भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां एक तरफ एयर कंडीशनर (AC) और कूलर के लगातार चलने से बिजली के बिल आसमान छू रहे हैं, वहीं बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक खट्टी-मीठी खबर सामने आई है। बिजली कंपनियों द्वारा जून के महीने में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत का ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) लगाया गया है, जिसका चौतरफा विरोध हो रहा है। लेकिन, इस भारी विरोध और बढ़ती नाराजगी के बीच पावर कॉरपोरेशन ने उपभोक्ताओं को शांत करने के लिए एक बड़ी राहत का ऐलान भी किया है।READ ALSO:-प्रशांत महासागर में खौफनाक 'एल नीनो' की दस्तक से भारत पर मंडराया सूखे का खतरा, PM मोदी ने खुद संभाला मोर्चा, मुख्यमंत्रियों को किया हाई-अलर्ट!
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अब उपभोक्ताओं को उनके द्वारा जमा की गई 'सिक्योरिटी धनराशि' (Security Deposit) पर 6.50 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा। इस फैसले से राज्य के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचने वाला है। आइए, इस पूरे गणित को विस्तार से समझते हैं कि आखिर आपके बिल में यह पैसा कैसे जुड़ेगा, आपको कितना फायदा होगा और इसके पीछे का कानूनी अधिकार क्या है।
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एक हाथ से लिया, दूसरे हाथ से दिया: क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nबिजली विभाग का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। दरअसल, बिजली कंपनियों ने जून के बिल में 10% का फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) जोड़ दिया है। कंपनियों का तर्क है कि कोयले और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण यह सरचार्ज लगाया गया है।
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लेकिन, इस सरचार्ज के खिलाफ उपभोक्ता संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इसी भारी विरोध को देखते हुए और वैधानिक नियमों का पालन करते हुए, बिजली विभाग ने सिक्योरिटी डिपॉजिट पर ब्याज देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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- \r\n कुल लाभार्थी: इस फैसले से लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n ब्याज की कुल रकम: अनुमान है कि उपभोक्ताओं के खातों (बिलों) में लगभग 300 करोड़ रुपये का ब्याज ट्रांसफर (समायोजित) किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n कब मिलेगा लाभ: यह ब्याज उपभोक्ताओं के जून या जुलाई महीने के बिजली बिल में काटकर (Adjusted) दिया जाएगा।\r\n \r\n
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कैसे तय हुआ 6.50% का आंकड़ा?
\r\n\r\nआपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि ब्याज की दर 6.50 प्रतिशत ही क्यों तय की गई है?
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नियमों के अनुसार, उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी धनराशि पर प्रति वर्ष 1 अप्रैल को लागू बैंक दर (Bank Rate) के आधार पर ब्याज दिया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 को बैंक की आधार ब्याज दर 6.50 प्रतिशत थी। इसी वैधानिक दर को आधार मानते हुए बिजली कंपनियों ने अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट किया है। अब सॉफ्टवेयर स्वचालित (Automatic) तरीके से हर उपभोक्ता की जमा सिक्योरिटी का 6.50% हिस्सा कैलकुलेट करके उनके वर्तमान बिल में से माइनस (घटा) कर देगा।
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आंकड़ों की बात करें तो, पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं की औसत जमा सिक्योरिटी का कुल योग लगभग 4,616 करोड़ रुपये था। इसी भारी-भरकम राशि पर अब ब्याज बांटा जा रहा है।
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क्या कहता है कानून? यह आपका 'वैधानिक अधिकार' है
\r\n\r\nबहुत से उपभोक्ताओं को यह पता ही नहीं होता कि मीटर लगवाते समय जो पैसा वे विभाग में जमा करते हैं, उस पर उन्हें ब्याज पाने का अधिकार है। यह कोई सरकारी खैरात या योजना नहीं है, बल्कि यह आपका कानूनी हक है।
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- \r\n विद्युत अधिनियम-2003 (Electricity Act 2003): इस अधिनियम की धारा 47 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि बिजली वितरण कंपनी (Discom) उपभोक्ता से ली गई सुरक्षा निधि पर ब्याज देने के लिए बाध्य है।\r\n \r\n
- \r\n विद्युत वितरण संहिता-2005: इसके साथ ही, विद्युत वितरण संहिता-2005 की धारा 4.20 के तहत भी यह सुनिश्चित किया गया है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में लागू बैंक दर के हिसाब से उपभोक्ताओं को हर साल उनके बिल में ब्याज का समायोजन (Adjustment) करके दिया जाए।\r\n \r\n
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अगर कोई बिजली कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो वह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन कर रही है और इसके खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत की जा सकती है।
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कहीं आप चूक तो नहीं गए? ऐसे करें अपने बिल की जांच
\r\n\r\nभले ही बिजली विभाग ने सॉफ्टवेयर के जरिए स्वचालित रूप से ब्याज समायोजित करने का दावा किया है, लेकिन कई बार तकनीकी खामियों या डेटा अपडेट न होने के कारण उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सभी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। उनका कहना है कि उपभोक्ता आंख मूंदकर बिल जमा न करें, बल्कि इसकी बारीकी से जांच करें।
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उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
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- \r\n अपना वर्तमान बिल चेक करें: जून या जुलाई का जो भी नया बिल आपके पास आए, उसमें 'Sec. Deposit Interest' या 'ब्याज समायोजन' का कॉलम ध्यान से देखें।\r\n \r\n
- \r\n पुरानी रसीद से मिलान करें: कनेक्शन लेते समय आपने जो सिक्योरिटी मनी जमा की थी, उसका 6.50% निकालें और देखें कि क्या बिल में उतनी ही रकम माइनस की गई है या नहीं।\r\n \r\n
- \r\n जिनका बिल जून में आ चुका है: जिन उपभोक्ताओं ने अपना जून का बिल पहले ही जमा कर दिया है और उसमें ब्याज नहीं जुड़ा था, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग के अनुसार, ऐसे छूटे हुए उपभोक्ताओं के बिल में यह ब्याज 'जुलाई महीने' की साइकिल में एडजस्ट कर दिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n लाभ न मिलने पर शिकायत करें: यदि आपको जून और जुलाई दोनों के बिलों में सिक्योरिटी धनराशि पर देय ब्याज का लाभ नहीं मिलता है, तो तुरंत संबंधित वितरण कंपनी (Sub-station) के अधिशासी अभियंता (XEN) या एसडीओ (SDO) के संज्ञान में यह बात लाएं। आप टोल-फ्री नंबर पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\r\n \r\n
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सतर्क रहें और अपने अधिकारों को जानें
\r\n\r\nएक ओर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार से बिजली के बिलों में जो बढ़ोतरी हुई है, वह यकीनन आम आदमी की जेब पर एक बड़ा डाका है। लेकिन दूसरी ओर, 300 करोड़ रुपये का यह ब्याज वितरण उसी महंगाई में एक छोटी सी मरहम का काम कर सकता है।
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यह खबर इस बात का भी प्रमाण है कि एक जागरूक उपभोक्ता होना कितना जरूरी है। अपने बिजली बिलों के पीछे छपे नियमों को पढ़ें, अपने अधिकारों को जानें और यह सुनिश्चित करें कि आपके खून-पसीने की कमाई का एक भी रुपया गलत तरीके से विभाग के खाते में न जाए। अपना बिल समय पर भरें, लेकिन उससे पहले अपने हिस्से का ब्याज लेना बिल्कुल न भूलें!
Sabse pehle comment karne wale banein.