लखनऊ/मेरठ (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। बिजली विभाग में दशकों से चली आ रही 'एस्टीमेट' (Estimate) की मनमानी व्यवस्था अब इतिहास बनने जा रही है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहा है, जिसके तहत अब 150 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर, पोल या तार का अलग से खर्च नहीं देना होगा। इसके बजाय, एक 'फिक्स चार्ज' (Fixed Charge) की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे न केवल कनेक्शन प्रक्रिया सस्ती होगी, बल्कि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों पर भी प्रहार होगा।READ ALSO:-मेरठ के दिल 'बेगमपुल' में जन सुविधा कार्य में रोड़ा: शौचालय निर्माण रोकने पर व्यापार संघ का फूटा गुस्सा, पुलिस-प्रशासन से की शिकायत; स्वीकृत सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

18 दिसंबर को बदल जाएगा अंग्रेजों के जमाने का नियम

\r\n\r\n
विद्युत विभाग में अब तक अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही 40 मीटर तक कनेक्शन देने की पुरानी प्रणाली लागू थी। लेकिन अब इसे समाप्त कर दायरा 300 मीटर तक बढ़ाया जा रहा है। इस क्रांतिकारी बदलाव और कॉस्ट डाटा बुक (Cost Data Book) के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाने के लिए 18 दिसंबर को 'सप्लाई रिव्यू पैनल सब कमेटी' की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है 'एस्टीमेट' का खेल और कैसे मिलेगी राहत?

\r\n\r\n
अब तक प्रदेश में नया बिजली कनेक्शन लेते समय उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पुरानी व्यवस्था: वर्तमान में, कनेक्शन के लिए ट्रांसफार्मर, केबल कंडक्टर और लाइन के नाम पर एक 'एस्टीमेट' तैयार किया जाता है। अक्सर यह आरोप लगता है कि बिजली निगम के अभियंता (Engineers) जानबूझकर खंभे से घर की दूरी अधिक दिखाकर या ट्रांसफार्मर की क्षमता कम बताकर लाखों रुपये का एस्टीमेट बना देते थे। मजबूरी में उपभोक्ता को यह राशि चुकानी पड़ती थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    नई व्यवस्था: नए प्रस्ताव के मुताबिक, 150 किलोवाट तक के लोड के लिए उपभोक्ताओं को तकनीकी व्यवस्थाओं (पोल, ट्रांसफार्मर आदि) की चिंता नहीं करनी होगी। उपभोक्ता केवल एक निर्धारित 'एकमुश्त शुल्क' जमा करेगा। इसमें प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी राशि, मीटरिंग चार्ज और अन्य सभी खर्च शामिल होंगे। 300 मीटर तक की दूरी में लाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की जिम्मेदारी अब बिजली विभाग की होगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

नई दरें: 100 मीटर की दूरी पर केवल 5500 रुपये

\r\n\r\n
प्रस्तावित व्यवस्था में दरों को बेहद किफायती और पारदर्शी रखा गया है, ताकि आम आदमी को लूटा न जा सके। उदाहरण के लिए:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    2 किलोवाट (घरेलू): यदि कोई उपभोक्ता 2 किलोवाट का घरेलू कनेक्शन लेना चाहता है और खंभे से उसके घर की दूरी 100 मीटर तक है, तो उसे अब केवल 5500 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे। पहले इसके लिए दो खंभों की लाइन का भारी-भरकम एस्टीमेट बनाया जाता था।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    300 मीटर की दूरी: इसी तरह, यदि दूरी 300 मीटर तक है, तो उपभोक्ता को मात्र 7555 रुपये जमा करने होंगे। इसमें खंभा, लाइन और ट्रांसफार्मर का सारा खर्च विभाग वहन करेगा।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कनेक्शन के लिए तीन स्लैब का प्रस्ताव

\r\n\r\n
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दूरी को तीन श्रेणियों (Slabs) में बांटा गया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पहला स्लैब: 0 से 100 मीटर तक।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दूसरा स्लैब: 101 से 300 मीटर तक।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    तीसरा स्लैब: 301 मीटर से अधिक (इसके लिए अलग से एस्टीमेट की व्यवस्था होगी)।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत: गरीबों को किस्तों में मीटर

\r\n\r\n
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा, "कनेक्शन को फिक्स चार्ज आधारित बनाने के लिए हम लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। नियामक आयोग से मंजूरी मिलते ही प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर अलग-अलग वसूली बंद हो जाएगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म होगा क्योंकि अब अभियंता एक जैसे मामलों में अलग-अलग एस्टीमेट बनाकर सौदेबाजी नहीं कर पाएंगे। खास बात यह है कि नए प्रस्ताव में गरीब उपभोक्ताओं को मीटर की कीमत चुकाने के लिए किस्तों (Installments) की सुविधा भी दी जाएगी। यह नियम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह फैसला उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। 18 दिसंबर के बाद, बिजली कनेक्शन लेना न केवल सस्ता होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बाबू और इंजीनियरों के चक्कर काटने और रिश्वत देने की मजबूरी से भी आजादी मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें