उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में संशोधन करते हुए विलंब शुल्क (Late Fee) की दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी नागरिक ने बच्चे के जन्म या किसी की मृत्यु के तय 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, तो उसे पहले की तुलना में अब 10 गुना तक अधिक लेट फीस चुकानी होगी।READ ALSO:-बिजनौर में प्राइवेट स्कूलों की 'गुंडागर्दी' के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर गरजे अभिभावक: DDPS स्कूल पर जबरन ₹750 वसूलने और नाम काटने की धमकी देने का आरोप
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
राज्य सरकार के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि यह नई व्यवस्था प्रदेश के शहरी (Urban) और ग्रामीण (Rural) दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी होगी। सरकार की तरफ से 16 जून की अधिसूचना के तहत इस नई व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को समयबद्ध (Time-bound) बनाना और राष्ट्रीय स्तर पर डेटाबेस को पूरी तरह अपडेट रखना है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

समझिए लेट फीस का नया गणित: पहले कितना था और अब कितना लगेगा?

\r\n\r\n
अधिनियम के नियमानुसार, किसी भी जन्म या मृत्यु की घटना के शुरुआती 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। लेकिन 21 दिन की समय सीमा समाप्त होते ही विलंब शुल्क देना अनिवार्य होगा, जिसकी नई दरें इस प्रकार हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    21 से 30 दिन के भीतर आवेदन करने पर: पहले इसके लिए महज 2 रुपये का शुल्क लगता था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 20 रुपये कर दिया गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    30 दिन से लेकर 1 साल के भीतर आवेदन करने पर: पहले इसके लिए 5 रुपये की लेट फीस निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    1 साल के बाद आवेदन करने पर: पहले इसके लिए केवल 10 रुपये लगते थे, लेकिन अब 10 गुना बढ़ोतरी के साथ 100 रुपये विलंब शुल्क देना होगा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

1 साल की देरी पर प्रक्रिया हुई और भी सख्त, एसडीएम (SDM) की अनुमति जरूरी

\r\n\r\n
यदि आप जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पंजीकरण नहीं कराते हैं, तो अब आपको केवल बढ़ी हुई फीस ही नहीं देनी होगी, बल्कि एक बेहद सख्त प्रशासनिक प्रक्रिया से भी गुजरना होगा। एक साल से अधिक की देरी होने पर अब संबंधित क्षेत्र के उप जिलाधिकारी (SDM) का लिखित आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके साथ ही, नियम यह भी कहता है कि यदि बच्चे का जन्म घर पर हुआ है और 21 दिनों की निर्धारित अवधि में उसका पंजीकरण नहीं कराया गया, तो स्थानीय प्रशासन पुलिस वेरिफिकेशन (पुलिस सत्यापन) कराने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी करेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अब पूरी तरह ऑनलाइन हुई व्यवस्था; बड़े अस्पतालों को मिली सीधे आईडी

\r\n\r\n
केंद्र सरकार द्वारा साल 2023 में किए गए संशोधन के बाद अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज्ड यानी पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    एकमात्र वैध दस्तावेज: सरकार के नए नियमों के तहत, अक्टूबर 2023 के बाद पैदा हुए बच्चों के लिए उनका जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) ही भविष्य में एकमात्र वैध और मुख्य दस्तावेज माना जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अस्पतालों से सीधा प्रमाणीकरण: जनता की सुविधा के लिए सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों को नगर निगम की यूजर आईडी (User ID) सौंप दी गई है। इसके जरिए अस्पताल अपने स्तर से ही सीधे प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्यों जरूरी हैं ये दोनों प्रमाण पत्र?

\r\n\r\n
राज्य सरकार ने नागरिकों को जागरूक करते हुए इन दोनों प्रमाण पत्रों की उपयोगिता को भी स्पष्ट किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate): यह बच्चे के स्कूल में दाखिले (Admission), ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, पासपोर्ट आवेदन, बीमा पॉलिसी लेने और सरकारी राशन कार्ड में नाम दर्ज कराने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनिवार्य है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति के उत्तराधिकार (Waris) दावों, सरकारी या निजी पेंशन शुरू कराने और बीमा दावों (Insurance Claims) के त्वरित निपटारे के लिए बेहद आवश्यक दस्तावेज है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सरकार की जनता को सलाह

\r\n\r\n
यूपी सरकार के प्रवक्ता ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनचाहे विलंब शुल्क और प्रशासनिक भागदौड़ से बचने के लिए जन्म या मृत्यु की घटना घटित होने के तुरंत बाद, यानी 21 दिनों के भीतर ही अपने नजदीकी रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर या फिर केंद्र सरकार के आधिकारिक सीआरएस (CRS) पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन अवश्य कर दें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
यह विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट समाचार पोर्टलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एसईओ (SEO) मानकों और सरकारी अधिसूचना के तहत संकलित की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें