लखनऊ (एजुकेशन डेस्क)। उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत बेहद ही सकारात्मक और ऐतिहासिक फैसलों के साथ हुई है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा के स्तर को सुधारने, शिक्षकों के हितों की रक्षा करने और छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए अपना खजाना खोल दिया है।READ ALSO:-मेरठ STF का 'ऑपरेशन क्लीन': दिल्ली-NCR से कारें चुराकर जम्मू-कश्मीर में बेचने वाले हाईटेक गिरोह का पर्दाफाश, RTO दलाल समेत 4 अरेस्ट!
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नए सत्र की शुरुआत के साथ ही शासन स्तर से कई बड़े और अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी राहत उन 'विशेष शिक्षकों' (Special Educators) को मिली है, जो लंबे समय से अनुबंध और संविदा पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश के लाखों गरीब और ग्रामीण छात्रों के लिए स्कूल बैग, स्वेटर, जूते-मोजे और स्टेशनरी खरीदने के लिए 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के माध्यम से धनराशि सीधे उनके माता-पिता के बैंक खातों में भेजने की तैयारी भी युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है।
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आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार के इन बड़े फैसलों से शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को क्या-क्या सीधा लाभ मिलने वाला है।
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लंबे संघर्ष की जीत: 434 विशेष शिक्षकों को मिला नियमितीकरण का तोहफा

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उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में एक लंबे समय से संविदा (Contract) के आधार पर काम कर रहे विशेष शिक्षकों के लिए यह नया सत्र उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। ये वे शिक्षक हैं जो अपनी विशेष ट्रेनिंग के जरिए 'दिव्यांग' (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों को शिक्षित करने का पुनीत और चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने प्रशस्त किया रास्ता: इन शिक्षकों की नियमित नियुक्ति का रास्ता एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद साफ हुआ है। रजनीश कुमार पांडेय द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए नियमित विशेष शिक्षकों की नियुक्ति करने का सख्त आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में ही उत्तर प्रदेश सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
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क्या रही चयन की पूरी प्रक्रिया?

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    शासन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी (Screening Committee) का गठन किया था।
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    इस कमेटी के समक्ष कुल 540 संविदा शिक्षकों की चयन प्रक्रिया और उनके दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
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    जांच और मानकों के आधार पर सक्षम समिति ने अपनी संस्तुति दी, जिसके बाद 434 शिक्षकों को नियमित नियुक्ति देने का अंतिम निर्णय लिया गया।
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अब क्या होगा नया पदनाम? शासन ने इन 434 शिक्षकों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। बेसिक शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करें। अब इन शिक्षकों को 'सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा' (Assistant Teacher Special Education) के सम्मानित पद पर तैनाती दी जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि अब इन्हें संविदा के मामूली मानदेय के बजाय राज्य सरकार के नियमों के अनुसार 'नियमित वेतन' (Regular Salary) और अन्य सभी सरकारी भत्ते प्राप्त होंगे।
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बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक को सख्त निर्देश दिया है कि इस मामले में तत्काल आवश्यक वैधानिक कार्यवाही करते हुए शासन को अवगत कराएं, ताकि इन शिक्षकों को जल्द से जल्द उनके नए पदों पर कार्यभार ग्रहण कराया जा सके।
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छात्रों के लिए खुला खजाना: DBT के लिए 2.53 अरब रुपये स्वीकृत

