उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), जिसे आमतौर पर यूपी बोर्ड के नाम से जाना जाता है, एशिया का सबसे बड़ा परीक्षा बोर्ड है। 100 साल से अधिक के गौरवशाली इतिहास में करोड़ों छात्र यहां से 10वीं और 12वीं पास कर निकले हैं। लेकिन, अक्सर छात्रों के सामने एक बड़ी समस्या आती है—मार्कशीट (Marksheet) या सर्टिफिकेट (Certificate) का खो जाना, जल जाना या नष्ट हो जाना।READ ALSO:-मेरठ में ट्रैफिक पुलिस का 'रौद्र रूप': हापुड़ अड्डे पर अचानक चला डंडा, मिनटों में गायब हुआ जाम; अब रोज चलेगा 'स्पेशल क्लीन-अप' अभियान
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पुराने समय में, अगर किसी छात्र की मार्कशीट खो जाती थी, तो उसे दोबारा बनवाना 'लोहे के चने चबाने' जैसा था। छात्रों को महीनों बोर्ड ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते थे और दलाल इस मजबूरी का फायदा उठाकर हजारों रुपये ऐंठ लेते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। यूपी बोर्ड ने छात्रों की सहूलियत के लिए एक पारदर्शी और आसान व्यवस्था लागू की है।
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इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि अगर आपका अंकपत्र (Marksheet) या प्रमाणपत्र (Certificate) खो गया है, तो आप उसे सरकारी तरीके से, बिना रिश्वत दिए, कैसे दोबारा हासिल कर सकते हैं।
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समस्या की गंभीरता: हर साल हजारों छात्र होते हैं परेशान

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यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर दो साल में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाले छात्रों का आंकड़ा एक करोड़ के पार चला जाता है। इतनी बड़ी संख्या में जब छात्र निकलते हैं, तो दस्तावेजों का रखरखाव एक चुनौती बन जाता है।
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अक्सर देखा गया है कि:

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    नौकरी के इंटरव्यू के वक्त मार्कशीट नहीं मिलती।
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    घर शिफ्ट करते समय दस्तावेज खो जाते हैं।
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    बाढ़ या आगजनी जैसी दुर्घटनाओं में सर्टिफिकेट नष्ट हो जाते हैं।
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ऐसे समय में छात्र पैनिक (Panic) हो जाते हैं और दलालों के जाल में फंस जाते हैं। लेकिन बोर्ड सचिव दिव्यकान्त शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड ने अब छात्रों के लिए 'सिंगल विंडो' जैसी राहत दी है।
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नियम बदला: कहां मिलेगी आपकी मार्कशीट? (Where to Apply)

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यूपी बोर्ड ने अपने कामकाज को विकेंद्रीकृत (Decentralize) कर दिया है। अब आपको हर काम के लिए प्रयागराज मुख्यालय दौड़ने की जरूरत नहीं है। नियम को दो हिस्सों में बांटा गया है:
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(A) 1982 के बाद पास हुए छात्र

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यदि आपने अपनी 10वीं या 12वीं की परीक्षा वर्ष 1982 या उसके बाद पास की है, तो आपका रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड और क्षेत्रीय कार्यालयों में उपलब्ध है। आप अपने जिले से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) में आवेदन कर सकते हैं।
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यूपी बोर्ड के 5 क्षेत्रीय कार्यालय और उनके कार्यक्षेत्र:

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  1. \r\n
    प्रयागराज (क्षेत्रीय कार्यालय): प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों के लिए।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    वाराणसी: पूर्वांचल के जिलों (गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, आदि) के लिए।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश (नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, आदि) के लिए।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    बरेली: रुहेलखंड क्षेत्र (मुरादाबाद, बदायूं, शाहजहांपुर) के लिए।
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  9. \r\n
    गोरखपुर: गोरखपुर और बस्ती मंडल के जिलों के लिए।
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  10. \r\n
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(B) 1982 से पहले के छात्र

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यदि आपने 1982 से पहले परीक्षा पास की है, तो आपका रिकॉर्ड केवल यूपी बोर्ड मुख्यालय (प्रयागराज) में सुरक्षित है। ऐसे पुराने दस्तावेजों की डुप्लीकेट कॉपी प्राप्त करने के लिए आपको प्रयागराज मुख्य कार्यालय में ही आवेदन करना होगा।
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आवेदन की प्रक्रिया: ऑनलाइन और ऑफलाइन (Step-by-Step Guide)

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बोर्ड सचिव दिव्यकान्त शुक्ला के अनुसार, छात्र अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं।
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तरीका 1: जनसेवा केंद्र (Online via Jan Seva Kendra)

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सरकार ने 'जनहित गारंटी अधिनियम' के तहत मार्कशीट बनवाने की सेवा को ऑनलाइन कर दिया है।
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  1. \r\n
    अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) पर जाएं।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    वहां 'यूपी बोर्ड डुप्लीकेट मार्कशीट' सेवा का चयन करें।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन कराकर अपलोड करें।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    निर्धारित शुल्क जमा करें और रसीद प्राप्त करें।
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  9. \r\n
    बोर्ड द्वारा सत्यापन के बाद मार्कशीट आपके पते पर या केंद्र पर भेज दी जाएगी।
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तरीका 2: यूपी बोर्ड वेबसाइट (Direct Online)

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छात्र स्वयं यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर जाकर 'जनहित सेवाएं' सेक्शन में आवेदन कर सकते हैं। यहां आपको अपना रोल नंबर, पासिंग ईयर और जिला चुनकर फॉर्म भरना होगा।
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तरीका 3: ऑफलाइन आवेदन (Offline Process)

