प्रदेश में इन दिनों औद्योगिक क्षेत्र एक गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। गैस की भारी कमी और उत्पादन लागत (Production Cost) में बेतहाशा वृद्धि ने उद्योगों की कमर तोड़ कर रख दी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई कारखानों में तालाबंदी और कर्मचारियों की छंटनी (Job Loss) का खतरा मंडराने लगा है। स्थिति को नियंत्रण में लाने और उद्योगों को फौरी राहत देने के लिए श्रम विभाग ने एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) और शिफ्ट प्रणाली को लेकर कई अहम और बड़े फैसले लिए गए हैं। READ ALSO:-रिश्तों का खूनी अंत: गाजियाबाद में 80 साल के बुजुर्ग के सिर पर सवार हुआ खून, 72 वर्षीय पत्नी को कुल्हाड़ी से काटकर उतारा मौत के घाट; फिर खुद पहुंचा थाने
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आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह संकट क्या है, श्रम विभाग ने क्या फैसले लिए हैं और इसका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।
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क्या है पूरा मामला? क्यों गहराया उद्योगों पर संकट?

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अधिकारियों और औद्योगिक संगठनों के अनुसार, पिछले कुछ समय से प्रदेश में प्राकृतिक गैस और औद्योगिक इस्तेमाल वाली गैस की आपूर्ति (Gas Supply) बुरी तरह प्रभावित हुई है। गैस की कमी के कारण:
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    उत्पादन लागत में भारी उछाल: गैस महंगी होने और सप्लाई बाधित होने से कारखानों को चलाने का खर्च कई गुना बढ़ गया है।
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    नौकरियों पर मंडराया खतरा: उत्पादन लागत बढ़ने और मुनाफा घटने के कारण उद्योगपति अब खर्च में कटौती करने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ रहा है और कई बड़े व छोटे उद्योगों में छंटनी (Layoffs) का खतरा पैदा हो गया है।
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श्रम विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए बड़े फैसले

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गहराते औद्योगिक संकट और संभावित बेरोजगारी के खतरे को देखते हुए श्रम विभाग ने तुरंत मोर्चा संभाला। विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई और ऊर्जा (बिजली व गैस) की खपत को कम करने के लिए दो सबसे बड़े फैसले लिए गए:
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1. सप्ताह में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) व्यवस्था: बैठक में तय किया गया कि ऊर्जा की खपत को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए आईटी (IT), कॉर्पोरेट और उन सभी कार्यालयों में जहां घर से काम करना संभव है, वहां सप्ताह में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
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    फायदा: इससे न केवल कार्यालयों में बिजली और एसी (AC) का खर्च बचेगा, बल्कि कर्मचारियों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की भी बचत होगी।
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2. कार्यालयों और फैक्ट्रियों के लिए अलग-अलग शिफ्ट (Staggered Shifts): जिन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और फैक्ट्रियों में 'वर्क फ्रॉम होम' संभव नहीं है, उनके लिए शिफ्ट प्रणाली में बदलाव किया गया है।
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    तय किया गया है कि फैक्ट्रियों और कार्यालयों को एक ही समय पर खोलने के बजाय अलग-अलग शिफ्ट (Different Shifts) में संचालित किया जाएगा।
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    फायदा: इससे एक ही समय में ग्रिड पर पड़ने वाला ऊर्जा (Power & Gas) का भारी दबाव कम होगा और संसाधनों का समान रूप से वितरण हो सकेगा।
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जल्द जारी होंगे विस्तृत दिशा-निर्देश (SOP)

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श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये कदम फिलहाल फौरी राहत (Immediate Relief) के तौर पर उठाए गए हैं ताकि उद्योगों को बंद होने से बचाया जा सके और लोगों की नौकरियां सुरक्षित रहें।
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सरकार और श्रम विभाग इस नई व्यवस्था (वर्क फ्रॉम होम और शिफ्ट टाइमिंग) को लेकर जल्द ही एक विस्तृत गाइडलाइन (SOP - Standard Operating Procedure) जारी करेंगे। इस गाइडलाइन में स्पष्ट किया जाएगा कि किन-किन सेक्टर्स पर यह नियम अनिवार्य रूप से लागू होगा और शिफ्ट की टाइमिंग क्या-क्या रहेंगी।
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गैस आपूर्ति की यह समस्या अगर जल्द नहीं सुलझी, तो आने वाले दिनों में औद्योगिक क्षेत्र को और भी कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सरकार की कोशिश है कि ऊर्जा की बचत करके किसी तरह उत्पादन चक्र को टूटने से बचाया जाए और कर्मचारियों की छंटनी को रोका जाए।
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