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नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) में बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करने और उन्हें सभी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के लिए शासन ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से बच्चों को यूनिफॉर्म या स्कूल बैग सीधे बांटने के बजाय, उनकी खरीदारी के लिए पैसे सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेज रही है। इस पारदर्शी व्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) कहा जाता है।
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₹1200 प्रति छात्र की धनराशि: इस साल भी कक्षा 1 से 8 तक के प्रत्येक पात्र छात्र-छात्रा को 1200 रुपये की नकद धनराशि दी जाएगी। यह पैसा बच्चों की शिक्षा से जुड़ी निम्नलिखित आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए दिया जाता है:
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    स्कूल बैग
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    स्टेशनरी (कॉपियां, पेन, पेंसिल आदि)
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    जूता और मोजा (Shoes and Socks)
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    सर्दियों के लिए स्वेटर
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किन स्कूलों के बच्चों को मिलेगा लाभ? बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने बेसिक शिक्षा निदेशक को भेजे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ प्रदेश के विभिन्न प्रकार के विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा, जिनमें शामिल हैं:
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    प्रदेश के सभी परिषदीय प्राथमिक विद्यालय
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    परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय
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    राजकीय विद्यालय
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    समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालय
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    प्रदेश के सहायता प्राप्त (Aided) विद्यालय
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2.53 अरब रुपये का भारी-भरकम बजट: इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए शासन ने 2.53 अरब रुपये (लगभग 253 करोड़ रुपये) का विशाल वित्तीय बजट स्वीकृत कर दिया है। इतनी बड़ी धनराशि की स्वीकृति यह दर्शाती है कि सरकार बेसिक शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है।
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अभिभावकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना (Aadhaar Seeding): संयुक्त सचिव ने अपने निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह धनराशि केवल बच्चों के माता-पिता या कानूनी अभिभावकों के उसी बैंक खाते में भेजी जाएगी जो 'आधार सीडेड' (Aadhaar Seeded) होंगे। यानी बैंक खाते का आधार कार्ड से लिंक होना और NPCI (National Payments Corporation of India) के सर्वर पर मैप होना अनिवार्य है। यदि किसी अभिभावक का बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो उनका पैसा बीच में अटक सकता है। इसलिए, विभाग ने अपील की है कि सभी अभिभावक समय रहते अपने बैंक खातों की ई-केवाईसी (e-KYC) और आधार सीडिंग जरूर करवा लें।
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बालिका शिक्षा पर विशेष जोर: केजीबीवी (KGBV) में 100% नामांकन का लक्ष्य 

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उत्तर प्रदेश सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को केवल नारों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की बालिकाओं को अच्छी शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के लिए प्रदेश भर में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) संचालित किए जा रहे हैं। ये पूरी तरह से आवासीय (Residential) विद्यालय होते हैं, जहां लड़कियों की पढ़ाई से लेकर रहने और खाने तक की सारी व्यवस्था सरकार द्वारा मुफ्त की जाती है।
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नए सत्र 2026-27 के लिए बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों (Commissioners) और मुख्य विकास अधिकारियों (CDOs) को एक विशेष और सख्त निर्देश जारी किया है।
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उन्होंने कहा है कि किसी भी हाल में प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में बालिकाओं का शत-प्रतिशत (100%) नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
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    प्रशासन की जिम्मेदारी: स्थानीय प्रशासन (CDO और बीएसए) की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे अपने-अपने जिलों में ड्रॉपआउट (स्कूल छोड़ चुकीं) या कभी स्कूल न जाने वाली गरीब, वंचित और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं की पहचान करें।
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    काउंसलिंग और दाखिला: ऐसी बालिकाओं के माता-पिता की काउंसलिंग की जाए और उन्हें कस्तूरबा विद्यालयों में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि कोई भी सीट खाली न रहे।
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बदल रही है यूपी के सरकारी स्कूलों की तस्वीर

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1 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह नया शैक्षणिक सत्र उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। एक ओर जहां 434 विशेष शिक्षकों के नियमित होने से 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का सपना साकार होगा और दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर DBT के माध्यम से 2.53 अरब रुपये सीधे खातों में पहुंचने से भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।
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कस्तूरबा विद्यालयों में बालिकाओं के शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश की कोई भी बेटी शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित न रहे। इन फैसलों से यह साफ है कि यूपी में सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा और शैक्षिक माहौल अब तेजी से बदल रहा है, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहा है।
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