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अगर आप तकनीक में सहज नहीं हैं, तो आप सीधे अपने क्षेत्रीय कार्यालय जा सकते हैं।
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  1. \r\n
    संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय से आवेदन फॉर्म लें।
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  3. \r\n
    उसे भरकर अपने स्कूल के प्रधानाचार्य (Principal) से सत्यापित कराएं।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    ट्रेजरी चालान के माध्यम से फीस जमा करें।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    दस्तावेज संलग्न कर खिड़की पर जमा करें।
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  8. \r\n
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सबसे महत्वपूर्ण: जरूरी दस्तावेज (Required Documents)

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डुप्लीकेट मार्कशीट बनवाने के लिए आपको यह साबित करना होगा कि आपकी असली मार्कशीट वास्तव में खो गई है। इसके लिए बोर्ड ने 5 दस्तावेजों की सूची अनिवार्य की है:
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क्र.सं.
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दस्तावेज का नाम
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विवरण/निर्देश
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आवेदन पत्र
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छात्र द्वारा भरा गया फॉर्म, जिस पर प्रधानाचार्य की आख्या (रिपोर्ट) और हस्ताक्षर/मुहर लगी हो।
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2
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ट्रेजरी चालान
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200 रुपये का शुल्क, जो सरकारी खजाने (Treasury) में जमा किया गया हो।
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शपथ पत्र (Affidavit)
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10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र। (इसमें लिखा होना चाहिए कि मार्कशीट कैसे खोई)।
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4
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अखबार की विज्ञप्ति
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किसी भी दैनिक समाचार पत्र में 'मार्कशीट खोने' का विज्ञापन (Classified Ad) छपवाना होगा। उसकी मूल प्रति (Original Cutout) आवेदन के साथ लगेगी।
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पहचान पत्र
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आधार कार्ड, वोटर आईडी या स्कूल आईडी की स्वप्रमाणित (Self-attested) फोटोकॉपी।
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मार्कशीट में गलती है? तो यह करें (Correction Process)

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कई बार मार्कशीट खोती नहीं है, बल्कि उसमें नाम, माता-पिता का नाम या जन्मतिथि गलत छप जाती है।
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    प्रक्रिया: सुधार की प्रक्रिया भी डुप्लीकेट बनवाने जैसी ही है।
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  • \r\n
  • \r\n
    अंतर: मार्कशीट खोने की स्थिति में अखबार में विज्ञापन देना पड़ता है, लेकिन सुधार (Correction) के लिए विज्ञापन की जरूरत नहीं होती।
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  • \r\n
  • \r\n
    शर्त: संसोधन (Correction) से पहले या बाद में आपको अपनी गलत (Original) मार्कशीट बोर्ड कार्यालय में जमा (Surrender) करनी होगी। पुरानी मार्कशीट जमा करने के बाद ही नई संशोधित मार्कशीट दी जाती है।
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  • \r\n
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60 हजार से ज्यादा गलतियां सुधारी गईं

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बोर्ड सचिव ने बताया कि यूपी बोर्ड ने हाल ही में एक विशेष अभियान चलाया था। पिछले तीन महीनों में पूरे प्रदेश से 60,000 से अधिक आवेदन मार्कशीट सुधार के लिए आए। बोर्ड ने तेजी से सत्यापन कर इन्हें ठीक किया और छात्रों को नई मार्कशीट प्रदान की।
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दलालों से बचें: क्यों खर्च करें हजारों रुपये?

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अक्सर देखा गया है कि क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर कुछ दलाल घूमते रहते हैं जो छात्रों से कहते हैं, "सरकारी काम में महीनों लगेंगे, मुझे 2000-5000 रुपये दो, मैं एक हफ्ते में करवा दूंगा।"
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आपको इनसे सावधान रहने की जरूरत है:
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    सरकारी शुल्क: मात्र 200 रुपये (ट्रेजरी चालान)।
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    एफिडेविट खर्च: लगभग 100-150 रुपये।
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  • \r\n
    अखबार विज्ञापन: 200-300 रुपये।
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  • \r\n
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यानी कुल मिलाकर 500-600 रुपये में आपका काम कानूनी रूप से हो सकता है। इसलिए दलालों के झांसे में न आएं।
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छात्रों के लिए विशेष टिप्स (Pro Tips)

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    डिजिटल लॉकर (DigiLocker): यूपी बोर्ड ने अब हाल के वर्षों (2013-2014 के बाद) की मार्कशीट 'डिजीलॉकर' पर भी अपलोड कर दी हैं। अगर आपको तत्काल मार्कशीट की जरूरत है, तो आप वहां से डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं, जो हर जगह मान्य है।
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    फोटोकॉपी रखें: भविष्य के लिए अपनी मार्कशीट की रंगीन स्कैन कॉपी हमेशा अपने ईमेल या गूगल ड्राइव पर सेव रखें।
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    विज्ञापन संभालें: अखबार में जो विज्ञापन दें, उसकी 2-3 प्रतियां खरीद कर रख लें।
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आपकी मार्कशीट, आपका अधिकार

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यूपी बोर्ड ने तकनीक का इस्तेमाल कर छात्रों की राह आसान कर दी है। मार्कशीट खोना एक दुर्घटना हो सकती है, लेकिन उसे दोबारा पाना अब सिरदर्द नहीं है। चाहे प्रयागराज हो, वाराणसी हो या मेरठ, क्षेत्रीय कार्यालय आपकी मदद के लिए तैयार हैं।
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ख़बरीलाल न्यूज़ नेटवर्क आपसे अपील करता है कि आप जागरूक बनें और सही प्रक्रिया अपनाकर अपना समय और पैसा दोनों बचाएं।
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(शिक्षा जगत और यूपी बोर्ड से जुड़ी हर अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहें।)
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