लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश आज वैश्विक पटल पर पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प और आगामी महाकुंभ जैसे महाआयोजनों के चलते राज्य में देशी और विदेशी पर्यटकों की आमद में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यटकों की इस भारी भीड़ को सुरक्षित, किफायती और घर जैसा माहौल (Home-like Environment) प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी 'बीएण्डबी (बेड एंड ब्रेकफास्ट) व होम स्टे नीति-2025' में कई बड़े और अहम संशोधन किए हैं।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर क्राइम: जब 'अवैध संबंधों' की आग में भस्म हुई दोस्ती; दोस्त ने पिलाई शराब, फिर घोंटा गला, पुलिस एनकाउंटर में कातिल गिरफ्तार
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नए बदलावों के तहत सरकार ने होम स्टे संचालकों को बड़ी राहत देते हुए कमरों की संख्या सीमा बढ़ा दी है, वहीं गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ कड़े नियम भी लागू किए हैं। अगर आप भी यूपी में अपना मकान किराए पर देकर पर्यटन व्यवसाय से जुड़ना चाहते हैं, तो इन नए नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
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कमरों की संख्या में इजाफा: अब 8 कमरे दे सकेंगे किराए पर

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होम स्टे नीति में किया गया सबसे बड़ा बदलाव कमरों की संख्या को लेकर है। राज्य सरकार ने पुरानी व्यवस्था को खत्म करते हुए संचालकों को अधिक मुनाफा कमाने का अवसर दिया है।
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    पुराना नियम: इससे पहले के नियमों के अनुसार, होम स्टे मालिक अपने घर के केवल दो-तिहाई (2/3) कमरों को ही किराए पर दे सकते थे। यह संख्या कम से कम एक और अधिकतम छह (कुल 16 शैय्या या बेड) तक सीमित थी।
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    नया नियम (संशोधित): नए बदलाव के बाद, अब कोई भी होम स्टे संचालक अपने घर में एक से लेकर अधिकतम आठ कमरों (कुल 16 शैय्या/बेड) तक का पंजीकरण करा सकता है। इस फैसले से उन भवन स्वामियों को सीधा फायदा होगा जिनके पास बड़े मकान हैं और वे अधिक पर्यटकों को ठहराने की क्षमता रखते हैं।
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केयरटेकर का रहना हुआ अनिवार्य: सुरक्षा और 'अतिथि देवो भव:' का संकल्प

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होम स्टे का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को एक कमर्शियल होटल की बजाय स्थानीय संस्कृति और पारिवारिक माहौल का अनुभव कराना होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया है कि पंजीकृत होम स्टे इकाई में केयरटेकर (Caretaker) या भवन स्वामी का भौतिक रूप से (Physically) निवास करना जरूरी होगा।
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    क्यों लिया गया यह फैसला? कई बार देखा गया था कि लोग होम स्टे के नाम पर पूरी बिल्डिंग को बिना किसी निगरानी के होटल की तरह चला रहे थे। केयरटेकर के रहने से न केवल पर्यटकों (खासकर महिला पर्यटकों) की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उन्हें समय पर किफायती दरों पर नाश्ता, भोजन और स्थानीय पर्यटन की सही जानकारी भी मिल सकेगी।
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शहरी क्षेत्रों और लीज से जुड़े नए कड़े मानक

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उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस नीति के संशोधनों पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शहरी परिक्षेत्रों (Urban Areas) में होम स्टे को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
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    स्वामित्व या लीज की शर्तें: शहरी क्षेत्रों में अब होम स्टे इकाई केवल वही होगी, जो या तो संचालक के खुद के स्वामित्व (Ownership) वाली भूमि पर बनी हो, या फिर विकास प्राधिकरणों (Development Authorities) से विधिवत लीज पर ली गई हो।
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    लीज की न्यूनतम अवधि: यदि कोई व्यक्ति किराए या लीज के भवन पर होम स्टे शुरू करना चाहता है, तो उस भवन की लीज एग्रीमेंट न्यूनतम तीन वर्ष की होनी चाहिए। इससे कम अवधि के लीज एग्रीमेंट पर होम स्टे का लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
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बजट ट्रैवलर्स के लिए 'डॉरमेट्री' को भी मिली मान्यता

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बैकपैकर्स, छात्रों और कम बजट वाले पर्यटकों (Budget Travelers) को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डॉरमेट्री (Dormitory) के कंसेप्ट को भी इस नीति में शामिल किया है। नए संशोधन के अनुसार, 16 बिस्तरों (Beds) वाली डॉरमेट्री को भी अब एक पात्र होम स्टे इकाई माना जाएगा। इससे सस्ते आवास की तलाश में आने वाले पर्यटकों को भारी राहत मिलेगी और वे सुरक्षित स्थानों पर ठहर सकेंगे।
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होटल और गेस्ट हाउस के लिए 'नो एंट्री'

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सरकार ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि होम स्टे योजना का लाभ बड़े व्यावसायिक घरानों या होटलों को नहीं मिलेगा। संशोधन के अनुसार, आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों, कमर्शियल होटलों (Hotels), मोटल (Motels) या बड़े गेस्ट हाउस को इस 'बीएण्डबी (बेड एंड ब्रेकफास्ट)' योजना के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जाएगा। यह योजना विशुद्ध रूप से स्थानीय निवासियों के स्वरोजगार और पर्यटकों को 'होम-स्टे' का वास्तविक अनुभव देने के लिए है।
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डिजिटल सशक्तिकरण: पोर्टल पर खुद कर सकेंगे लाइसेंस का नवीनीकरण (Auto-Renewal)

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'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देते हुए पर्यटन विभाग ने होम स्टे के नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और ऑनलाइन कर दिया है।
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    अब पंजीकृत होम स्टे इकाइयों के मालिकों को अपना लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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    संचालक अपनी पंजीकरण अवधि समाप्त होने से पहले पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने पंजीकरण का नवीनीकरण कर सकेंगे।
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    स्वचालित व्यवस्था: स्वचालित नवीनीकरण (Auto-Renewal) की यह सुविधा पंजीकरण समाप्ति की तिथि से तीन महीने पहले (3 Months prior) से ही पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगी। इससे संचालकों को अपना व्यवसाय बिना किसी रुकावट के चलाने में सहूलियत मिलेगी।
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उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर

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विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।
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    स्वरोजगार को बढ़ावा: स्थानीय लोग अपने खाली पड़े कमरों का उपयोग करके एक नियमित आय (Regular Income) का स्रोत तैयार कर सकेंगे।
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    महिलाओं का सशक्तिकरण: होम स्टे के संचालन में महिलाएं बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, जिससे महिला उद्यमिता (Women Entrepreneurship) को बल मिलेगा।
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    पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा: महाकुंभ-2025 और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान जब होटलों में कमरे कम पड़ जाते हैं, तब ये होम स्टे लाखों पर्यटकों को आश्रय देने का काम करेंगे।
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'बीएण्डबी होम स्टे नीति-2025' में किए गए ये संशोधन दर्शाते हैं कि सरकार पर्यटन को केवल एक उद्योग तक सीमित न रखकर, उसे आम जनमानस के आर्थिक विकास से जोड़ना चाहती है। 8 कमरों की अनुमति, केयरटेकर की अनिवार्यता और ऑनलाइन ऑटो-रिन्यूअल जैसी सुविधाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यूपी अब एक आधुनिक और पर्यटक-अनुकूल (Tourist-Friendly) राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जो लोग इस सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह नीति एक सुनहरा अवसर लेकर आई है।
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