\r\n \r\n
- \r\n सामुदायिक केंद्र (Community Center) और बच्चों के लिए पार्क\r\n \r\n
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फ्लैटों के आवंटन को लेकर एक सख्त नियम भी बनाया गया है। शुरुआत में ये फ्लैट लाभार्थियों को 'लीज' (Lease) पर दिए जाएंगे। आवंटन के बाद अगले 10 साल तक कोई भी लाभार्थी इन फ्लैटों को बेच या खरीद नहीं सकेगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि भू-माफिया इन गरीबों से सस्ते में फ्लैट न हथिया सकें। 10 वर्ष की अवधि सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद, इन फ्लैटों को 'फ्रीहोल्ड' कर दिया जाएगा और सीधे आवंटियों के नाम पर इसकी पक्की रजिस्ट्री कर दी जाएगी।
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लखनऊ और सहारनपुर से होगी शुरुआत: सर्वे और डीपीआर तैयार
\r\n\r\nयोजना को धरातल पर उतारने के लिए राज्य नगरीय विकास अभिकरण (SUDA) की नोडल एजेंसी ने प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में सघन सर्वे का काम लगभग पूरा कर लिया है। गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, मेरठ, प्रयागराज, शाहजहांपुर और वाराणसी समेत कई बड़े शहरों में जमीन चिह्नांकन और परिवारों की गिनती का काम बहुत तेजी से चल रहा है।
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इस बीच, राजधानी लखनऊ और सहारनपुर की दो प्रमुख मलिन बस्तियों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR - Detailed Project Report) तैयार कर ली गई है:
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- \r\n लखनऊ: राजधानी की वसंतकुंज योजना के अंतर्गत आने वाली 'विनायकपुरम मलिन बस्ती' में 314 गरीब परिवारों के लिए फ्लैट बनाए जाएंगे। चूंकि यह बस्ती वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर बसी है, इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस जमीन को नगर निगम को विधिवत हैंडओवर (हस्तांतरित) करने की कागजी प्रक्रिया चल रही है।\r\n \r\n
- \r\n सहारनपुर: सहारनपुर जिले की कुष्ठ आश्रम योजना के अंतर्गत 'खलासी लाइन बस्ती' में 106 परिवारों को पक्के फ्लैट दिए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार, इस बस्ती की जमीन पर कोई विवाद नहीं है, इसलिए यहां बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कार्य सबसे पहले शुरू होने की प्रबल उम्मीद है।\r\n \r\n
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आगजनी की घटनाओं के बाद सरकार ने दिखाई तेजी
\r\n\r\nहाल ही के दिनों में मलिन बस्तियों में रहने वालों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। पिछले ही हफ्ते राजधानी लखनऊ और गाजियाबाद की झुग्गी बस्तियों में भीषण आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं। इन हादसों में सैकड़ों झोपड़ियां जलकर पूरी तरह से राख हो गई थीं, जिससे गरीब परिवारों की जीवन भर की जमा-पूंजी और आशियाना उजड़ गया था।
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इन दर्दनाक हादसों के बाद बस्तीवासियों की सुरक्षा, पक्के मकान और बुनियादी सुविधाओं की मांग बहुत जोर पकड़ने लगी थी। मौसम की मार और आगजनी जैसे हादसों से गरीबों को बचाने के लिए ही नगर विकास विभाग ने यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना की फाइलों को गति दी है। कंक्रीट के पक्के मकान बन जाने से आग लगने जैसी त्रासदियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी। दिलचस्प बात यह है कि राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूड़ा) के हालिया सर्वे में उत्तर प्रदेश के सात शहरों— आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, मथुरा, मुरादाबाद और फिरोजाबाद में ऐसी कोई भी मलिन बस्ती नहीं मिली है, जहां तत्काल प्रभाव से इस पुनर्विकास योजना को लागू करने की आवश्यकता हो।
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ग्रामीण इलाकों के लिए सीएम आवास योजना में अहम फैसला
\r\n\r\nशहरी क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के गरीबों के लिए भी एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में घोषणा की है कि समाज के सबसे पिछड़े और उपेक्षित आदिवासी समुदायों को अब 'सीएम आवास योजना (ग्रामीण)' की पात्रता सूची में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
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इस फैसले के तहत भोटिया, जौनसारी, राजर्जी और गोंड जैसी प्रमुख जनजातियों के साथ-साथ इनकी पर्यायवाची जातियों (जैसे- धुरिया, ओझा, नायक, पठारी, राजगोंड, खरवार, खैरवार, पराहिया, पंखा, पनिका आदि) को प्राथमिकता के आधार पर पक्के मकान दिए जाएंगे। ये जनजातीय और पिछड़े समुदाय मुख्य रूप से प्रदेश के महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, कुशीनगर, भदोही और संत कबीर नगर जिलों में निवास करते हैं।
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बताया जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जब इन ग्रामीण इलाकों के भ्रमण पर गए थे, तब इन आदिवासी और अत्यंत पिछड़े परिवारों ने उनसे मिलकर पक्के आवास की गुहार लगाई थी। इन परिवारों की दयनीय आर्थिक और सामाजिक स्थिति का जमीनी जायजा लेने के बाद, विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की गई और यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
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निष्कर्ष के तौर पर, उत्तर प्रदेश सरकार के ये दोनों फैसले राज्य के सबसे गरीब और वंचित वर्ग के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रखने वाले हैं। जहां एक ओर यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना शहरी झुग्गीवासियों को उसी जगह पर पक्के और सुविधा-युक्त फ्लैट देकर उनके जीवन से विस्थापन का दर्द खत्म करेगी, वहीं दूसरी ओर सीएम आवास योजना में आदिवासी जातियों को प्राथमिकता देने से ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा। 10 साल की लीज का नियम लाभार्थियों को भू-माफियाओं से बचाएगा और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ेगा। लखनऊ और सहारनपुर से शुरू होने वाली यह यूपी मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना जल्द ही पूरे प्रदेश के मलिन बस्तियों की तस्वीर बदलकर उन्हें 'स्मार्ट' और सुरक्षित आवासों में तब्दील कर देगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.