उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की, ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाली Smart Chip कंपनी की वर्षों पुरानी मोनोपॉली तोड़ने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। राज्य में अब एक नहीं, तीन कंपनियां डीएल जारी करने के लिए मैदान में उतरने वाली थीं, लेकिन टेंडर मिलते ही गुजरात की एक कंपनी ने काम शुरू करने से पहले ही हाथ खींच लिए हैं। एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (आईटी) सुनीता वर्मा ने पुष्टि की है कि फोकॉम (Fo-Com) कंपनी ने लाइसेंस बनाने से मना कर दिया है और उसकी सिक्योरिटी जब्त की जाएगी।READ ALSO:-10 मिनट में लोन' का लालच, 'प्रोसेसिंग फीस' का जाल! पर्सनल लोन के नाम पर हो रहे इस 'डिजिटल फ्रॉड' से ऐसे बचें
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Smart Chip की मोनोपॉली तोड़ने का प्रयास
\r\n\r\nपिछले कई सालों से, उत्तर प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों (RTO Offices) में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) जारी करने का काम केवल एक ही कंपनी—Smart Chip—के हाथ में था। इस एकाधिकार (Monopoly) को खत्म करने और काम में तेजी लाने के लिए परिवहन विभाग ने कई कंपनियों को आमंत्रित किया था।
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- \r\n टेंडर की प्रक्रिया: परिवहन विभाग ने स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का टेंडर तीन कंपनियों को दिया। इन कंपनियों को एक माह के अंदर काम शुरू करना था।\r\n \r\n
- \r\n चुनी गई कंपनियां:\r\n\r\n
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- \r\n गुजरात की फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड (Fo-Com Net Pvt. Ltd.)\r\n \r\n
- \r\n पश्चिम बंगाल की सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Silver Touch Technologies Ltd.)\r\n \r\n
- \r\n दिल्ली की रोजमार्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Rosmerta Technologies Ltd.)\r\n \r\n
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फोकॉम ने किया काम करने से इनकार
\r\n\r\nकंपनियों द्वारा काम शुरू करने से पहले ही गुजरात की फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड ने काम करने से इनकार कर दिया।
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- \r\n कारण: कंपनी ने तर्क दिया है कि टेंडर की दरें, विशेष रूप से ₹46.62 प्रति स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की दर, बहुत कम है। कंपनी का कहना है कि इस दर पर काम करने में उसे काफी घाटा होगा और इसलिए काम कर पाना संभव नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n बैंक गारंटी जब्त: एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आईटी सुनीता वर्मा ने स्पष्ट किया है कि फोकॉम कंपनी ने टेंडर फाइनल होने के बावजूद बैंक गारंटी जमा नहीं की और अब उसकी जमा की गई सिक्योरिटी जब्त कर ली जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n पुरानी कंपनी का सहयोग: जब तक नई कंपनियां अपना इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित नहीं कर लेतीं, तब तक वर्तमान में कार्यरत Smart Chip कंपनी से ही लाइसेंस का काम जारी रखने का आग्रह किया गया है।\r\n \r\n
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डीएल के लिए जोन का विभाजन (जो अब बदलेगा):
\r\n\r\nपरिवहन विभाग ने काम में तेजी लाने के लिए उत्तर प्रदेश के छह जोन को तीन कंपनियों में बांटा था।
\r\n\r\n| \r\n कंपनी का नाम \r\n | \r\n \r\n आवंटित जोन (मूल योजना) \r\n | \r\n
| \r\n रोजमार्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड \r\n | \r\n \r\n वाराणसी और मेरठ जोन (27 ARTO कार्यालय) \r\n | \r\n
| \r\n सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज लिमिटेड \r\n | \r\n \r\n लखनऊ और बरेली जोन (25 ARTO कार्यालय) \r\n | \r\n
| \r\n फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड \r\n | \r\n \r\n कानपुर और आगरा जोन (25 ARTO कार्यालय) \r\n | \r\n
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अब दो कंपनियों में बँटेगा काम
\r\n\r\nफोकॉम कंपनी के पीछे हटने से परिवहन विभाग की 'समय पर डीएल जारी करने' की उम्मीदों को झटका लगा है। हालांकि, अधिकारियों ने जल्द ही इस समस्या का समाधान करने का भरोसा दिया है।
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- \r\n नए सिरे से बंटवारा: परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि अब बचे हुए दो कंपनियों—रोजमार्टा और सिल्वर टच—में ही प्रदेश के आरटीओ कार्यालयों का बराबर-बराबर बंटवारा किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत: नई कंपनियों को काम शुरू करने के लिए मुख्यालय पर अपना इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना होगा, जिसकी लागत (फर्नीचर, कंप्यूटर, एसी और सर्वर) उन्हें खुद ही वहन करनी होगी।\r\n \r\n
- \r\n लाइसेंस में देरी: अधिकारियों का तर्क है कि अब दो कंपनियों के पास भी काम होने से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पहले की तुलना में तेजी आएगी और आवेदकों को डीएल मिलने में देरी नहीं होगी।\r\n \r\n
नई कंपनियों को मुख्यालय पर अपना इंफ्रास्ट्रक्चर (फर्नीचर, कंप्यूटर, सर्वर, एसी) खुद की लागत पर स्थापित करना होगा, जिसके लिए उन्हें स्थान उपलब्ध करा दिया गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.