भारत जैसे विशाल, विविध और सघन आबादी वाले देश में सटीक सरकारी नीतियां बनाने, बुनियादी ढांचे का विकास करने और जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए 'जनगणना' (Census) सबसे अहम और प्रामाणिक स्रोत है। इसी दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और भारत के महापंजीयक (RGI) के निर्देशानुसार, राज्य में जनगणना 2026 की व्यापक और जमीनी स्तर की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।READ ALSO:-रठ में खौफनाक वारदात: गन्ने के खेत में मिली महिला की गला रेती लाश, बच्चों की किताबें लेने गई थी बाजार; 'लव मैरिज' के एंगल से जांच में जुटी पुलिस
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यह जनगणना केवल एक रूटीन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कई मायनों में बेहद खास और अत्याधुनिक होने वाली है। देश के इतिहास में यह पहली बार होगा जब प्रगणक (Enumerator) हाथों में कागजों का भारी-भरकम बंडल लेकर नहीं, बल्कि स्मार्टफोन और टैबलेट लेकर आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और त्रुटिहीन बनाने के लिए इसे पूरी तरह से 'डिजिटल' कर दिया गया है।
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भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में व्यवस्थित जनगणना का इतिहास 1881 से शुरू होता है। उस लिहाज से वर्ष 2026-27 में होने जा रही यह भारत की 16वीं जनगणना है। वहीं, वर्ष 1947 में देश को मिली आजादी के बाद से यह 8वीं जनगणना होगी। उत्तर प्रदेश, जिसकी आबादी आज 25 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है, वहां इस महा-अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने अपनी मशीनरी को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया है।
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जनगणना के दो महत्वपूर्ण चरण: कब, क्या और कैसे होगा?

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इतनी बड़ी आबादी की गिनती एक ही बार में करना संभव नहीं है, इसलिए इस जटिल और विस्तृत प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे दो अलग-अलग वैज्ञानिक चरणों में विभाजित किया गया है:
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    पहला चरण - हाउस लिस्टिंग (मकानों की गणना): यह चरण 22 मई 2026 से शुरू होकर 20 जून 2026 तक पूरे उत्तर प्रदेश में चलेगा। इस पहले चरण में नागरिकों की गिनती नहीं होगी, बल्कि केवल मकानों, भवनों (चाहे वे आवासीय हों या व्यावसायिक) और उनमें रहने वाले परिवारों को उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का पूरा डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
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    दूसरा चरण - जनसंख्या गणना (लोगों की गिनती): पहले चरण के सफलतापूर्ण पूरा होने के बाद, अगले साल यानी फरवरी 2027 में मुख्य जनगणना का काम शुरू होगा। इस दूसरे चरण में देश और राज्य की वास्तविक आबादी, यानी व्यक्तियों की गिनती की जाएगी और उनकी शिक्षा, पेशा, उम्र जैसी जनसांख्यिकीय (Demographic) जानकारी दर्ज की जाएगी।
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डिजिटल क्रांति की सबसे बड़ी सौगात: 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (स्वयं गणना)

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इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी, सुविधाजनक और क्रांतिकारी खासियत यह है कि इसमें देश के नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप नौकरीपेशा हैं, आपके पास समय की कमी है, या आप नहीं चाहते कि कोई प्रगणक आपके घर आकर आपसे लंबा समय लेकर सवाल पूछे, तो आप खुद ही घर बैठे अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए सरकारी पोर्टल पर अपने घर की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
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सेल्फ-एन्यूमरेशन कैसे काम करेगा?

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    ऑनलाइन डेटा भरने की तारीख: उत्तर प्रदेश के नागरिक प्रगणकों के घर आने से ठीक पहले, 7 मई 2026 से लेकर 21 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल या आधिकारिक मोबाइल ऐप पर अपना डेटा खुद भर सकते हैं।
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    SE ID जनरेशन: जब आप सफलतापूर्वक अपनी और अपने घर की सभी आवश्यक जानकारी पोर्टल पर भर देंगे, तो सिस्टम की तरफ से एक विशेष SE ID (Self Enumeration ID) तुरंत जनरेट होगी, जो आपके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए भी आएगी।
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    प्रगणक को क्या देना होगा: जब 22 मई के बाद सरकारी प्रगणक (Enumerator) आपके दरवाजे पर हाउस लिस्टिंग के सर्वे के लिए आएगा, तो आपको बस उसे अपनी वह SE ID बतानी होगी। इसके बाद प्रगणक को आपसे कोई अन्य 33 सवाल पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह अपने ऐप में आपकी SE ID डालेगा और आपका डेटा सिंक हो जाएगा। इससे आपका और सरकारी कर्मचारी, दोनों का बेशकीमती समय बचेगा।
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घर-घर सर्वे का चक्रव्यूह: प्रगणक पूछेंगे ये 33 महत्वपूर्ण सवाल

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जो नागरिक तकनीकी कारणों से या अपनी मर्जी से 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' का विकल्प नहीं चुनेंगे, उनके लिए पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा।
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22 मई से 20 जून तक प्रगणक आपके घर आएंगे। वे सभी जानकारी सीधे एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए सुरक्षित मोबाइल ऐप के जरिए सर्वर पर अपलोड करेंगे। इस चरण में प्रगणक घर के मुखिया से कुल 33 सवाल पूछेंगे।
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क्या होंगे ये 33 सवाल? (एक नजर में) ये सवाल मुख्य रूप से आपके मकान की भौतिक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों के आकलन के लिए बनाए गए हैं। इनमें शामिल होंगे:
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    मकान की स्थिति: आपका मकान पक्का है, अर्ध-पक्का है या कच्चा है? छत, फर्श और दीवारें किस सामग्री (ईंट, सीमेंट, मिट्टी, घास-फूस) की बनी हैं?
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    बुनियादी सुविधाएं: घर में पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है (पाइपलाइन, कुआं, हैंडपंप)? क्या घर में बिजली का कनेक्शन है?
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    स्वच्छता और रसोई: शौचालय की सुविधा घर के अंदर है या बाहर? शौचालय का प्रकार क्या है? खाना पकाने के लिए किस ईंधन (LPG, लकड़ी, बायोगैस) का उपयोग होता है?
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    संपत्ति और संचार: परिवार के पास क्या-क्या संपत्तियां मौजूद हैं? जैसे- रेडियो, टेलीविजन (TV), लैपटॉप/कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, स्मार्टफोन, साइकिल, मोटरसाइकिल/स्कूटर या कार/जीप आदि। इन आंकड़ों से सरकार को स्पष्ट रूप से यह समझने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का सख्त अभाव है और भविष्य में कहां नई योजनाएं लागू करनी हैं।
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डेटा सुरक्षा की 100% गारंटी: किसी भी तरह के डर की जरूरत नहीं

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अक्सर लोगों के मन में यह एक बड़ा डर और शंका होती है कि सरकार को अपनी संपत्ति, वाहनों और सुविधाओं की सही जानकारी देने पर कहीं उन्हें पुलिस, कोर्ट या टैक्स विभाग के चक्कर न काटने पड़ें या उनका टैक्स न बढ़ जाए। यूपी सरकार और जनगणना निदेशालय ने इस बार इस भ्रांति को दूर करने के लिए कड़े नियम बनाए हैं।
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    पूर्ण गोपनीयता (Strict Confidentiality): भारत के जनगणना अधिनियम के तहत, आपका सारा डेटा पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखा जाएगा। किसी भी व्यक्ति का निजी डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
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    किसी अन्य विभाग से साझा नहीं होगा डेटा: आपके द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग किसी भी हालत में टैक्स वसूली, पुलिस इन्वेस्टिगेशन, या कोर्ट-कचहरी के मामलों में एक सबूत के तौर पर नहीं किया जाएगा। यहां तक कि इसे इनकम टैक्स विभाग (IT Department) के साथ भी साझा नहीं किया जाएगा।
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    सिर्फ विकास कार्यों के लिए उपयोग: इस विस्तृत डेटा कलेक्शन का एकमात्र और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य देश और राज्य के लिए बेहतर नीतियां (Policy Making) बनाना और नई विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना है।
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यूपी का महा-प्लान: 5.25 लाख कर्मचारी और 3.9 लाख ब्लॉक का विशाल नेटवर्क

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25 करोड़ से अधिक की अनुमानित आबादी और एक विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल वाले उत्तर प्रदेश में इतने बड़े स्तर पर जनगणना कराना कोई आसान काम नहीं है। यह किसी आम चुनाव से भी बड़ी प्रशासनिक कवायद है:
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    अधिकारियों की महा-फौज: पूरे प्रदेश में इस महा-सर्वेक्षण को बिना किसी रुकावट के अंजाम देने के लिए करीब 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें मुख्य रूप से सरकारी शिक्षक, लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें प्रगणक और सुपरवाइजर के रूप में कड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है।
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    भौगोलिक दायरा: यह सर्वे प्रदेश के सभी 75 जिलों, 350 तहसीलों और 783 शहरी निकायों (जिनमें नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं) में एक साथ युद्धस्तर पर चलाया जाएगा।
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    हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB): व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी घर छूट न जाए, पूरे राज्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है। इसके तहत लगभग 3.9 लाख हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए हैं। हर ब्लॉक की जिम्मेदारी एक प्रगणक की होगी, जिसमें औसतन 120-150 घर शामिल होंगे।
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मुख्य जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा का आधिकारिक बयान

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जनगणना की इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया को लेकर उत्तर प्रदेश की निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
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अधिकारी शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया, "पहला चरण, जिसे हम हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO) कहते हैं, वह 2026 में होने वाला है। हर राज्य इस प्रक्रिया के लिए अपनी भौगोलिक और प्रशासनिक सुविधा के अनुसार 30 दिनों की एक खास समय-सीमा तय करता है। हमारे राज्य (उत्तर प्रदेश) ने इस पहले चरण के लिए 22 मई से 20 जून तक का समय तय किया है। पहले चरण का मुख्य जोर घर के स्तर पर गिनती करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को समझने पर होता है। इसमें हम घर में रहने वाले लोगों की कुल संख्या या उनकी व्यक्तिगत विशेषताओं जैसी जानकारियां शामिल नहीं करते हैं।"
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आम जनता के लिए विशेष सुविधा: जारी हुआ टोल फ्री नंबर 1855

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चूंकि यह पहली डिजिटल जनगणना है और कई लोगों के लिए 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' की प्रक्रिया नई हो सकती है, इसलिए प्रशासन ने तकनीकी सहायता के लिए एक मजबूत हेल्पडेस्क भी तैयार किया है।
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उत्तर प्रदेश प्रशासन ने आम जनता की मदद के लिए एक खास टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया है। यदि किसी नागरिक को ऑनलाइन डेटा भरने में कोई परेशानी आती है, कोई शंका होती है, या ऐप सही से काम नहीं कर रहा है, तो इस नंबर पर कॉल करके मुफ्त में तकनीकी सहायता और जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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आपकी सही जानकारी, विकसित भारत की तैयारी

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22 मई 2026 से उत्तर प्रदेश की धरती पर शुरू होने जा रहा यह जनगणना का पहला चरण सिर्फ एक सरकारी औपचारिकता या कागजी कार्यवाही नहीं है। यह भविष्य के नए, सशक्त और विकसित भारत की नींव रखने वाला एक मजबूत कदम है। पूर्ण रूप से डिजिटल और सेल्फ-एन्यूमरेशन जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ, यह प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, तेज, सुरक्षित और ईको-फ्रेंडली (कागज की बचत) हो गई है।
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उत्तर प्रदेश के हर एक नागरिक के लिए यह सुनिश्चित करने का समय है कि वे इस पहले चरण में अपनी और अपने मकान की सही जानकारी बिना किसी डर के ऑनलाइन पोर्टल या घर आने वाले प्रगणकों के माध्यम से दर्ज कराएं। क्योंकि आपके द्वारा दिया गया आज का एक-एक सही आंकड़ा, कल के उत्तर प्रदेश की विकास योजनाओं की दिशा और दशा तय करेगा।
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